आजकल हर जगह वज़न घटाने और फिटनेस को लेकर इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) का ही नाम सुनाई देता है। खासकर डायबिटीज के मरीजों के बीच इसे लेकर इतनी चर्चा क्यों है? इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि कई लोगों का मानना है कि इससे ब्लड शुगर कंट्रोल करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) बढ़ाने में काफी फायदा मिलता है। जब आप कुछ घंटों तक खाना नहीं खाते, तो आपके शरीर को ब्लड में मौजूद शुगर का इस्तेमाल करने का पर्याप्त समय मिल जाता है। लेकिन क्या यह तरीका डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है? इंटरनेट पर आपको इसके ढेरों फायदे मिल जाएँगे, लेकिन एक मरीज होने के नाते आपको इसके पीछे की पूरी सच्चाई जाननी बहुत ज़रूरी है। अगर आप भी फास्टिंग (Fasting) शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो रुकिए! बिना सही जानकारी के उठाया गया यह कदम आपकी सेहत को भारी नुकसान भी पहुँचा सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि डायबिटीज में इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक ऐसा टूल है जिसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आप टाइप 2 के मरीज हैं, तो डॉक्टर की देखरेख में 12 घंटे का उपवास वज़न और शुगर कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन, इंसुलिन लेने वालों के लिए यह तरीका बहुत खतरनाक हो सकता है। एक्सपर्ट्स की सबसे बड़ी सलाह यही है कि अपनी बॉडी की सुनें और कमज़ोरी लगने पर तुरंत अपना फास्ट तोड़ दें।
क्या Diabetes के हर मरीज के लिए Intermittent Fasting सही है?
सीधे शब्दों में कहें तो इसका जवाब है—बिल्कुल नहीं! हर इंसान का शरीर अलग होता है और उसकी मेडिकल कंडीशन भी अलग-अलग होती है। टाइप 1 (Type 1) और टाइप 2 (Type 2) डायबिटीज में बहुत बड़ा फर्क होता है। टाइप 2 के कुछ मरीजों को वज़न कम करने और शुगर लेवल को मैनेज करने में इससे बहुत फायदा हो सकता है। उपवास करने से उनके शरीर में इंसुलिन बेहतर तरीके से काम करना शुरू कर सकता है। लेकिन अगर हम टाइप 1 डायबिटीज की बात करें, जहाँ शरीर में इंसुलिन बिल्कुल भी नहीं बनता, वहाँ फास्टिंग करना बहुत खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा, जो लोग इंसुलिन के इंजेक्शन या ऐसी तेज़ दवाइयाँ ले रहे हैं जो सीधे शुगर कम करती हैं, उनके लिए भी लंबे समय तक भूखा रहना बहुत रिस्की है। इसलिए यह कभी मत सोचिए कि जो चीज़ आपके दोस्त या पड़ोसी के लिए काम कर रही है, वह आपके लिए भी सौ प्रतिशत सही होगी।

Intermittent Fasting शुरू करने से पहले Diabetes Patients को ये 7 बातें ज़रूर जाननी चाहिए
अगर आप इसे शुरू करने का पक्का मन बना ही चुके हैं, तो कुछ खास बातों को अपनी रूटीन में शामिल करना आपके लिए बहुत ज़रूरी है:
- डॉक्टर की परमिशन है सबसे ज़रूरी: बिना अपने डॉक्टर से पूछे इस फास्टिंग रूटीन को बिल्कुल भी शुरू न करें, क्योंकि वे आपकी मेडिकल हिस्ट्री जानते हैं।
- ब्लड शुगर की लगातार जाँच: आपको आम दिनों के मुकाबले कई ज़्यादा बार अपनी शुगर चेक करनी पड़ेगी, ताकि आप हमेशा सुरक्षित रहें।
- पानी की कमी न होने दें: फास्टिंग के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत ज़रूरी है। खूब सारा पानी पिएँ।
- शुरुआत हमेशा धीरे-धीरे करें: सीधे 16 घंटे भूखे रहने की कोशिश न करें। पहले 10 या 12 घंटे से शुरुआत करना बेहतर है।
- दवाइयों के समय में बदलाव: खाली पेट होने पर आपकी दवाइयाँ कैसे काम करेंगी, इसके लिए डॉक्टर से अपनी डोज़ सेट करवाएँ।
- हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) का खतरा: शुगर अचानक से गिरने के लक्षणों को पहचानें और हमेशा अपने पास कुछ मीठा ज़रूर रखें।
- अपनी बॉडी की सुनें: अगर आपको कमज़ोरी, चक्कर या घबराहट महसूस हो रही है, तो तुरंत अपना फास्ट तोड़ दें। सेहत से बढ़कर कुछ नहीं है।
किन Diabetes Patients को Intermittent Fasting से बचना चाहिए?
कुछ लोगों के लिए उपवास रखना फायदे की जगह एक बड़ा नुकसान बन सकता है। नीचे बताए गए मरीजों को इंटरमिटेंट फास्टिंग से बिल्कुल दूर रहना चाहिए:
- टाइप 1 डायबिटीज के मरीज: क्योंकि आपका शरीर इंसुलिन नहीं बनाता है, इसलिए फास्टिंग में आपका शुगर लेवल बहुत तेज़ी से गिर सकता है या अचानक बढ़ सकता है।
- प्रेग्नेंट या ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएँ: इस दौरान माँ के शरीर को और बच्चे के विकास के लिए लगातार सही पोषण की ज़रूरत होती है।
- ऐसे लोग जिन्हें बार-बार हाइपोग्लाइसीमिया होता है: अगर आपकी शुगर बिना किसी चेतावनी के अचानक बहुत नीचे चली जाती है, तो फास्टिंग आपके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
- जिन मरीजों को किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारी है: डायबिटीज के साथ अगर आपको ये बीमारियाँ भी हैं, तो आपको बहुत संभलकर रहना चाहिए।
- ईटिंग डिसऑर्डर (Eating Disorder) की हिस्ट्री वाले लोग: अगर आपको पहले कभी खाने को लेकर कोई डिसऑर्डर रहा है, तो भूखे रहने का यह तरीका आपकी परेशानी को और बढ़ा सकता है।

Intermittent Fasting के दौरान Blood Sugar क्यों गिर सकता है?
इस पूरी प्रक्रिया को समझना बहुत आसान है। हमारा शरीर रोज़मर्रा के कामों के लिए एनर्जी हमारे खाए हुए भोजन से लेता है, खासकर कार्बोहाइड्रेट से जो पचने के बाद ग्लूकोज (Glucose) में बदलता है। जब हम इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं, तो हम एक लंबे समय तक शरीर को बाहर से खाना नहीं देते हैं। ऐसे में ब्लड में शुगर का लेवल स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है। अब अगर कोई डायबिटीज का मरीज ऐसी दवाइयाँ या इंसुलिन ले रहा है जिनका काम ही खून से शुगर को हटाना है, तो मामला काफी बिगड़ सकता है। शरीर में बाहर से शुगर आ नहीं रही है, और दवाइयाँ अंदर मौजूद शुगर को तेज़ी से कम कर रही हैं। इस स्थिति में ब्लड शुगर एक खतरनाक लेवल तक गिर सकता है जिसे हम हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं। यही मुख्य वजह है कि बिना दवा की डोज़ बदले उपवास करना बहुत बड़ा रिस्क माना जाता है।
Fasting के समय क्या खाएं और क्या नहीं?
फास्टिंग का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप पानी तक न पिएँ और शरीर को सुखा लें। फास्टिंग विंडो (Fasting Window) के दौरान भी आपको कुछ चीज़ें लेने की पूरी आज़ादी होती है जो आपकी शुगर नहीं बढ़ाती हैं। आप सादा पानी, ब्लैक टी, ब्लैक कॉफी और ग्रीन टी आराम से पी सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे, इनमें आपको चीनी, दूध या शहद बिल्कुल भी नहीं मिलाना है। जब आप अपना फास्ट तोड़ते हैं यानी ईटिंग विंडो (Eating Window) शुरू करते हैं, तो वह समय बहुत अहम होता है। फास्ट खोलने पर आपको एकदम से बहुत सारा मीठा या कार्बोहाइड्रेट वाला खाना नहीं खाना चाहिए। अपनी प्लेट में खूब सारी हरी सब्ज़ियाँ, हेल्दी फैट्स और लीन प्रोटीन (जैसे अंडे, दालें, पनीर या चिकन) शामिल करें। रिफाइंड कार्ब्स, पैक्ड फूड और बहुत ज़्यादा मीठे फलों से दूरी बनाए रखें। आपका सही खाना ही आपकी फास्टिंग के रिज़ल्ट को कई गुना बेहतर बनाएगा।
Diabetes की दवा और Insulin लेने वाले मरीजों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अगर आप अपनी डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए गोलियाँ (Pills) खाते हैं या इंसुलिन (Insulin) लेते हैं, तो आपको फास्टिंग के दौरान कदम-कदम पर सावधानी बरतनी होगी। इन दवाइयों का काम ही ब्लड शुगर को कम करना होता है। जब आप खाना नहीं खा रहे होते, तब आपके शरीर को इन दवाइयों की उतनी ज़रूरत नहीं होती जितनी आम दिनों में खाना खाने के बाद होती है। इसलिए फास्टिंग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से मिलकर अपनी दवाइयों का सही समय और डोज़ ज़रूर एडजस्ट करवाएँ। खासकर सल्फोनीलुरिया (Sulfonylureas) जैसी दवाइयाँ और इंसुलिन लेते समय शुगर गिरने का खतरा सबसे ज़्यादा होता है। डॉक्टर शायद आपको फास्टिंग के दिनों में इनकी डोज़ आधी करने या बिल्कुल न लेने की सलाह दे सकते हैं। कभी भी खुद से अपनी दवाइयाँ बंद करने या अपनी डोज़ कम करने की गलती न करें, यह बहुत खतरनाक कदम हो सकता है।
Intermittent Fasting के दौरान किन लक्षणों को बिल्कुल नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?
फास्टिंग करते समय शरीर में होने वाले बदलावों को पहचानना आना हर मरीज के लिए बहुत ज़रूरी है। अगर आपके ब्लड शुगर का लेवल बहुत ज़्यादा नीचे चला जाता है, तो आपका शरीर आपको कुछ खास इशारे देता है। इन लक्षणों को कभी भी नज़रअंदाज़ (Ignore) नहीं करना चाहिए:
- बहुत ज़्यादा पसीना आना: अगर आप आराम से बैठे हैं और अचानक आपके पसीने छूटने लगें।
- चक्कर आना या आँखों के आगे अँधेरा छाना: अगर आपको अपना बैलेंस बिगड़ता हुआ या धुँधलापन महसूस हो।
- हाथ-पैर काँपना या तेज़ धड़कन: अगर आपको बहुत ज़्यादा घबराहट महसूस हो रही हो और दिल ज़ोर से धड़के।
- बहुत तेज़ भूख लगना या चिड़चिड़ापन होना: यह इस बात का संकेत है कि शरीर को तुरंत शुगर चाहिए।
- कन्फ्यूजन (Confusion) या सोचने में दिक्कत: जब आपके दिमाग को काम करने के लिए सही मात्रा में ग्लूकोज नहीं मिलता। अगर इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत अपना फास्ट तोड़ दें और कुछ मीठा जैसे—ग्लूकोज पाउडर, जूस या कोई कैंडी खा लें।

Ayurveda के अनुसार Diabetes और उपवास (Fasting) को कैसे देखा जाता है?
प्राचीन आयुर्वेद (Ayurveda) में फास्टिंग या उपवास को 'लंघन' (Langhana) कहा गया है। आयुर्वेद यह मानता है कि सही तरीके से किया गया उपवास शरीर से विषाक्त पदार्थों यानी 'आम' (Ama) को बाहर निकालता है और हमारी पाचन अग्नि (Digestive Fire) को बहुत मज़बूत करता है। डायबिटीज, जिसे आयुर्वेद में 'प्रमेह' या 'मधुमेह' (Madhumeha) कहा जाता है, उसे मुख्य रूप से कफ (Kapha) दोष के बिगड़ने से जुड़ी बीमारी माना गया है। ऐसे में उपवास करने से शरीर का बढ़ा हुआ कफ संतुलित हो सकता है और मेद (Fat) कम होता है। लेकिन इसके साथ ही आयुर्वेद यह भी चेतावनी देता है कि वात (Vata) प्रकृति वाले लोगों या बहुत कमज़ोर मरीजों को लंबे समय तक भूखा नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे उनके शरीर में वात दोष बढ़ सकता है। इसलिए आयुर्वेद के हिसाब से भी, हर मरीज के लिए उपवास का तरीका उसकी प्रकृति (Body Type) और बीमारी की गंभीरता के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए।
Diabetes Patients के लिए सुरक्षित तरीके से Intermittent Fasting शुरू करने के टिप्स
अगर आप सारे खतरे जानने के बाद भी इसे आजमाना ही चाहते हैं, तो सुरक्षित रहने के लिए इन आसान से टिप्स (Tips) को ज़रूर फॉलो करें:
- 12/12 या 14/10 से शुरुआत करें: सीधे 16 या 18 घंटे फास्ट करने के बजाय, शुरुआत में रात को 8 बजे अपना खाना खा लें और अगली सुबह 8 बजे नाश्ता करें। यह शरीर के लिए आसान होता है।
- प्लानिंग (Planning) के साथ खाएँ: अपनी ईटिंग विंडो में केवल न्यूट्रिशन से भरपूर चीज़ें ही खाएँ। फाइबर और प्रोटीन को अपनी डाइट का सबसे अहम हिस्सा बनाएँ।
- वर्कआउट का समय सही रखें: अगर आप एक्सरसाइज़ (Exercise) करते हैं, तो उसे फास्टिंग के आखिरी घंटों में बिल्कुल न करें। इसे उस समय करें जब आप अच्छी तरह से खाना खा चुके हों।
- इमरजेंसी किट हमेशा साथ रखें: घर से बाहर जाते समय अपने बैग में हमेशा ग्लूकोज की गोलियाँ, कैंडी या कुछ मीठा ज़रूर रखें।
- बिल्कुल स्ट्रेस न लें: अगर आप इस फास्टिंग को फॉलो नहीं कर पा रहे हैं, तो खुद से ज़बरदस्ती न करें। तनाव (Stress) लेने से भी शरीर का शुगर लेवल बढ़ जाता है।
डॉक्टर से कब सलाह लेना ज़रूरी है?
- फास्टिंग शुरू करते वक्त: फास्टिंग का प्लान बनाने से पहले डॉक्टर की राय लेना सबसे पहला और ज़रूरी कदम है।
- तकलीफ महसूस होने पर: अगर चक्कर आएँ, शुगर बिगड़ रही हो या वज़न अचानक तेज़ी से घटने लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर को दिखाएँ।
- बीमारी या इंफेक्शन होने पर: कोई इंफेक्शन हो जाए या तबीयत ठीक न लगे, तो फास्टिंग वहीं रोक देना ही सही फैसला है।
- आगे क्या करना है: आपकी सेहत देखकर डॉक्टर ही तय करेंगे कि फास्टिंग जारी रखनी है या पुरानी रूटीन पर लौटना है।
निष्कर्ष
इसमें कोई शक नहीं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) ने दुनिया भर में बहुत से लोगों को वज़न कम करने और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने में काफी मदद की है। टाइप 2 डायबिटीज के कुछ मरीजों के लिए भी यह शुगर मैनेज करने का एक बेहतरीन टूल साबित हो सकता है। लेकिन सच मानिए, यह कोई जादू की छड़ी नहीं है, और न ही यह हर किसी के शरीर के लिए सुरक्षित है। फास्टिंग का असली फायदा तभी है जब उसे सही तरीके, पूरी जानकारी और डॉक्टरी देखरेख में किया जाए। अगर आप बिना सोचे-समझे केवल इंटरनेट देखकर इसे शुरू कर देंगे, तो यह फायदे की जगह आपके लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अपनी सेहत, अपनी दवाइयों और अपने शरीर के इशारों को अच्छी तरह समझें। अगर आप अपनी डाइट में थोड़ा सा बदलाव, समय पर सही दवाइयाँ और हल्की एक्सरसाइज़ (Exercise) को अपनी रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो आप बिना किसी भारी रिस्क के भी अपनी डायबिटीज को बहुत अच्छी तरह से कंट्रोल कर सकते हैं। अपनी सेहत का ख्याल रखें, खुश रहें और स्वस्थ रहें!
References
https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/diabetes
https://www.who.int/india/diabetes
https://applications.emro.who.int/dsaf/dsa509.pdf
https://www.healthline.com/health/diabetes
https://www.healthline.com/nutrition/intermittent-fasting-guide
https://www.healthline.com/nutrition/10-health-benefits-of-intermittent-fasting





























