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स्किन इन्फेक्शन हर 2 महीने में क्यों होता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

स्किन इन्फेक्शन हर 2 महीने में क्यों होता है?

आप सुबह उठते हैं और देखते हैं कि आपकी त्वचा पर फिर से वह लाल रंग का चकत्ता उभर आया है। यह सच में बहुत ही ज्यादा थका देने वाला अनुभव होता है। आपने शायद कुछ हफ़्ते पहले ही एक बहुत महंगी एंटी-फंगल क्रीम का कोर्स पूरा किया था। उस समय लगा था कि बीमारी बिल्कुल ठीक हो गई है। लेकिन जैसे ही आपने क्रीम लगानी बंद की। ठीक दो महीने बाद वह इन्फेक्शन और भी ज्यादा खुजली के साथ वापस लौट आया। यह एक कभी न खत्म होने वाला दूत चक्र सा लगने लगता है।

ज्यादातर लोग बस बार-बार केमिस्ट की दुकान पर जाते हैं। वही पुरानी स्टेरॉयड वाली क्रीम खरीद लाते हैं। लेकिन बार-बार होने वाला यह इन्फेक्शन सिर्फ त्वचा की ऊपरी परत की बीमारी नहीं है। यह आपके शरीर के अंदर बज रहा एक बहुत बड़ा अलार्म है। आपका खून अंदर से अशुद्ध हो चुका है। जब तक आप अपने खून को अंदर से साफ नहीं करेंगे। तब तक आप इस भयंकर खुजली से कभी भी अपनी एंग्जायटी को मैनेज नहीं कर पाएंगे। प्राकृतिक रूप से ठीक होना ही एकमात्र स्थायी रास्ता है।

बार-बार होने वाला स्किन इन्फेक्शन आखिर क्या है?

आपकी त्वचा आपके खून और आपके पेट का सीधा आईना होती है। जब कोई इन्फेक्शन बार-बार लौटकर आता है। तो इसका सीधा सा मतलब यह है कि आपकी इम्यूनिटी यानी रोगों से लड़ने की ताकत पूरी तरह से हार चुकी है।

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का गिरना: क्रीम सिर्फ ऊपरी बैक्टीरिया या फंगस को मारती है। लेकिन आपके शरीर के अंदर उस इन्फेक्शन से लड़ने वाले सैनिक (WBCs) बहुत कमजोर हो चुके हैं।
  • खून में अशुद्धि का लगातार बने रहना: जब खून में गंदगी लगातार तैरती रहती है। तो फंगस और बैक्टीरिया को पनपने के लिए हमेशा एक बहुत ही अनुकूल माहौल मिलता रहता है।

बार-बार होने वाले इन्फेक्शन के प्रकार

त्वचा की ये जिद्दी बीमारियाँ अलग-अलग लोगों में बिल्कुल अलग-अलग तरीके से सामने आती हैं।

  • फंगल इन्फेक्शन (दाद या रिंगवर्म): यह जांघों के बीच या पसीने वाली जगहों पर बार-बार गोल लाल घेरे के रूप में उभरता है।
  • बैक्टीरियल इन्फेक्शन (फोड़े-फुंसी): त्वचा पर बार-बार बड़े और दर्दनाक पस वाले दाने निकलना।
  • डर्मेटाइटिस या एक्जिमा के फ्लेयर-अप: त्वचा का अचानक बहुत ज्यादा रूखा हो जाना। वहां से पपड़ी झड़ना और खून निकल आना।
  • यीस्ट इन्फेक्शन: यह अक्सर शरीर की सिलवटों में बहुत भयंकर खुजली और जलन के साथ बार-बार होता है।

इसके लक्षण कैसे पहचानें?

जब आपका शरीर अंदर से इस गंदगी से जूझ रहा होता है। तो त्वचा कई बहुत ही परेशान करने वाले संकेत देती है।

  • रात के समय खुजली का अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाना। जिससे आपकी नींद पूरी तरह से टूट जाती है।
  • इन्फेक्शन वाली जगह का रंग धीरे-धीरे गहरा काला या बहुत सख्त हो जाना।
  • एक जगह ठीक होने के बाद शरीर के बिल्कुल किसी नए हिस्से पर इन्फेक्शन का शुरू हो जाना।
  • अक्सर इस इन्फेक्शन के तनाव के साथ लोगों में अचानक वजन बढ़ना भी देखा जाता है।
  • बिना किसी वजह के हर समय चिड़चिड़ापन महसूस करना।

इन्फेक्शन बार-बार लौटने के मुख्य कारण

  • कमजोर पेट और टॉक्सिन्स: जब आपका पाचन तंत्र खराब होता है। तो खाया हुआ भोजन सड़कर जहर (टॉक्सिन) बन जाता है। यह जहर सीधा खून में मिल जाता है।
  • स्ट्रेस और हार्मोनल बदलाव: लगातार तनाव के प्रभाव आपके इम्यून सिस्टम को पूरी तरह से सुन्न कर देते हैं। कई बार महिलाओं में यह हार्मोनल असंतुलन से भी जुड़ा होता है। यह समझना जरूरी है कि पीसीओडी क्या है क्योंकि वह भी बार-बार इन्फेक्शन का कारण बन सकता है।
  • स्टेरॉयड क्रीम का अत्यधिक इस्तेमाल: ये क्रीम आपकी त्वचा को बहुत ज्यादा पतला और कमजोर बना देती हैं। जिससे बैक्टीरिया को अंदर घुसने में बहुत आसानी होती है।
  • नींद का पूरा न होना: लगातार काम के बोझ से नींद की कमी शरीर की रिपेयर प्रक्रिया को रोक देती है।

इसे नज़रअंदाज़ करने पर क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

अगर आप इस समस्या को सिर्फ ऊपर से क्रीम लगाकर नजरअंदाज करते रहेंगे। तो इसके परिणाम बहुत भयंकर हो सकते हैं।

  • पूरे शरीर में फैलाव: एक छोटा सा दाद धीरे-धीरे आपकी पूरी पीठ और पेट को अपनी चपेट में ले सकता है।
  • त्वचा का स्थायी रूप से खराब होना: बार-बार खुजलाने से त्वचा बहुत ज्यादा मोटी हो जाती है और वहां जीवन भर के लिए गहरे काले निशान पड़ जाते हैं।
  • एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस: बार-बार गोलियां खाने से बैक्टीरिया इतने ताकतवर हो जाते हैं कि फिर उन पर कोई भी दवा असर ही नहीं करती।
  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: लगातार होने वाली खुजली और गंदे निशानों के कारण इंसान गहरे डिप्रेशन और सामाजिक एकांतवास में चला जाता है। लगातार त्वचा की बीमारियों और फंगल इन्फेक्शन का भारी तनाव महिलाओं के शरीर के हार्मोन्स को बिगाड़ देता है। कई बार यह तनाव इतना बढ़ जाता है कि उन्हें अनियमित पीरियड्स या फिर गंभीर फर्टिलिटी इश्यूज का भी सामना करना पड़ जाता है।

इसकी जांच कैसे होती है?

आम डॉक्टर बस त्वचा को देखकर क्रीम लिख देते हैं। लेकिन असली कारण जानने के लिए कुछ जांच जरूरी होती हैं।

  • ब्लड शुगर टेस्ट: कहीं छिपी हुई डायबिटीज तो नहीं है। जो इन्फेक्शन को सूखने ही नहीं दे रही है।
  • स्किन स्क्रेपिंग: त्वचा की पपड़ी को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर यह देखना कि यह फंगस है या बैक्टीरिया।
  • आईजीई (IgE) लेवल: शरीर में एलर्जी के स्तर को चेक करने के लिए किया जाने वाला ब्लड टेस्ट।
  • मेटाबॉलिक प्रोफाइल: यह देखने के लिए कि कहीं थायरॉइड के लक्षण तो आपकी इम्युनिटी को सुस्त नहीं कर रहे हैं।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आयुर्वेद कभी भी त्वचा की बीमारी को सिर्फ बाहर से ठीक करने में विश्वास नहीं रखता।

  • वात, पित्त और कफ का भयंकर असंतुलन: खासकर पित्त (गर्मी) और कफ (नमी) के बिगड़ने से रक्त (खून) और रस धातु पूरी तरह से दूषित हो जाते हैं।
  • अग्नि की कमजोरी: जब आपकी पाचन अग्नि ठंडी पड़ जाती है। तो शरीर में 'आम' (गंदगी) का पहाड़ बन जाता है।
  • यह 'आम' और दूषित खून त्वचा की सूक्ष्म नलियों में जाकर ब्लॉक हो जाता है। इसी से बार-बार इन्फेक्शन होता है। आयुर्वेद इसी गंदगी को शरीर के बाहर फेंकता है। जैसे पीसीओडी का प्राकृतिक इलाज शरीर को अंदर से साफ करता है, वैसे ही स्किन इन्फेक्शन का इलाज भी खून की पूरी सफाई मांगता है।

जीवा आयुर्वेद की समग्र चिकित्सा

हम सिर्फ खुजली को सुन्न नहीं करते। हम आपके शरीर के अंदर के वातावरण को ही बदल देते हैं।

  • रक्त शोधन (खून की सफाई): जड़ी-बूटियों के माध्यम से खून में तैर रहे सारे टॉक्सिन्स को बाहर निकालना।
  • दोष संतुलन: भड़की हुई गर्मी (पित्त) को शांत करना ताकि त्वचा की लालिमा और जलन खत्म हो सके।
  • ओजस (इम्यूनिटी) बढ़ाना: शरीर की अपनी ताकत को इतना बढ़ा देना कि फंगस दोबारा हमला ही न कर पाए।
  • मानसिक शांति: बीमारी के भारी तनाव को कम करने के लिए तनाव कम करने की खास विधियां।

स्किन इन्फेक्शन के लिए 4 बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

  • नीम: यह प्रकृति का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल पेड़ है। यह खून की गहराई में जाकर इन्फेक्शन को जड़ से काट देता है।
  • मंजिष्ठा: यह खून को साफ करने और त्वचा के काले पड़ चुके दाग-धब्बों को मिटाने के लिए एक बहुत ही शानदार जड़ी-बूटी है।
  • खदिर: इसे आयुर्वेद में त्वचा रोगों का सबसे बड़ा दुश्मन माना गया है। यह बार-बार होने वाली खुजली को तुरंत शांत करता है।
  • गिलोय: यह एक बहुत ही बेहतरीन इम्युनोमॉड्यूलेटर है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सीधा बढ़ाता है ताकि इन्फेक्शन दोबारा न लौट सके।

आयुर्वेदिक थेरेपी

  • विरेचन: यह एक पंचकर्म चिकित्सा है। इसके जरिए लिवर और आंतों में जमा हुआ सालों पुराना विषैला पित्त दस्त के रास्ते पूरी तरह से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
  • रक्तमोक्षण: जो खून त्वचा के आस-पास बिल्कुल दूषित होकर रुक गया है। उसे मेडिकल जोंक (Leech) के माध्यम से बाहर निकाला जाता है। इससे दर्द और खुजली में तुरंत चमत्कारिक आराम मिलता है।
  • लेपन: प्रभावित त्वचा पर खास ठंडी और औषधीय जड़ी-बूटियों का लेप लगाना। जो त्वचा को बाहर से रिपेयर करता है।

हार्मोनल और मेटाबॉलिक संतुलन के लिए डाइट प्लान

पावर फूड्स:

  • कड़वी सब्जियाँ: करेला, परवल और मेथी। यह खून को साफ करने का सबसे प्राकृतिक तरीका है।
  • शुद्ध घी: यह शरीर की अंदरूनी खुश्की को खत्म करता है और पाचन को सुचारू रूप से चलाता है।
  • पाचन सहायक: पेट को हर हाल में साफ रखने के लिए त्रिफला के फायदे अपनाएं। साफ आंतों का मतलब है साफ त्वचा।

इन चीजों से बिल्कुल बचें:

  • खट्टी और फर्मेंटेड चीजें: पुराना दही, अचार, इडली और सिरका। यह शरीर में पित्त की गर्मी को तुरंत भड़का देते हैं।
  • मैदा और रिफाइंड चीनी: ये सीधे तौर पर पेट में जाकर सड़ांध पैदा करते हैं। जिससे गंभीर पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
  • बेमेल भोजन (विरुद्ध आहार): दूध के साथ नमक या मछली का सेवन। आयुर्वेद में इसे त्वचा रोगों का सबसे बड़ा कारण माना गया है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीजों की जांच कैसे करते हैं?

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि आपके अंदर खून में कितनी अशुद्धि जमा हो गई है।
  • लक्षणों का गहराई से मूल्यांकन: यह समझना कि इन्फेक्शन हर बार उसी जगह पर क्यों लौट रहा है।
  • लाइफस्टाइल रिव्यू: आपके खाने के समय और आपके काम के तनाव को बारीकी से समझना।
  • मूल कारण की पहचान: यह तय करना कि बीमारी सिर्फ पसीने की वजह से है। या फिर आपका शरीर अंदर से पूरी तरह खोखला हो चुका है।

हमारे यहाँ इलाज का सफर

  • संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80+ क्लिनिक में आकर डॉक्टर को त्वचा दिखा सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: घर बैठे वीडियो कॉल से सिर्फ 49 रुपये में बात करें। इसमें बिल्कुल भी संकोच न करें।
  • विस्तृत जांच: आपके पुराने सभी क्रीम और दवाइयों की हिस्ट्री बहुत ध्यान से सुनी जाती है।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके लिए खास जड़ी-बूटियों, डाइट और तनाव से राहत का एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपकी खुजली में बहुत ज्यादा आराम आ जाएगा। रातों की नींद बेहतर होगी। पेट साफ रहने लगेगा।
  • पहले से तीसरे महीने तक: त्वचा की पपड़ी झड़ना बंद हो जाएगी। इन्फेक्शन का फैलाव पूरी तरह से रुक जाएगा। शरीर से गंदगी निकलने के कारण थोड़ा वजन कम होना भी महसूस हो सकता है।
  • तीसरे से छठे महीने तक: खून पूरी तरह से साफ हो जाएगा। त्वचा पर जमे हुए काले निशान हल्के पड़ने लगेंगे। अब क्रीम बंद करने के बाद भी इन्फेक्शन वापस नहीं लौटेगा।

आप किन परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं?

  • बार-बार होने वाले फंगल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन से हमेशा के लिए छुटकारा।
  • एक बेदाग, साफ और चमकती हुई स्वस्थ त्वचा।
  • शरीर में एक नई और बहुत ही मजबूत इम्यूनिटी का निर्माण।
  • खुजली के कारण होने वाले चिड़चिड़ेपन का बिल्कुल खत्म होना और एक शांत दिमाग पाना।
  • महंगी और नुकसानदायक स्टेरॉयड क्रीम से जीवनभर की आजादी।

मरीजों के अनुभव

अपनी त्वचा की समस्या से राहत पाने के लिए मैंने काफी पैसा खर्च किया। मुझे लगा कि यह कभी ठीक नहीं होगी। फिर एक दिन मैंने यूट्यूब पर त्वचा रोगों पर जिवा का एक कार्यक्रम देखा और एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श लेने का निर्णय लिया। मुझे यह सुविधा बहुत पसंद आई कि जिवा के डॉक्टरों से वीडियो कॉल के माध्यम से या क्लिनिक में आमने-सामने परामर्श लिया जा सकता है। आयुर्वेदिक दवाइयों ने मेरी त्वचा की समस्या को पूरी तरह ठीक कर दिया।

गुणाध्य ठाकुर

मथुरा

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

  • दवा
  • परामर्श
  • मानसिक स्वास्थ्य सत्र
  • योग और ध्यान मार्गदर्शन
  • आहार योजना
  • थेरेपी

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीजों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग Rs.1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ त्वचा को ऊपर से नहीं रंगते। हम आपके लिवर और खून की गहराई से सफाई करते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास जटिल और पुराने त्वचा रोगों के इलाज में सालों का शानदार अनुभव रखने वाले डॉक्टर हैं।
  • कोई साइड इफेक्ट नहीं: स्टेरॉयड की तरह हमारी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां आपकी त्वचा को पतला या खराब नहीं करतीं।
  • स्थायी समाधान: हमारा लक्ष्य आपको बार-बार अस्पताल बुलाना नहीं है। हमारा लक्ष्य आपको हमेशा के लिए ठीक करना है।

आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

  • आधुनिक चिकित्सा: यह दृष्टिकोण मुख्य रूप से बाहरी क्रीम और भारी एंटीबायोटिक्स पर निर्भर करता है। यह बीमारी को कुछ समय के लिए दबा जरूर देता है। लेकिन यह आपके लिवर पर बहुत ज्यादा भार डालता है। जैसे ही आप दवा छोड़ते हैं, इन्फेक्शन दोगुनी ताकत से लौट आता है।
  • आयुर्वेद: यह शरीर को खुद को हील करने का पूरा मौका देता है। आयुर्वेद खून की गर्मी को शांत करता है। पेट के टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी मजबूत हो जाती है कि त्वचा की बीमारी अपने आप दम तोड़ देती है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको इनमे से कोई परेशानी हो रही हो तो डॉक्टर को तुरंत संपर्क करें:

  • अगर त्वचा पर लालिमा बहुत तेजी से पूरे शरीर में फैल रही हो।
  • अगर दाने या चकत्ते में से पीला मवाद या बदबूदार पानी रिसने लगा हो।
  • अगर इन्फेक्शन के साथ आपको बार-बार तेज बुखार आ रहा हो।
  • अगर खुजलाते-खुजलाते त्वचा फट गई हो और वहां असहनीय दर्द होने लगा हो।

निष्कर्ष

हर दो महीने में स्किन इन्फेक्शन का वापस आ जाना कोई मामूली बात नहीं है। यह आपके शरीर की एक बहुत ही गंभीर पुकार है कि आपका खून गंदगी से भर चुका है। स्टेरॉयड क्रीम के पीछे भागकर इस अलार्म को बंद करने की कोशिश मत कीजिए। इससे समस्या और ज्यादा जटिल होगी। अपनी जीवनशैली को सुधारें। अपने पेट को साफ रखें। जीवा आयुर्वेद की प्राकृतिक और सुरक्षित जड़ी-बूटियों को अपनाकर अपने खून को अंदर से शुद्ध करें। आज ही संपर्क करें और हमेशा के लिए एक बेदाग, साफ और खुजली-रहित त्वचा का आनंद लें।

FAQs

बिल्कुल। बार-बार स्टेरॉयड वाली क्रीम लगाने से आपकी त्वचा की ऊपरी परत बहुत ज्यादा पतली हो जाती है। उसकी अपनी इम्युनिटी खत्म हो जाती है, जिससे फंगस को अंदर घुसने में और भी ज्यादा आसानी होती है।

नीम को आयुर्वेद में सबसे बेहतरीन रक्त शोधक (खून साफ करने वाला) माना गया है। इसमें प्राकृतिक रूप से फंगस और बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने की बहुत अद्भुत क्षमता होती है।

सौ प्रतिशत। अगर आपका खाना ठीक से नहीं पच रहा है, तो वह पेट में सड़कर टॉक्सिन (आम) बनाता है। यह गंदगी सीधा खून में मिलकर त्वचा के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश करती है, जिसे हम इन्फेक्शन कहते हैं।

खट्टी और फर्मेंटेड चीजें शरीर में तुरंत पित्त (गर्मी) को बढ़ा देती हैं। यह अतिरिक्त गर्मी खून में मिलकर आपकी खुजली और त्वचा की लालिमा को बहुत ज्यादा भड़का देती है।

हां। तनाव लेने से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो सीधे तौर पर आपके इम्यून सिस्टम को बहुत ज्यादा कमजोर कर देता है। कमजोर इम्युनिटी में इन्फेक्शन बहुत तेजी से फैलता है।

विरेचन में औषधियों के जरिए लिवर और आंतों में जमा हुआ सालों पुराना विषैला पित्त दस्त के रास्ते बाहर निकाला जाता है। पेट और लिवर के साफ होते ही खून की गर्मी शांत हो जाती है और त्वचा चमकने लगती है।

केमिकल वाले और तेज खुशबू वाले साबुन त्वचा को बहुत ज्यादा रूखा कर देते हैं। बेहतर है कि आप प्राकृतिक उबटन या बहुत ही माइल्ड आयुर्वेदिक साबुन का इस्तेमाल करें।

बार-बार खुजलाने और बार-बार होने वाले सूजन (इन्फ्लेमेशन) के कारण त्वचा वहां खुद को बचाने के लिए मोटी और काली हो जाती है। इसे पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन कहते हैं।

खुजली और जलन में तो कुछ ही हफ्तों में आराम मिल जाता है। लेकिन खून को पूरी तरह से शुद्ध होने और त्वचा के काले दाग मिटने में कम से कम तीन से छह महीने का अनुशासित समय लगता है।

बिल्कुल। शुद्ध देसी घी शरीर की अंदरूनी खुश्की को दूर करता है। यह पित्त की गर्मी को शांत करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर त्वचा में एक प्राकृतिक चमक लेकर आता है।

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