घर में बार-बार Snacks सामने दिखना बच्चों और Adults दोनों की Eating को कैसे बदलता है?

Information By Dr. Kuldeep Solanki     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कई बार ऐसा होता है जब हम घर में होते हैं हमें अचानक भूख लगने लगती है, कभी हमारा मन चाय के साथ biscuit खाने का करने लगता है या कभी कुछ और कई बार तो ऐसा होता है सामने जो snacks दिख जाए हम वही खाने लगते है चाहे हमें भूख हो या नहीं। 

आजकल हर किसी के घर में biscuits, नमकीन, chips और अन्य packaged foods बेहद आसानी से मिल जाते हैं। नज़रो के सामने ऐसे snacks के होने की वजह से हमारा ध्यान बार-बार उसी की तरफ जाता है और हम बार-बार उसे खाने लगते है चाहे हमें भूख हो या नहीं। 

यह आदत बच्चों में ज्यादा दिखाई देती है बच्चे इन snacks की ओर जल्दी आकर्षित होते है, जब कि ये उनके लिए सही नहीं है, क्योंकि बचपन में ही खान-पान की आदत विकसित होती है। वही बड़े भी इससे पीछे नहीं रहते ऑफिस से लौटके थकान और भूख मिटाने के लिए वो भी snacks का ही सेवन करते है। कुछ लोगों के लिए तो snacks उनके जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। 

Snacks खाने की आदत को कैसे बदल सकते हैं?

आजकल हर किसी के घर में snacks या packaged food मौजूद होते हैं, और लोग उन्हें ऐसी जगह पर रख देते हैं जहाँ से घर के सदस्य आसानी से उन्हें लेकर खा सकें। नज़रो के सामने snacks होने के वजह से घर के सदस्य बार-बार उसका सेवन करते है तब भी जब उनका मन नहीं होता और बार-बार snacks खाना उनकी eating को काफी गंभीर रूप से बदलता है। 

आइए जानते हैं कैसे:

  • जब snacks बार-बार आँखों के सामने आते है तो, snacks के देखने से ही शरीर में भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन सक्रिय हो जाते है और भूख न होने के बावजूद भी snacks खाने का मन कर जाता हैं जिस वजह से बार-बार snacks खाने की आदत लग जाती है। 
  • भोजन व्यक्ति से जितना पास होता है, उतनी ही उसे खाने की संभावना बढ़ जाती है। रिसर्च बताती है की भोजन की दूरी में कुछ सेंटीमीटर का फर्क करने से भी उसकी खपत में भारी कमी आती है। 
  • बच्चों पर इसका प्रभाव पड़ता है, बार-बार snacks खाने से बच्चें डिनर और लंच के दौरान पेट भरा होने के कारण कम खाना खाते है। snacks शरीर के लिए बेहद unhealthy होते है इससे शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। 
  • Adults पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है, जब adults दिन भर की थकान के बाद घर लौटते हैं और आँखों के सामने snacks देखते हैं तो वो खुद पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं। 
  • बार-बार snacks खाने से मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ता है। Snacks में मौजूद unhealthy fat obesity और मोटापे का कारण बन सकता है।   

बार-बार Snacks खाने के फायदे और नुकसान

घर में बार-बार snacks का सामने दिखना बच्चों और adults के खान पान के व्यवहार को सीधा प्रभावित करता है। ऐसा नहीं है कि snacks खाना बुरा है और इसे बिल्कुल ही छोड़ देना चाहिए। यदि खुद को नियंत्रित करके इसका सेवन करा जाएं तो यह खाने के व्यवहार को  प्रभावित नहीं करता है। आइए जानते हैं इसके फायदे और नुकसान:

फायदे (यदि सामने दिखने वाले snacks healthy हो)

नुकसान यदि सामने दिखने वाले snacks unhealthy हो

यदि सामने कुछ healthy रखा हो जैसे फल, ड्राई फ्रूट्स, मखाने आदि तो adult और बच्चे वही उठाएंगे, जिससे उनके शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ति होगी।

सामने snacks रखें होने के कारण सबका ध्यान उसी कि ओर आकर्षित होता है और बच्चे और adults भूख न होने के बावजूद भी उसका सेवन करते है।

बच्चों और adults के लिए खाने के अलावा healthy snacks का सेवन उनके energy level को बनाए रखता है और उनके metabolism को ठीक रखता है।

बार-बार high-fat snacks और unhealthy snacks खाने की वजह से बच्चों और adults में मोटापा (obesity) होने का खतरा बढ़ जाता है।


आँखों के सामने healthy snacks दिखाई देने से बच्चे उन्हें ही खाएंगे और बचपन से ही उनमें सही खाने की आदत विकसित होगी।

बार-बार snacks के सेवन से बच्चों का पेट भर जाता है, जिस वजह से वो मुख्य भोजन नहीं करते और दिन भर unhealthy snacks खाने की वजह से उनमें आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।

खाने की आदत को ठीक करने के आसान तरीके

घर में हर समय snacks आँखों के सामने रखने से यह बच्चों और adults को बिना भूख के खाने का आदी बना देता है।  इस आदत को ठीक करने के तरीके निम्नलिखित हैं:

  • Unhealthy snacks को आँखों के सामने न रखें, इन्हे किसी डिब्बे में बंद करके ऐसी जगह रखें जहां किसी की भी इन पर सीधी नज़र न जाए। यदि आँखों के सामने snacks रखने ही हैं, तो healthy snacks रखें। 
  • Unhealthy snacks की जगह healthy snacks का उपयोग करें। जैसे chips, biscuit की जगह भुने हुए चने, ड्राई फ्रूट्स या मखाने आदि का सेवन करें, मीठे की जगह नारियल पानी, छाछ आदि का सेवन  करें। 
  • खाना या snacks निश्चित जगह पर बैठकर ही खाएं, बेड या सोफे पर नहीं। 
  • कोशिश करें की कुछ भी खाते वक़्त स्क्रीन को न देखें। मोबाइल, टीवी या लैपटॉप आदि के बिना खाना खाएं। स्क्रीन देखते हुए खाने से हमारा सारा ध्यान स्क्रीन कि ओर जाता है पेट से मिलने वाले सिग्नल्स पर नहीं जिस वजह से हम ज्यादा खाना खा लेते हैं। 
  • Unhealthy snacks खरीदने से बचें। 
  • दिन भर में पर्याप्त पानी पिएं और पूरी नींद लें। कई बार हमें प्यास लगी होती है और हमारा दिमाग उसे भूख समझ लेता है और snacks की ओर भागता है।  पर्याप्त पानी पीने से क्रेविंग्स शांत होती है। पूरी नींद न लेने की वजह से व्यक्ति के भूख के हॉर्मोन असंतुलित हो जाते हैं जिस वजह से हर वक़्त क्रेविंग होने लगती है। 

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण 

आयुर्वेद में भोजन को शरीर और मन के पोषण का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, सही समय पर और अपनी पाचन क्षमता के अनुसार भोजन करना ज़रूरी है। घर में chips, biscuit, नमकीन जैसी चीजें दिखने पर व्यक्ति भूख न लगने के बावजूद भी snacks खा सकता है। ऐसी आदतों से बचने के लिए  भूख के संकेतों को समझना और संतुलित दिनचर्या अपनाना उपयोगी है।  आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से ताज़ा, पौष्टिक और उचित मात्रा में भोजन करना बेहतर माना जाता हैं। ताज़े फल, भुने चने और मखाने जैसे विकल्प चुनकर खानपान को संतुलित बनाया जा सकता है।

निष्कर्ष

घर में बार-बार snacks का सामने दिखना बच्चों और adults के खान-पान की आदत को प्रभावित कर सकता है। कई बार व्यक्ति भूख न होने के बावजूद भी सामने रखी चीज़ को केवल स्वाद के लिए या सामने देखकर खाने लगता है।  धीरे-धीरे ये अधिक खाना खाने और पौष्टिक तत्वों को नज़रअंदाज़ करने की आदत बन सकती है। इससे बचने के लिए snacks को उचित जगह पर रखना, unhealthy snacks की जगह healthy snacks का उपयोग करना और नियमित भोजन की आदत अपनाना ज़रूरी है। बच्चों के सामने ऐसा करना अधिक आवश्यक है क्योंकि बच्चों में इसी उम्र में खानपान की आदत विकसित होती है। 

References

Is Frequency of Shared Family Meals Related to the Nutritional Health of Children and Adolescents? - PMC

Mindless Eating Challenge: Retention, Weight Outcomes, and Barriers for Changes in a Public Web-Based Healthy Eating and Weight Loss Program - PMC

From mindless eating to mindlessly eating better - PubMed

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

Snacks बार-बार सामने दिखाई देने से बच्चों और बड़ों को बिना भूख के भी खाने का मन कर सकता है। इससे बार-बार कुछ खाने की आदत विकसित होती है। 

अगर बच्चें बार बार ज्यादा कैलोरी वाले snacks खाते है और उनकी शारीरिक गतिविधियां कम है तो उनके वजन बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है। 

Chips, biscuits, नमकीन जैसे snacks को किसी बंद जगह पर रखें और बार-बार सामने दिखाई देने वाली जगह पर healthy snacks जैसे ड्राई फ्रूट्स, फल आदि रखें। 

बच्चों को संतुलित भोजन दें, उनकी नियमित दिनचर्या बनाएं और स्वयं भी ये आदतें अपनाएं।  बच्चे अक्सर बड़ों को देखकर अच्छी आदतें अपनाते हैं। 

भूख के संकेतो को समझे, भोजन करते समय मोबाइल या स्क्रीन से दूरी बनाये और केवल बोरियत को भगाने के लिए भोजन न करें।

आयुर्वेद में उचित मात्रा में, सही समय पर पाचन क्षमता के अनुसार भोजन करने का महत्त्व दिया जाता है। ताज़ा और स्वस्थ भोजन को महत्त्व देना स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा है।

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