Diseases Search
Close Button
 
 

“भूख नहीं लगती” — digestion weak है या stress का असर?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

"आज तो कुछ खाने का मन ही नहीं है।" हम सब कभी न कभी ऐसा बोलते ही हैं। एक-दो दिन भूख न लगना बहुत आम बात है। शायद आपने पहले कुछ हैवी खा लिया हो या फिर बस मौसम का असर हो।

लेकिन, अगर हफ्तों से आपकी भूख गायब है, खाने को देखकर ही जी मिचलाने लगता है, या ज़बरदस्ती निवाला गले से नीचे उतारना पड़ रहा है, तो इसे इग्नोर बिल्कुल मत कीजिए। शरीर आपको बता रहा है कि अंदर कुछ तो गड़बड़ है। भूख मरने की वजह सिर्फ पेट खराब होना नहीं होता; कई बार टेंशन, अधूरी नींद और हमारी खराब लाइफस्टाइल भी इसकी बहुत बड़ी वजह होती है।

आख़िर भूख लगती कैसे है?

भूख लगने का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि आपका पेट खाली हो गया है। असल में, यह हमारे पेट, दिमाग और शरीर के हार्मोन्स के बीच का एक आपसी तालमेल है।

जब शरीर को काम करने के लिए एनर्जी की ज़रूरत होती है, तो पेट सीधे दिमाग को एक सिग्नल भेजता है, "पेट खाली हो गया है, अब कुछ ईंधन डालो।" इसके बाद ही दिमाग हमें भूख का अहसास कराता है और खाने को देखकर हमारे मुँह में पानी आने लगता है।

लेकिन दिक्कत तब आती है जब आप बहुत ज़्यादा टेंशन में होते हैं, रात भर ठीक से सोते नहीं हैं, या दिन भर कुर्सी पर एक ही जगह बैठे रहते हैं। ऐसे में पेट और दिमाग के बीच का यह सिग्नल वाला रास्ता ब्लॉक हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर को खाने की ज़रूरत तो होती है, लेकिन हमारा सिस्टम हमें भूख का अहसास ही नहीं करा पाता।

क्या कमज़ोर पाचन इसकी वजह हो सकता है?

अगर आप थोड़ा सा भी खाना खाते हैं और आपका पेट फूल जाता है, खट्टी डकारें आने लगती हैं, सीने में जलन होती है या पेट में भारीपन बना रहता है, तो समझ जाइए कि आपका पाचन कमज़ोर पड़ गया है।

जब हमारा पाचन सुस्त होता है, तो पुराना खाया हुआ खाना पेट में ही पड़ा रहता है और पचता नहीं है। जब पिछला खाना ही पेट में जमा पड़ा है, तो पेट नए खाने की जगह ही नहीं बनाता। यही वजह है कि आपको अगली बार खाने की इच्छा ही नहीं होती। इसे लोग अक्सर गैस समझकर टाल देते हैं, लेकिन अगर पाचन को सही समय पर ठीक न किया जाए, तो शरीर में कमज़ोरी आने लगती है।

टेंशन और चिंता से भूख क्यों मर जाती है?

शायद आपको पता न हो, लेकिन हमारे दिमाग और पेट का एकदम सीधा कनेक्शन है। अगर दिमाग में उथल-पुथल मची हो, तो सबसे पहले हमारा पेट ही गड़बड़ाता है।

होता यह है कि जब हम किसी बात को लेकर बहुत ज़्यादा टेंशन में होते हैं, चाहे वो ऑफिस का काम हो, घर-परिवार की कोई परेशानी या फिर पैसों की दिक्कत, तो हमारा शरीर एक तरह के 'अलार्म मोड' में चला जाता है। शरीर को लगने लगता है कि कोई बहुत बड़ा खतरा सामने आ गया है।

इस खतरे से निपटने के लिए शरीर अपनी पूरी ताकत और एनर्जी सिर्फ दिमाग और मांसपेशियों की तरफ लगा देता है और खाना पचाने वाली मशीन (पेट) के काम को कुछ देर के लिए बिल्कुल रोक देता है। बस यही वजह है कि जब हम बहुत ज़्यादा टेंशन या स्ट्रेस में होते हैं, तो हमारी भूख पूरी तरह गायब हो जाती है और कुछ भी खाने का मन नहीं करता।

कमज़ोर पाचन और तनाव में अंतर कैसे पहचानें?

कई बार समझ नहीं आता कि भूख पेट की वजह से मरी है या दिमाग की वजह से। इसे पहचानने का बहुत ही आसान तरीका है:

  • अगर वजह पेट है: खाना खाने के बाद पेट में दर्द, बहुत ज़्यादा गैस, कब्ज, खट्टी डकारें या उल्टी जैसा मन होगा। खाना सामने देखकर भी भारीपन महसूस होगा।
  • अगर वजह दिमाग है: पेट में कोई जलन या गैस नहीं होगी, लेकिन आपका मन बेचैन रहेगा। नींद नहीं आएगी, दिल की धड़कन तेज़ रहेगी, चिड़चिड़ापन होगा और खाने की थाली देखकर भी उसे छूने का मन नहीं करेगा।

कई बार ये दोनों समस्याएं एक साथ भी हो सकती हैं, तनाव की वजह से पाचन बिगड़ जाता है और बिगड़े पाचन की वजह से तनाव बढ़ जाता है।

कौन-सी गलत आदतें आपकी भूख मार रही हैं?

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हमारी अपनी ही कुछ आदतें हमारी भूख को धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं:

  • देर रात तक जागना: रात को देर से सोने से पेट का पाचन पूरी तरह सुस्त हो जाता है।
  • सुबह का नाश्ता छोड़ना: सुबह-सुबह खाली पेट रहने से पेट में तेज़ाब बनता है जो भूख को मार देता है।
  • दिन भर कुछ न कुछ चबाना: हर आधे घंटे में बिस्किट, नमकीन या चाय लेते रहने से पेट कभी खाली ही नहीं होता, जिससे असली भूख लगना बंद हो जाती है।
  • जंक फूड की लत: पिज्जा, बर्गर और मैदे की चीजें पचने में बहुत भारी होती हैं और पचने में अधिक समय लग सकता है। 
  • बैठे-बैठे दिन बिताना: दिन भर कुर्सी या सोफे पर लेटे रहने से शरीर की एनर्जी खर्च ही नहीं होती, तो भूख कैसे लगेगी?

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

कभी-कभार भूख कम लगना सामान्य हो सकता है, लेकिन लगातार "भूख न लगने" की समस्या को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यह सिर्फ कमज़ोर पाचन का संकेत नहीं है, बल्कि अत्यधिक तनाव का भी सीधा परिणाम हो सकता है। तनाव के दौरान शरीर 'फाइट या फ्लाइट' मोड में चला जाता है, जिससे आंतों की तरफ रक्त संचार कम हो जाता है और भूख मर जाती है; वहीं, कमज़ोर पाचन या फैटी लिवर होने पर खाना पेट में लंबे समय तक रहने से हमेशा भारीपन बना रहता है। यदि आपको लंबे समय से भूख नहीं लग रही है और साथ में वज़न कम हो रहा है या थकान महसूस होती है, तो सिर्फ भूख बढ़ाने वाले टॉनिक पर निर्भर न रहें, बल्कि इसके असली कारण (शारीरिक या मानसिक) को समझने के लिए डॉक्टर से परामर्श लें। 

किन लक्षणों को भूलकर भी नज़रअंदाज़ न करें?

भूख न लगना एक बात है, लेकिन अगर इसके साथ नीचे दी गई चीजें भी हो रही हैं, तो यह किसी बीमारी का इशारा हो सकता है:

आयुर्वेद क्या कहता है? 

आयुर्वेद में हमारे पाचन को 'जठराग्नि' यानी पेट की अग्नि माना गया है। बस यूं समझ लीजिए कि यही वो अग्नि है जो हमारे खाए हुए भोजन को पकाकर शरीर को ताकत देती है।

जब यह अग्नि तेज़ जलती है, तो हमें कड़ाके की भूख लगती है और खाया-पिया तुरंत पच भी जाता है। लेकिन जैसे ही हम बासी खाना, फ्रिज का एकदम ठंडा पानी या बहुत ज़्यादा तेल-मसाले वाला खाना पेट में डालते हैं, तो यह अग्नि बुझने लगती है। और जब पेट की अग्नि ही बुझ जाएगी, तो खाना सामान्य गति से पच नहीं पाता, जिससे आपकी भूख पूरी तरह मर जाती है। अपनी इस पेट की अग्नि को जलाए रखने के लिए आयुर्वेद हमेशा ताज़ा, हल्का गर्म और सादा खाना खाने की सलाह देता है।

खुलकर भूख लगने के लिए रोज़ की कुछ आसान आदतें

अगर आप चाहते हैं कि आपको बिल्कुल टाइम पर और तेज़ भूख लगे, तो फौरन किसी टॉनिक या दवाई के पीछे भागने से बचें। बस अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इन छोटी-छोटी बातों को शामिल कर लें:

  • खाने का एक टाइम बांध लें: रोज़ सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का डिनर एक ही समय पर करने की कोशिश करें। हमारे शरीर को एक फिक्स रूटीन (नियम) बहुत पसंद आता है।
  • खूब चबा-चबाकर खाएं: खाने को मुँह में इतनी बार चबाएं कि वह पानी बन जाए। इससे आपके पेट को खाना पचाने में ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी और वह जल्दी पचेगा।
  • रोज़ थोड़ा पैदल चलें: सुबह या शाम के वक्त कम से कम 20 से 30 मिनट तेज़-तेज़ टहलें (वॉक करें)। जब आप चलेंगे, शरीर थकेगा और पुरानी कैलोरी जलेगी, तो अपने आप तेज़ भूख चमकेगी।
  • पानी पीने का सही तरीका अपनाएं: दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी ज़रूर पिएं। लेकिन याद रहे, खाना खाने के एकदम पहले या खाना खाते ही तुरंत बाद गट-गट करके ढेर सारा पानी बिल्कुल न पिएं।
  • गहरी नींद लें: रात को 7 से 8 घंटे की सुकून भरी नींद लेना बहुत ज़रूरी है। जब आप अच्छी नींद लेते हैं, तो आपका दिमाग शांत रहता है और पाचन अंदर से मज़बूत होता है।

डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है?

अगर आपको दो हफ्ते से ज़्यादा समय से बिल्कुल भूख नहीं लग रही है, और ऊपर बताए गए घरेलू नुस्खे आजमाने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा है, तो सीधे डॉक्टर के पास जाएं।

अगर आपको पहले से शुगर, थायराइड, लिवर या किडनी की कोई बीमारी है, तो खुद से कोई घरेलू नुस्खा या चूर्ण खाने के बजाय डॉक्टर से जांच ज़रूर करवाएं। सही समय पर खून की जांच या अल्ट्रासाउंड कराने से असली वजह का पता चल जाता है और इलाज आसान हो जाता है।

निष्कर्ष

भूख न लगने की परेशानी को सिर्फ "अरे, आज मूड नहीं है" कहकर छोड़ देना सही नहीं है। यह पेट की सुस्ती भी हो सकती है और दिमाग की टेंशन भी।

सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि आपका शरीर आपसे क्या कह रहा है। अपनी लाइफस्टाइल को सुधारें, घर का बना ताज़ा और सादा खाना खाएँ, थोड़ी कसरत करें और दिमाग को शांत रखें। जब आपका पेट और दिमाग दोनों खुश रहेंगे, तो आपको समय पर अच्छी भूख भी लगेगी और खाया-पिया शरीर को लगेगा भी!

References

A review on the food digestion in the digestive tract and the used in vitro models - PMC 

Digestive Disorders | Nutrition.gov 

Your Digestive System & How it Works - NIDDK 

Physiology, Digestion - StatPearls - NCBI Bookshelf 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, कुछ मामलों में लंबे समय तक भूख कम लगना कैंसर का एक लक्षण हो सकता है, खासकर जब इसके साथ बिना वजह वज़न कम होना, लगातार थकान, दर्द या खून आना जैसे अन्य संकेत भी हों। हालांकि, केवल भूख कम लगना कैंसर का प्रमाण नहीं है। अगर यह समस्या कई हफ्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच करवाना ज़रूरी है।

हाँ। फैटी लिवर, हेपेटाइटिस या लिवर सिरोसिस जैसी समस्याओं में भूख कम लगना आम बात है। इसके साथ मतली, पेट में भारीपन, जल्दी पेट भर जाना या कमजोरी भी महसूस हो सकती है। लंबे समय तक भूख कम रहने पर लिवर की जांच कराना उचित रहता है।

हाँ, कुछ लोगों में विटामिन B12 की कमी के कारण भूख कम लग सकती है। इसके अलावा थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी, चक्कर आना और याददाश्त पर असर जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। सही जांच के बाद डॉक्टर की सलाह से B12 की कमी का इलाज किया जा सकता है।

हाँ। कुछ एंटीबायोटिक दवाएं अस्थायी रूप से भूख कम कर सकती हैं क्योंकि वे स्वाद में बदलाव, मतली या पेट की गड़बड़ी पैदा कर सकती हैं। आमतौर पर दवा का कोर्स पूरा होने के बाद भूख सामान्य हो जाती है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लें।

बच्चों में भूख कम लगने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे दांत निकलना, वायरल संक्रमण, पेट के कीड़े, कब्ज, बार-बार जंक फूड खाना या विकास के दौरान भूख का स्वाभाविक रूप से कम होना। यदि बच्चा लगातार खाना न खाए, वज़न न बढ़े या बहुत सुस्त रहने लगे, तो बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

उम्र बढ़ने के साथ स्वाद और सूंघने की क्षमता कम हो सकती है, पाचन धीमा हो सकता है और कुछ दवाओं के कारण भी भूख घट सकती है। इसके अलावा डायबिटीज, किडनी, लिवर या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। लंबे समय तक भूख कम रहने पर कारण की जांच कराना ज़रूरी है।

हाँ, गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में मॉर्निंग सिकनेस, मतली और हार्मोनल बदलाव के कारण कई महिलाओं की भूख कम हो जाती है। यह अक्सर अस्थायी होता है। लेकिन अगर खाना बिल्कुल न खा पा रही हों, बार-बार उल्टी हो रही हो या वज़न तेजी से घट रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डिप्रेशन का असर केवल मन पर ही नहीं, बल्कि भूख पर भी पड़ता है। कई लोगों में डिप्रेशन के दौरान खाने की इच्छा कम हो जाती है, जबकि कुछ लोगों में भूख बढ़ भी सकती है। यदि भूख कम होने के साथ लगातार उदासी, किसी काम में रुचि न रहना, नींद में बदलाव या निराशा महसूस हो रही हो, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us