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Obesity और knee pain का connection: weight ही नहीं, inflammation भी reason हो सकता है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 03 Aug, 2026
  • category-iconUpdated on 03 Aug, 2026
  • category-iconJoint Health
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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि सीढ़ियाँ चढ़ते ही आपके घुटने जवाब दे जाएँ? आजकल बहुत से लोग यह सोचते हैं कि उनके घुटनों का दर्द सिर्फ उनके भारी वज़न की वजह से है। जब भी कोई मोटा इंसान डॉक्टर के पास जाता है, तो उसे सबसे पहले वज़न कम करने की सलाह मिलती है। लेकिन क्या सच में सिर्फ वज़न ही घुटनों को खराब कर रहा है? या फिर हमारे शरीर के अंदर चल रही कोई और प्रक्रिया इसका कारण है? इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि मोटापे और घुटनों के दर्द का असली कनेक्शन क्या है और इन्फ्लेमेशन (सूजन) इसमें कितनी बड़ी भूमिका निभाता है।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

मेडिकल साइंस के बड़े एक्सपर्ट्स और हड्डी रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि मोटापे का असर सिर्फ बाहरी शरीर पर नहीं पड़ता। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जब शरीर में एक्स्ट्रा फैट जमा होता है, तो वह सिर्फ एक बेजान चर्बी नहीं होती। यह चर्बी शरीर में ऐसे खतरनाक रसायन छोड़ती है जो जोड़ों के अंदर जाकर भयंकर सूजन यानी इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं। डॉक्टरों की राय में, जब मरीज़ लगातार घुटनों में जलन और दर्द की शिकायत लाते हैं, तो यह सिर्फ भारी वज़न का दबाव नहीं होता, बल्कि उन रसायनों का हमला होता है जो घुटनों की ग्रीस को अंदर ही अंदर पूरी तरह खत्म कर रहे होते हैं।

वज़न ही नहीं, बल्कि इन्फ्लेमेशन भी घुटनों को बर्बाद करता है?

यह बहुत ही ज़रूरी सवाल है कि मोटापे में इन्फ्लेमेशन घुटनों का सबसे बड़ा दुश्मन कैसे बन जाता है। दरअसल, हमारे शरीर की चर्बी से साइटोकिन्स नाम के रसायन निकलते हैं। जब आपका वज़न ज़्यादा होता है, तो ये रसायन शरीर में बहुत अधिक मात्रा में बनने लगते हैं। ये खून के ज़रिए सीधे आपके घुटनों के जोड़ों तक पहुँचते हैं। वहाँ पहुँचकर ये रसायन कार्टिलेज (घुटनों की गद्दी) को तेज़ी से घिसना शुरू कर देते हैं। इसी वजह से आपका वज़न अगर थोड़ा सा भी ज़्यादा हो, तो भी आपको घुटनों में चुभन, गर्माहट और बहुत ज़्यादा सूजन महसूस होने लगती है, जो सिर्फ दबाव से नहीं होती।

घुटनों के दर्द और मोटापे के कारणों का प्रतिशत

यह जानना बहुत दिलचस्प है कि कितने प्रतिशत लोग सिर्फ वज़न और कितने इन्फ्लेमेशन के कारण दर्द सहते हैं। हाल ही के स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि मोटापे से पीड़ित लगभग 85% लोग घुटनों की समस्या से जूझ रहे हैं। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत में बाँटें, तो लगभग पैंतालीस प्रतिशत मामलों में घुटनों का दर्द शरीर में लगातार बने रहने वाले भारी इन्फ्लेमेशन के कारण होता है। तीस प्रतिशत मामलों में यह शरीर के भारी वज़न के सीधे दबाव का नतीजा होता है। वहीं बचे हुए पच्चीस प्रतिशत मामलों में कमज़ोर माँसपेशियाँ और खराब डाइट मुख्य रूप से ज़िम्मेदार होती हैं।

घुटनों में दर्द होने पर शरीर में अजीब-सी बेचैनी क्यों होती है?

जब घुटनों में लगातार दर्द और इन्फ्लेमेशन रहता है, तो शरीर को बहुत ज़्यादा बेचैनी और घबराहट का सामना करना पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर के अंदरूनी हिस्से में सूजन होने पर आपका इम्यून सिस्टम हमेशा हाई अलर्ट पर रहता है। शरीर को लगता है कि उसे किसी बाहरी बीमारी से लगातार लड़ना है, जिससे बहुत ज़्यादा ऊर्जा खर्च होती है। इस लगातार लड़ाई की वजह से आपका नर्वस सिस्टम कभी शांत नहीं हो पाता। इसी कारण आपको नींद नहीं आती, सारा दिन थकावट लगती है और दर्द वाले हिस्से में अजीब सी गर्माहट और उलझन हमेशा बनी रहती है।

घुटनों के किन खतरनाक लक्षणों को कभी हल्के में न लें?

घुटनों में हल्का दर्द होना या सीढ़ियाँ चढ़ते हुए थोड़ी थकावट लगना आम बात है और इससे ज़्यादा घबराना नहीं चाहिए। लेकिन जब आपका शरीर कुछ खास तरह के गंभीर इशारे दे, तो हमें तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि ये किसी बड़ी अंदरूनी बीमारी के संकेत हो सकते हैं:

  • घुटनों का लॉक हो जाना: चलते-चलते अगर घुटने अचानक जाम हो जाएँ और आप उन्हें किसी भी तरह सीधा न कर पाएँ।
  • आवाज़ आना: उठते या बैठते समय अगर घुटनों से कट-कट की बहुत तेज़ और लगातार आवाज़ आने लगे।
  • भयानक सूजन: घुटनों का आकार सूजकर बहुत बड़ा हो जाए और छूने पर वहाँ बहुत ज़्यादा गर्म महसूस हो।
  • पैर का टेढ़ा होना: अगर आपके पैरों या घुटनों का आकार अंदर या बाहर की तरफ मुड़ने लगे।

क्या दर्द और मोटापे की दवाइयाँ स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं?

जी हाँ, कई बार घुटनों के दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए हम जो पेनकिलर्स या स्टेरॉयड्स खाते हैं, वे ही परेशानी का बड़ा कारण बन जाते हैं। जब आप दर्द की तेज़ दवाइयाँ रोज़ाना खाते हैं, तो ये पेट और किडनी को खराब करती हैं, साथ ही शरीर में पानी भी जमा करने लगती हैं। इस वजह से आपका वज़न और ज़्यादा तेज़ी से बढ़ने लगता है। बढ़ा हुआ वज़न फिर से घुटनों पर भारी दबाव डालता है। इसके अलावा मोटापे की कुछ दवाइयाँ शरीर से ज़रूरी पोषक तत्व निकाल देती हैं, जिससे घुटने और भी ज़्यादा कमज़ोर होकर दर्द करने लगते हैं।

इन्फ्लेमेशन और घुटनों के दर्द पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ दोषों पर निर्भर करता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, मोटापा कफ दोष के बढ़ने का नतीजा है, जबकि जोड़ों का दर्द वात दोष के बेकाबू होने से होता है। जब इन्फ्लेमेशन की बात आती है, तो आयुर्वेद इसे रक्त में 'आम' (विषैले तत्व) और पित्त के बढ़ने से जोड़ता है। जब आपका खानपान खराब होता है, तो पेट में गंदगी बनती है। यह गंदगी खून के ज़रिए घुटनों में जाकर सूजन पैदा करती है। आयुर्वेद कहता है कि सिर्फ दर्द की गोलियाँ खाने के बजाय शरीर से इन विषैले तत्वों को बाहर निकालना बहुत ज़रूरी है।

घुटनों के भयानक दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए क्या करें?

जब भी आपके घुटनों में अचानक बहुत तेज़ दर्द हो और सूजन आ जाए, तो बाज़ार की तेज़ दवा खाने के बजाय घर पर कुछ सुरक्षित तरीके आजमाने चाहिए। ये घरेलू उपाय पूरी तरह प्राकृतिक हैं और घुटनों की माँसपेशियों को बहुत जल्दी आराम पहुँचाते हैं:

  • हल्दी का लेप: हल्दी और सरसों के तेल को हल्का गर्म करके घुटनों पर लगाने से अंदरूनी सूजन तुरंत खिंच जाती है।
  • ठंडी और गर्म सिकाई: दर्द ज़्यादा हो तो बर्फ से और जकड़न हो तो गर्म पानी की थैली से अच्छी तरह सिकाई करें।
  • तिल के तेल की मालिश: गुनगुने तिल के तेल से दर्द वाली जगह की बिल्कुल हल्के हाथों से मालिश करवाएँ।
  • मेथी दाने का पानी: रात को भिगोए हुए मेथी दाने का पानी सुबह खाली पेट पिएँ, यह सूजन को तेज़ी से काटता है।

वज़न ज़्यादा है तो घुटनों को दर्द से कैसे बचाएँ?

अगर आप चाहते हैं कि घुटनों में बार-बार दर्द का न हो, तो अपनी रोज़ की आदतों में थोड़े से बदलाव कर लीजिए। एक सही रूटीन अपनाकर आप इस समस्या से आराम से बच सकते हैं:

  • सही जूते-चप्पल चुनें हमेशा सॉफ्ट सोल वाले और आरामदायक जूते-चप्पल ही पहनें, ताकि चलते-फिरते वक्त घुटनों और एड़ियों पर झटका न लगे।
  • मीठा और मैदा कम करें चीनी और मैदे से बनी चीजें शरीर के अंदर सूजन को बढ़ाती हैं, इसलिए इनसे जितना हो सके दूरी बना लें।
  • पानी में एक्सरसाइज़ करेंअगर वज़न बहुत ज़्यादा है, तो तैराकी (स्विमिंग) या पानी के अंदर हल्की-फुल्की कसरत करें। इससे घुटनों पर सीधा दबाव नहीं पड़ता।
  • ज़मीन पर बैठने से बचें जमीन पर चौकड़ी मार कर बैठना या उकड़ू (पंजों के बल) बैठने की आदत छोड़ दें, इससे घुटनों पर बहुत ज़ोर पड़ता है। 

घुटनों की ग्रीस (कार्टिलेज) बचाने के लिए कैसी डाइट लेनी चाहिए?

घुटनों के दर्द में सिर्फ कम खाना ही ज़रूरी नहीं है, बल्कि सही खाना भी उतना ही ज़्यादा ज़रूरी है। आपकी डाइट ऐसी होनी चाहिए जो अंदरूनी इन्फ्लेमेशन को शांत करे और कार्टिलेज को बचाए। अपने रोज़ाना के आहार में ओमेगा-थ्री से भरपूर चीज़ें जैसे अखरोट और अलसी के बीज शामिल करें। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, ताज़े फल और विटामिन सी से भरपूर चीज़ें खाएँ, जो शरीर में कोलेजन बनाने में भारी मदद करती हैं। कोलेजन घुटनों की गद्दी को फिर से बनाने का काम करता है। रिफाइंड तेल की जगह शुद्ध सरसों का तेल या देसी घी का थोड़ा इस्तेमाल करें।

क्या बिना सर्जरी के घुटनों का दर्द पूरी तरह ठीक हो सकता है?

यह सवाल हर उस इंसान के मन में आता है जो घुटनों के दर्द से बहुत परेशान है। इसका जवाब है, हाँ, बिल्कुल हो सकता है, बशर्ते आपकी बीमारी बहुत आखिरी स्टेज पर न पहुँच गई हो। अगर आप समय रहते अपने शरीर का इन्फ्लेमेशन कम कर लें, डाइट सुधार लें और सही योगासन करें, तो आपके घुटने वापस मज़बूत हो सकते हैं। माँसपेशियों को मज़बूत बनाने वाली फिजियोथेरेपी इसमें बहुत बड़ा जादुई काम करती है। जब जांघों और पिंडलियों की माँसपेशियाँ मज़बूत हो जाती हैं, तो शरीर का पूरा वज़न घुटनों के जोड़ों पर न पड़कर माँसपेशियों पर आ जाता है, जिससे दर्द जड़ से खत्म हो जाता है।

घुटनों के दर्द में आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा में बड़ा अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
बीमारी का नज़रिया घुटनों के दर्द और मोटापे के कारणों का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार, जीवनशैली और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार दवाइयाँ, फिजियोथेरेपी, वजन प्रबंधन, इंजेक्शन या सर्जरी जैसे चिकित्सकीय विकल्प अपनाए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, योग, नियमित दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
असर होने की गति कई मामलों में दर्द नियंत्रण और कार्यक्षमता में अपेक्षाकृत जल्दी सुधार मिल सकता है। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
जीवनशैली का महत्व उपचार के साथ वजन नियंत्रण, व्यायाम और संतुलित आहार को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आहार, योग और स्वस्थ दिनचर्या को समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
दीर्घकालिक लक्ष्य दर्द कम करना, जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार। संतुलित जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य को लंबे समय तक बनाए रखने पर बल दिया जाता है।

घुटनों की समस्या में तुरंत डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

वैसे तो घुटनों का हल्का दर्द और सूजन सिकाई करने और सही डाइट लेने से खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है। लेकिन हमें हमेशा इस बात का पूरा अंदाज़ा होना चाहिए कि कब स्थिति बहुत गंभीर रूप ले सकती है और हमें तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • असहनीय दर्द होना: अगर घुटनों में ऐसा भयंकर दर्द हो कि आप अपने पैरों पर एक मिनट भी सीधे खड़े न रह पाएँ।
  • बुखार के साथ सूजन: जब घुटने के दर्द और भारी सूजन के साथ आपको अचानक बहुत तेज़ बुखार भी आ जाए।
  • चोट लगने के बाद: अगर गिरने या एक्सीडेंट के बाद घुटना अचानक अपनी जगह से खिसका हुआ महसूस होने लगे।
  • रंग बदलना: अगर घुटने के आस-पास की त्वचा का रंग लाल या नीला पड़ने लगे और पैर में सुन्नपन आ जाए।

निष्कर्ष

मोटापे और घुटनों के दर्द का कनेक्शन सिर्फ शरीर के भारी वज़न तक सीमित नहीं है। जैसा कि हमने समझा, शरीर के अंदर का इन्फ्लेमेशन आपके कार्टिलेज का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह दर्द सिर्फ हड्डियों की खराबी नहीं है, बल्कि यह बताता है कि आपका पोस्चर, खानपान और तनाव बहुत ज़्यादा बेकाबू हो चुके हैं। इस बीमारी को सिर्फ तेज़ दवा खाने से नहीं, बल्कि सही जीवनशैली और सूजन कम करने वाले आहार से ही जीता जा सकता है। अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें, वज़न को धीरे-धीरे कम करें और हमेशा सकारात्मक रहें। अगर परेशानी ज़्यादा तंग करे, तो हमेशा डॉक्टर से सही सलाह लें।

References

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/37874571/

https://www.health.harvard.edu/pain/take-control-of-your-knee-pain

https://www.healthline.com/health/knee-pain/knee-joint-pain

https://www.healthline.com/health/knee-pain-location-chart

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

सिर्फ वज़न कम करना काफी नहीं है। आपको अपने शरीर से इन्फ्लेमेशन भी खत्म करना होगा। जब आपका वज़न घटेगा और सूजन कम होगी, तब घुटनों का दर्द लगभग पूरी तरह से गायब हो जाएगा।

सूजन और इन्फ्लेमेशन कम करने के लिए ग्रीन टी या ताज़ी अदरक की चाय सबसे ज़्यादा फायदा करती है। इनमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो घुटनों की सूजन को अंदर से बहुत तेज़ी से काटते हैं।

हाँ, हल्की वॉक करना बहुत ज़रूरी है। लेकिन अगर दर्द बहुत ज़्यादा तेज़ है, तो लगातार चलने से बचें। ऐसे में आपको स्विमिंग या साइकिल चलाने जैसी एक्सरसाइज़ करनी चाहिए जिससे घुटनों पर सीधा ज़ोर न पड़े।

कुछ लोगों को डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है जिससे शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ जाता है। अगर आपको दूध पीने के बाद जोड़ों में दर्द महसूस होता है, तो कुछ दिन दूध बंद करके देखें।

गद्दी (कार्टिलेज) बचाने के लिए अपनी डाइट में विटामिन सी और ओमेगा-थ्री शामिल करें। इसके साथ ही आलथी-पालथी मारकर ज़मीन पर बैठने से पूरी तरह बचें, क्योंकि इससे गद्दी पर बहुत भारी दबाव पड़ता है।

जी हाँ, चीनी और बहुत ज़्यादा मीठा शरीर के अंदर भयानक इन्फ्लेमेशन पैदा करता है। यह खून में मिलकर ऐसे रसायन बनाता है जो सीधे आपके घुटनों और बाकी जोड़ों में सूजन और दर्द बढ़ा देते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, सरसों के तेल में लहसुन और अजवाइन पकाकर उसकी मालिश करने से घुटनों का दर्द तुरंत कम होता है। इसके अलावा तिल का तेल भी नसों को शांत करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

अगर आपको दर्द लगातार रहता है, तो सीढ़ियाँ चढ़ने से बचना चाहिए। सीढ़ियाँ चढ़ते समय आपके घुटनों पर आपके शरीर के वज़न का तीन गुना ज़्यादा दबाव पड़ता है, जो स्थिति को और भी खराब कर सकता है।

कुर्सी पर बैठकर किए जाने वाले योगासन सबसे सुरक्षित होते हैं। आप लेटकर पवनमुक्तासन या हल्के स्ट्रेचिंग वाले आसन कर सकते हैं। भारी योगासन या कूदने वाली एक्सरसाइज़ घुटनों के लिए इस समय बिल्कुल सही नहीं होती।

बिल्कुल, जब शरीर में यूरिक एसिड बढ़ता है, तो उसके छोटे-छोटे क्रिस्टल घुटनों और जोड़ों में जाकर जमा हो जाते हैं। इससे घुटनों में बहुत भयानक दर्द, लालिमा और भारी सूजन आ जाती है जिसे तुरंत कंट्रोल करना ज़रूरी है।

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