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Stress blood sugar को कैसे affect कर सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि शुगर का बढ़ना सिर्फ बहुत ज़्यादा मीठा खाने या खराब लाइफस्टाइल की वजह से होता है। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि जब आप बहुत ज़्यादा टेंशन में होते हैं, तो आपकी शुगर अचानक क्यों बढ़ जाती है? दरअसल, हमारे दिमाग की उलझनों और खून में दौड़ती शुगर का बहुत गहरा रिश्ता है। जब दिमाग में तनाव का बवंडर उठता है, तो इसका सीधा असर हमारे हॉर्मोन्स पर पड़ता है। सिर्फ शुगर कंट्रोल करने की दवा खा लेने से यह बीमारी जड़ से नहीं जाती। जब तक आप मन की शांति नहीं ढूँढते, तब तक ब्लड शुगर का मीटर ऊपर-नीचे होता रहेगा। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई आम उतार-चढ़ाव नहीं है, बल्कि आपके शरीर की एक पुकार है कि अब उसे रिलैक्स होने की ज़रूरत है।

तनाव से शुगर लेवल क्यों बढ़ता है? (फाइट और फ्लाइट रिस्पॉन्स)

जब आप बहुत ज़्यादा चिंता में होते हैं, तो आपका दिमाग शरीर को आपातकालीन स्थिति यानी 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) मोड में डाल देता है। इस स्थिति से निपटने के लिए शरीर को तुरंत ऊर्जा की ज़रूरत होती है। इस ऊर्जा को पाने के लिए हमारा लिवर (Liver) अपने अंदर जमा किए हुए ग्लूकोज़ को खून में छोड़ना शुरू कर देता है। आम दिनों में इंसुलिन इस ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुँचा देता है, लेकिन स्ट्रेस के समय शरीर इंसुलिन का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि वह सारा ग्लूकोज़ खून में ही तैरता रहता है और आपका ब्लड शुगर लेवल अचानक से हाई हो जाता है।

क्या शुगर बढ़ने का कारण हमेशा मीठा खाना ही है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार आप एकदम कड़क डाइट फॉलो करते हैं, चीनी बिल्कुल छोड़ देते हैं, फिर भी आपकी रिपोर्ट में शुगर बढ़ी हुई आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि खेल आपकी थाली का नहीं, बल्कि आपके ख्यालों का है। अगर आप दिन-रात ऑफिस की टेंशन ले रहे हैं या किसी बात को लेकर घबराए हुए हैं, तो आप भले ही उबली हुई सब्ज़ियाँ खा रहे हों, आपका लिवर तनाव के कारण खून में शुगर घोलता रहेगा। इसलिए स्ट्रेस में ली गई हेल्दी डाइट भी कई बार शरीर को फायदा नहीं पहुँचा पाती।

मानसिक दबाव का आपके शरीर पर क्या असर पड़ता है?

जब हम लगातार परेशान रहते हैं, तो हमारे शरीर के अंदर कई सारे बदलाव एक साथ होने लगते हैं:

  • कॉर्टिसोल हार्मोन का बढ़ना: तनाव में यह हार्मोन शरीर में तेज़ी से बढ़ता है, जो इंसुलिन के काम में रुकावट पैदा करता है, जिससे शुगर खून में ही रह जाती है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: लगातार स्ट्रेस रहने से शरीर के सेल्स इंसुलिन को पहचानना बंद कर देते हैं, जिससे शुगर पचना मुश्किल हो जाता है।
  • क्रेविंग्स (कुछ खाने की तलब): तनाव में अक्सर शरीर को तुरंत एनर्जी चाहिए होती है, इसलिए अनहेल्दी या मीठा खाने की ज़बरदस्त इच्छा होती है।
  • नींद का टूटना: स्ट्रेस के कारण नींद पूरी नहीं होती, जिससे अगले दिन शरीर थका रहता है और ब्लड शुगर अनियंत्रित हो जाती है।

क्या लगातार शुगर हाई रहना किसी गंभीर खतरे की घंटी है?

अगर आपको रोज़ाना स्ट्रेस हो रहा है और आपकी शुगर भी लगातार बढ़ रही है, तो इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ न करें। यह शरीर में चल रही किसी बड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है:

  • प्री-डायबिटीज से टाइप-2 डायबिटीज: अगर लंबे समय तक स्ट्रेस रहे, तो हल्की-फुल्की बढ़ी हुई शुगर पक्की टाइप-2 डायबिटीज में बदल सकती है।
  • हार्ट की बीमारियाँ: खून में लगातार शुगर और कॉर्टिसोल का बढ़ा रहना दिल की धमनियों को सख्त कर देता है।
  • नसों की कमज़ोरी (Neuropathy): हाई ब्लड शुगर धीरे-धीरे शरीर की नसों को डैमेज करने लगती है, जिससे हाथ-पैरों में सुन्नपन आने लगता है।
  • किडनी पर दबाव: खून में तैरती एक्स्ट्रा शुगर को बाहर निकालने के लिए किडनी को बहुत ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

आयुर्वेद की नज़र में स्ट्रेस और ब्लड शुगर का रिश्ता

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ ये तीन मुख्य दोष होते हैं। जब आप बहुत ज़्यादा सोचते हैं या डरते हैं, तो शरीर में 'वात' (हवा तत्व) असंतुलित हो जाता है। यह बढ़ा हुआ वात शरीर के 'कफ' दोष को अपनी जगह से हिला देता है और पाचन अग्नि को मंद कर देता है। जब अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बनने लगता है। आयुर्वेद में डायबिटीज को 'प्रमेह' कहा जाता है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप अपने दिमाग के वात (चंचलता और तनाव) को शांत नहीं करेंगे, तब तक शरीर का शुगर लेवल (कफ और मेद) भी संतुलित नहीं होगा।

आयुर्वेद इस समस्या को जड़ से कैसे ठीक करता है?

आयुर्वेद सिर्फ बीमारी के लक्षणों को नहीं दबाता, बल्कि उसके जड़ तक जाता है। आयुर्वेद यह मानता है कि आपकी शुगर और स्ट्रेस आपके गलत लाइफस्टाइल और खराब पाचन का ही नतीजा है। इसमें सबसे पहले डॉक्टर आपकी नाड़ी देखकर आपके शरीर के दोष को समझते हैं। फिर शरीर की अंदरूनी सफाई (डिटॉक्स) के लिए पंचकर्म जैसी थेरेपी दी जाती है ताकि शरीर से सारे टॉक्सिन्स बाहर निकल जाएँ। इसके साथ ही, आपका डाइट प्लान कुछ इस तरह सेट किया जाता है जो आपके पाचन को मज़बूत करे और दिमाग को रिलैक्स करे। इससे शरीर खुद को हील (ठीक) करना सीख जाता है।

शुगर और स्ट्रेस को कंट्रोल करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन जड़ी-बूटियाँ दी हैं जो दिमाग को शांत करती हैं और इंसुलिन को बेहतर बनाती हैं:

  • गिलोय (गुडूची): यह शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाती है, स्ट्रेस कम करती है और ब्लड शुगर को नैचुरली कंट्रोल करने में बहुत असरदार है।
  • अश्वगंधा: यह तनाव के हार्मोन (कॉर्टिसोल) को घटाने की सबसे ताकतवर जड़ी-बूटी है। यह दिमाग को रिलैक्स करती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाती है।
  • ब्राह्मी: यह सीधे आपके दिमाग की नसों को ठंडक देती है, ओवरथिंकिंग रोकती है जिससे शरीर का नर्वस सिस्टम रिलैक्स होता है।
  • सदाबहार: इसके फूल और पत्तियाँ शरीर में पैंक्रियाज को एक्टिव करने और शुगर को पचाने में बहुत मदद करते हैं।

क्या बहुत ज़्यादा सोचने (Overthinking) से भी इंसुलिन बिगड़ता है?

बिलकुल! हमारा दिमाग शरीर की 20% ऊर्जा अकेले इस्तेमाल करता है। जब आप बेवजह बहुत ज़्यादा सोचते हैं, तो दिमाग को और ज़्यादा ऊर्जा (ग्लूकोज़) की ज़रूरत पड़ने लगती है। इसकी भरपाई के लिए शरीर खून में ग्लूकोज़ का लेवल बढ़ा देता है। लगातार ऐसा होने से आपके पैंक्रियाज को बार-बार इंसुलिन बनाना पड़ता है। धीरे-धीरे पैंक्रियाज थक जाता है और ओवरथिंकिंग के जाल में फँसा व्यक्ति बिना मीठा खाए भी हाई ब्लड शुगर का शिकार हो जाता है।

रोज़मर्रा की वो गलतियाँ जो स्ट्रेस और शुगर दोनों को बढ़ाती हैं

हम अक्सर जाने-अनजाने में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो हमारी परेशानी को दोगुना कर देता है (यहाँ टेबल की जगह महत्वपूर्ण बिंदु दिए गए हैं):

  • खाली पेट बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी पीना: खाली पेट कैफीन लेने से कॉर्टिसोल अचानक बढ़ता है, जिससे स्ट्रेस और शुगर दोनों में उछाल आता है।
  • देर रात का भारी और मीठा खाना: रात में इंसुलिन धीमा काम करता है, देर से खाने पर खाना पचता नहीं है और सुबह शुगर हाई मिलती है।
  • मैदा और प्रोसेस्ड फूड का ज़्यादा सेवन: ये चीज़ें खून में एकदम से शुगर छोड़ती हैं और पचने में भारी होने से शरीर को स्ट्रेस में डाल देती हैं।
  • अनियमित भोजन का समय: कभी भी कुछ भी खा लेने से शरीर की बायोलॉजिकल घड़ी बिगड़ जाती है और इंसुलिन सही समय पर नहीं बन पाता।
  • नींद से समझौता करना: 7-8 घंटे की नींद न लेने से शरीर खुद को रिपेयर नहीं कर पाता, जिससे मानसिक तनाव और शुगर का स्तर अगले दिन बिगड़ा हुआ रहता है।

किन दूसरी शारीरिक समस्याओं के कारण यह दिक्कत होती है?

कई बार आप डाइट और स्ट्रेस दोनों मैनेज करते हैं, फिर भी कुछ दूसरी बीमारियों की वजह से शुगर लेवल और तनाव बढ़ सकता है:

  • थायराइड का असंतुलन: इसके बिगड़ने से शरीर का पूरा मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिससे वज़न, तनाव और शुगर तीनों बढ़ते हैं।
  • विटामिन डी की कमी: इसकी कमी से डिप्रेशन और थकान महसूस होती है, जो सीधा इंसुलिन के काम करने की क्षमता को कमज़ोर कर देती है।
  • पीसीओएस (PCOS): महिलाओं में हार्मोनल इम्बैलेंस की वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है, जिससे तनाव और शुगर की समस्या बनी रहती है।
  • स्लीप एप्निया: सोते समय बार-बार साँसें रुकने की यह बीमारी शरीर को बहुत ज़्यादा स्ट्रेस में डालती है, जिससे सुबह शुगर लेवल हाई रहता है।

शुगर की गोलियों का अंधाधुंध इस्तेमाल कब बन जाता है नुकसानदायक?

जब भी हमारी रिपोर्ट में शुगर ज़्यादा आती है, हम तुरंत डॉक्टर की दी हुई दवा का डोज़ बढ़ा लेते हैं। ये गोलियाँ खून से शुगर को कम तो कर देती हैं, लेकिन अगर आपका स्ट्रेस कम नहीं हुआ है, तो लिवर फिर से शुगर छोड़ देगा। सिर्फ गोलियों पर निर्भर रहने और अपने तनाव को नज़रअंदाज़ करने से धीरे-धीरे शरीर का पैंक्रियाज प्राकृतिक रूप से काम करना भूल जाता है। इससे शरीर में कमज़ोरी आती है और आपकी दवाइयों का पावर बढ़ता चला जाता है।

दवा की जगह इन आसान तरीकों से पाएं स्ट्रेस और शुगर से आराम

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर इस परेशानी से राहत पा सकते हैं:

  • खाना खाने के बाद आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर हल्के गुनगुने पानी के साथ लें, यह इंसुलिन को तुरंत एक्टिव कर देता है।
  • रात को एक चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें और सुबह वह पानी पी लें। यह तनाव को कम करता है और शुगर को कंट्रोल रखता है।
  • जब भी बहुत ज़्यादा घबराहट हो, तो शांत जगह पर बैठकर 5 मिनट के लिए गहरी साँसें लें (Deep Breathing)। इससे फाइट और फ्लाइट मोड बंद हो जाता है और शुगर का लेवल नीचे आने लगता है।
  • खाना खाने के तुरंत बाद लेटने के बजाय 15 मिनट की हल्की सैर (Walk) ज़रूर करें, इससे मांसपेशियों में शुगर आसानी से खप जाती है।

तन और मन को सेहतमंद रखने के लिए रोज़मर्रा की आदतें

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं:

  • रूटीन सेट करें: सोने, जागने और खाने का एक पक्का समय तय करें ताकि शरीर को पता हो कि उसे कब इंसुलिन बनाना है।
  • धूप ज़रूर लें: सुबह की ताज़ी धूप में कम से कम 20 मिनट बैठें, इससे विटामिन डी मिलता है और मूड अच्छा करने वाले हार्मोन बनते हैं।
  • डिजिटल डिटॉक्स: सोने से एक घंटे पहले टीवी और मोबाइल बंद कर दें, इससे दिमाग रिलैक्स होगा और गहरी नींद आएगी।
  • हल्का व्यायाम और योग: रोज़ाना 30 मिनट का योग या व्यायाम शरीर में जमे हुए स्ट्रेस को बाहर निकालता है और शुगर को बर्न करता है।

स्ट्रेस और शुगर के लिए डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • जब आपको बार-बार बहुत ज़्यादा प्यास लगने लगे और बार-बार पेशाब जाने की नौबत आए।
  • आँखों के सामने धुंधलापन छाने लगे या चक्कर आने लगें।
  • स्ट्रेस के कारण आपको पैनिक अटैक आने लगें और दिल की धड़कन बहुत ज़्यादा तेज़ रहने लगे।
  • चोट लगने या घाव होने पर वह जल्दी न भरे।
  • अचानक से बिना किसी कारण के आपका वज़न बहुत तेज़ी से गिरने लगे और हर वक्त थकान रहे।

एलोपैथी (आधुनिक इलाज) और आयुर्वेद में क्या अंतर है?

पहलू एलोपैथी आयुर्वेद
मुख्य लक्ष्य बढ़े हुए शुगर लेवल और स्ट्रेस के लक्षणों को नियंत्रित करना। शरीर के संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाना।
उपचार का तरीका दवाएँ, जीवनशैली में बदलाव और नियमित मॉनिटरिंग। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, योग, ध्यान और पारंपरिक उपचार।
असर का समय कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी असर दिखा सकते हैं। प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण बीमारी के प्रबंधन और जटिलताओं की रोकथाम पर ध्यान। जीवनशैली और संतुलन के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य बनाए रखने का प्रयास।
स्वास्थ्य का दृष्टिकोण विशिष्ट रोग और उसके जोखिम कारकों पर केंद्रित। शरीर, मन और जीवनशैली को एक साथ देखकर उपचार का दृष्टिकोण।

निष्कर्ष:

हमेशा याद रखें कि आपका दिमाग और शरीर अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही टीम का हिस्सा हैं। आप जो भी सोचते या महसूस करते हैं, उसका सीधा असर आपके खून की हर एक बूँद पर पड़ता है। इसलिए स्ट्रेस और ब्लड शुगर को दो अलग-अलग बीमारियाँ मानकर इनका इलाज करने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद के लिए थोड़ा सा समय निकालें। अपने खानपान को सुधारें, रोज़ थोड़ा योग करें और स्ट्रेस को खुद पर हावी न होने दें। जब आपका दिमाग खुश और शांत रहेगा, तो यकीनन आपका शरीर भी पूरी तरह से तंदुरुस्त और शुगर-फ्री रहेगा।

References:

https://cdn.who.int/media/docs/default-source/searo/ncd/ncd-flip-charts/1.-diabetes-24-04-19.pdf

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/diabetes

https://www.niddk.nih.gov/health-information/diabetes/overview/preventing-problems/low-blood-glucose-hypoglycemia

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

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