भूख या खाना खाना सिर्फ एक डेली टास्क नहीं है जो कर लिया, बल्कि आयुर्वेद के अनुसार भूख लगना और समय पर खाना-खाना आपके शरीर को ढंग से काम करने को दिखाता है और इसमे सबसे ज़रूरी है आपकी खाना खाने की इच्छा जो हमारे शरीर की अग्नि (digestive fire) से उत्पन होती है। हम अक्सर खाना खाने की इच्छा को ध्यान से नहीं समझते, लेकिन आयुर्वेद में भूख की इच्छा को सबसे ज़रूरी बताया गया हैं । हम अक्सर भूख न लगने पर यह कहते हैं कि मैं बाद में खा लूँगा या कभी बिना भूख के खाना खाते हैं और फिर बाद में हमे acidity या पाचन की समस्या होती हैं।
आयुर्वेद में भूख को सिर्फ खाने की इच्छा नहीं बोलते बल्कि यह एक संकेत होता है जो आपकी पाचन क्रिया में कोई परेशानी या रुकावट की ओर इशारा करती हैं। यह ब्लॉग आपको बताएगा कि आयुर्वेद में भूख को सिर्फ ‘खाने की इच्छा’ नहीं माना जाता बल्कि आपके रूटीन का एक ज़रूरी हिस्सा कैसे है?
खाने की इच्छा पर आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद में खाना या भोजन को सिर्फ कोई चीज़ नहीं बलकी पाचन क्रिया या शरीर में अग्नि तत्व का सही से काम करने का संकेत है । आयुर्वेद यह भी बताता है की खाना सिर्फ खाने क लिए नहीं खाया जाता बल्कि आपके शरीर को स्वस्थ रखने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
आयुर्वेद में यह भी कहता है की भूख दो तरीके की होती है;
- शारीरिक भूख (physical या real): इसमें आपकी भूख धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और अक्सर हल्का खाना जैसे दाल या सब्ज़ी खाने का मन करता है, और खाना खाने के बाद हम satisfied महसूस करते हैं।
- मन की भूख (stress या emotional): इसमें हमें अचानक से या एकदम से खाना खाने की इच्छा होती है, जबकि हमारा पेट भरा होता है, और इसमें हमें अक्सर चटपटा या मीठा खाना खाने का मन करता है और जब हम खा लेते हैं, तब हम heavy महसूस करते हैं।
खाना-खाने की इच्छा और Modern Routine
आयुर्वेद में कहा गया है कि अगर आपका पाचन सही है तो आपका शरीर भी सही रहेगा, लेकिन आज के modern routine में हम अक्सर अपनी शारीरिक भूख (Physical Hunger) को समझे बिना ही खाना खाने लगते हैं और जब शरीर को असल में पोषण की जरूरत होती है, तो काम के चक्कर में भूख को टाल देते हैं।
Modern routine में हम अक्सर छोटी-छोटी गलती करदेते है जैसे:
- Clock Eating: इसका मतलब है की हम समय के अनुसार चलते है जैसे 2 बजे लंच जब की हमारे शरीर को खाना खाने की कोई ज़रूरत नहीं है।
- Stress Eating: इसका मतलब यह होता है कि जब आप शारीरिक रूप से भूखे नहीं होती बल्कि कोई तनाव या खुशी के कारण होती है, तब हम बिना सोचे-समझे खाना खलेते है।
- Fast-food craving: इसका मतलब है कि आपको बाहर का खाना खाने की अक्सर इच्छा होती रहती है, भले ही आपका पेट भरा हो।
यह ही छोटी-छोटी गलतियाँ आगे जाकर हमारी पाचन अग्नि को कमज़ोर करती हैं और निम्नलिखित बीमारियों को न्योता देती है:
2 . Nausea या vomiting
3 . लिवर या किडनी में दिक्कत
4 . अन्य कोई बीमारियाँ
खाने की इच्छा या भूख को कैसे कैसे समझें?
आयुर्वेद और Modern science के अनुसार हमें जो भूख लगती है, वह दो कारणों से प्रभावित होती है:
- पहला भूख के हार्मोन जिसे ghrelin और leptin कहा गया है, जो हमारी नींद, तनाव और भोजन खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं।
- दूसरी जिस है उसे हम संतुष्टि या satisfaction from food बोलते है, जो तब होता है जब हमारे mind में dopamine hormone रिलीज़ होता है।
हमारे खाना खाने की इच्छा कुछ Daily habits से ठीक हो सकती है जैसे:
- अपनी असली भूख को पहचानें, जिसके कुछ लक्षण हैं: डकार साफ आना, प्यास का समय से लगना और मन में उत्साह होना।
- अपनी प्यास और भूख में अंतर समझें क्योंकि कई बार हमारी भूख पानी पीने से ही शांत हो जाती है।
- अपनी नींद पूरी ले क्यूंकि जब हमारी नींद कम-से-कम 7-8 घंटे पूरी नहीं होती तो हमे क्रेविंग्स (cravings) होती है जिसके कारण हम ज़्यादा खाना खाते है।
- बिना distraction या phone के खाना खाएं क्योंकि Ayurveda में भूख को सीधा mind and hand coordination से जोड़ा गया है, यानी जब हम खाना focus से खाते हैं तो हम उतना ही खाना खाते हैं जितनी हमें असल भूख होती है।
Conclusion
भूख या खाने की इच्छा को आयुर्वेद और Modern Science में बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है, लेकिन आज की fast-moving लाइफस्टाइल में हमारा रूटीन फिक्स नहीं है, जिसके कारण हम अक्सर असली भूख (physical hunger) या मन की भूख (stress या emotional hunger) में अंतर नहीं कर पाते हैं।
Ayurveda हमें यही चीज़ सिखाता है कि जब हमें असली भूख लगे यानि पानी पिने से भी भूख खतम न हो तो ही खाना खाना चाहिए।
References
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4268644/
https://training.seer.cancer.gov/anatomy/body/functions.html