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क्या ज़्यादा पानी पीना हमेशा अच्छा होता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल जहां देखो, हर कोई यही सलाह देता है कि "दिन भर खूब पानी पिया करो।" जिम ट्रेनर से लेकर इंटरनेट के तक, सब जगह यही बताया जाता है कि जितना ज़्यादा पानी पियोगे, सेहत उतनी ही चमकेगी। इसी चक्कर में कई लोगों ने बड़ी-बड़ी 2-लीटर वाली सिपर बोतलें खरीद ली हैं। वो हर जगह इन्हें साथ रखते हैं और बिना प्यास लगे भी, सिर्फ अपना 'टारगेट' पूरा करने के लिए पानी पीते रहते हैं।

लेकिन क्या हमारा शरीर कोई पानी की टंकी है जिसे फुल रखना ज़रूरी है? क्या सच में ज़रूरत से ज़्यादा पानी पीना हमारी सेहत के लिए हमेशा अच्छा होता है? आइए आज इस बात को आयुर्वेद के नज़रिए से समझते हैं, जो पानी को सिर्फ 'लीटर' या 'गिलास' में नहीं मापता, बल्कि आपकी असली ज़रूरत को समझता है।

"दिन में 8-10 गिलास पानी" – ये ट्रेंड कितना सही?

पानी हमारे शरीर के लिए अमृत है, इसमें कोई शक नहीं। ये हमारे शरीर की सफाई करता है और ज़रूरी तत्वों को पूरे शरीर में पहुंचाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में "दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पियो" वाले फॉर्मूले को लोगों ने एक पक्का नियम मान लिया है।

अब आप ही सोचिए, एक इंसान जो दिन भर AC ऑफिस में कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर पर काम करता है और दूसरा जो चिलचिलाती धूप में फील्ड का काम या मजदूरी करता है, क्या इन दोनों के शरीर को बराबर पानी की ज़रूरत हो सकती है? बिल्कुल नहीं!

आयुर्वेद कहता है कि हर किसी के लिए पानी पीने का कोई एक फिक्स नियम नहीं हो सकता। यह 4 चीज़ों पर निर्भर करता है:

  • आपकी मेहनत (Physical Activity): पसीना ज़्यादा निकलता है, तो पानी ज़्यादा चाहिए।
  • मौसम (Weather): गर्मियों में शरीर अंदर से सूखता है, लेकिन सर्दियों और बारिश में नमी बनी रहती है, इसलिए सर्दियों में पानी की ज़रूरत अपने आप कम हो जाती है।
  • आपका खाना: अगर आप रसीले फल (जैसे तरबूज, संतरा) और छाछ ज़्यादा लेते हैं, तो आपको अलग से लीटर-लीटर पानी पीने की ज़रूरत नहीं है।
  • शरीर की प्रकृति (वात, पित्त, कफ): जिन्हें ज़्यादा गर्मी लगती है (पित्त प्रकृति), उन्हें पानी ज़्यादा चाहिए। लेकिन जिनका शरीर भारी है (कफ प्रकृति), उन्हें बहुत ज़्यादा पानी पीने से शरीर में सूजन (Water retention) आ सकती है।

हद से ज़्यादा पानी पीने के 3 बड़े नुकसान

अक्सर हम सिर्फ 'पानी की कमी' के नुकसान सुनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना ज़रूरत पानी पीना भी शरीर का पूरा सिस्टम बिगाड़ सकता है?

  • पाचन अग्नि (जठराग्नि) का बुझ जाना: हमारे पेट में खाना पचाने के लिए एक 'पाचन अग्नि' (आग) जलती है। मान लीजिए चूल्हे पर खाना पक रहा है और आप उस पर एक जग पानी डाल दें, तो क्या होगा? आग बुझ जाएगी! बस पेट में भी यही होता है। बिना प्यास के बहुत सारा पानी पीने से हाज़मा सुस्त पड़ जाता है और खाना पचने की बजाय पेट में पड़ा-पड़ा सड़ने लगता है, जिससे गैस और एसिडिटी बनती है।
  • किडनी पर एक्स्ट्रा लोड: हमारी किडनी शरीर का फिल्टर है। जब आप बिना प्यास के लीटर-लीटर पानी पीते हैं, तो किडनी को उसे बाहर निकालने के लिए ओवर-टाइम काम करना पड़ता है। इससे शरीर के ज़रूरी मिनरल्स (जैसे सोडियम) भी पेशाब के रास्ते बाहर बह जाते हैं, जिससे अचानक कमज़ोरी या चक्कर आ सकते हैं।
  • शरीर में भारीपन: बहुत ज़्यादा पानी पीने से पेट हमेशा भारी-भारी लगता है, बार-बार वाशरूम भागना पड़ता है और शरीर में एक अजीब सी सुस्ती छा जाती है। कई बार तो चेहरे और पैरों पर हल्की सूजन भी आ जाती है।

पानी पीने के नियम

अक्सर हम बस इस बात पर ध्यान देते हैं कि दिनभर में कितने गिलास पानी पीना है। लेकिन आयुर्वेद कहता है कि 'कितना' पीने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी यह जानना है कि पानी 'कैसे और कब' पीना चाहिए। आइए, पानी पीने के कुछ बहुत ही सीधे और आसान नियम समझते हैं:

  1. जब शरीर मांगे, तभी पानी पिएं: आजकल एक नया ट्रेंड चल पड़ा है मोबाइल का अलार्म बजता है और हम पानी पी लेते हैं। आयुर्वेद के हिसाब से यह तरीका बिल्कुल गलत है। हमारा शरीर बहुत समझदार है, प्यास के रूप में उसके पास अपना खुद का अलार्म है। जब आपका गला सूखने लगे, होंठ खुश्क हो जाएं या पेशाब का रंग पीला दिखने लगे, तो समझ जाइए कि शरीर पानी मांग रहा है। 
  2. खाने और पानी का सही तालमेल: कई लोगों की आदत होती है कि खाना खत्म करते ही गटागट पूरा गिलास पानी पी जाते हैं। सच मानिए, यह आपके हाजमे का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर आप खाने से बिल्कुल पहले पानी पी लेंगे, तो आपकी भूख मर जाएगी। और अगर खाने के तुरंत बाद पेट भरकर पानी पिएंगे, तो खाना पचने के बजाय पेट में ही सड़ेगा, जिससे गैस, एसिडिटी और मोटापा बढ़ेगा। 
  3. फ्रिज के चिल्ड पानी से तौबा करें: कड़कड़ाती धूप से आकर फ्रिज का बर्फ जैसा पानी पीने में सुकून तो बहुत मिलता है, लेकिन अंदर शरीर को यह बहुत बड़ा झटका देता है। एकदम ठंडा पानी हमारी आंतों और नसों को बुरी तरह सिकोड़ देता है, जिसकी वजह से कब्ज की शिकायत शुरू हो जाती है। पानी हमेशा मटके का या साधारण ही पिएं। 
  4. हमेशा बैठकर और तसल्ली से पिएं: जल्दबाजी में खड़े-खड़े पानी पीना जोड़ों के दर्द को बुलावा देना है। खड़े होकर पीने से पानी बहुत तेजी से नीचे जाता है और आगे चलकर घुटनों में 'वात' यानी दर्द पैदा करता है। पानी को हमेशा तसल्ली से एक जगह बैठकर, बिल्कुल चाय की तरह एक-एक घूंट करके पीना चाहिए। इसके पीछे एक बहुत सीधा सा विज्ञान है जब हम धीरे-धीरे पानी पीते हैं, तो हमारे मुंह में बनने वाली लार (Saliva) पानी के साथ अच्छे से घुल जाती है। यह लार पेट में जाकर एसिडिटी, गैस और जलन को जड़ से खत्म कर देती है।

सुबह-सुबह बासी मुंह पानी पीना (उषापान)

आयुर्वेद में सुबह उठते ही बिना कुल्ला किए पानी पीने (उषापान) को एक चमत्कारी आदत माना गया है।

  • क्या होता है इससे? यह रात भर के जमे हुए कचरे को शरीर से बाहर निकालता है और पेट को एकदम साफ कर देता है।
  • तांबे का बर्तन: अगर रात को तांबे के लोटे में रखा पानी सुबह पिया जाए, तो यह अमृत बन जाता है। यह लिवर को मज़बूत करता है और वजन घटाने में भी मदद करता है। लेकिन ध्यान रहे, यहाँ भी ज़बरदस्ती 4-5 गिलास न पिएं, 1 या 2 गिलास ही काफी हैं।

निष्कर्ष

पानी बेशक ज़िंदगी है, लेकिन "ज़्यादा" का मतलब हमेशा "बेहतर" नहीं होता। हर चीज़ की तरह पानी का भी एक बैलेंस होना ज़रूरी है। असल में, आयुर्वेद हमें कोई कड़े नियम नहीं देता, बल्कि यह सिखाता है कि हम भीड़ की देखा-देखी करने के बजाय अपने शरीर से दोस्ती करें और उसकी आवाज़ सुनें।

अपने शरीर की ज़रूरत को समझिए, मौसम के हिसाब से चलिए और प्यास लगने पर आराम से बैठकर, घूंट-घूंट करके पानी पिएं। तो अगली बार जब कोई आपको 'दिन में 4-5 लीटर पानी पीने' वाला ज्ञान दे, तो बस मुस्कुराइए और वही कीजिए जो आपका शरीर आपसे मांग रहा हो।

पानी पीने का सही तरीका कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस इन्हीं छोटी-छोटी देसी बातों को अपनी आदत बना लीजिए, आपकी आधी बीमारियां, गैस, कब्ज़ और पेट की परेशानियां तो बिना किसी दवा के वैसे ही छूमंतर हो जाएंगी!

References

Drinking-water

Water, Hydration and Health - PMC

Staying hydrated in the heat: what the public can learn from professional athletes

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, यदि सामान्य से अधिक प्यास लग रही हो और बार-बार पानी पीने की इच्छा हो रही हो, तो यह केवल मौसम या गर्मी की वजह से नहीं हो सकता। कई बार यह शरीर में शर्करा के असंतुलन, अत्यधिक पानी की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित होता है।

नहीं। शरीर को तरलता केवल पानी से ही नहीं मिलती। फल, सब्जियाँ, नारियल पानी, छाछ, सूप और अन्य प्राकृतिक पेय भी शरीर में जल की पूर्ति करते हैं। संतुलित आहार लेने वाले व्यक्ति को पानी की कुछ मात्रा भोजन से भी प्राप्त हो जाती है।

ज़रूरी नहीं। अधिक पानी पीने पर पेशाब की आवृत्ति बढ़ सकती है, लेकिन कुछ मामलों में यह मूत्र मार्ग से जुड़ी समस्याओं, मधुमेह या अन्य कारणों से भी हो सकता है। यदि बिना अधिक पानी पिए भी बार-बार पेशाब आ रहा हो तो इसकी जांच करवानी चाहिए।

हाँ। बढ़ती उम्र के साथ कई लोगों में प्यास का एहसास कम हो जाता है। ऐसे में वे ज़रूरत से कम पानी पी सकते हैं। वहीं कुछ लोग स्वास्थ्य के डर से ज़रूरत से ज़्यादा पानी पीने लगते हैं। इसलिए बुजुर्गों को अपनी शारीरिक ज़रूरत और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पानी का सेवन करना चाहिए।

यात्रा के समय मौसम, गतिविधि और वातावरण बदल जाता है। अधिक चलना-फिरना, गर्मी या लंबे समय तक बाहर रहना शरीर की जल आवश्यकता बढ़ा सकता है। इसलिए यात्रा के दौरान शरीर के संकेतों पर ध्यान देना और स्वच्छ पानी का सेवन करना महत्वपूर्ण होता है।

हाँ। भोजन में नमक की मात्रा अधिक होने पर शरीर को संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक तरल की आवश्यकता महसूस हो सकती है। यही कारण है कि अधिक नमकीन भोजन खाने के बाद अक्सर प्यास बढ़ जाती है। इसलिए भोजन में नमक का संतुलित उपयोग भी ज़रूरी माना जाता है।

सामान्य परिस्थितियों में प्यास शरीर का स्वाभाविक संकेत है। लेकिन बहुत अधिक गर्मी, लंबी यात्रा, भारी व्यायाम या कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में केवल प्यास का इंतजार करना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे समय पर नियमित अंतराल में भी पानी लेना लाभकारी हो सकता है।

सोने से ठीक पहले बहुत अधिक पानी पीने से रात में बार-बार उठकर शौचालय जाना पड़ सकता है, जिससे नींद प्रभावित हो सकती है। बेहतर यह माना जाता है कि दिनभर पर्याप्त तरल लिया जाए और रात के समय संतुलित मात्रा में पानी पिया जाए।

 हाँ। शरीर में पर्याप्त जल संतुलन रहने पर त्वचा की नमी और लचक बेहतर बनी रह सकती है। हालांकि केवल अधिक पानी पी लेना ही चमकदार त्वचा की गारंटी नहीं है। इसके लिए संतुलित आहार, अच्छी नींद और स्वस्थ जीवनशैली भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

नहीं। गर्मियों में पसीना अधिक निकलने के कारण शरीर को अधिक तरल की आवश्यकता हो सकती है, जबकि सर्दियों में यह आवश्यकता अपेक्षाकृत कम हो सकती है। इसलिए पानी की मात्रा तय करते समय मौसम, गतिविधि और शरीर की ज़रूरत को ध्यान में रखना चाहिए।

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