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रात को थके होने के बावजूद नींद न आना modern lifestyle का कौन-सा pattern है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

रात को थकान महसूस होने के बावजूद नींद न आना आज की आधुनिक लाइफस्टाइल का एक आम पैटर्न बनता जा रहा है। दिन भर काम, पढ़ाई या दूसरी गतिविधियों के बाद शरीर आराम चाहता है, लेकिन सोने के समय दिमाग सक्रिय रहता है। देर रात तक मोबाईल या लैपटॉप चलाना, अनियमित दिनचर्या लगातार थकान देर रात से खाना और कैफीन का ज़्यादा इस्तेमाल नींद को प्रभावित कर सकता है कई बार व्यक्ति शारीरिक रूप से थका होता है लेकिन मानसिक रूप से आराम की स्थिति में नहीं पहुँच पता है। यही वजह है कि बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद आने में समय लगता है या नींद बार-बार टूट सकती है। 

थकान के बावजूद नींद क्यों नहीं आती है? 

थकान के बावजूद नींद न आने की वजह हमेशा शरीर की थकावट नहीं होती। कई बार शरीर आराम चाहता है लेकिन दिमाग लगातार सक्रिय रहता है दिनभर का तनाव चिंता, काम का दबाव और सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल मस्तिष्क को जागने का संकेत दे सकता है। देर रात तक जागना रोज़ अलग समय पर सोना शाम के बाद चाय कॉफी लेना और रात में भरी भोजन करना भी नींद को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोगों में दिनभर शारीरिक गतिविधि कम होने से भी रात में पर्याप्त नींद का दबाव नहीं बनता। इसलिए अच्छी नींद के लिए केवल थकान ज़रूरी नहीं बल्कि सही लाइफस्टइल और शांत मानसिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है। 

एक्सपर्ट्स की क्या राय है?

एक्सपर्ट्स  के अनुसार थकान के बावजूद नींद आना शरीर से ज़्यादा दिमाग के सक्रीय रहने से जुड़ा हो सकता है लगातार तनाव देर रत तक काम करना मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल और सोने जागने का अनियमित समय नींद की प्राकर्तिक लय को प्रभावित कर सकता है 

एक्सपर्ट्स सोने से पहले स्क्रीन कम देखने और शांत वातावरण बनाने की सलाह देते हैं। अगर सही समय पे बिस्तर पे रहन के बावजूद  लम्बे वक़्त तक नींद न आये या थकान महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। 

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है ?

आयुर्वेद में अच्छी नींद को शरीर और मन के संतुलन से जोड़ा गया है। रात को थकान होने के बावजूद नींद न आना गलत लाइफस्टइल, देर रात तक जागने, मानसिक तनाव  से जुड़ा हो सकता है। आयुर्वेदिक दृश्टिकोण से रात में शरीर को धीरे धीरे विश्राम की अवस्था में जाता चाहिए लेकिन देर रात तक काम करना मोबाइल देखना और चिंता करना इस प्राकर्तिक प्रक्रिया को रोक सकता है। सही समय पर भोजन और सोना, शाम के बाद ज़्यादा तनाव वाली चीज़ों से बचना, हलकी गतिविधि और सोने से पहले शांत वातावरण बनाना नींद की स्वस्थ दिनचर्या को बढ़ावा दे सकता है। 

देर रात काम करने का असर 

देर रात तक फोन चलाना हमारी नींद और हमारे मानसिक तनाव पर असर डालती है:

  • शरीर की प्राकृतिक नींद पर प्रभाव  पड़ सकता है। 
  • थकान के बावजूद दिमाग देर रात तक सक्रिय रह सकता है। 
  • सुबह उठने में परेशानी और दिन भर सुस्ती महसूस हो सकती हैं। 
  • ध्यान लगाने और काम में फोकस करने पर कमी आ सकती है  
  • लगातार देर रात तक काम करने से नींद का समय कम हो सकता है। 
  • देर से खाना खाने की आदत बढ़ सकती है। 
  • अगले दिन चिड़चिड़ाहट और मानसिक थकान महसूस हो सकती है। 
  • नियमित रूप से ऐसा होने से दिन का पैटर्न बिगड़ सकता है। 

इसलिए काम और सोने के बीच सही अंतर रखना बेहतर है। 

आधुनिक जीवनशैली में बिगड़ती नींद

  • देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत नींद को बिगाड़ सकती है 
  • काम के ज़्यादा घंटे आराम का समय कम कर दते हैं 
  • लगातार तनाव और चिंता दिमाग को रात में भी  
  • सक्रिय रख सकते हैं। 
  • शाम या रात में चाय-कॉफी लेने से नींद आने में देरी हो सकती है। 
  • देर रात ज़्यादा भोजन से आराम पर असर पड़ सकता है। 
  • दिन भर कम शारीरिक गतिविधि से रात में नींद का दबाव कम हो सकता है। 
  • सोने से पहले काम या पढ़ाई करने से मन शांत होने में समय लग सकता है। 

इसलिए नियमित दिनचर्या और सही आराम अच्छी नींद के लिए ज़रूरी हैं। 

दिनभर की थकान: रात में नींद न आए तो क्या करें?

दिनभर की थकान हो और फिर भी नींद न आये तो कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना चाहिये 

  • रोज़ सोने और जागने का समय एक जैसा ही रखें। 
  • सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।  
  • शाम के बाद चाय और कैफीन वाली चीज़ें कम करें। 
  • रात में बहुत ज़्यादा भोजन करने से बचें। 
  • कमरे में तेज़ रौशनी हो और आवश्यक से ज़्यादा शोर न हो। 
  • दिनभर खूब पानी पिएँ लेकिन सोने से ठीक पहले बहुत ज़्यादा पानी न पिएँ। 
  • बिस्तर पर जाने से पहले चिंता और तनाव से जुड़ीं चीज़ों का ख्याल न लाएँ। 

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

कई हफ़्तों तक नींद का समय बिगड़ रहा है तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। 

  • रात में अगर बार-बार जागना। 
  • तेज़ खर्राटे या नींद में साँस रुकने जैसी समस्या हो। 
  • सुबह उठने पर बार-बार दर्द या सुस्ती हो। 
  • नींद की परेशानी के साथ लगातार बेचैनी है। 
  • लंबे समय से समस्या रहने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। 

निष्कर्ष:

ज़्यादा थकान के बावजूद नींद न आना एक समस्या बन चुकी है। हमारा शरीर भले ही थक चुका हो लेकिन मानसिक तनाव असंतुलित दिनचर्या और स्क्रीन की लत हमारे दिमाग को शांत नहीं होने देते। इस समस्या से बचने के लिए हमें अपनी लाइफस्टाइल को सही करना होगा। सोने का एक निश्चित समय तय करना स्क्रीन टाइम कम करना और तनावमुक्त वातावरण बनाना बेहद ज़रूरी है। स्वस्थ शरीर और शांत मन के लिए अच्छी नींद हमारे लिए सबसे ज़रूरी है।

References:

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC1978319/

https://sleep.hms.harvard.edu/education-training/public-education/sleep-and-health-education-program/sleep-health-education-20

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1087079225000747

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/33683929/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

क्योंकि शरीर थका होता है लेकिन मानसिक तनाव चिंता या स्क्रीन के इस्तेमाल के कारण आपका दिमाग लगातार सक्रिय रहता है।

मोबाइल की रोशनी दिमाग को जगाए रखती है, जिससे नींद लाने वाले हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है और नींद आने में देरी होती है।

रात का भोजन हमेशा हल्का होना चाहिए और उसे सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खा लेना चाहिए ताकि पाचन सही रहे।

दिनभर शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर पर पर्याप्त स्लीप प्रेशर नहीं बन पाता, जिससे रात में नींद आने में दिक्कत होती है।

चाय-कॉफी में मौजूद कैफीन आपके नर्वस सिस्टम को उत्तेजित कर देता है, जिससे नींद का प्राकृतिक चक्र टूट जाता है

आयुर्वेद के अनुसार शरीर और मन का संतुलन सही समय पर भोजन और सोने से पहले एक शांत व तनावमुक्त वातावरण सबसे ज़रूरी है।

इससे आपकी नींद पूरी नहीं होती, जिससे अगले दिन चिड़चिड़ापन, फोकस में कमी और दिनभर सुस्ती महसूस होती है।

अगर यह समस्या कई हफ्तों तक लगातार बनी रहे, सोते समय सांस रुके, या दिनभर बहुत ज़्यादा बेचैनी हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।

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