ब्राउन ब्रेड को व्हाइट ब्रेड की तुलना में ज़्यादा अच्छा मानते हैं लेकिन यह इतना सही नहीं है, केवल ब्रेड का भूरा रंग देखकर उसकी शुद्धता नहीं तय की जाती बाजार में मिलने वाली में कई ब्राउन ब्रेड में रंग या और चीज़ों का इस्तेमाल हो सकता है जबकि उनमे साबूत अनाज की मात्रा कम हो सकती है दूसरी ओर AC ब्रेड जिनमे साबूत अनाज और फाइबर हो, वे बेहतर हो सकते हैं इसलिए ब्रेड लेते समय केवल रंग नहीं बल्कि साडी सूची साबूत आज और फाइबर की मात्रा को देखना ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
ब्राउन ब्रेड असल में क्या है?
सिर्फ ब्राउन ब्रेड नाम से ही यह तय नहीं होता की वह पूरी तरह पौष्टिक या साबुत अनाज से बनी है सही ब्राउन ब्रेड वह हो सकती है जिसमे गेहूं का आंटा साबूत गेहूं या नाज इस्तेमाल किये गए हों। कई पैक्ड ब्रेड का भूरा रंग प्राकर्तिक अनाज के कारण होता है। इसलिए इसे केवल रंग देखकर इसे व्हाइट ब्रेड से बेहतर मानना सही नहीं है। ब्रेड खरीदते समय पैकेट पर सूची है या नहीं साथ ही फाइबर की मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए।
ब्राउन ब्रेड और व्हाइट ब्रेड में क्या फर्क है
सफेद ब्रेड की तुलना में 100% होल व्हीट या आटा ब्राउन ब्रेड अधिक सही होती है। सफेद ब्रेड मैदे से बनती है जिसमें फाइबर कम होता है, जबकि असली ब्राउन ब्रेड में फाइबर विटामिंस और मिनरल्स ज़्यादा होते हैं। हालांकि कई बाजार में मिलने वाली ब्राउन ब्रेड केवल मैदे में रंग मिलाकर बेची जाती हैं इसलिए हमेशा पैकेट पर सामग्री ज़रूर जाँचें।
सफेद ब्रेड:
- यह रिफाइंड मैदे से बनती है।
- इसमें फाइबर बहुत कम होता है।
- यह पचने में आसान होती है लेकिन ब्लड शुगर तेज़ी से बढ़ाती है।
ब्राउन ब्रेड:
- असली ब्राउन ब्रेड पूरे गेहूं से बनती है।
- इसमें फाइबर अधिक होता है जो पाचन और पेट के लिए अच्छा है।
- इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो शुगर के मरीज़ों के लिए बेहतर है।
ब्राउन ब्रेड खाने के क्या फायदे हैं ?
ब्राउन ब्रेड को इसके बहुत सरे फायदों की वजह से इसे सेहत के लिए अच्छा माना जाता है
- पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है: विशेषज्ञ का कहना है कि इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है। यह मल को गाढ़ा बनाता है, इसलिए कब्ज़ को रोकने में मदद कर सकता है ।
- वज़न नियंत्रण: इसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम होती है।
- ब्लड शुगर कंट्रोल: इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जिससे यह शुगर के मरीज़ों के लिए सही माना जाता है।
- दिल की सेहत: यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है।
ब्रेड में फाइबर का होना क्यों ज़रूरी है?
ब्रेड में फाइबर होना इसलिए ज़रूरी है क्योकि यह पाचन को सही रखने और पेट को ज़्यादा देर तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है। जब ब्रेड में सही तरीके से फाइबर होता है तो खाने के बाद भूख जल्दी नहीं लगती और बार बार कुछ खाने की इच्छा काम हो जाती है फाइबर आँतों को सामान्य रखने में मदद करता है जिससे कब्ज़ जैसी परेशानी से बचने में सहायता मिलती है साबूत अनाज से बानी ब्रेड आमतौर पर फाइबर का बेहतर तरीका है इसलिए ब्रेड खरीदते समय केवल उसका रंग देखने के बजाय पैकेट पर दी गई फाइबर और सामाग्री की जानकारी देखना ज़्यादा समझदारी है।
डाइबिटीज़ में ब्रेड खाते समय क्या ध्यान रखना चाहिए ?
डायबिटीज़ में ब्रेड खाते समय सफेद ब्रेड की जगह हमेशा होल व्हीट या मल्टीग्रेन ब्रेड चुनें क्योंकि इनमें फाइबर अधिक होता है । ब्रेड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होना ज़रूरी है। एक बार में केवल एक या दो स्लाइस ही खाएं। ब्रेड के साथ मक्खन या जैम लगाने के बजाय पनीर, अंडा, एवोकैडो या पीनट बटर जैसी प्रोटीन और हेल्दी फैट वाली चीजें मिलाएं। इससे शरीर में शुगर का स्तर अचानक तेज़ी से नहीं बढ़ता है और पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है। खाने से पहले ब्रेड के पैकेट पर लिखे पोषण तत्वों की जांच ज़रूर कर लें।
ब्राउन ब्रेड खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
ब्राउन ब्रेड खरीदते समय सबसे पहले सामग्री सूची देखें। घटक 100% होल व्हीट' या पूरा गेहूं होना चाहिए। मैदा या रिफाइंड आटा वाली ब्रेड न लें। इसके अलावा, रंग के बजाय असली फाइबर की जांच करें, क्योंकि कैमेल कलर से ब्रेड को भूरा किया जाता है।
ज़रूरी बातें जिन्हें ध्यान रखना ज़रूरी है
- सामग्री: पहले नंबर पर साबुत गेहूं लिखा होना चाहिए।
- फाइबर: प्रति स्लाइस अधिक फाइबर वाली ब्रेड चुनें।
- शुगर और सोडियम: कम चीनी और कम नमक वाली ब्रेड लें।
- तारीख: हमेशा ताज़ा बनी हुई और निर्माण तिथि देखकर खरीदें।
रोज़ ब्रेड खाना कितना सही है?
रोज़ ब्रेड खाना सेहत के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जाता है। ज़्यादातर ब्रेड रिफाइंड मैदा से बनती है जो पाचन को बिगाड़ सकती है और वज़न बढ़ा सकती है। इससे शरीर में शुगर भी तेजी से बढ़ता है जो डायबिटीज़ का खतरा बढ़ाता है। सफेद ब्रेड में फाइबर और ज़रूरी पोषक तत्व नहीं होते हैं। अगर आपको ब्रेड खानी है तो मैदे की जगह सौ प्रतिशत होल व्हीट या ब्राउन ब्रेड चुनें। इसे कभी-कभार नाश्ते में खाना ठीक है, लेकिन रोज़ाना और हर वक्त खाना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। संतुलित आहार के लिए ब्रेड की जगह ताज़े फल दलिया या पोहा जैसी चीज़ें ज़्यादा फायदेमंद होती हैं।
निष्कर्ष
केवल ब्रेड का भूरा रंग देखकर उसे पौष्टिक मान लेना एक भूल है। ब्रेड की असली पहचान उसमें मौजूद साबुत अनाज और फाइबर की मात्रा से होती है। बाज़ार में मिलने वाली कई ब्राउन ब्रेड में सिर्फ भूरा रंग मिला होता है, इसलिए खरीदते समय हमेशा पैकेट पर सामग्री की जांच करें। डाइबिटीज़ और वज़न नियंत्रण के लिए असली ब्राउन ब्रेड सफेद ब्रेड से बेहतर है। हालांकि, रोज़ाना ब्रेड खाने से बचें और स्वस्थ रहने के लिए प्राकृतिक आहार को ही प्राथमिकता दें।
References:
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12930236/
https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S0271531700001263
https://www.bhf.org.uk/informationsupport/heart-matters-magazine/nutrition/wholegrain-foods
https://www.healthline.com/nutrition/9-benefits-of-whole-grains















