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हर बुखार Infection नहीं होता, बच्चों में और क्या हो सकते हैं कारण?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर जब बच्चे का शरीर गर्म होता है, तो माता-पिता बहुत ज़्यादा घबरा जाते हैं। उन्हें लगता है कि बच्चे को कोई भारी इन्फेक्शन हो गया है और वे तुरंत तेज़ दवाइयाँ देना शुरू कर देते हैं। लेकिन हर बुखार इन्फेक्शन नहीं होता, बच्चों में और क्या हो सकते हैं कारण? यह जानना बहुत ज़रूरी है। बुखार असल में शरीर का एक तरीका है, जिससे वह बाहरी बदलावों का सामना करता है। कई बार एकदम सामान्य कारणों से भी बच्चे का शरीर बहुत ज़्यादा गर्म हो जाता है। ऐसे में बिना पूरी बात जाने बच्चे को भारी दवाइयाँ देना उसकी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है।

बच्चों को बहुत ज़्यादा और भारी कपड़े पहनाने की गलती

छोटे बच्चों के शरीर का तापमान बहुत जल्दी बदल जाता है। माता-पिता अक्सर बच्चों को ठंड से बचाने के चक्कर में बहुत ज़्यादा और भारी कपड़े पहना देते हैं। छोटे बच्चों के शरीर में पसीना निकालने वाला सिस्टम पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। जब उन्हें मोटे कंबलों में लपेटा जाता है या ज़्यादा कपड़े पहनाए जाते हैं, तो उनके शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे उनका शरीर बहुत ज़्यादा गर्म हो जाता है और बुखार जैसा लगने लगता है। यह कोई बीमारी या इन्फेक्शन बिल्कुल नहीं है। अगर आप बच्चे के कपड़े कम कर दें, तो उसका शरीर जल्दी एकदम सामान्य हो जाएगा।

शरीर में पानी की भारी कमी यानी डिहाइड्रेशन का असर

गर्मियों के मौसम में बच्चों के शरीर में पानी की भारी कमी होना बुखार का एक बहुत बड़ा कारण बन सकता है। जब बच्चे बाहर खेलते हैं और सही मात्रा में पानी नहीं पीते हैं, तो उन्हें डिहाइड्रेशन हो जाता है। शरीर में पानी की कमी होने से पसीना आना एकदम बंद हो जाता है, जिससे शरीर अपनी गर्मी को बाहर नहीं निकाल पाता। इसके कारण बच्चे का तापमान तेज़ी से बढ़ने लगता है और उसे बुखार आ जाता है। यह कोई इन्फेक्शन नहीं है। बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, ताज़ा जूस या नारियल पानी ज़रूर पिलाएँ ताकि उनके शरीर में नमी हमेशा बनी रहे।

बच्चों के नए दांत निकलते समय मसूड़ों में होने वाली सूजन

जब छोटे बच्चों के नए दांत निकलने शुरू होते हैं, तो यह समय उनके लिए बहुत ही भारी दर्द और बेचैनी से भरा होता है। दांत निकलते समय मसूड़ों में भारी सूजन आ जाती है और उनमें लगातार दर्द बना रहता है। इस सूजन की वजह से भी कई बच्चों का शरीर एकदम गर्म हो जाता है और उन्हें हल्का बुखार आ जाता है। इस समय बच्चे बहुत ज़्यादा चिड़चिड़े हो जाते हैं और खाना-पीना एकदम छोड़ देते हैं। यह कोई बीमारी नहीं बल्कि एक प्राकृतिक बदलाव है। ऐसे समय में डॉक्टर की सलाह से मसूड़ों पर हल्की मालिश करें ताकि उन्हें भारी दर्द से तुरंत आराम मिल सके।

किसी नई वैक्सीन या टीके के लगने के बाद शरीर की प्रतिक्रिया

बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर कई तरह के टीके लगाए जाते हैं। जब भी बच्चे को कोई नई वैक्सीन लगती है, तो उसका शरीर उस दवा के खिलाफ अपनी ताकत बनाता है। इस दौरान शरीर का तापमान बढ़ जाना एक बहुत ही आम बात है। वैक्सीन लगने के बाद आने वाला बुखार इस बात का साफ संकेत है कि बच्चे का शरीर एकदम सही काम कर रहा है। यह बुखार आमतौर पर एक या दो दिन में अपने आप खत्म हो जाता है। इसके लिए दवा देने की ज़रूरत नहीं है। बस बच्चे को थोड़ा आराम करने दें और पानी पिलाएँ।

ज़्यादा गर्मी में बाहर खेलने से शरीर का गर्म पड़ना

अगर बच्चा बहुत ज़्यादा गर्मी में बाहर खेल रहा है या किसी बंद कमरे में काफी लंबे समय तक है, तो उसे हीट एग्जॉशन हो सकता है। बाहर की भारी गर्मी के कारण शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता और तापमान अचानक से तेज़ी से बढ़ जाता है। कई बार बच्चे चिलचिलाती धूप में घंटों खेलते रहते हैं, जिससे उनका शरीर एकदम भट्टी की तरह गर्म हो जाता है। यह स्थिति खतरनाक हो सकती है, लेकिन यह कोई इन्फेक्शन नहीं है। अगर ऐसा हो, तो तुरंत बच्चे को ठंडी छाँव में ले जाएँ, उसके कपड़े ढीले करें और ताज़ा पानी पिलाएँ ताकि शरीर की गर्मी शांत हो सके।

भारी मानसिक तनाव और किसी बात के डर से शरीर का गर्म पड़ना

आप शायद यह बात नहीं जानते होंगे, लेकिन भारी मानसिक तनाव और बहुत ज़्यादा डर की वजह से भी बच्चों को बुखार आ सकता है। इसे साइकोजेनिक फीवर कहा जाता है। जब कोई बच्चा स्कूल जाने से डरता है, पढ़ाई का भारी दबाव लेता है या किसी बात से परेशान होता है, तो उसके शरीर का तापमान अचानक से बढ़ जाता है। यह तनाव शरीर के अंदर ऐसे बदलाव करता है कि उन्हें तेज़ बुखार हो जाता है। ऐसे में दवाइयों से ज़्यादा बच्चों को आपके प्यार की ज़रूरत होती है। उनसे बात करें, उनकी परेशानी समझें और उनके दिमाग से भारी डर को पूरी तरह दूर करें।

आयुर्वेद के इन आसान प्राकृतिक उपायों से बच्चों का बुखार करें दूर

आयुर्वेद के अनुसार बच्चों का शरीर बहुत नाज़ुक होता है, इसलिए उन्हें भारी दवाइयाँ देने से हमेशा बचना चाहिए। जब बच्चे का शरीर गर्म हो जाए, तो उसके माथे पर ताज़े पानी की पट्टियाँ रखें। तुलसी के पत्तों का रस और थोड़ा सा शहद मिलाकर चटाने से शरीर की गर्मी एकदम शांत हो जाती है। इसके अलावा बच्चे को मुनक्का का ताज़ा पानी पिलाने से पेट साफ रहता है और बुखार में भारी आराम मिलता है।

निष्कर्ष

बच्चों में बुखार आना हमेशा किसी बड़े इन्फेक्शन का संकेत नहीं होता। मौसम का बदलाव, पानी की भारी कमी, नए दांत आना या वैक्सीन लगना भी इसके आम कारण हो सकते हैं। एक माता-पिता के रूप में आपको हमेशा इन छोटे बदलावों पर खास ध्यान देना चाहिए। बिना पूरी बात जाने बच्चे को भारी दवाइयाँ बिल्कुल न दें। आयुर्वेद के आसान और प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप अपने बच्चे को घर पर ही काफी आराम दे सकते हैं। अगर परेशानी ज़्यादा लगे, तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से मिलें और हमेशा सुरक्षित रहें।

References

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC7122655/

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1876034111000256

https://www.healthline.com/health/viral-fever

https://www.healthline.com/health/fever-symptoms

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी नहीं, ज़्यादातर बुखार बिना किसी इन्फेक्शन के होते हैं या वायरल होते हैं, जिनमें एंटीबायोटिक दवाइयाँ बिल्कुल भी फायदा नहीं करती हैं।

हाँ, छोटे बच्चों के शरीर की गर्मी बाहर न निकल पाने के कारण उनका शरीर एकदम गर्म हो जाता है, जिसे हम गलती से बुखार समझ लेते हैं।

इस स्थिति में बच्चे को सादा पानी, ताज़ा फलों का रस या नारियल पानी पिलाना चाहिए ताकि शरीर में नमी दोबारा लौट सके।

बिल्कुल नहीं, मसूड़ों की सूजन की वजह से शरीर हल्का गर्म होता है। यह एक प्राकृतिक बदलाव है जो कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है।

वैक्सीन के बाद बुखार आने का सीधा मतलब है कि बच्चे का शरीर उस दवा के प्रति सही प्रतिक्रिया दे रहा है और अंदर से खुद को मज़बूत बना रहा है।

जी हाँ, स्कूल या किसी और बात के भारी डर की वजह से बच्चे का तापमान अचानक बढ़ सकता है, जिसे मानसिक बुखार भी कहा जाता है।

चिलचिलाती धूप में ज़्यादा देर रहने से शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, जिससे हीट एग्जॉशन होता है और शरीर भट्टी की तरह तपने लगता है।

हमेशा एक अच्छे थर्मामीटर का ही इस्तेमाल करें। हाथ लगाकर अंदाज़ा लगाना कई बार गलत हो सकता है क्योंकि हाथ ठंडे होने पर शरीर ज़्यादा गर्म लगता है।

हमेशा एक अच्छे थर्मामीटर का ही इस्तेमाल करें। हाथ लगाकर अंदाज़ा लगाना कई बार गलत हो सकता है क्योंकि हाथ ठंडे होने पर शरीर ज़्यादा गर्म लगता है।

अगर बुखार बहुत तेज़ हो, बच्चा एकदम सुस्त पड़ जाए या बुखार तीन दिन से ज़्यादा लगातार बना रहे, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार माथे पर ताज़े पानी की पट्टियाँ रखना और तुलसी व शहद का रस चटाना शरीर की गर्मी को शांत करने का सबसे अच्छा और सुरक्षित तरीका है।

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