Diseases Search
Close Button
 
 

Sugar, BP और fatty liver साथ-साथ क्यों दिखते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप डॉक्टर के पास सिर्फ रूटीन चेकअप के लिए गए हों, और टेस्ट रिपोर्ट में शुगर, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर तीनों एक साथ निकल आएँ? आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में यह बहुत आम बात हो गई है। लोग यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि आखिर ये तीनों अलग-अलग बीमारियाँ एक साथ उनके शरीर में कैसे घुस आईं। जब आप सोचते हैं कि आप तो मीठा भी कम खाते हैं, फिर शुगर कैसे हो गई? या शराब बिल्कुल नहीं पीते, फिर लिवर फैटी कैसे हो गया? यह एक ऐसा खतरनाक चक्रव्यूह है जिसमें एक बार फँसने पर निकलना बहुत ज़्यादा मुश्किल लगता है। इस ब्लॉग में हम इसी उलझन को सुलझाएँगे और जानेंगे कि शुगर, बीपी और फैटी लिवर का आपस में क्या गहरा कनेक्शन है।

एक्सपर्ट की क्या राय है

मेडिकल फील्ड के बड़े एक्सपर्ट्स और पेट रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से मानना है कि शुगर, बीपी और फैटी लिवर कोई अलग-अलग बीमारियाँ बिल्कुल नहीं हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ये तीनों असल में एक ही जड़ से पैदा होती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में 'मेटाबॉलिक सिंड्रोम' कहा जाता है। जब आपकी रोज़ाना की जीवनशैली बिगड़ती है, तो शरीर का पूरा सिस्टम एक साथ खराब होने लगता है। डॉक्टरों की राय में, जब मरीज़ इन तीनों बीमारियों की रिपोर्ट एक साथ लेकर आते हैं, तो वे समझाते हैं कि यह शरीर के अंदर चल रहे इंसुलिन रेजिस्टेंस का सीधा नतीजा है। इसे सिर्फ दवा से नहीं, बल्कि सही डाइट से ही ठीक किया जा सकता है।

शुगर, बीपी और फैटी लिवर का आपस में क्या कनेक्शन है?

यह बहुत ज़रूरी सवाल है कि आखिर ये तीनों खतरनाक बीमारियाँ एक साथ हमला क्यों करती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण आपके शरीर का 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' है। जब आपका शरीर खाने को सही तरीके से पचा नहीं पाता, तो खून में शुगर का स्तर तेज़ी से बढ़ने लगता है। इस बढ़ी हुई शुगर को तुरंत कम करने के लिए शरीर बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाता है, जो फालतू शुगर को चर्बी में बदलकर सीधे लिवर पर चिपका देता है, जिससे फैटी लिवर होता है। वहीं, जब खून में शुगर और चर्बी दोनों बढ़ जाते हैं, तो खून गाढ़ा हो जाता है। गाढ़े खून को पूरे शरीर में पंप करने के लिए दिल को ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है, जिससे बीपी हाई हो जाता है।

परसेंटेज के आधार पर इन बीमारियों का आँकड़ा

यह जानना बहुत दिलचस्प है कि भारत में कितने प्रतिशत लोग इस तिहरी मार का लगातार शिकार हो रहे हैं। हाल ही के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि शुगर वाले लगभग 80% मरीज़ों में फैटी लिवर और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या एक साथ पक्के तौर पर देखी जाती है। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत (Percentage) में गहराई से बाँटें, तो लगभग 45% मामलों में इसका सीधा कारण शरीर का बढ़ा हुआ भारी वज़न और इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है। तीस प्रतिशत मामलों में लगातार लिया जा रहा मानसिक तनाव और नींद की कमी ज़िम्मेदार होती है। वहीं बचे हुए 25% मामलों में कसरत न करना और बाहर का खाना मुख्य वजह है।

शुगर और बीपी नॉर्मल रहने पर भी फैटी लिवर क्यों होता है?

कई बार लोग यह शिकायत करते हैं कि उनकी शुगर और बीपी की रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल है, फिर भी अल्ट्रासाउंड कराने पर फैटी लिवर क्यों आ गया। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में इंसुलिन का स्तर अंदर ही अंदर बहुत बुरी तरह बिगड़ा हुआ होता है। जब आप बाहर से तेज़ दवाइयाँ खाते हैं, तो मशीन में खून की शुगर और बीपी तो बिल्कुल नॉर्मल दिखते हैं, लेकिन जो फालतू कैलोरी आप खा रहे हैं, वह कहीं न कहीं तो शरीर में जमा होगी। वह सीधा आपके लिवर पर जाकर चर्बी के रूप में बैठ जाती है। इसलिए, सिर्फ खून की रिपोर्ट का नॉर्मल होना ही काफी नहीं है, बल्कि अंदरूनी पाचन तंत्र का सही होना ज़्यादा ज़रूरी है।

किन गंभीर लक्षणों को हमें बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए?

इन बीमारियों की शुरुआत में शरीर में कोई खास दर्द महसूस नहीं होता, लेकिन जब आपका शरीर कुछ गंभीर इशारे दे, तो हमें तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। ये अंदरूनी खराबी के बड़े संकेत हो सकते हैं:

  • पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन: अगर आपको दाएँ तरफ पसलियों के ठीक नीचे लगातार एक भारीपन या मीठा दर्द महसूस हो।
  • हमेशा बहुत ज़्यादा थकान रहना: अगर आप आठ घंटे सोकर उठें, फिर भी पूरे दिन शरीर में भारी कमज़ोरी और सुस्ती छाई रहे।
  • पेशाब में झाग आना: अगर टॉयलेट करते समय बहुत ज़्यादा झाग बने, जो किडनी पर पड़ रहे दबाव का सीधा इशारा है।
  • पैरों में सूजन आना: शाम होते-होते आपके पैरों के टखनों में अजीब सी सूजन और भारीपन महसूस होने लगे।

क्या रोज़ खाई जाने वाली दवाइयाँ इस भयंकर बीमारी का कारण हैं?

जी हाँ, कई बार ऐसा होता है कि हम एक बीमारी को दबाने के लिए जो तेज़ दवाइयाँ लेते हैं, वे शरीर में दूसरी बीमारी को जन्म दे देती हैं। बहुत सी पुरानी ब्लड प्रेशर की गोलियाँ (जैसे कुछ बीटा-ब्लॉकर्स) आपके शरीर का मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा कर देती हैं, जिससे वज़न और शुगर दोनों तेज़ी से बढ़ने लगते हैं। वहीं, कुछ तेज़ दर्द निवारक दवाइयाँ लिवर पर सीधा और खतरनाक वार करती हैं। जब आपका लिवर पहले से ही कमज़ोर हो और आप खाली पेट तेज़ दवाइयाँ खाते हैं, तो लिवर सूजने लगता है। इसलिए, दवाइयों का खराब साइड इफेक्ट आपके लिवर और शुगर के लिए कई बार बहुत खतरनाक और जानलेवा रूप ले सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ इन तीन महत्वपूर्ण दोषों पर निर्भर करता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, ये तीनों बीमारियाँ 'कफ' और 'पित्त' दोष के एक साथ बिगड़ने का भयंकर नतीजा हैं। जब आप लगातार भारी और तला हुआ खाना खाते हैं, तो शरीर के अंदर 'आम' यानी विषैले तत्व बनने लगते हैं। ये विषैले तत्व लिवर में फँसकर उसे ब्लॉक कर देते हैं और खून में गर्मी बढ़ाकर बीपी तेज़ कर देते हैं। आयुर्वेद स्पष्ट रूप से कहता है कि केवल गोलियों से लक्षणों को दबाने के बजाय, शरीर से इन ज़हरीले तत्वों को हमेशा के लिए बाहर निकालना बहुत ज़रूरी है।

तीनों बीमारियों से एक साथ राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए?

जब शुगर, हाई बीपी और फैटी लिवर एक साथ आपके शरीर को घेर लें, तो सिर्फ दवाइयों पर निर्भर रहने की बजाय घर पर कुछ बहुत असरदार और प्राकृतिक तरीके आजमाने चाहिए। ये तरीके शरीर को अंदर से साफ करते हैं:

  • दालचीनी और मेथी का पानी पिएँ: रोज़ सुबह खाली पेट इनका पानी पीने से इंसुलिन सही होता है और शुगर तुरंत कम होती है।
  • खाने में फाइबर बढ़ाएँ: अपनी डाइट में सलाद और साबुत अनाज ज़्यादा लें, जो लिवर की फालतू चर्बी को काटकर पूरी तरह बाहर निकालते हैं।
  • सेंधा नमक खाएँ: सफेद नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करें, जिससे आपका ब्लड प्रेशर बहुत जल्दी काबू में आ जाता है।
  • लहसुन का इस्तेमाल करें: रोज़ सुबह लहसुन की एक कली खाने से खून का गाढ़ापन कम होता है और लिवर साफ होता है।

क्या बढ़ता हुआ मानसिक तनाव भी इसकी असली वजह हो सकता है?

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव एक ऐसी भयानक दीमक बन गया है जो इंसान के शरीर को अंदर ही अंदर पूरी तरह खोखला कर रहा है। जब आप ऑफिस के काम या परिवार की बातों को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। इस हार्मोन के तेज़ी से बढ़ने से शरीर में इंसुलिन सही से काम करना बंद कर देता है, जिससे शुगर तेज़ी से ऊपर भागती है। दूसरी तरफ, यही तनाव आपके खून की नसों को सिकोड़ कर आपका बीपी हाई कर देता है और फालतू फैट को सीधे लिवर पर चिपका देता है। असल में मानसिक तनाव इन तीनों बीमारियों की सबसे बड़ी जड़ है।

इन जानलेवा बीमारियों से खुद को सुरक्षित रखने के असरदार उपाय क्या हैं?

अगर आप चाहते हैं कि आपको बार-बार इन भयंकर शारीरिक परेशानियों का सामना न करना पड़े, तो आपको अपनी दिनचर्या में कुछ खास बदलाव करने होंगे। एक अनुशासित जीवनशैली अपनाकर आप इन बीमारियों से आसानी से बच सकते हैं:

  • वज़न को पूरी तरह कंट्रोल करें: अपने पेट की चर्बी घटाएँ, सिर्फ पाँच किलो वज़न कम करने से इन तीनों बीमारियों में जादुई असर दिखता है।
  • नियमित व्यायाम की आदत: रोज़ सुबह आधा घंटा हल्का योगा या तेज़ वॉक ज़रूर करें, जिससे खून का दौरा अच्छा रहे।
  • मीठा खाना बिल्कुल छोड़ें: चीनी और मैदे वाली चीज़ें पूरी तरह बंद कर दें, क्योंकि ये लिवर और शुगर के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
  • सात घंटे की गहरी नींद लें: तनाव कम करने और शरीर की मरम्मत के लिए रोज़ रात को अच्छी और पूरी नींद लेना बहुत ज़रूरी है।

आयुर्वेदिक और आधुनिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
बीमारी का नज़रिया रोग के कारण की पहचान कर वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर उपचार किया जाता है। व्यक्ति की प्रकृति, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार दवाइयाँ, जाँच, सर्जरी या अन्य चिकित्सकीय उपचार अपनाए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, योग, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और उनके लाभ व संभावित दुष्प्रभावों की निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही मात्रा में ही लेनी चाहिए।
जीवनशैली का महत्व उपचार के साथ संतुलित आहार, व्यायाम और नियमित फॉलो-अप की सलाह दी जाती है। आहार, योग, दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
दीर्घकालिक लक्ष्य रोग का प्रभावी प्रबंधन, जटिलताओं की रोकथाम और जीवन की गुणवत्ता में सुधार। समग्र स्वास्थ्य, संतुलित जीवनशैली और लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

तुरंत डॉक्टर से कब मिलना चाहिए ?

वैसे तो ये बीमारियाँ सही डाइट और रोज़ाना कसरत करने से खुद-ब-खुद कंट्रोल में आ जाती हैं। लेकिन हमें हमेशा इस बात का पूरा अंदाज़ा होना चाहिए कि कब स्थिति बहुत ज़्यादा गंभीर रूप ले सकती है और तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • अचानक सीने में दर्द उठना: अगर छाती में ऐसा भयंकर भारीपन और दर्द लगे जो आपके बाएँ हाथ तक जा रहा हो।
  • चक्कर खाकर गिर जाना: अगर शुगर अचानक नीचे गिर जाए और आपकी आँखों के आगे पूरा अंधेरा छा जाए।
  • आँखों में पीलापन आना: अगर लिवर खराब होने की वजह से आपकी आँखें और पेशाब बहुत ज़्यादा गहरे पीले रंग के हो जाएँ।
  • लगातार तेज़ उल्टियाँ होना: खाना खाते ही अगर तुरंत उल्टी हो जाए और पानी भी किसी तरह न पच रहा हो।

निष्कर्ष

शुगर, हाई बीपी और फैटी लिवर का एक साथ शरीर पर हमला करना कोई बहुत बड़ा जादू नहीं है। यह आपकी बदलती हुई जीवनशैली, भारी तनाव और गलत खानपान का सीधा नतीजा है। शरीर एक बहुत ही समझदार मशीन है, जब एक पुर्जा खराब होता है, तो पूरा सिस्टम डगमगाने लगता है। इन बीमारियों को सिर्फ तेज़ दवाइयाँ खाकर पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है। अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें और हमेशा प्राकृतिक आहार लें। पौष्टिक खानपान, नियमित हल्का व्यायाम और तनाव मुक्त जीवन ही आपका सच्चा साथी है। अगर परेशानी ज़्यादा तंग करे, तो हमेशा डॉक्टर से सही सलाह लें, क्योंकि खुद को खुश रखना ही सबसे बड़ी दवा है।

References

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/25547872/

https://www.healthline.com/health/type-2-diabetes/hyperglycemia

https://www.healthline.com/health/diabetes

https://www.cdc.gov/diabetes/diabetes-complications/diabetes-and-your-heart.html

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी हाँ, बिल्कुल। जब आपके लिवर से फालतू चर्बी हटने लगती है, तो शरीर में इंसुलिन वापस सही तरीके से काम करने लगता है। इंसुलिन सही होते ही खून में शुगर अपने आप नॉर्मल लेवल पर आ जाती है।

शुगर सिर्फ चीनी खाने से नहीं बढ़ती। आप जो रोटी, चावल या आलू खाते हैं, उनमें बहुत कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर में जाकर शुगर ही बनाता है। इसके साथ ही स्ट्रेस भी शुगर बढ़ाने का बड़ा कारण है।

ज़रूरी नहीं है कि हर गोली लिवर खराब करे। लेकिन कुछ दवाइयाँ मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देती हैं। इसलिए अगर आपको कोई परेशानी लगे, तो दवा बंद करने के बजाय अपने डॉक्टर से बात करके दवा बदलवाएँ।

इन बीमारियों में रिफाइंड तेल का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। इसकी जगह पर आप सरसों का तेल, ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) या थोड़ा सा शुद्ध देसी घी इस्तेमाल कर सकते हैं जो नुकसान नहीं करते।

हाँ, जब आप रात को देर तक जागते हैं, तो शरीर को आराम नहीं मिलता और स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है। नींद पूरी न होने से अगले दिन बीपी और शुगर दोनों की रिपोर्ट हमेशा गड़बड़ ही आती है।

हाँ, आप सेब, पपीता और अमरूद जैसे फल खा सकते हैं क्योंकि इनमें फाइबर होता है जो शुगर को धीरे बढ़ाता है। लेकिन फलों का रस (जूस) कभी न पिएँ, क्योंकि वह लिवर पर सीधा ज़हर की तरह काम करता है।

दूध वाली चाय पीने के बजाय आप ताज़ी ग्रीन टी या अदरक और नींबू की हर्बल चाय पी सकते हैं। ये चाय लिवर से ज़हरीले तत्वों को बाहर निकालती हैं और शरीर में जमा चर्बी को बहुत तेज़ी से पिघलाती हैं।

बिल्कुल हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में 'लीन डायबिटीज़' कहते हैं। ऐसे लोगों का बाहर से वज़न नहीं बढ़ता, लेकिन अंदर ही अंदर उनके अंगों (जैसे लिवर) के चारों तरफ खतरनाक चर्बी जमा हो जाती है।

जब बीपी बहुत तेज़ हो जाए, तो बिल्कुल शांत जगह पर लेट जाएँ। पैरों को हल्के गर्म पानी में डुबोकर रखें और बहुत लंबी-गहरी साँसें लें। इससे आपका नर्वस सिस्टम रिलैक्स होगा और बीपी तुरंत नीचे आ जाएगा।

सिर्फ वॉक करना काफी नहीं है। वॉक करने से शरीर में खून का दौरा अच्छा होता है, लेकिन जब तक आप अपनी डाइट से मीठा और जंक फूड बाहर नहीं निकालेंगे, तब तक इन बीमारियों को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us