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कमज़ोरी और आँखों में पीलापन? Jaundice के लिए बेस्ट आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट

Information By Dr. Keshav Chauhan

हाल ही में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 60% तक पूर्णकालिक (term) और 80% तक समय से पहले जन्मे (preterm) शिशुओं में पीलिया पाया जाता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यह समस्या कितनी व्यापक है और इसके प्रति जागरूकता कितनी आवश्यक है।
पीलिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी त्वचा, आँखों का सफेद भाग और श्लेष्मल झिल्ली (mucous membranes) पीले रंग के हो जाते हैं। यह बिलीरुबिन (bilirubin) नामक पदार्थ के रक्त में बढ़ने के कारण होता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से उत्पन्न होता है। सामान्यतः, लिवर (liver) इस बिलीरुबिन को शरीर से बाहर निकालता है, लेकिन जब लिवर ठीक से काम नहीं करता या बिलीरुबिन की मात्रा अधिक हो जाती है, तो पीलिया के लक्षण प्रकट होते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि क्या घरेलू उपायों से इस स्थिति का समाधान किया जा सकता है? आइए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करें और जानें कि आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से पीलिया के लिए कौन-कौन से प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं।

पीलिया (Jaundice) क्या है?

पीलिया, जिसे चिकित्सकीय भाषा में 'जॉन्डिस' (Jaundice) या 'हाइपरबिलिरुबिनेमिया' (Hyperbilirubinemia) कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी त्वचा, आँखों का सफेद भाग और श्लेष्मल झिल्ली (mucous membranes) पीले रंग के हो जाते हैं। जब लिवर किसी कारणवश इस प्रक्रिया को सही से नहीं कर पाता, तो बिलीरुबिन रक्त में जमा होने लगता है, जिससे पीलिया के लक्षण प्रकट होते हैं।​
पीलिया के मुख्य लक्षणों में त्वचा और आँखों का पीला पड़ना, गहरे रंग का मूत्र, हल्के रंग का मल, थकान, पेट में दर्द और भूख में कमी शामिल हैं। यदि आप इन लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपका लिवर ठीक से कार्य नहीं कर रहा है, और आपको आयुर्वेदिक सलाह लेनी चाहिए।

जॉन्डिस में चिकित्सा कारण और आयुर्वेद कारण

जॉन्डिस, जिसे हिंदी में पीलिया कहते हैं, वो हालात होती है जब हमारी त्वचा, आंखों का सफेद हिस्सा और मूत्र का रंग पीला पड़ जाता है। ये सब इसलिए होता है क्योंकि शरीर में एक खास पिगमेंट, जिसे बिलीरुबिन कहते हैं, उसकी मात्रा बढ़ जाती है। आजकल की आधुनिक दवाओं वाली चिकित्सा और आयुर्वेद दोनों इस बीमारी को थोड़े अलग तरीके से देखते हैं।

अगर आधुनिक चिकित्सा की बात करें तो जॉन्स के तीन असल में बड़े कारण होते हैं।

  • सबसे पहले लिवर से पहले की समस्या, मतलब लाल रक्त कोशिकाएं बहुत तेजी से टूट जाती हैं।
  • फिर लिवर से जुड़ी परेशानी, जैसे हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, सिरोसिस या फिर कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट्स।
  • और आखिरी, पित्त नलिकाओं में कोई रुकावट आना, जो गॉल स्टोन या ट्यूमर की वजह से हो सकता है।

अब बात करें आयुर्वेद की, तो जॉन्डिस को कमला रोग के तहत रखा गया है। इसका कारण पित्त दोष का असंतुलन माना गया है। जब पित्त खराब हो जाता है और रक्त या यकृत को नुकसान पहुंचाता है, तब शरीर में पीला रंग दिखने लगता है।

आयुर्वेद के हिसाब से, अनियमित खाने-पीने की आदतें, ज्यादा तैलीय या मसालेदार खाना, शराब पीना, ज़्यादा तनाव लेना और पाचन शक्ति का कमजोर पड़ना, ये सब कमला रोग के कारक बनते हैं। यहाँ लिवर को पित्त के ठिकाने की तरह देखा गया है, और जब ये प्रभावित होता है, तो पूरे शरीर पर असर होता है।

पीलिया के मुख्य कारण क्या हैं? 

पीलिया विभिन्न कारणों से हो सकता है, जो आयु वर्ग के अनुसार भिन्न होते हैं। यह आपकी त्वचा और आँखों को पीला करने वाला बिलीरुबिन का संचय होता है।
हेपेटाइटिस (Hepatitis): यह लिवर की सूजन है, जो विभिन्न प्रकार के वायरस (A, B, C इत्यादि) के कारण होती है। हेपेटाइटिस विशेष रूप से युवा और मध्य-आयु वर्ग में अधिक देखी जाती है, और यह पीलिया का एक प्रमुख कारण है।

बाइल डक्ट ब्लॉकेज (Bile Duct Obstruction): यह पित्त नलिका में पथरी या ट्यूमर के कारण हो सकता है। वृद्ध व्यक्तियों में यह स्थिति अधिक सामान्य है।

हेमोलिटिक एनीमिया (Hemolytic Anemia): यह तब होता है जब रक्त में लाल रक्त कोशिकाएँ असामान्य रूप से तोड़ी जाती हैं, जिससे बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। यह स्थिति सभी आयु वर्गों में पाई जा सकती है।

जन्मजात विकार (Congenital Disorders): नवजात शिशुओं में, पीलिया अक्सर जन्मजात लिवर क्रियाओं के विकारों के कारण होता है, जैसे कि बिलीरुबिन चयापचय में विकार।

दवाइयों का प्रभाव (Medication Side Effects): कुछ दवाइयाँ भी लिवर को प्रभावित कर सकती हैं और पीलिया का कारण बन सकती हैं। यह स्थिति किसी भी आयु में हो सकती है, खासकर जब दवाइयाँ लंबे समय तक ली जाती हैं।

पीलिया के लक्षण क्या हैं? (What are the Symptoms of Jaundice?)

पीलिया के लक्षण विशेष रूप से ध्यान देने योग्य होते हैं, क्योंकि ये आपके शरीर में हो रहे अंदरूनी परिवर्तनों का संकेत देते हैं। सबसे आम लक्षण है त्वचा और आँखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना, जो कि बिलीरुबिन के उच्च स्तर के कारण होता है।

  • त्वचा और आँखों का पीलापन: यह सबसे स्पष्ट लक्षण है। अगर आप देखें कि आपकी त्वचा और आँखों का सफेद हिस्सा पीला दिख रहा है, तो यह पीलिया का संकेत हो सकता है।
  • कमज़ोरी: पीलिया से पीड़ित व्यक्तियों को अक्सर असामान्य रूप से थकान महसूस होती है।
  • पेट में दर्द और सूजन: लिवर की खराबी के कारण पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या सूजन हो सकती है।
  • गहरे रंग का मूत्र और हल्का रंग का मल: बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने से मूत्र गहरा हो सकता है और मल हल्का।
  • भूख न लगना और वजन में कमी: लिवर की असामान्य कार्यप्रणाली भूख में कमी ला सकती है।

आयुर्वेद में पीलिया का उपचार कैसे होता है? (Ayurvedic Remedies for Jaundice)

आयुर्वेद में पीलिया को "कामला" रोग कहा गया है और इसे पित्त दोष (Pitta dosha) के असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। जब शरीर में पित्त (bile) अधिक मात्रा में बनता है या वह सही तरह से बाहर नहीं निकल पाता, तो यह रक्त और मांस धातु को प्रभावित करता है, जिससे पीलिया के लक्षण सामने आते हैं।

आयुर्वेद में इलाज सिर्फ लक्षणों को दबाने का नहीं, बल्कि बीमारी की जड़ तक जाकर उसे ठीक करने का प्रयास होता है। इसके लिए शरीर को शुद्ध (detoxify) करने, अग्नि (digestive fire) को मज़बूत करने और लिवर (liver) को बल देने वाले उपाय किए जाते हैं।

प्रो टिप:

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ पंचकर्म (Panchakarma) चिकित्सा जैसे विरेचन (purgation therapy) भी पीलिया में प्रभावी हो सकती है, लेकिन इसे केवल विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।

आयुर्वेदिक इलाज के तरीके

आयुर्वेद में जॉन्डिस का इलाज सिर्फ लक्षणों को छुपाने के लिए नहीं होता, बल्कि असली वजह को ठीक करने की कोशिश की जाती है। ये पित्त दोष को शांत करता है, यकृत को मजबूत बनाता है और पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है।

पंचकर्म

पंचकर्म, जो कि आयुर्वेद की एक क्लीनिंग प्रक्रिया है, जॉन्डिस में खास तौर पर विरेचन को अहम माना जाता है। विरेचन के ज़रिए शरीर से खराब पित्त बाहर निकलता है। इससे यकृत पर दबाव कम होता है और पित्त संतुलित रहता है। कभी-कभी शरीर को शुद्ध करने के लिए स्नेहन और स्वेदन भी किया जाता है। और हां, ये सब काम केवल किसी अनुभवी आयुर्वेद डॉक्टर के साथ ही करवाना चाहिए, खुद से हाथ आजमाना ठीक नहीं।

पीलिया के लिए जादुई जड़ी-बूटियां

भुम्यामलकी को यकृत की सुरक्षा करने वाली औषधि माना गया है। यह लिवर की कोशिकाओं को बचाती है और बिलीरुबिन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है। कुटकी पित्त दोष और यकृत की सफाई के लिए अच्छी मानी गई है। कालमेघ कड़वापन लिए होते हुए भी पाचन को ठीक रखता है और पित्त दोष कम करता है। गुडूची की तो बात ही अलग है, ये इम्यूनिटी बढ़ाती है और शरीर को बीमारियों से लड़ने में समर्थ बनाती है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर हर किसी की बीमारी, उम्र और प्रकृति के मुताबिक दवाएं तय करते हैं। इसलिए बिना सलाह के कोई दवा लेना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है।

घरेलू उपाय

हल्के जॉन्डिस में कुछ घरेलू नुस्खे भी काम आ सकते हैं।

  •  ताज़ा गन्ने का रस थोड़ा-थोड़ा पीना फायदेमंद रहता है क्योंकि ये यकृत को एनर्जी देता है।
  •  नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है और टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है।
  •  आंवला पाचन और लिवर दोनों के लिए अच्छा माना जाता है। 
  • साथ ही हल्दी में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं जो लिवर को सपोर्ट करते हैं।

लेकिन हाँ, ये चीजें सिर्फ सहायक हैं, अगर हालत ज्यादा खराब है तो अकेले इन्हीं पर भरोसा करना ठीक नहीं होगा।

क्या खाएं 

जॉन्डिस के दौरान खाने का बहुत ख्याल रखना चाहिए। हल्का, आसानी से पचने वाला और कम तैलीय खाना चाहिए। जैसे:- 

  •  मूंग दाल की खिचड़ी, 
  • दलिया,
  •  उबली सब्जियां,
  •  साथ ही पपीता
  •  सेब जैसे फल खाने चाहिए।
  •  पानी भी खूब पीना जरूरी है।
  • नियमित और समय पर भोजन करना भी पाचन अग्नि को संतुलित रखता है।

 क्या न खाएं

  • तले हुए भोजन,
  • अधिक मसालेदार व्यंजन, 
  • भारी दालें, 
  • जंक फूड, 
  • शराब  
  • अधिक नमक से परहेज करना चाहिए। 
  • अत्यधिक प्रोटीन भी कुछ स्थितियों में लिवर पर भार डाल सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है।

क्या घरेलू उपायों से पीलिया का इलाज संभव है? (Home Remedies for Jaundice)

जी हाँ, पीलिया की शुरुआती अवस्था में घरेलू उपाय बेहद लाभकारी हो सकते हैं। ये उपाय न केवल लक्षणों को कम करते हैं, बल्कि लिवर को डिटॉक्स करके उसकी कार्यक्षमता भी बढ़ाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ असरदार घरेलू नुस्खों के बारे में:
1. गन्ने का रस (Sugarcane Juice)
गन्ने का रस पीलिया के इलाज में बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देता है, लिवर को एनर्जी देता है और पीलिया से जुड़ी कमज़ोरी को दूर करता है। इसमें मौजूद नेचुरल शुगर और इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करते हैं।

प्रो टिप:

  • गन्ने का रस सिर्फ ताज़े और साफ जगह से निकाला हुआ ही पिएं।
  • यह उपाय खासकर गर्मी के मौसम में ज़्यादा असरदार होता है क्योंकि उस समय शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है।
  • डायबिटीज़ के मरीज़ बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन न करें।

2. हल्दी का पानी (Turmeric Water)
हल्दी एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है जो लिवर की सफाई करने में मदद करती है। यह शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और बिलीरुबिन के स्तर को नियंत्रित करती है।

प्रो टिप:

  • सुबह खाली पेट हल्दी पानी पीना सबसे ज़्यादा असर करता है।
  • यदि आपको पेट में जलन या गैस की समस्या रहती है, तो हल्दी का सेवन सीमित मात्रा में करें।

3. टमाटर का रस (Tomato Juice)

टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन (Lycopene) लिवर को मज़बूत बनाता है और पीलिया से जुड़ी सूजन को कम करता है। यह एक नेचुरल डिटॉक्सिफायर के रूप में काम करता है।

प्रो टिप:

  • टमाटर का रस सुबह खाली पेट लेने से जल्दी फायदा होता है।
  • एसिडिटी या पेट में अल्सर की समस्या हो तो टमाटर का सेवन सीमित करें।

4. मूली के पत्तों का रस (Radish Leaf Juice)

मूली के पत्ते लिवर की सफाई के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इनका रस शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है और पीलिया के लक्षणों को तेजी से कम करता है।

प्रो टिप:

  • यह नुस्खा तब सबसे अच्छा काम करता है जब पीलिया के लक्षण हल्के हों और रोगी को भूख कम लग रही हो।
  • अधिक मात्रा में पीने से दस्त की समस्या हो सकती है, इसलिए संतुलन बनाए रखें।


5. पपीते के पत्ते और शहद (Papaya Leaves + Honey)

पपीते के पत्तों में मौजूद एंजाइम लिवर की सूजन को कम करते हैं और पाचन सुधारते हैं। शहद इसके प्रभाव को बढ़ाता है।

प्रो टिप:

  • यह मिश्रण उन लोगों के लिए अच्छा है जिन्हें पीलिया के साथ-साथ पाचन से जुड़ी शिकायतें भी हैं।
  • किसी भी तरह की एलर्जी की स्थिति में पहले एक छोटा मात्रा सेवन कर प्रतिक्रिया देखें।

6. नारियल पानी (Coconut Water)

नारियल पानी शरीर को ठंडक देता है, डिहाइड्रेशन को दूर करता है और पीलिया से जुड़ी कमज़ोरी को भी कम करता है। यह लिवर के लिए भी लाभकारी होता है।

प्रो टिप:

  • सबसे बढ़िया असर तब मिलता है जब इसे खाली पेट सुबह पिया जाए।
  • बासी या बहुत ठंडा नारियल पानी पीने से बचें, खासकर ठंडी में।

7. तुलसी और पुनर्नवा (Tulsi + Punarnava)

तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और पुनर्नवा लिवर को डिटॉक्स करती है। दोनों मिलकर पीलिया को जड़ से खत्म करने में मदद करते हैं।

प्रो टिप:

  • यह उपाय लंबे समय तक (10-15 दिन) लेने पर असर दिखाता है, इसलिए नियमितता ज़रूरी है।
  • गर्भवती महिलाओं को बिना सलाह के पुनर्नवा का सेवन नहीं करना चाहिए।

8. छाछ या मट्ठा (Buttermilk)

छाछ पाचन को दुरुस्त करने और लिवर पर बोझ कम करने का बेहतरीन तरीका है। यह शरीर को ठंडक देता है और पीलिया के कारण होने वाली गर्मी और जलन को शांत करता है।

प्रो टिप:

  • रोज़ सुबह और शाम 1-1 गिलास छाछ में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें।
  • ताज़ा छाछ का ही सेवन करें, बासी या खट्टा हुआ मट्ठा नुकसान कर सकता है।

इन सभी उपायों को आज़माने से पहले यह ज़रूरी है कि आप पीलिया के स्तर को समझें। यदि लक्षण गंभीर हों या लगातार बने रहें, तो तुरंत आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें। घरेलू नुस्खे सहायक हो सकते हैं, लेकिन हर स्थिति में प्राथमिक इलाज नहीं होता।

पीलिया से बचाव कैसे करें? 

पीलिया से बचाव करना मुश्किल नहीं है, बस आपको अपनी दिनचर्या, खानपान और स्वच्छता पर थोड़ा ध्यान देना होगा। क्योंकि पीलिया का सीधा संबंध हमारे लिवर से होता है, इसलिए अगर आप लिवर को स्वस्थ रखते हैं, तो पीलिया से बचना काफी हद तक संभव है।

1. साफ-सुथरा खाना और पानी ही लें : बाजार का खुला, बासी या गंदे पानी से बना खाना बिलकुल न खाएं। सड़क किनारे मिलने वाली चाट, गोलगप्पे, या खुली मिठाइयाँ पीलिया का खतरा बढ़ा सकती हैं। पीने के लिए हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही लें।

2. भोजन से पहले हाथ धोने की आदत डालें : कई बार सिर्फ हाथ धोने की लापरवाही से वायरस पेट में चला जाता है। खाने से पहले और बाद में अच्छे से साबुन से हाथ धोना पीलिया से बचाव का आसान तरीका है।
3. लिवर के लिए फायदेमंद भोजन करें : हरी सब्ज़ियां, फल, नींबू, आंवला, गाजर, चुकंदर और नारियल पानी जैसे तत्व लिवर को ताकत देते हैं। अधिक तला-भुना, मसालेदार और वसायुक्त खाना लिवर पर बोझ डालता है।
4. शराब और धूम्रपान से दूरी रखें : शराब लिवर की सबसे बड़ी दुश्मन है। नियमित रूप से शराब का सेवन करने से लिवर धीरे-धीरे कमज़ोर होता है, जिससे पीलिया और अन्य गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।

 कब चिकित्सकीय की सहायता लें:- 

  • यदि त्वचा का पीलापन तेजी से बढ़ रहा हो,
  • तेज बुखार हो,
  • उल्टी या पेट में तेज दर्द हो,
  • अत्यधिक कमजोरी महसूस हो 
  • पेशाब का रंग बहुत गहरा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • नवजात शिशुओं में जॉन्डिस को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। 
  • लंबे समय तक भूख न लगना या वजन तेजी से घटना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

हल्के और गंभीर जॉन्डिस में उपचार 

हल्के जॉन्डिस में आमतौर परबिलीरुबिन स्तर लिमिटेड बढ़ाया जाता है और लिवर कार्य अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। ऐसे मामलों में विश्राम, उचित आहार, हल्की औषधियां और निगरानी पर्याप्त हो सकती है।

गंभीर जॉन्डिस में बिलीरुबिन स्तर बहुत अधिक होता है या लिवर में सूजन के संकेत होते हैं। ऐसे में विस्तृत जांच, अस्पताल में भर्ती और कारण आधारित उपचार आवश्यक होता है। यदि पित्त नलिका में रुकावट हो तो शल्य चिकित्सा भी करनी पड़ सकती है। आयुर्वेदिक उपचार को भी इस अवस्था में विशेषज्ञ पर्यवेक्षण में ही अपनाना चाहिए और आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वय आवश्यक है।

क्या इन जड़ी बूटियों के दुष्प्रभाव हो सकते हैं? 

वैसे आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां सुरक्षित (safe) मानी जाती हैं, लेकिन गलत मात्रा या बिना सलाह उपयोग से side effects संभव हैं। कुछ जड़ी बूटियाँ जो असरदार हैं जैसे:- 

  • कुटकी अधिक मात्रा में लेने से दस्त हो सकते हैं।
  •  कालमेघ अत्यधिक लेने पर पेट में जलन हो सकती है। 
  • गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में विशेष सावधानी आवश्यक है।
  •  इसलिए व्यक्तिगत प्रकृति और स्थिति के अनुसार दवा लेना ही सुरक्षित है।

संदर्भ और प्रमाण

आयुर्वेद के पुराने ग्रंथों में कमला रोग का वर्णन मिलता है, जहां पित्त दोष की तोड़ना-मरोड़ना को मुख्य कारण बताया गया है।आजकल किए गए कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि आयुर्वेद में उपयोग की जाने वाली कुछ जड़ी बूटियां लिवर की रक्षा करने में मदद कर सकती हैं। जैसे: भुम्यामलकी और गुडूची पर हुए शोधों में अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं और इनसे लिवर को सहारा मिलने के संकेत मिले हैं।

अंतिम विचार (Final Thoughts)

अगर आपको भी हाल ही में कमज़ोरी, थकान और आँखों में पीलापन महसूस हुआ है, तो यह सिर्फ आम थकावट ना होके पीलिया का संकेत हो सकता है। लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है! आयुर्वेद में पीलिया का इलाज ना सिर्फ प्रभावी है, बल्कि ये शरीर को अंदर से भी मज़बूत बनाता है।
यहाँ बताए गए घरेलू नुस्खे, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और जीवनशैली की सलाह आपको ना सिर्फ इस बीमारी से उबरने में मदद करेंगी, बल्कि भविष्य में भी इससे बचने का रास्ता दिखाएंगी।
याद रखिए, स्वस्थ लिवर ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है! अगर लक्षण बढ़ रहे हों, तो आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेने में बिल्कुल देर न करें।
और जानने के लिए, हमारे जीवा डॉक्टरों से बात करें। डायल करें 0129-4264323।

FAQs

1. पीलिया रोग को जड़ से कैसे खत्म करें?
पीलिया को जड़ से खत्म करने के लिए लिवर की सफाई और मज़बूती बेहद ज़रूरी होती है। इसके लिए त्रिफला जैसी आयुर्वेदिक औषधियाँ मददगार हैं। साथ ही, साफ भोजन, भरपूर पानी, और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाएं। समय पर इलाज और परहेज़ से पीलिया पूरी तरह ठीक हो सकता है।

2. पीलिया के बाद लीवर को मज़बूत कैसे बनाएं?
कमज़ोर लिवर को ताकत देने के लिए गिलोय, पुनर्नवा, हल्दी और आंवला का सेवन करें। ज़्यादा तला-भुना, शराब और प्रोसेस्ड फूड से बचें। दिनचर्या में योग, प्राणायाम और भरपूर नींद शामिल करें। स्वच्छ खाना और समय पर भोजन भी ज़रूरी है।

3. पीलिया को ठीक करने के लिए किस औषधीय पौधे का उपयोग किया जाता है?
गिलोय को पीलिया के इलाज में सबसे प्रभावशाली आयुर्वेदिक पौधे के रूप में जाना जाता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है। इसके अलावा पुनर्नवा और भृंगराज भी पीलिया में लाभदायक माने जाते हैं।

4. पीलिया मे पीली आँखों से कैसे छुटकारा पाएं?
पीली आँखें बिलीरुबिन के बढ़ने से होती हैं। जब लिवर सही से काम करने लगता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, तो आँखों का रंग धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है। इसके लिए गन्ने का रस, हल्दी पानी और नारियल पानी मददगार होते हैं।

5. पीलिया से लीवर ठीक होने में कितना समय लगता है?
पीलिया से लीवर पूरी तरह ठीक होने में आमतौर पर 2 से 4 हफ्ते लग सकते हैं, लेकिन यह व्यक्ति की उम्र, रोग की गंभीरता और देखभाल पर निर्भर करता है। सही इलाज, आराम और पौष्टिक भोजन से यह प्रक्रिया तेज़ हो सकती है।

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