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Office workers में neck pain क्यों common है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सोचिए ज़रा, दोपहर के तीन बज रहे हैं। आप अपने ऑफिस के डेस्क पर बैठे हैं, लैपटॉप पर किसी ज़रूरी प्रोजेक्ट की एक्सेल शीट खुली है और अचानक आपको अपनी गर्दन के पिछले हिस्से में एक अजीब सी जकड़न महसूस होती है। आप अपनी गर्दन को थोड़ा दाएं-बायें घुमाने की कोशिश करते हैं, और तभी एक तीखी सी कट-कट की आवाज आती है। हम में से ज्यादातर लोग इस दर्द को बहुत ही आम मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं या फिर थोड़ा सा बाम लगाकर वापस काम में जुट जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कंप्यूटर के सामने बैठने वाले लगभग हर दूसरे इंसान की गर्दन में यह दर्द क्यों घर कर जाता है?

आज की कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल में गर्दन का दर्द कोई मामूली शिकायत नहीं रह गया है, बल्कि यह एक साइलेंट महामारी की तरह फैल रहा है। हम दिन के आठ से दस घंटे एक ही जगह बैठकर स्क्रीन को घूरते हुए बिता देते हैं। हमारा शरीर इस तरह लगातार एक ही पोजीशन में बैठने के लिए नहीं बना है। आयुर्वेद में माना जाता है कि शरीर में गतिशीलता का कम होना ही कई बीमारियों की जड़ है। 

गलत पोस्चर और स्क्रीन का लेवल

ऑफिस डेस्क पर गलत तरीके से बैठने और स्क्रीन का सही तालमेल न होने से हमारी गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर बहुत बुरा असर पड़ता है:

  • टेक्स्ट-नेक: स्क्रीन की तरफ लगातार आगे झुककर काम करने से गर्दन की हड्डियों पर सीधा और भारी दबाव पड़ता है।
  • कीबोर्ड की दूरी: कीबोर्ड बहुत दूर रखने से बाहों को आगे खींचना पड़ता है, जिससे ऊपरी पीठ में तेज दर्द होता है।
  • गलत माउस पोश्चर: माउस का लगातार गलत एंगल पर इस्तेमाल करने से शरीर के एक तरफ का कंधा पूरी तरह जाम हो जाता है।
  • screen की ऊंचाई: आंखों के लेवल से नीचे लैपटॉप होने पर बेचारी गर्दन को पूरे दिन सिर का भारी वजन संभालना पड़ता है।

बिना ब्रेक के लगातार घंटों तक बैठना

दिनभर बिना किसी मूवमेंट के एक ही पोजीशन में जमे रहने से हमारी मांसपेशियां पूरी तरह लॉक हो जाती हैं और खून का दौरा रुकने लगता है:

  • ब्लड सर्कुलेशन: लगातार बैठे रहने से गर्दन के हिस्से में खून का दौरा धीमा हो जाता है और नसों को पोषण नहीं मिलता।
  • लैक्टिक एसिड: मांसपेशियों में मूवमेंट न होने से वहां एसिड जमा होने लगता है, जो शाम तक भारीपन और दर्द की वजह बनता है।
  • कॉलिंग पोश्चर: कान और कंधे के बीच फोन दबाकर बात करते हुए टाइपिंग करने से रीढ़ की हड्डी एक तरफ टेढ़ी होने लगती है।
  • मांसपेशियों का कड़ापन: रीढ़ के जोड़ों को हिलने-डुलने का मौका न मिलने से वे अपनी नेचुरल कोमलता खो देते हैं और अकड़ जाते हैं।

ऑफिस का स्ट्रेस और मांसपेशियों का खिंचाव

क्या आपको पता है कि ऑफिस की डेडलाइन का प्रेशर सिर्फ आपके दिमाग को नहीं, बल्कि सीधे आपकी गर्दन को थका देता है? जब भी हम किसी काम को लेकर बहुत ज्यादा तनाव या गुस्से में होते हैं, तो हमारा शरीर अनजाने में ही टाइट हो जाता है। हम अपने कंधों को सिकोड़ लेते हैं और गर्दन की नसें तन जाती हैं। यह एक स्वाभाविक शारीरिक प्रतिक्रिया है जिसे हम खुद भी महसूस नहीं कर पाते।

लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव गर्दन के ऊपरी हिस्से के टिश्यूज को सख्त बना देता है। यही कारण है कि जिस दिन ऑफिस में काम का दबाव ज्यादा होता है, उस दिन शाम को गर्दन और सिर के पिछले हिस्से में भारीपन और दर्द बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए, मानसिक शांति का सीधा संबंध आपकी शारीरिक सेहत और रीढ़ की हड्डी के आराम से जुड़ा हुआ है।

आयुर्वेद के अनुसार गर्दन दर्द की असली वजह

आयुर्वेद में किसी भी तरह के दर्द और जकड़न का मुख्य कारण शरीर में 'वात दोष' का बढ़ना माना जाता है। वात का स्वभाव सूखा, ठंडा और गतिहीन होना है। जब ऑफिस वर्कर लगातार एसी  की ठंडी हवा के नीचे बैठते हैं, पर्याप्त पानी नहीं पीते और शारीरिक मूवमेंट कम करते हैं, तो उनकी गर्दन और कंधों के जोड़ों में वात का प्रकोप बढ़ जाता है।

यह बढ़ाया हुआ वात जोड़ों के अंदर मौजूद नेचुरल चिकनाई को सुखाने लगता है। जब चिकनाई कम हो जाती है, तो गर्दन हिलाने पर हड्डियों में घर्षण होता है और दर्द महसूस होने लगता है। आयुर्वेद कहता है कि जब तक शरीर में वायु का संतुलन ठीक नहीं होगा और शरीर को अंदरूनी नमी नहीं मिलेगी, तब तक इस दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा पाना मुश्किल है।

गर्दन दर्द से आराम पाने के सरल उपाय

ऑफिस की भागदौड़ के बीच इन आसान और छोटे बदलावों को अपनाकर आप गर्दन के दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं:

  • डेस्क सेटअप: लैपटॉप स्टैंड का इस्तेमाल करें ताकि कंप्यूटर की स्क्रीन हमेशा आपकी आंखों के बिल्कुल सामने सीधी रहे।
  • स्ट्रेचिंग ब्रेक: हर 45 मिनट में अपनी सीट से उठें, थोड़ा टहलें और अपनी गर्दन को बहुत आराम से चारों तरफ घुमाएं।
  • गरम सिकाई: दर्द ज्यादा होने पर सेंधा नमक मिले गर्म पानी की थैली या हीटिंग पैड से गर्दन के पिछले हिस्से की सिकाई करें।
  • आयुर्वेदिक मालिश: रात को सोते समय गर्दन और कंधों पर गुनगुने महानारायण तेल या तिल के तेल से हल्के हाथों से मालिश करें।
  • पानी की मात्रा: दिनभर में पर्याप्त गुनगुना पानी पिएं ताकि शरीर के टॉक्सिंस बाहर निकलें और जोड़ों की नमी बनी रहे।

गलत खान-पान जो दर्द को और बढ़ा देता है

आजकल के ऑफिस वर्कर के खान-पान में पैकेट बंद चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और मैदे से बनी चीजों का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। यह सब चीजें हमारी आंतों में जाकर चिपक जाती हैं और पाचन शक्ति को पूरी तरह ब्लॉक कर देती हैं। लगातार ऐसी चीजें खाने से पेट में गैस और कब्ज बनता है, जो आयुर्वेद के अनुसार वात को बढ़ाकर गर्दन के दर्द को सीधे ट्रिगर करता है।

कोशिश करें कि काम के दौरान हमेशा ताजा और गर्म खाना ही खाएं। ठंडी चीजें, फ्रिज का रखा हुआ पुराना खाना या बहुत ज्यादा तीखा-मसालेदार भोजन शरीर में रूखापन पैदा करता है। अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में पानी और लिकिड चीजें शामिल करें ताकि जोड़ों के बीच की चिकनाई कभी खत्म न हो।

निष्कर्ष

देखा जाए तो ऑफिस में काम करना हमारी मजबूरी हो सकता है, लेकिन अपनी सेहत को दांव पर लगाना हमारी अपनी चॉइस है। गर्दन का यह दर्द हमें सिर्फ यह याद दिलाने आता है कि हम अपने शरीर के साथ थोड़ी नाइंसाफी कर रहे हैं। स्क्रीन के सामने लगातार खुद को झोंक देने से आपकी प्रोडक्टिविटी नहीं बढ़ेगी, बल्कि एक दिन शरीर पूरी तरह जवाब दे देगा।

इसलिए, छोटी-छोटी बातें जैसे स्क्रीन की ऊंचाई सही करना, काम के बीच में थोड़ा सा स्ट्रेचिंग ब्रेक लेना और रात को हल्के तेल की मालिश करना, आपको इस बड़ी मुसीबत से बचा सकता है। अपनी रीढ़ की हड्डी का ख्याल रखिए, क्योंकि अगर शरीर का यह पिलर कमजोर हो गया, तो पूरी लाइफस्टाइल का ढांचा डगमगा जाएगा। थोड़ा सा रुकिए, सांस लीजिए और अपनी गर्दन को ज़रा आराम दीजिए!

References

  1. Ministry of Ayush, Government of India
  2. National Health Portal of India
  3. Ministry of Health and Family Welfare, Government of India

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, ज्यादातर मामलों में यह सिर्फ गलत तरीके से बैठने के कारण मांसपेशियों में आई सामान्य जकड़न होती है।

हर एक घंटे में अपनी गर्दन को धीरे-धीरे क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज पांच बार घुमाएं।

हाँ, तकिया ऐसा होना चाहिए जो सोते समय आपकी गर्दन और रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा और नेचुरल सपोर्ट दे।

गुनगुने महानारायण तेल या तिल के तेल से हल्की मालिश करने से जकड़न तुरंत खुल जाती है।

हाँ, ठंडी हवा सीधे गर्दन पर लगने से वात दोष बढ़ता है और मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं।

यह सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस या किसी नस के गंभीर रूप से दबने का संकेत हो सकता है, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

बिलकुल, लैपटॉप स्टैंड स्क्रीन को आँखों के स्तर पर लाता है जिससे गर्दन पर बेवजह का झुकाव खत्म हो जाता है।

पुरानी जकड़न और मांसपेशियों के कड़ेपन के लिए हमेशा गर्म पानी या हीटिंग पैड से सिकाई करना सबसे बेस्ट होता है।

हाँ, स्ट्रेस के कारण हमारी गर्दन और कंधों की मांसपेशियां अनजाने में बहुत ज्यादा टाइट हो जाती हैं।

वात को कम करने के लिए अपनी डाइट में गुनगुना पानी, देसी घी और ताजी बनी गर्म चीजों को शामिल करें।

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