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बच्चों में stomach pain को कब ignore नहीं करना चाहिए?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 25 Jun, 2026
  • category-iconUpdated on 25 Jun, 2026
  • category-iconChild Health
  • blog-view-icon5009

अच्छा, एक बात बताइए। आपके घर में भी सुबह-सुबह स्कूल जाने के समय बच्चे के पेट में अचानक दर्द शुरू हो जाता है क्या? हम सबने बचपन में ये ड्रामा कभी न कभी तो किया ही है। कभी मंडे ब्लूज, तो कभी मैथ्स का मुश्किल टेस्ट! लेकिन सच कहूं, हर बार ये सिर्फ एक बहाना नहीं होता। कई बार बच्चा वाकई बहुत तकलीफ में होता है, और हम समझ ही नहीं पाते कि मामला कब सामान्य से सीरियस हो गया।

छोटे बच्चे अक्सर अपनी तकलीफ को शब्दों में खुलकर बता नहीं पाते। वो बस रोते हैं, चिड़चिड़े हो जाते हैं या फिर खाना-पीना छोड़ देते हैं। ऐसे में माता-पिता होने के नाते हमारी जिम्मेदारी थोड़ी बढ़ जाती है। आयुर्वेद कहता है कि बच्चों का पाचन तंत्र बहुत नाजुक होता है, इसलिए उनकी छोटी-मोटी तकलीफ भी जल्दी बढ़ सकती है।  

दर्द की जगह और उसका समय

सबसे पहले यह देखिए कि बच्चा पेट में किस तरफ हाथ लगा रहा है। अगर बच्चा नाभि के आस-पास हाथ रख रहा है, तो अक्सर यह गैस, कब्ज या बदहजमी का सामान्य दर्द हो सकता है। लेकिन अगर दर्द पेट के किसी खास हिस्से में हो रहा है या अचानक बढ़ा है, तो आपको तुरंत चौकन्ना हो जाना चाहिए। समय पर ध्यान देना बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ दर्द मिनटों में बढ़ जाते हैं।

अगर दर्द अचानक उठा और इतना तेज है कि बच्चा सीधा खड़ा भी नहीं हो पा रहा, तो यह खतरे की घंटी है। इसके अलावा, अगर दर्द लगातार कई घंटों से बना हुआ है और बच्चा उसकी वजह से सो भी नहीं पा रहा है, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे बिल्कुल मत बैठिए। इन मुख्य बिंदुओं पर नजर रखें:

  • नाभि: यह अक्सर गैस या सामान्य कब्ज का संकेत होता है।
  • निचला दाहिना हिस्सा: यह अपेंडिक्स का शुरुआती इशारा हो सकता है, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  • अचानक तेज दर्द: अगर दर्द अचानक उठे और बच्चा सीधा न हो पाए, तो यह मेडिकल इमरजेंसी है।

पेट दर्द के साथ दिखने वाले दूसरे लक्षण

सिर्फ पेट दर्द ही अकेला विलेन नहीं होता, इसके साथ आने वाले दूसरे लक्षण असली कहानी बताते हैं। अगर बच्चे को पेट दर्द के साथ तेज बुखार आ जाए, तो इसका सीधा मतलब है कि शरीर के अंदर कोई इन्फेक्शन पैर पसार रहा है। इसके साथ ही, अगर बच्चा बार-बार उल्टी कर रहा हो, तो मामला पेट की आम खराबी से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।

एक और बात जो बहुत जरूरी है, वो है मोशन का साफ न होना या पॉटी में खून आना। अगर बच्चा पेट दर्द के साथ दस्त से परेशान है और उसमें खून के अंश दिखें, तो मामला इन्फेक्शन या आंतों की सूजन का हो सकता है। ऐसी स्थिति में की गई लापरवाही बच्चे की सेहत पर बहुत भारी पड़ सकती है। इन लक्षणों को कभी न भूलें:

  • बुखार: शरीर के अंदर किसी बड़े इन्फेक्शन का साफ संकेत है।
  • हरी या पीली उल्टी: यह आंतों में किसी तरह की रुकावट की तरफ इशारा करती है।
  • पॉटी में खून: आंतों में गंभीर सूजन या इन्फेक्शन की पक्की निशानी है।

बच्चे के बदलते व्यवहार पर रखें नजर

बच्चे अपनी तकलीफ बोलने से ज्यादा अपने बर्ताव से जाहिर करते हैं। अगर आपका हमेशा हंसने-खेलने और कूदने वाला बच्चा अचानक बिल्कुल सुस्त पड़ गया है, या फिर लगातार रो रहा है जिसे चुप कराना नामुमकिन लग रहा है, तो समझो बात बढ़ चुकी है। कुछ बच्चे दर्द के मारे अपने पैरों को पेट की तरफ सिकोड़ कर लेट जाते हैं, जो कि पेट के अंदरूनी हिस्से में तेज मरोड़ की पक्की निशानी है।

अगर बच्चा खाने-पीने से पूरी तरह मना कर दे और यहाँ तक कि पानी की एक घूंट भी अंदर न ले जाए, तो शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। जब बच्चा रोए पर उसकी आँखों से आंसू न निकलें और उसकी जीभ सूखी दिखे, तो बिना वक्त गंवाए सीधे अस्पताल का रुख करना चाहिए।

आयुर्वेद के नजरिए से बच्चों की अग्नि

आयुर्वेद में माना जाता है कि बच्चों का पाचन यानी उनकी 'अग्नि' बहुत संवेदनशील और कमजोर होती है। जब वो कुछ ऐसा-वैसा खा लेते हैं जो आसानी से पच नहीं पाता, तो पेट में 'आम' यानी अनपचा खाना जमा होने लगता है। यही टॉक्सिंस पेट में वायु यानी गैस को रोकते हैं, जिससे अचानक तेज मरोड़ उठती है और बच्चा परेशान हो जाता है।

कई बार बाहर का जंक फूड, बासी खाना या ज्यादा मीठा खाने से पेट में कीड़े भी हो जाते हैं। अगर बच्चा रात को सोते समय अपने दांत किटकिटाता है, या फिर उसके पेट में अक्सर हल्का-हल्का दर्द बना रहता है, तो यह पेट में कीड़े होने का संकेत हो सकता है। इसका सही समय पर इलाज न होने से बच्चे का विकास रुक जाता है।

जब दर्द सामान्य हो तो क्या करें

अगर आपको लग रहा है कि दर्द बहुत गंभीर नहीं है, बच्चा बीच-बीच में खेल भी रहा है और कोई बड़ा लक्षण नहीं है, तो आयुर्वेद के कुछ आसान तरीके आजमाए जा सकते हैं। नाभि के आस-पास गुनगुने पानी में घुली हुई हींग का पेस्ट लगाना एक बेहतरीन और पुराना नुस्खा है। इससे पेट में फंसी हुई गैस तुरंत पास हो जाती है और बच्चे को झटपट आराम मिलता है।

इसके साथ ही, बच्चे को थोड़ा सा गुनगुना पानी पीने के लिए दें। हल्का सा अजवाइन का पानी भी पेट को राहत पहुँचाने में मददगार साबित होता है। लेकिन हमेशा याद रखिए, ये सब सिर्फ सामान्य गैस या कब्ज के लिए है; अगर ऊपर बताए गए डेंजर साइंस में से एक भी दिख रहा है, तो इन नुस्खों में वक्त बर्बाद करना समझदारी नहीं होगी।

खान-पान की कुछ आदतें जो दर्द बढ़ाती हैं

आजकल के बच्चों में पैकेट बंद चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और मैदे से बनी चीजों का क्रेज बहुत बढ़ गया है। यह सब चीजें बच्चे की आंतों में जाकर चिपक जाती हैं और उनकी पाचन शक्ति को पूरी तरह ब्लॉक कर देती हैं। लगातार ऐसी चीजें खाने से पेट में पुराना कब्ज बन जाता है, जो बाद में अचानक बहुत तेज पेट दर्द के रूप में सामने आता है।

कोशिश करें कि बच्चे को हमेशा ताजा और गर्म खाना ही दें। ठंडी चीजें, फ्रिज का रखा हुआ खाना या बहुत ज्यादा तीखा-मसालेदार भोजन बच्चों के पेट के लिए सही नहीं होता। उन्हें खाने को अच्छी तरह चबाकर खाने की आदत डालें, ताकि पेट पर ज्यादा लोड न पड़े।

निष्कर्ष

तो दोस्तों, बात की एक बात ये है कि बच्चों के मामले में 'देखते हैं, कल तक ठीक हो जाएगा' वाली सोच बिल्कुल नहीं चलेगी। उनका शरीर हमारी तरह मजबूत नहीं होता कि वो हर तरह के दर्द या इन्फेक्शन को लंबे समय तक झेल सकें। एक सजग माता-पिता होने के नाते, आपको उनके पेट दर्द के पैटर्न और उनके रोने के तरीके को समझना होगा।

हमेशा याद रखें कि आयुर्वेद और घरेलू नुस्खे सेहत को बनाए रखने और शुरुआती छोटी दिक्कतों के लिए बेहतरीन हैं, लेकिन वो किसी मेडिकल इमरजेंसी का विकल्प नहीं हो सकते। जब भी पेट दर्द के साथ बुखार, लगातार उल्टी या बहुत ज्यादा सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी झिझक के डॉक्टर से सलाह लें।  

References

  1. Ministry of Ayush, Government of India
  2. National Health Portal of India
  3. Ministry of Health and Family Welfare, Government of India

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, यह बच्चों में गैस के कारण होने वाले दर्द को दूर करने का एक बेहद सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय है।

यदि दर्द पेट के निचले दाहिने हिस्से में लगातार बना रहे और छूने पर बच्चा चीख उठे, तो यह अपेंडिक्स हो सकता है।

हाँ, पेट में कीड़े होने पर बच्चों को अक्सर हल्का-हल्का पेट दर्द, भूख न लगना और चिड़चिड़ापन रहता है।

पेट दर्द के साथ हरी या पीली उल्टी होना किसी गंभीर रुकावट या इन्फेक्शन का संकेत है, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

 पेट साफ न होने या मल बहुत सख्त होने के कारण बच्चों की आंतों में तेज मरोड़ उठ सकती है।

दर्द के समय बच्चे को खिचड़ी, मूंग दाल का सूप या दलिया जैसा बिल्कुल हल्का और सुपाच्य भोजन ही दें।

नवजात शिशुओं से लेकर 5 साल तक के बच्चों में गैस, कोलिक और पाचन की गड़बड़ी सबसे ज्यादा होती है।

स्कूल जाने का डर, परीक्षा का तनाव या घर का कोई डर भी बच्चों में पेट दर्द का कारण बन जाता है।

लगातार दस्त और दर्द के कारण शरीर में पानी की कमी न हो, इसलिए ओआरएस का घोल देना बेहद जरूरी है।

अगर पेट दर्द के साथ तेज बुखार हो, बच्चा सुस्त पड़ जाए या पॉटी में खून आए, तो तुरंत अस्पताल जाएं।

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