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PCOS वाली महिलाओं को Diabetes के खतरे को हल्के में क्यों नहीं लेना चाहिए?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 21 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 19 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
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हार्मोनल पिल्स (पिल्स) और शुगर कम करने वाली गोलियों का इस्तेमाल PCOS (पीसीओएस) और डायबिटीज जैसी बीमारियों में काफी आम है। ये दवाएँ कुछ समय के लिए माहवारी को नियमित कर देती हैं या ब्लड शुगर को फौरी तौर पर कम कर देती हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि वह पूरी तरह ठीक हो गई है और उसकी परेशानी खत्म हो गई है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मरीज़ को दवा छोड़ने के तुरंत बाद फिर से वज़न बढ़ने लगता है और ब्लड शुगर पहले से भी ज़्यादा बढ़कर वापस आ जाता है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे लगातार दवाओं पर शरीर की निर्भरता, इंसुलिन रेजिस्टेंस, बीमारी कितनी गंभीर है, या सबसे महत्वपूर्ण—प्रजनन तंत्र की खराबी और शरीर के अंदर जमा टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और ओवरीज़ तथा पैंक्रियाज़ की सेहत बनी रहे।

PCOS और डायबिटीज क्या है?

PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) एक ऐसी स्थिति है, जहाँ महिलाओं का हार्मोनल संतुलन और मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह बिगड़ जाता है। जब ओवरीज़ में छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं, तो शरीर में पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) बढ़ने लगता है। इसके साथ ही शरीर इंसुलिन हार्मोन पर ठीक से प्रतिक्रिया करना बंद कर देता है। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं। आमतौर पर महिलाएँ इसका शिकार गलत खानपान, जंक फूड, बहुत ज़्यादा मीठा खाने, या शारीरिक मेहनत न करने के कारण होती हैं। जब इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं होता, तो खून में मौजूद शुगर तेज़ी से बढ़ने लगता है और डायबिटीज का रूप ले लेता है। अंग्रेजी दवाएँ खाने पर कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ लक्षणों को दबाती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस खराब माहौल को ठीक नहीं करतीं जिसमें यह मेटाबॉलिक बीमारी बार-बार पनपती है। दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार इस्तेमाल करना प्रजनन क्षमता और किडनी पर बुरा असर डालता है।

PCOS से जुड़ी बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

महिलाओं की इस तकलीफ से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं:

  • इंसुलिन रेजिस्टेंट PCOS: यह सबसे आम है। इसमें शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे डायबिटीज का खतरा सबसे ज़्यादा होता है।
  • पोस्ट-पिल PCOS: यह गर्भनिरोधक गोलियाँ छोड़ने के बाद उभरता है, जब ओवरीज़ खुद से काम करना बंद कर देती हैं।
  • इंफ्लेमेटरी PCOS: इसमें शरीर में लगातार अंदरूनी सूजन रहती है, जिससे ओवरीज़ ज़्यादा एंड्रोजन बनाती हैं।
  • टाइप 2 डायबिटीज: इंसुलिन रेजिस्टेंस के लंबे समय तक रहने के कारण ब्लड शुगर का स्थायी रूप से बढ़ जाना।
  • प्री-डायबिटीज: यह वह स्थिति है जब ब्लड शुगर सामान्य से ज़्यादा होता है, लेकिन इतना नहीं कि उसे डायबिटीज कहा जाए।

PCOS और डायबिटीज के लक्षण और संकेत

बार-बार माहवारी का बिगड़ना या लगातार थकान कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं:

  • लगातार थकान और कमज़ोरी: विशेषकर खाना खाने के बाद या रात के समय असहनीय सुस्ती आना।
  • वज़न बढ़ना: पेट के आसपास चर्बी जमा होना और लाख कोशिशों के बाद भी वज़न कम न होना।
  • माहवारी में अनियमितता: पीरियड्स का बहुत देर से आना, न आना या बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होना।
  • त्वचा का रंग बदलना: गर्दन या अंडरआर्म्स के आसपास की त्वचा का काला या मोटा पड़ जाना (अकैन्थोसिस नाइग्रिकन्स), जो इंसुलिन रेजिस्टेंस का सीधा संकेत है।
  • दवा का असर खत्म होते ही वापसी: गोलियाँ बंद करते ही कुछ ही दिनों के भीतर माहवारी का रुक जाना और शुगर का फिर से खतरनाक स्तर पर पहुँच जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

बार-बार शुगर बढ़ने और PCOS के मुख्य कारण क्या हैं?

प्रजनन तंत्र खराब होने और शुगर बढ़ने के पीछे सिर्फ मीठा खाना नहीं, बल्कि कई अंदरूनी कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • पाचन की अशुद्धि: गलत खान-पान जैसे मैदा, जंक फूड या भारी भोजन से शरीर में टॉक्सिन्स (आम) बनते हैं। यह गंदगी रस और आर्तव धातु (प्रजनन तंत्र) को दूषित कर देती है और बीमारियों को पनपने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करती है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: जब ओवरीज़ और कोशिकाएँ इंसुलिन को पहचानने से इनकार कर देती हैं, तो खून में शुगर तैरता रहता है।
  • गोलियों पर निर्भरता: तुरंत राहत के लिए लंबे समय तक भारी दवाएँ और हार्मोनल पिल्स खाने से शरीर की प्राकृतिक कार्यक्षमता नष्ट हो जाती है।
  • मोटापा और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल: खून में ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल और फैट ओवरीज़ के लिए सबसे बड़ा खतरा होता है।
  • खराब जीवनशैली: दिन भर बैठे रहना, शारीरिक मेहनत न करना और देर रात तक जागना।

इसके जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

PCOS और डायबिटीज को अगर अनदेखा किया जाए या सही समय पर इलाज न मिले, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • बाँझपन (इनफर्टिलिटी): ओवरीज़ से अंडे न निकलने के कारण गर्भधारण में भारी समस्या आना।
  • हृदय रोग का खतरा: यह नसों में ब्लॉकेज पैदा कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम तेज़ी से बढ़ता है।
  • एंडोमेट्रियल कैंसर: माहवारी समय पर न आने से गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है, जिससे आगे चलकर कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।
  • मानसिक तनाव और चिंता: जीवन भर की बीमारी, अनचाहे बाल और वज़न के डर से डिप्रेशन और नींद की समस्या हो सकती है।
  • किडनी और नसों का डैमेज: लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर किडनी के फिल्टर करने की क्षमता को नष्ट कर देता है और नसों में सुन्नपन लाता है।

समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से PCOS और डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर या ओवरीज़ की दिक्कत नहीं है। यहाँ यह माना जाता है कि जब शरीर में कफ और वात दोष बिगड़ जाते हैं तथा जठराग्नि (पाचन अग्नि) कमज़ोर हो जाती है, तब ऐसी परेशानी आती है। डॉक्टर नाड़ी, जीभ और पेट की स्थिति देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं शरीर में टॉक्सिन्स (आम) तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने रस धातु और आर्तव धातु (प्रजनन चैनलों) को पूरी तरह दूषित कर दिया है। जब तक यह दूषित वसा शरीर में जमा रहेगी, सिस्ट बनने और इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हमेशा बनी रहेगी। आयुर्वेद में बस लक्षण मिटाना और गोलियाँ बढ़ाना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, मेटाबॉलिज़्म की शुद्धि हो और ओवरीज़ प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बनें।

PCOS और डायबिटीज के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रजनन तंत्र को स्वस्थ बनाने और ब्लड शुगर को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • शतावरी: यह महिलाओं के लिए प्रकृति का सबसे बेहतरीन टॉनिक है। यह हार्मोन को संतुलित करती है और प्रजनन तंत्र को ताकत देती है।
  • गिलोय: आयुर्वेद में इसे बहुत शक्तिशाली माना गया है। यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाती है और ब्लड शुगर को प्राकृतिक रूप से कम करती है।
  • कांचनार गुग्गुल: सिस्ट और ग्रंथियों की सूजन को खत्म करने के लिए यह बहुत ताकतवर औषधि है। यह गहराई में जाकर रुकावट को खत्म करती है।
  • करेला और विजयसार: यह खून से शुगर को कम करने और इंसुलिन रेजिस्टेंस को खत्म करने का एक बहुत ही लाभकारी उपाय है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म 

  • गहरी सफाई और मेटाबॉलिक शुद्धि: जब PCOS सालों पुराना हो और किसी दवा से ठीक न हो रहा हो, तो जीवा आयुर्वेद में 'विरेचन' और 'बस्ती' विशेषकर उत्तर बस्ती जैसी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • इलाज का समय: यह 7 से 15 दिनों तक चलने वाली शरीर के अंदरूनी अंगों और पेट की गहरी सफाई की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • टॉक्सिन्स बाहर निकालना: विरेचन प्रक्रिया में मरीज़ को औषधीय घी पिलाकर विशेष जड़ी-बूटियों के माध्यम से मल त्याग कराया जाता है। इससे ओवरीज़ और आंतों में जमा पुरानी गंदगी बाहर निकल जाती है।
  • आंतरिक राहत: अंदरूनी सफाई के साथ पेट के अंगों की मालिश और भाप दी जाती है। इससे शरीर का भारीपन दूर होता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस जड़ से खत्म होने लगता है।

PCOS और डायबिटीज के लिए सही खान पान 

क्या खाएँ?

  • कड़वी और हल्की सब्ज़ियाँ: करेला, परवल, लौकी और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ खाएँ, कड़वा रस खून को साफ करता है।
  • पुराना अनाज और मूंग दाल: जौ, रागी और छिलके वाली हरी मूंग की दाल का सूप पिएँ, यह पेट को हल्का रखता है।
  • मेथी और दालचीनी का प्रयोग: सुबह खाली पेट मेथी का पानी पिएँ या खाने में दालचीनी का इस्तेमाल करें, यह शुगर कंट्रोल और सिस्ट गलाने में बेहतरीन है।

क्या न खाएँ?

  • मीठा और प्रोसेस्ड फूड: चीनी, मिठाइयाँ, पैकेटबंद जूस और मैदे से बनी चीज़ों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, ये सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।
  • डेयरी और विरुद्ध आहार: बाज़ार का दूध और दूध के साथ नमकीन चीज़ें या बेमेल भोजन कभी न खाएँ, यह कफ बढ़ाता है और पाचन को दूषित करता है।
  • तला-भुना और भारी भोजन: पूरी, पराठे, जंक फूड और ज़्यादा तेल वाली चीज़ें शरीर पर बोझ डालती हैं और चर्बी बढ़ाती हैं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में मेटाबॉलिक रोगों का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे शुगर कितनी पुरानी है, सिस्ट का आकार कितना बड़ा है, और मरीज़ का शरीर कितना कमज़ोर है।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर समस्या नई है और शुगर अभी बॉर्डरलाइन पर है, तो आमतौर पर 1 से 2 महीनों में ही आपका शरीर हल्का होने लगता है और माहवारी नियमित होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर डायबिटीज बहुत पुरानी है और पीसीओएस की वजह से वज़न काफी ज़्यादा है, तो पूरी तरह ठीक होने और दवाइयाँ कम होने में 3 से 6 महीने या उससे ज़्यादा भी लग सकते हैं।
  • उपचार का तरीका: इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से पाचन सुधारने वाली जड़ी-बूटियाँ, सही खानपान और योग शामिल होता है।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर अपनी डाइट और लाइफस्टाइल का कड़ाई से पालन करती है, तो हार्मोन दुरुस्त हो जाते हैं और भविष्य में बीमारी के वापस लौटने की संभावना खत्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम श्वेता है और मैं नोएडा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। मुझे साल 2006 से पीसीओडी की शिकायत थी, जिसके लिए मैंने काफी सालों तक एलोपैथिक ट्रीटमेंट किया, लेकिन मुझे कोई रिजल्ट नहीं मिला। फिर मैंने होम्योपैथिक ट्रीटमेंट भी लिया, पर उससे भी कोई आराम नहीं मिला। 

तभी मैंने टीवी पर जीवा आयुर्वेदा का प्रोग्राम देखा। उसके बाद मैं जीवा के नोएडा ब्रांच में गई, जहाँ मेरी मुलाकात डॉक्टर अभिलाषा तिवारी से हुई। उन्होंने मेरी प्रॉब्लम को बहुत अच्छे से समझा और मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया।मैंने साल 2017 से यह ट्रीटमेंट शुरू किया था। डेढ़ साल तक इलाज लेने के बाद मुझे पीसीओडी में बहुत अच्छा सुधार और रिजल्ट मिला। पीसीओडी का ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद मैंने इनफर्टिलिटी के लिए ट्रीटमेंट शुरू किया। जीवा के इलाज की मदद से आज मेरा एक छोटा सा बेटा है। मैं इस सबके लिए डॉक्टर अभिलाषा तिवारी और पूरे जीवा परिवार को धन्यवाद करना चाहती हूँ।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

इस बीमारी में आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज का नज़रिया बिल्कुल अलग है:

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
उपचार का दृष्टिकोण हार्मोन देकर लक्षणों को नियंत्रित करना बीमारी की जड़ पर काम करना
कार्य करने का तरीका हार्मोनल गोलियों से माहवारी लाना शरीर को अंदर से संतुलित कर प्रजनन तंत्र सुधारना
मूल कारण पर प्रभाव मेटाबॉलिज़्म की कमज़ोरी को ठीक नहीं करता कफ दोष और दूषित पाचन को संतुलित करता है
उपचार विधियाँ हार्मोनल दवाइयाँ जड़ी-बूटियाँ और संतुलित आहार
दुष्प्रभाव दवा छोड़ते ही समस्या लौटना, ओवरीज़/किडनी पर असर सामान्यतः सुरक्षित, प्राकृतिक सुधार
परिणाम अस्थायी नियंत्रण साइकिल नियमित, प्रजनन तंत्र में सुधार
समय जल्दी असर थोड़ा समय लगता है, लेकिन दीर्घकालिक लाभ

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

PCOS और डायबिटीज होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • माहवारी लगातार 3-4 महीने तक न आए।
  • ब्लड शुगर का स्तर अचानक बहुत ज़्यादा बढ़ या घट जाए।
  • वज़न तेज़ी से बढ़ने लगे और कंट्रोल न हो।
  • गर्दन और अंडरआर्म्स की त्वचा बहुत ज़्यादा काली और मोटी होने लगे।
  • घरेलू उपचार या परहेज़ करने के बाद भी चेहरे पर बाल आने की समस्या बढ़ती ही जा रही हो।

समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और अंगों को स्थायी रूप से खराब होने से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से PCOS और डायबिटीज का कनेक्शन मुख्य रूप से कफ दोष के बिगड़ने तथा जठराग्नि के कमज़ोर होने से जुड़ा होता है। गलत खान-पान, बैठे रहने वाली जीवनशैली और कमज़ोर पाचन से शरीर में टॉक्सिन्स (आम) बनते हैं जो ओवरीज़ के काम को कमज़ोर कर देते हैं। यही रुकावट इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं होने देती, जिससे शुगर बढ़ती है। सिर्फ बाहरी गोलियाँ खाने से माहवारी आ जाती है लेकिन बीमारी मरती नहीं है। इलाज में पाचन की शुद्धि और ओवरीज़ को ताकत देना सबसे ज़्यादा आवश्यक है। इसमें कफ को संतुलित करना, हल्का खाना खाना, कांचनार-गिलोय जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना और शारीरिक मेहनत वाली दिनचर्या अपनाना शामिल है जिससे बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, अगर पाचन और ओवरीज़ की शुद्धि के लिए सही आयुर्वेदिक औषधियाँ खाई जाएँ और डाइट का कड़ाई से पालन किया जाए, तो इसे रिवर्स किया जा सकता है।

नहीं, गोली सिर्फ कृत्रिम रूप से माहवारी लाती है। अंदरूनी तौर पर ओवरीज़ और पैंक्रियाज़ को ताकत दिए बिना यह बीमारी बनी रहती है।

हाँ, नया और पॉलिश किया हुआ सफेद चावल शरीर में तेज़ी से शुगर और फैट बढ़ाता है। आयुर्वेद में पुराना अनाज खाने की सलाह दी जाती है।

हाँ, शतावरी सबसे अच्छी प्राकृतिक जड़ी-बूटी है जो हार्मोन को संतुलित करती है और प्रजनन तंत्र को ताकत देती है।

हाँ, मैदे और केमिकल वाले जंक फूड शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ देते हैं जिससे शरीर में टॉक्सिन्स और चर्बी तेज़ी से बढ़ती है।

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार रात में देर तक जागने से शरीर का वात और पित्त बिगड़ता है, जो शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को रोक देता है।

बिल्कुल, शारीरिक मेहनत न करने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा पड़ जाता है जो फैट जमा होने और इंसुलिन रेजिस्टेंस के लिए अनुकूल माहौल देता है।

हाँ, मेथी दाना पाचन तंत्र को ठीक करता है और शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाकर शुगर को कम करता है।

हाँ, लंबे समय तक ओवरीज़ में सिस्ट रहने और अंडे न बनने के कारण गर्भधारण में भारी समस्या आ सकती है।

हाँ, पेट साफ न होने और कब्ज़ से शरीर में गंदगी जमा होती है, जो ओवरीज़ के काम को भारी कर देती है और मेटाबॉलिज़्म बिगाड़ देती है।

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