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त्वचा एलर्जी बार-बार – क्या शरीर अंदर से संवेदनशील हो चुका है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आप अचानक देखते हैं कि आपकी त्वचा एकदम लाल हो गई है। भयंकर खुजली होने लगती है। यह सच में बहुत डरावना होता है। आप घबराकर तुरंत एक एंटी-एलर्जी गोली खा लेते हैं। कुछ दिन तक सब बिल्कुल ठीक रहता है। आपको लगता है कि बीमारी चली गई। लेकिन फिर अचानक धूल का एक बारीक कण या कोई खास खाने की चीज इसे वापस ले आती है। यह बहुत ही ज्यादा परेशान करने वाला और थकाऊ अनुभव है। आप हर वक्त डर के साये में जीते हैं। डॉक्टर बस एंटी-हिस्टामिन गोलियाँ लिख देते हैं।

लेकिन यह एलर्जी सिर्फ बाहर की धूल या प्रदूषण का नतीजा बिल्कुल नहीं है। आपका शरीर अंदर से बहुत ज्यादा अति-संवेदनशील (Hypersensitive) हो चुका है। आपका इम्यून सिस्टम पूरी तरह से पागल सा हो गया है। वह अपने और पराए की पहचान भूल गया है। सिर्फ गोलियों से इस सिस्टम को सुन्न कर देना कोई इलाज नहीं है। प्राकृतिक रूप से अपने खून को साफ करके ही आप अपनी एंग्जायटी को मैनेज कर सकते हैं। आप ठीक वैसे ही अपनी त्वचा को हमेशा के लिए शांत कर सकते हैं, जैसे पुराने से पुराने माइग्रेन से राहत पाई जा सकती है।

बार-बार होने वाली यह त्वचा एलर्जी आखिर क्या है?

एलर्जी का सीधा सा मतलब है कि आपका शरीर किसी बहुत ही आम और हानिरहित चीज को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान बैठा है। वह उस पर बहुत आक्रामक रूप से हमला करता है।

  • अति-संवेदनशील खून: जब आपका खून अंदर से दूषित होता है। तो शरीर धूल, धूप या पोलन को देखकर बहुत ज्यादा भड़क जाता है और ओवररिएक्ट करता है।
  • हिस्टामिन का तूफान: आपका इम्यून सिस्टम बचाव के लिए हिस्टामिन नाम का केमिकल बहुत भारी मात्रा में छोड़ता है। यही केमिकल त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन और खुजली पैदा करता है।

यह भयंकर एलर्जी कितने प्रकार की हो सकती है?

यह परेशानी अलग-अलग रूपों में आपके शरीर पर हमला करती है। ट्रिगर्स और अंदरूनी गर्मी के आधार पर त्वचा अलग-अलग तरह से रिएक्ट करती है।

  • अर्टिकेरिया (शीतपित्त): अचानक पूरी त्वचा पर लाल रंग के बड़े-बड़े और सूजे हुए चकत्ते उभर आना। यह बिल्कुल मधुमक्खियों के डंक जैसे लगते हैं।
  • कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस: किसी खास साबुन, परफ्यूम या सिंथेटिक कपड़े को छूने मात्र से वहां की त्वचा का छिल जाना और लाल हो जाना।
  • एटोपिक एक्जिमा: त्वचा का बहुत ज्यादा रूखा और खुरदरा हो जाना। खुजलाने पर वहां से अक्सर खून और पानी निकलने लगता है।
  • फूड एलर्जी के चकत्ते: कुछ खास खाने (जैसे पीनट्स या सीफूड) के तुरंत बाद शरीर पर दाने निकल आना।

इसके लक्षण और संकेत कैसे पहचानें?

जब आपका शरीर अंदर से लड़ रहा होता है, तो आपकी त्वचा डरावने संकेत देती है। इन संकेतों को समय रहते समझना बहुत जरूरी है।

  • अचानक बहुत तेज खुजली का शुरू होना जो आपकी बर्दाश्त के बिल्कुल बाहर हो जाए।
  • त्वचा का एकदम लाल टमाटर जैसा हो जाना और छूने पर बहुत गर्म महसूस होना।
  • इस भयंकर तनाव के बीच कई बार महिलाओं को हार्मोनल असंतुलन का सामना भी करना पड़ जाता है।
  • लगातार खुजलाते हुए त्वचा का कट जाना और वहां से चिपचिपा पानी रिसना।
  • एलर्जी वाली जगह पर, खासकर आंखों और होंठों के आस-पास भारी सूजन आ जाना।

एलर्जी बार-बार लौटने के मुख्य कारण क्या हैं?

यह एलर्जी सिर्फ बाहर की हवा से नहीं आती। असली अपराधी आपके शरीर के अंदर छिपी गंदगी और आपकी खराब जीवनशैली है।

  • कमजोर पेट और टॉक्सिन्स: जब आपका पाचन तंत्र खराब होता है, तो पेट में 'आम' (टॉक्सिन) बनता है। यही चिपचिपी गंदगी खून को पूरी तरह अशुद्ध कर देती है।
  • स्ट्रेस का असर: लगातार चिंता में रहने से इम्युनिटी कंफ्यूज हो जाती है। तनाव के प्रभाव शरीर के इम्यून रिस्पॉन्स को भड़का देते हैं।
  • नींद का पूरा न होना: काम के चक्कर में लगातार नींद की कमी आपके शरीर को अंदर से बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा और रिएक्टिव बना देती है।
  • विरुद्ध आहार: गलत खाने का कॉम्बिनेशन (जैसे दूध के साथ खट्टा) खून को तुरंत दूषित कर देता है।

इसे नज़रअंदाज़ करने पर क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

अगर आप सिर्फ गोलियां खाकर इस एलर्जी को म्यूट (Mute) करते रहेंगे, तो इसके परिणाम भविष्य में बहुत भयंकर होंगे।

  • एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis): एलर्जी का एकदम से इतना बढ़ जाना कि गले में सूजन आ जाए और सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगे।
  • स्थायी काले दाग: बार-बार लाल चकत्ते पड़ने से त्वचा वहां से हमेशा के लिए काली, मोटी और भद्दी हो जाती है।
  • स्टेरॉयड की लत: रोज-रोज दवाइयां खाने से शरीर उन गोलियों का आदी हो जाता है। बिना गोली के आप जी ही नहीं पाते। इससे अक्सर वजन घटाने की प्रक्रिया रुक जाती है और शरीर फूलने लगता है।

इसका निदान कैसे किया जाता है?

आम डॉक्टर बस एलर्जी वाली जगह को देखकर गोली दे देते हैं। लेकिन खून की असली स्थिति को जानना बहुत ज्यादा जरूरी है।

  • ब्लड टेस्ट (IgE लेवल): यह टेस्ट साफ बताता है कि शरीर के अंदर एलर्जी पैदा करने वाले एंटीबॉडीज का स्तर कितना ज्यादा बढ़ा हुआ है।
  • पैच टेस्ट: यह देखने के लिए कि आपकी त्वचा किस खास केमिकल या धातु पर एकदम से भड़क रही है।
  • लिवर फंक्शन टेस्ट: यह जांचने के लिए कि कहीं आपका लिवर शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में फेल तो नहीं हो रहा है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आयुर्वेद सिर्फ ऊपरी चकत्तों पर ध्यान देकर उन्हें सुन्न नहीं करता। यह खून की गहराई और शरीर की प्राकृतिक गर्मी तक जाता है।

  • शीतपित्त का प्रकोप: आयुर्वेद में इसे शीतपित्त या उदर्द कहते हैं। जब सर्द और गर्म हवाएं शरीर में वात और कफ को बिगाड़ देती हैं, तो चकत्ते उभरते हैं।
  • अग्नि की कमजोरी: जब आपकी पाचन अग्नि बिल्कुल ठंडी पड़ जाती है, तो शरीर का रस दूषित हो जाता है और खून में विष भर जाता है।
  • त्वचा में टॉक्सिन्स: यह दूषित रस और बिगड़ा हुआ पित्त त्वचा की परतों में जाकर बस जाता है। आयुर्वेद इसी गंदगी को बाहर निकालता है। यही हर तरह के प्राकृतिक उपचार का असली और सबसे मजबूत आधार है।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

हम सिर्फ आपके हिस्टामिन को ब्लॉक करने वाली दवा नहीं देते। हम आपके पूरे शरीर को अंदर से मजबूत और समझदार बनाते हैं।

  • रक्त शोधन: खून की बहुत गहराई से सफाई करना। इससे त्वचा में जमा हुए सारे टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं।
  • दोष संतुलन: शरीर में भड़की हुई गर्मी (पित्त) और बिगड़े हुए वात को बिल्कुल शांत करना।
  • इम्युनिटी रिसेट: आपके पगलाए हुए इम्यून सिस्टम को शांत करना ताकि वह हर छोटी बात पर न भड़के।
  • मानसिक शांति: बीमारी के भारी तनाव को कम करने के लिए खास तनाव कम करने की विधियां अपनाई जाती हैं।

एलर्जी के लिए 4 सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां कौन सी हैं?

प्रकृति ने हमें शरीर की अति-संवेदनशीलता को कम करने के लिए बहुत जादुई चीजें दी हैं। ये आपको एलोपैथिक दवाइयों की तरह सुस्त या नींद में नहीं डालती हैं।

  • हरिद्रा (हल्दी): यह प्रकृति की सबसे अच्छी और ताकतवर एंटी-एलर्जिक दवा है। यह सीधे तौर पर हिस्टामिन को ब्लॉक करती है और त्वचा की सूजन मिटाती है।
  • नीम: यह खून को साफ करने वाला दुनिया का सबसे ताकतवर पेड़ है। यह त्वचा की गहराई में जाकर पित्त की भयंकर गर्मी को बिल्कुल ठंडा कर देता है।
  • खदिर: यह आयुर्वेद में त्वचा रोगों का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह खून की अशुद्धियों को तुरंत सोख लेता है और भयंकर खुजली को रोकता है।
  • गिलोय: यह एक बहुत ही बेहतरीन इम्युनोमॉड्यूलेटर है। यह आपके बिगड़े हुए इम्यून सिस्टम को समझदार बनाता है ताकि वह बेवजह अपने ही शरीर पर हमला न करे।

आयुर्वेदिक थेरेपी कैसे काम करती है?

जब शरीर का खून बहुत ज्यादा गंदा हो जाए, तो सिर्फ गोलियां काम नहीं करतीं। पंचकर्म की ये प्राचीन विधियां खून को सीधे तौर पर साफ करती हैं।

  • विरेचन: यह एक बहुत ही शक्तिशाली पंचकर्म चिकित्सा है। इसके जरिए लिवर में जमा हुआ सालों पुराना विषैला पित्त दस्त के रास्ते पूरी तरह से बाहर निकाल दिया जाता है।
  • अभ्यंग: खास औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। यह रूखी त्वचा को गहरी नमी देता है और एलर्जी के ट्रिगर्स को रोकता है।
  • लेपन: प्रभावित और लाल त्वचा पर ठंडी औषधीय जड़ी-बूटियों का लेप लगाया जाता है। यह त्वचा को बाहर से तुरंत रिपेयर करता है और जलन खींच लेता है।

हार्मोनल और मेटाबॉलिक संतुलन के लिए डाइट प्लान

आप जो खाते हैं, वह सीधे आपके खून को बनाता है। एलर्जी को शांत रखने के लिए एक बहुत ही साफ और पित्त-शामक डाइट लेना जरूरी है।

पावर फूड्स:

  • कड़वी सब्जियाँ: करेला, परवल और लौकी। यह खून को साफ करने और लिवर को धोने का सबसे प्राकृतिक तरीका है।
  • गाय का शुद्ध घी: यह शरीर की अंदरूनी खुश्की को खत्म करता है और आंतों में एक सुरक्षा परत बनाता है।
  • पाचन सहायक: पेट को हर हाल में साफ रखने के लिए त्रिफला के फायदे जानकर उसका सेवन जरूर करें।

इन चीजों से बिल्कुल बचें:

  • खट्टी और फर्मेंटेड चीजें: पुराना दही, अचार, खट्टा सिरका और शराब। यह शरीर में पित्त की गर्मी को तुरंत भड़का देते हैं।
  • पैकेट बंद खाना: इसमें मौजूद प्रिजर्वेटिव्स सीधा एलर्जी को ट्रिगर करते हैं। इससे पेट में भयंकर पाचन संबंधी समस्याएं भी शुरू हो जाती हैं।
  • बेमेल भोजन (विरुद्ध आहार): दूध के साथ नमक, मछली या खट्टे फलों का सेवन। आयुर्वेद में इसे एलर्जी और चर्म रोग का सबसे बड़ा कारण माना गया है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जांच कैसे करते हैं?

जब एंटी-एलर्जी गोलियाँ काम करना बंद कर देती हैं, तब हम आपकी बीमारी को नाड़ी से पकड़ते हैं। हम शरीर की असली चीख को सुनते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि आपके अंदर खून में कितनी ज्यादा अशुद्धि और पित्त जमा हो गया है।
  • लक्षणों का मूल्यांकन: यह समझना कि आपकी एलर्जी धूप में जाने से बढ़ती है, ठंड से बढ़ती है, या किसी खास चीज को छूने से।
  • लाइफस्टाइल रिव्यू: आपके खाने-पीने के समय को बारीकी से समझना। एक शांत दिमाग की कमी भी एलर्जी को भड़काती है।
  • मूल कारण की पहचान: यह तय करना कि बीमारी सिर्फ बाहरी धूल से है या आपका शरीर अंदर से बहुत ज्यादा रिएक्टिव हो चुका है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपके डर और झल्लाहट को समझते हैं। हमारा लक्ष्य आपको एक बहुत ही सुरक्षित और बिना साइड-इफेक्ट वाला इलाज देना है।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80+ क्लिनिक में आकर डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: घर बैठे वीडियो कॉल से सिर्फ 49 रुपये में बात करें (सामान्य फीस 299 रुपये है)।
  • विस्तृत जांच: आपके पुराने सभी एलर्जी टेस्ट और ब्लड रिपोर्ट्स की हिस्ट्री बहुत ध्यान से सुनी जाती है।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके लिए खास जड़ी-बूटियों, डाइट और तनाव से राहत का एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आपका खून एक दिन में इतना दूषित नहीं हुआ है। शरीर के अंदरूनी सिस्टम को पूरी तरह रिसेट होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपकी खुजली और त्वचा की जलन में बहुत ज्यादा आराम आ जाएगा। रातों की नींद बेहतर होगी और पेट साफ रहने लगेगा।
  • 1 से 3 महीने तक: लाल चकत्ते पड़ने की फ्रीक्वेंसी बहुत कम हो जाएगी। दवाइयों की जरूरत घट जाएगी।
  • 3 से 6 महीने तक: खून पूरी तरह से साफ हो जाएगा। आपका इम्यून सिस्टम बिल्कुल शांत हो जाएगा। आप धूल या मौसम बदलने पर भी परेशान नहीं होंगे।

आप किन परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं?

अगर आप ईमानदारी से आयुर्वेदिक नियमों का पालन करते हैं, तो आपकी त्वचा और जीवन पूरी तरह बदल जाएंगे।

  • बार-बार होने वाली भयंकर एलर्जी और लाल चकत्तों से हमेशा के लिए पक्का छुटकारा।
  • एक बेदाग, कोमल और बिल्कुल शांत त्वचा।
  • शरीर में एक नई और बहुत ही समझदार इम्यूनिटी का निर्माण जो बेवजह नहीं भड़कती।
  • एलर्जी के डर का बिल्कुल खत्म होना और हर मौसम को खुलकर इंजॉय करना।
  • रोज खाई जाने वाली नींद की गोलियों और एंटी-एलर्जिक दवाओं से जीवन भर के लिए आजादी।

मरीज़ों के अनुभव

मैं पिछले 5 वर्षों से त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान थी। मेरी माँ ने आयुर्वेदिक उपचार लेने की सलाह दी, क्योंकि यह बीमारी को जड़ से खत्म करता है। मेरी त्वचा की समस्या से पूरी तरह राहत मिलने के साथ-साथ अन्य समस्याएँ जैसे पैरों का रूखापन, होंठों और हाथों के आसपास एलर्जी तथा डैंड्रफ भी अपने-आप ठीक हो गए। पूर्ण उपचार प्रदान करने के लिए धन्यवाद, जिवा। मेरा पूरा परिवार जिवा का उपचार लेता है और मैं दूसरों को भी इसकी सलाह दूँगी।

तान्या

दिल्ली

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको जिंदगी भर दवाइयों के गुलाम नहीं बनाते। हम आपकी इम्युनिटी को सही रास्ता दिखाकर आपको हमेशा के लिए आज़ाद करते हैं।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ त्वचा को बाहर से शांत नहीं करते। हम आपके खून और लिवर की बहुत गहराई से सफाई करते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास पुराने और जिद्दी त्वचा रोगों के इलाज में सालों का शानदार अनुभव रखने वाले बेहतरीन डॉक्टर हैं।
  • कोई साइड इफेक्ट नहीं: एंटी-हिस्टामिन या स्टेरॉयड की तरह हमारी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां आपको सुस्त नहीं बनातीं।
  • स्थायी समाधान: हमारा लक्ष्य आपको रोज गोलियां खिलाना नहीं है। हमारा लक्ष्य आपको जड़ से हमेशा के लिए ठीक करना है।

आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

यह समझना बहुत जरूरी है कि आप अपने शरीर के साथ कैसा बर्ताव कर रहे हैं। दोनों चिकित्सा पद्धतियों में जमीन-आसमान का अंतर है।

  • आधुनिक चिकित्सा: यह दृष्टिकोण पूरी तरह से हिस्टामिन को ब्लॉक करने वाली दवाइयों और स्टेरॉयड क्रीम पर निर्भर करता है। यह एलर्जी को कुछ समय के लिए सुन्न जरूर कर देता है। लेकिन यह आपके लिवर पर बहुत ज्यादा भार डालता है। दवा का असर खत्म होते ही त्वचा फिर से भड़क जाती है।
  • आयुर्वेद: यह शरीर को खुद को हील करने का पूरा मौका देता है। आयुर्वेद खून की गर्मी को शांत करता है। पेट के टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी समझदार हो जाती है कि वह बेवजह अपने ही शरीर पर आक्रामक होना बंद कर देती है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

एलर्जी हमेशा एक सामान्य खुजली नहीं होती। शरीर के कुछ बहुत ही खतरनाक संकेतों को तुरंत पहचानना बहुत जरूरी है।

  • त्वचा पर लालिमा के साथ-साथ आपके होंठ, जीभ या आंखों पर भयंकर सूजन आ जाए।
  • एलर्जी के कारण आपको सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट या गले में घुटन महसूस हो रही हो (Anaphylaxis)।
  • लगातार खुजलाते-खुजलाते त्वचा फट गई हो और वहां असहनीय दर्द होने लगा हो।
  • लाल चकत्तों के साथ आपको बार-बार बहुत तेज बुखार आ रहा हो।
  • एलर्जी पूरे शरीर पर बहुत तेजी से फैल रही हो और चक्कर आ रहे हों।

निष्कर्ष

हर कुछ दिनों में एलर्जी का लौटकर वापस आ जाना कोई मामूली बात नहीं है। यह आपके शरीर की एक बहुत ही गंभीर पुकार है। आपका इम्यून सिस्टम पूरी तरह से भटक चुका है और आपका खून गंदगी से भर गया है। रोज एक एंटी-एलर्जी गोली खाकर इस अलार्म को सिर्फ म्यूट (Mute) करने की कोशिश मत कीजिए। इससे समस्या अंदर ही अंदर और ज्यादा जटिल होती जाएगी। अपनी जीवनशैली को सुधारें। अपने पेट को साफ रखें और विरुद्ध आहार से बचें। जीवा आयुर्वेद की प्राकृतिक और सुरक्षित जड़ी-बूटियों को अपनाकर अपने खून को अंदर से शुद्ध करें। आज ही जीवा से संपर्क करें और हमेशा के लिए एक शांत, खुजली-रहित और दमकती हुई त्वचा का आनंद लें।

FAQs

बिल्कुल नहीं। रोज ये गोलियां खाने से आपका लिवर और किडनी बहुत ज्यादा थक जाते हैं। शरीर इन दवाओं का पूरी तरह आदी हो जाता है और प्राकृतिक रूप से बीमारी से लड़ना भूल जाता है।

हल्दी प्राकृतिक रूप से दुनिया का एक बहुत शक्तिशाली एंटी-हिस्टामिन और एंटी-इन्फ्लेमेटरी मसाला है। यह शरीर की अति-संवेदनशीलता को कम करती है, सूजन मिटाती है और खून को एकदम शुद्ध बनाती है।

सौ प्रतिशत। अगर आपका खाना ठीक से नहीं पच रहा है, तो वह पेट में टॉक्सिन (आम) बनाता है। यह गंदगी सीधा खून में मिलकर इम्युनिटी को कंफ्यूज कर देती है, जिससे त्वचा भड़कती है।

खट्टी और फर्मेंटेड चीजें (जैसे पुराना दही, अचार, सिरका) शरीर में तुरंत पित्त (गर्मी) को बढ़ा देती हैं। यह अतिरिक्त गर्मी खून में मिलकर आपकी खुजली और त्वचा के लाल चकत्तों को बहुत ज्यादा भड़का देती है।

हां। तनाव लेने से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है। इससे नर्वस सिस्टम हाइपरएक्टिव हो जाता है और इम्यून सिस्टम डगमगा जाता है, जिससे त्वचा पर एलर्जी के लक्षण और भी ज्यादा गंभीर हो जाते हैं।

विरेचन पंचकर्म में औषधियों के जरिए लिवर और आंतों में जमा हुआ सालों पुराना विषैला पित्त मल के रास्ते बाहर निकाला जाता है। पेट साफ होते ही खून की गर्मी शांत हो जाती है और इम्युनिटी सुधरती है।

हां। आयुर्वेद में इसे शीतपित्त कहते हैं। जब ठंडी हवा शरीर के बिगड़े हुए पित्त (अंदरूनी गर्मी) से टकराती है, तो त्वचा के नीचे रिएक्शन होता है और लाल, खुजलीदार चकत्ते उभर आते हैं।

बार-बार लाल चकत्ते पड़ने और बार-बार खुजलाने के कारण त्वचा वहां खुद को बाहरी डैमेज से बचाने के लिए मोटी और काली हो जाती है। इसे पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन (PIH) कहते हैं।

खुजली और भयंकर जलन में तो कुछ ही हफ्तों में भारी आराम मिल जाता है। लेकिन खून को पूरी तरह से शुद्ध होने और इम्युनिटी को अंदर से रिसेट होने में कम से कम तीन से छह महीने लगते हैं।

बिल्कुल। आयुर्वेद में इसे 'विरुद्ध आहार' कहा गया है। दूध और नमक या खट्टे फलों का कॉम्बिनेशन शरीर में जाकर खून को बहुत तेजी से दूषित करता है जो सीधे तौर पर त्वचा रोगों और एलर्जी को जन्म देता है।

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