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Periods के दौरान painkiller रोज़ लेना सही है या cause समझना जरूरी है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 03 Aug, 2026
  • category-iconUpdated on 03 Aug, 2026
  • category-iconWomen's Health
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क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि माहवारी शुरू होते ही पेट और कमर में ऐसा दर्द उठता है कि आप सीधे मेडिकल स्टोर की तरफ भागती हैं? आजकल हर दूसरी लड़की और महिला पीरियड्स के दिनों में अपने पर्स में दर्द की गोलियाँ रखती है। दर्द इतना भयंकर होता है कि कोई काम करना या सीधा खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एक छोटी-सी गोली जादू की तरह काम करती है और दर्द गायब हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर महीने ये दवाइयाँ खाना आपके शरीर के अंदर क्या कर रहा है? इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि दर्द को दबाना सही है या इसकी असली वजह जानना ज़्यादा ज़रूरी है।

डॉक्टरों और विशेषज्ञों की क्या राय है?

मेडिकल फील्ड के बड़े विशेषज्ञों और स्त्री रोग डॉक्टरों का स्पष्ट मानना है कि हर महीने दर्द की गोलियों पर निर्भर रहना एक बहुत बड़ी गलती है। वे बताते हैं कि माहवारी का दर्द एक हद तक प्राकृतिक होता है, लेकिन अगर यह दर्द आपको रोज़मर्रा के काम करने से रोक रहा है, तो यह किसी अंदरूनी बीमारी का इशारा हो सकता है। डॉक्टरों की राय में, जब लड़कियाँ सिर्फ दवा खाकर दर्द दबा देती हैं, तो वे असल बीमारी को अंदर ही अंदर बढ़ने का मौका देती हैं। दर्द की गोली सिर्फ कुछ घंटों का आराम देती है, यह उस परेशानी को कभी जड़ से खत्म नहीं करती।

क्या पीरियड्स में रोज़ पेनकिलर लेना सही है?

यह एक ऐसा सवाल है जो हर उस महिला के मन में आता है जो दर्द सहती है। इसका सीधा सा जवाब है कि रोज़ाना और हर महीने पेनकिलर लेना बिल्कुल भी सही नहीं है। जब आप दर्द को दबाने के लिए लगातार दवा खाती हैं, तो आपका शरीर उसका आदी हो जाता है। कुछ समय बाद एक गोली से असर नहीं होता और आपको भारी डोज़ लेनी पड़ती है। इसके अलावा, दर्द शरीर की एक भाषा है। आपका शरीर दर्द के ज़रिए आपको बता रहा होता है कि अंदर गर्भाशय या नसों में कुछ गड़बड़ चल रही है। अगर आप उस आवाज़ को दवा से दबा देंगी, तो आप कभी असली बीमारी तक पहुँच ही नहीं पाएँगी।

कितने प्रतिशत महिलाएँ दर्द की दवा पर निर्भर हैं?

यह जानना आपके लिए बहुत चौंकाने वाला हो सकता है कि माहवारी के दर्द को दूर करने के लिए कितनी महिलाएँ सीधा गोलियों का सहारा लेती हैं। हाल ही में हुए स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि लगभग 75% महिलाएँ अपने पीरियड्स के पहले और दूसरे दिन पेनकिलर ज़रूर खाती हैं। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत में बाँटें, तो 45% मामलों में महिलाएँ ऑफिस या कॉलेज जाने की मजबूरी के कारण दवा खाती हैं। तीस प्रतिशत मामलों में घर का काम करने के दबाव में दर्द दबाया जाता है। बचे हुए पच्चीस प्रतिशत मामलों में दर्द सच में इतना भयंकर होता है कि उनके पास गोली खाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।

आखिर पीरियड्स में असहनीय दर्द क्यों होता है?

माहवारी में दर्द होना कोई हवा-हवाई बात नहीं है, इसके पीछे पूरा विज्ञान काम करता है। पीरियड्स के दौरान आपके गर्भाशय को अपनी अंदरूनी परत बाहर निकालने के लिए सिकुड़ना पड़ता है। इस सिकुड़न को करवाने के लिए शरीर में प्रोस्टाग्लैंडीन (Prostaglandin) नाम का एक रसायन बनता है। जिन महिलाओं के शरीर में यह रसायन बहुत ज़्यादा मात्रा में बनने लगता है, उन्हें पेट और कमर में बहुत तेज़ और असहनीय दर्द होता है। इसके अलावा कई बार खून के बड़े थक्के बाहर निकलने में भी गर्भाशय की नसों पर भारी दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से आपको ऐसा लगता है जैसे पेट में सुइयाँ चुभ रही हों।

किन गंभीर लक्षणों को बिल्कुल अनदेखा न करें?

हल्का दर्द होना आम बात है, लेकिन कभी-कभी शरीर कुछ ऐसे इशारे देता है जिन्हें सिर्फ दर्द की गोली खाकर टालना खतरनाक हो सकता है।

  • गातार उल्टियाँ आना: अगर दर्द के साथ-साथ आपको बहुत तेज़ उल्टियाँ होने लगें और पानी भी न पचे।
  • बेहोशी महसूस होना: जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाए और आपकी आँखों के आगे पूरा अंधेरा छा जाए।
  • भारी मात्रा में खून आना: अगर आपको बहुत ज़्यादा बड़े थक्के आ रहे हों और पैड हर घंटे बदलना पड़े।
  • बुखार चढ़ जाना: माहवारी के दर्द के साथ अगर शरीर का तापमान अचानक से बहुत तेज़ हो जाए।
  • पैरों में सुन्नपन: दर्द पेट से शुरू होकर पूरे पैरों में जाए और पैर सुन्न पड़ जाएँ।

दर्द की गोलियों के शरीर पर क्या नुकसान हैं?

अगर आपको लगता है कि एक छोटी सी गोली आपका क्या ही बिगाड़ लेगी, तो आपको दोबारा सोचने की ज़रूरत है। लगातार और हर महीने दर्द की तेज़ गोलियाँ खाने से पेट की अंदरूनी परत बुरी तरह जलने लगती है, जिससे भयंकर गैस और एसिडिटी की समस्या शुरू हो जाती है। यह गोलियाँ सीधे आपकी किडनी और लिवर पर बहुत भारी दबाव डालती हैं। लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करने से शरीर में खून की कमी हो सकती है और पेट में अल्सर भी बन सकता है। इसके अलावा, रोज़ दवा खाने से आपका नर्वस सिस्टम कमज़ोर हो जाता है और प्राकृतिक रूप से दर्द सहने की आपकी ताकत बिल्कुल खत्म हो जाती है।

क्या पेनकिलर से पीरियड्स का खून कम हो जाता है?

बहुत सी महिलाओं की यह शिकायत होती है कि जब वे दर्द की दवा खा लेती हैं, तो उनका खून का बहाव अचानक से कम हो जाता है या पीरियड्स रुक जाते हैं। असल में दर्द निवारक दवाइयाँ प्रोस्टाग्लैंडीन नाम के रसायन को बनने से रोक देती हैं। यही रसायन गर्भाशय को सिकोड़कर खून बाहर निकालता है। जब दवा के असर से गर्भाशय का सिकुड़ना कम हो जाता है, तो खून का बहाव भी हल्का पड़ जाता है। खून के अंदर रुक जाने से गर्भाशय की सफाई पूरी तरह नहीं हो पाती है, जो आगे चलकर इन्फेक्शन या गाँठ बनने का बहुत बड़ा कारण बन सकता है। इसलिए बिना सोचे-समझे दवा खाने से बचना चाहिए।

आयुर्वेद क्या मानता है?

आयुर्वेद के हिसाब से हमारा शरीर तीन चीजों पर चलता है वात पित्त और कफ। अगर पीरियड्स के दर्द की बात करें तो आयुर्वेद का मानना है कि यह दर्द पेट और कमर के निचले हिस्से में हवा के बिगड़ने से होता है।
शरीर का यह हिस्सा पेट साफ करने, पेशाब और पीरियड्स के खून को बाहर निकालने का काम करता है। लेकिन जब आप गलत खान-पान रखती हैं या बहुत ठंडी चीजें खा लेती हैं, तो शरीर में वात बढ़ जाती है और नसों में रुकावट आने लगती है। आयुर्वेद कहता है कि सिर्फ दर्द की गोली खाकर नसों को सुन्न कर लेना हल नहीं है, बल्कि अंदर से इस वात की परेशानी को सही खान-पान से ठीक करना चाहिए।

बिना दवा के दर्द से तुरंत राहत कैसे पाएँ?

जब भी माहवारी में भयंकर दर्द उठे, तो तुरंत दवा की दुकान पर दौड़ने के बजाय घर में मौजूद प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल करना चाहिए।

  • गर्म पानी से सिकाई पेट के निचले हिस्से और कमर पर गर्म पानी की थैली रखें, इससे गर्भाशय की नसें तुरंत खुल जाती हैं।
  • अजवाइन का पानी  एक गिलास पानी में थोड़ी सी अजवाइन उबालकर पिएँ, यह सूजन और दर्द को जादुई तरीके से खींच लेता है।
  • अदरक और गुड़ ताज़े अदरक के टुकड़े को गुड़ के साथ चबाएँ, यह शरीर में गर्मी पैदा करके जमे हुए खून को निकालता है।
  • हल्की मालिश गुनगुने तिल के तेल से पेट के निचले हिस्से की बहुत हल्के हाथों से मालिश करें।
  • हर्बल चाय  कैमोमाइल या पुदीने की चाय पिएँ जो आपकी मांसपेशियों को बिल्कुल शांत कर देती है।

क्या तनाव और थकान से दर्द ज़्यादा बढ़ता है?

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव एक ऐसी बीमारी है जो पीरियड्स के दर्द को कई गुना ज़्यादा भयंकर बना देती है। जब आप बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव लेती हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन तेज़ी से निकलने लगते हैं। ये हार्मोन आपकी खून की नसों को सिकोड़ देते हैं। जब नसें सिकुड़ती हैं, तो गर्भाशय तक ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुँच पाती। ऑक्सीजन की इसी कमी की वजह से आपकी मांसपेशियों में  ऐंठन और भारी दर्द शुरू हो जाता है। आप जितनी ज़्यादा थकान और तनाव महसूस करेंगी, आपका पीरियड पेन उतना ही ज़्यादा लंबा और असहनीय होता चला जाएगा।

भविष्य में दर्द से बचने के आसान उपाय क्या हैं?

अगर आप चाहती हैं कि हर महीने आपको इस दर्द भरी सज़ा से न गुज़रना पड़े, तो आपको अपनी दिनचर्या में कुछ खास बदलाव करने होंगे।

  • व्यायाम को आदत बनाएँ: रोज़ाना कम से कम आधा घंटा हल्का योगा या स्ट्रेचिंग ज़रूर करें जिससे पेल्विक एरिया मज़बूत रहे।
  • डाइट में बदलाव: पीरियड्स आने से एक हफ्ता पहले ही बाहर का जंक फूड, ज़्यादा नमक और चीनी खाना बिल्कुल बंद कर दें।
  • कैल्शियम और मैग्नीशियम लें: अपनी डाइट में मेवे, बीज और हरी सब्ज़ियाँ बढ़ाएँ, जो नसों की ऐंठन को रोकते हैं।
  • भरपूर पानी पिएँ: शरीर को हाइड्रेटेड रखें ताकि खून गाढ़ा न हो और वह बहुत आसानी से शरीर से बाहर निकल सके।
  • तनाव मुक्त रहें: अच्छी नींद लें और रोज़ सुबह ध्यान (मेडिटेशन) करें ताकि आपका नर्वस सिस्टम हमेशा शांत रहे।

एंडोमेट्रियोसिस और पीरियड पेन में क्या कनेक्शन है?

अगर आपका दर्द किसी भी घरेलू उपाय या दवा से ठीक नहीं हो रहा है, तो यह एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) का सीधा संकेत हो सकता है। यह एक ऐसी अंदरूनी बीमारी है जिसमें गर्भाशय के अंदर बनने वाली परत गर्भाशय के बाहर, ओवरीज़ या पेट के अन्य हिस्सों में बनने लगती है। जब पीरियड्स आते हैं, तो यह बाहर बनी हुई परत भी टूटती है और खून निकालती है, लेकिन उस खून को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता। वह खून पेट के अंदर ही जमा होकर भयंकर सूजन और ऐसा जानलेवा दर्द पैदा करता है जिसे सिर्फ पेनकिलर खाकर कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

आधुनिक दवा और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
नज़रिया दर्द के कारण की पहचान कर वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार, जीवनशैली और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार दर्द निवारक दवाइयाँ, फिजियोथेरेपी, अन्य चिकित्सकीय उपचार और पुनर्वास अपनाए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, योग, संतुलित आहार, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
असर होने की गति कई स्थितियों में अपेक्षाकृत जल्दी दर्द से राहत मिल सकती है। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और उनके लाभ व संभावित दुष्प्रभावों की निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही मात्रा में ही लेनी चाहिए।
जीवनशैली का महत्व उपचार के साथ संतुलित आहार, व्यायाम और स्वस्थ आदतों की भी सलाह दी जाती है। आहार, योग, दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

पीरियड के दर्द के लिए डॉक्टर से कब मिलें?

हर महीने होने वाले दर्द को नॉर्मल मानकर सहते रहना सही नहीं है। हमें यह मालूम होना चाहिए कि कब पानी सिर के ऊपर जा रहा है और हमें तुरंत किसी अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिलना चाहिए।

  • दवा का असर न होना: जब तेज़ से तेज़ दर्द की गोली खाने के बाद भी आपका दर्द बिल्कुल भी कम न हो रहा हो।
  • अचानक नया दर्द: अगर आपको पहले कभी इतना दर्द नहीं होता था और कुछ ही महीनों से दर्द बर्दाश्त के बाहर हो गया हो।
  • संबंध बनाते समय दर्द: अगर आपको माहवारी के अलावा भी पेट के निचले हिस्से में हमेशा भारीपन और दर्द महसूस होता हो।
  • रोज़मर्रा के काम रुकना: जब दर्द के कारण आपको हर महीने अपने स्कूल, कॉलेज या ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ती हो।
  • अजीब रंग का खून: अगर आपको बहुत ज़्यादा बदबूदार या बिल्कुल काले रंग के बड़े-बड़े थक्के निकल रहे हों।

निष्कर्ष:

माहवारी का दर्द कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप बस हर महीने एक गोली खाकर भूल जाएँ। यह आपका शरीर है जो आपसे बात करने की कोशिश कर रहा है। दर्द की गोलियाँ आपका सहारा हो सकती हैं, लेकिन वे आपकी बीमारी का इलाज बिल्कुल नहीं हैं। अगर आप रोज़ाना और हर महीने इन पर निर्भर हैं, तो आप अपनी किडनी और लिवर के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रही हैं। दर्द के असली कारण को पहचानें। अपनी डाइट सुधारें, थोड़ा व्यायाम करें और अगर दर्द हद से ज़्यादा हो तो डॉक्टर के पास जाने में ज़रा भी संकोच न करें। एक स्वस्थ और जागरूक जीवनशैली ही आपकी सबसे अच्छी दवा है।

References:

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/menstrual-health

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC7661839/

https://www.healthline.com/health/womens-health/stages-of-menstrual-cycle

https://www.healthline.com/health/womens-health/period-blood

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

लगातार दर्द की गोलियाँ खाने से शरीर के हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है। यह सीधे तौर पर बांझपन तो नहीं करता, लेकिन असली बीमारी (जैसे पीसीओडी या एंडोमेट्रियोसिस) को छुपा देता है, जिससे आगे चलकर गर्भधारण में भारी परेशानी हो सकती है।

बिल्कुल नहीं। गर्म पानी की थैली या हीटिंग पैड का इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित है। यह सिर्फ बाहर से सिकाई करता है, जिससे नसों की जकड़न खुलती है और दर्द से बहुत आराम मिलता है। इससे गर्भाशय को कोई भी नुकसान नहीं होता।

पपीता और केला खाना इस दौरान बहुत फायदेमंद होता है। केले में पोटेशियम होता है जो ऐंठन को रोकता है और पपीते के एंजाइम गर्भाशय की सफाई बहुत अच्छी तरह से करते हैं जिससे दर्द कम होता है।

यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। कॉफी में कैफीन होता है जो खून की नसों को और ज़्यादा सिकोड़ देता है। इससे आपके पेट का दर्द और कमर की अकड़न कम होने के बजाय कई गुना बढ़ जाती है।

अगर आपका दर्द असहनीय है, तो डॉक्टर सबसे पहले पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic Ultrasound) कराने की सलाह देते हैं। इससे पता चलता है कि अंदर कोई गाँठ, सिस्ट या एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी तो नहीं पनप रही है।

शुरुआती दो दिनों में बहुत भारी व्यायाम करने से बचना चाहिए। लेकिन हल्का योगा, स्ट्रेचिंग या पैदल चलने से शरीर में अच्छे हॉर्मोन्स (एंडोर्फिन) निकलते हैं जो दर्द को प्राकृतिक रूप से कम कर देते हैं।

आयुर्वेद मानता है कि बहुत ज़्यादा खट्टी और ठंडी चीज़ें (जैसे अचार या इमली) खाने से शरीर में वात दोष बढ़ता है। इससे खून जमने लगता है और दर्द बढ़ता है। इसलिए इन दिनों खट्टी चीज़ों से दूरी बनानी चाहिए।

अगर दर्द बर्दाश्त के बाहर है और दवा खानी ही पड़े, तो इसे हमेशा कुछ खाने के बाद ही लें। खाली पेट पेनकिलर खाने से पेट में गंभीर अल्सर और भारी एसिडिटी होने का खतरा रहता है।

यह एक बहुत पुराना और गलत मिथक है। शादी का माहवारी के दर्द से कोई सीधा संबंध नहीं है। अगर दर्द किसी हॉर्मोनल खराबी या गाँठ की वजह से है, तो वह बिना सही इलाज के कभी भी खुद-ब-खुद ठीक नहीं होता।

 तिल का तेल या कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल) बहुत अच्छा होता है। इसे हल्का गुनगुना करके पेट के निचले हिस्से और कमर पर बहुत हल्के हाथों से मालिश करने से मांसपेशियों का खिंचाव तुरंत खत्म हो जाता है।

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