Diseases Search
Close Button
 
 

Sattu और protein powder में क्या फर्क है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

 जिम जाने वाले लोगों से लेकर वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों तक, आजकल प्रोटीन की बात हर जगह सुनने को मिलती है। ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि क्या महंगे प्रोटीन पाउडर की जगह सत्तू पीना बेहतर विकल्प हो सकता है? 

दोनों ही शरीर को पोषण देने का काम करते हैं, लेकिन इनका उद्देश्य, पोषण और इस्तेमाल एक जैसा नहीं होता। राष्ट्रीय पोषण संस्थान के कुछ बुनियादी दिशानिर्देशों के अनुसार, शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों का स्रोत जितना प्राकृतिक हो, सामान्य स्वास्थ्य के लिए उतना ही बेहतर होता है। आइए समझते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और आपके लिए कौन-सा विकल्प ज्यादा उपयुक्त हो सकता है।

सबसे पहले समझिए – सत्तू और प्रोटीन पाउडर एक जैसे नहीं हैं

छोले या चने से बना सत्तू एक पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ है, जबकि प्रोटीन पाउडर खासतौर पर प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए तैयार किया जाता है। इसलिए दोनों की तुलना केवल "प्रोटीन" के आधार पर करना सही नहीं होगा।

भारतीय खानपान और कृषि अनुसंधान के कुछ ऐतिहासिक डेटा बताते हैं कि सत्तू का उपयोग सदियों से ग्रामीण भारत में मुख्य भोजन और ऊर्जा के स्रोत के रूप में होता आ रहा है। यह एक संपूर्ण आहार है, जो शरीर की कई आवश्यकताओं को एक साथ पूरा करता है, जबकि प्रोटीन पाउडर एक आधुनिक वैज्ञानिक खोज है जो केवल एक विशेष पोषक तत्व की कमी को पूरा करने पर केंद्रित है।

सत्तू क्या है?

सत्तू भुने हुए चने या अन्य अनाजों को पीसकर बनाया जाता है। यह लंबे समय से भारतीय खानपान का हिस्सा रहा है और गर्मियों में इसका सेवन विशेष रूप से लोकप्रिय है।

इसके कुछ प्रमुख गुण हैं—

  • प्राकृतिक रूप से फाइबर प्रदान करता है: यह शरीर के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाने में मददगार माना जाता है।
  • पेट को भरा हुआ रखता है: इसके सेवन से बार-बार भूख लगने की इच्छा शांत होती है, जो खानपान के संतुलन को बनाए रखती है।
  • सामान्य ऊर्जा बनाए रखता है: चने की शक्ति के कारण यह शरीर को तुरंत और लंबे समय तक चलने वाली ताकत देता है।
  • आसानी से पचने योग्य: भुना हुआ होने के कारण यह पेट के लिए हल्का होता है और अधिकांश लोगों को आसानी से पच जाता है।

प्रोटीन पाउडर क्या होता है?

प्रोटीन पाउडर ऐसा सप्लीमेंट है जिसे शरीर की प्रोटीन आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से बनाया जाता है। यह अलग-अलग स्रोतों जैसे व्हे, सोया या प्लांट प्रोटीन से तैयार किया जा सकता है।

आमतौर पर इसका उपयोग—

  • प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए: जब रोजमर्रा के खाने से शरीर की जरूरत के मुताबिक यह पोषक तत्व नहीं मिल पाता।
  • वर्कआउट करने वाले लोगों द्वारा: जो लोग भारी कसरत करते हैं और जिन्हें मांसपेशियों की मरम्मत के लिए तुरंत प्रोटीन चाहिए होता है।
  • मांसपेशियों की रिकवरी के लिए: यह कसरत के बाद थकी हुई मांसपेशियों को जल्दी ठीक होने में सहायता प्रदान करता है।
  • विशेष परिस्थितियों में: जब डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ किसी कमजोरी या बीमारी के बाद इसकी विशेष सलाह देते हैं।

दोनों में सबसे बड़ा अंतर कहाँ है?

तुलना करते समय केवल प्रोटीन की मात्रा नहीं, बल्कि पूरे पोषण को देखना जरूरी है। आंकड़े बताते हैं कि 100 ग्राम सत्तू में लगभग 18 से 20 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि 100 ग्राम अच्छे प्रोटीन पाउडर में इसकी मात्रा 70 से 80 ग्राम तक हो सकती है।

इनके अन्य अंतरों को नीचे दी गई बातों से आसानी से समझा जा सकता है:

  • संपूर्ण आहार बनाम सप्लीमेंट: सत्तू एक संपूर्ण खाद्य पदार्थ है, जिसमें प्रोटीन के साथ फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं, जबकि प्रोटीन पाउडर मुख्य रूप से केवल प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए रिफाइन करके बनाया जाता है।
  • दैनिक आहार का हिस्सा: सत्तू को आप रोजमर्रा के संतुलित भोजन का हिस्सा बना सकते हैं, लेकिन प्रोटीन पाउडर हर साधारण व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होता और इसका सेवन केवल आवश्यकतानुसार ही किया जाना चाहिए।

अगर आपका लक्ष्य वजन कम करना है...

वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए केवल प्रोटीन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, कैलोरी नियंत्रण और नियमित शारीरिक गतिविधि भी उतनी ही जरूरी है।

ऐसी स्थिति में इन दोनों का महत्व इस प्रकार है:

  • सत्तू की भूमिका: यह फाइबर से भरपूर होने के कारण लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है, जिससे आप फालतू की चीजें खाने से बच जाते हैं।
  • प्रोटीन पाउडर की भूमिका: यह केवल तभी उपयोगी हो सकता है जब आप कैलोरी कम रखते हुए अपने भोजन से पर्याप्त प्रोटीन न पा रहे हों।

अगर आप जिम या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं...

जो लोग नियमित रूप से भारी कसरत या वजन उठाने वाली ट्रेनिंग करते हैं, उनकी प्रोटीन आवश्यकता सामान्य लोगों से अधिक हो सकती है।

ऐसे लोगों के लिए कुछ बुनियादी बातें समझना जरूरी है:

  • आहार सर्वोपरि है: यदि आपके दैनिक भोजन जैसे दाल, पनीर, अंडे या चिकन से पर्याप्त प्रोटीन मिल रहा है, तो कोई भी सप्लीमेंट हमेशा जरूरी नहीं होता।
  • सप्लीमेंट का उपयोग: कुछ मामलों में जब भोजन से लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब आहार विशेषज्ञ की सलाह पर प्रोटीन पाउडर एक आसान और त्वरित विकल्प साबित हो सकता है।
  • मांसपेशियों का सच: केवल प्रोटीन पाउडर लेने से मांसपेशियां नहीं बनतीं; इसके लिए सही तरीके से कसरत करना और संतुलित आराम करना भी उतना ही जरूरी है।

आयुर्वेद की नजर से सत्तू

आयुर्वेद में सत्तू को लंबे समय से एक अत्यंत पौष्टिक, शीतल और संतुलित आहार का हिस्सा माना गया है। विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में इसका सेवन शरीर को अंदरूनी ठंडक देने, पित्त को शांत करने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। आयुर्वेद कहता है कि सत्तू का सेवन पानी और थोड़े से सेंधा नमक या मिश्री के साथ करना सबसे उत्तम है। हालांकि इसकी भारी प्रकृति व्यक्ति की पाचन क्षमता और शारीरिक बनावट के अनुसार अलग-अलग प्रभाव डाल सकती है, इसलिए इसकी मात्रा और सेवन का तरीका भी आपकी भूख के अनुसार तय होना महत्वपूर्ण होता है।

क्या सत्तू प्रोटीन पाउडर की जगह ले सकता है?

इसका जवाब सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं हो सकता, क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरतें अलग होती हैं।

यदि आपका उद्देश्य सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखना है और आपका दैनिक भोजन पूरी तरह से संतुलित है, तो सत्तू आपके लिए एक बहुत अच्छा और सस्ता खाद्य विकल्प हो सकता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति की प्रोटीन आवश्यकता बहुत अधिक है जैसे कुछ पेशेवर खिलाड़ी, एथलीट, या किसी गंभीर बीमारी से उबर रहे बुजुर्ग तो केवल सत्तू से उनकी यह जरूरत पूरी होना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और सही रास्ता होता है।

किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

अगर आप सत्तू या प्रोटीन पाउडर को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

इन नियमों का पालन जरूर करें:

  • सोशल मीडिया से बचें: केवल इंटरनेट की रील्स देखकर या किसी के कहने पर कोई भी नया सप्लीमेंट शुरू करने की गलती कभी न करें।
  • भोजन की गुणवत्ता: सप्लीमेंट का डिब्बा खरीदने से पहले अपने घर के बने दैनिक भोजन की शुद्धता और उसकी गुणवत्ता को सुधारने पर पहला ध्यान दें।
  • जलांश का संतुलन: चाहे आप सत्तू लें या प्रोटीन पाउडर, शरीर में पानी की कमी न होने दें और पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में सादा पानी पीते रहें।
  • प्राथमिकता तय करें: हमेशा याद रखें कि एक संतुलित आहार और नियमित रूप से किया जाने वाला शारीरिक व्यायाम ही अच्छी सेहत की असली नींव हैं।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के हालिया स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार, बिना डॉक्टरी सलाह के प्रोटीन सप्लीमेंट्स की अत्यधिक ओवरडोज़ लेने से पाचन तंत्र और गुर्दों (किडनी) पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। सत्तू एक प्राकृतिक और पौष्टिक पारंपरिक खाद्य पदार्थ है, जबकि प्रोटीन पाउडर एक प्रोसेस्ड सप्लीमेंट है। दोनों का उद्देश्य और शारीरिक उपयोग पूरी तरह अलग है। यदि आपको पहले से किडनी की कोई बीमारी है, लीवर संबंधी समस्या है, बार-बार पेट खराब होने या यूरिक एसिड बढ़ने की शिकायत रहती है, तो किसी भी प्रकार की हाई-प्रोटीन डाइट या सप्लीमेंट की शुरुआत करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य लें। अपनी उम्र और शारीरिक गतिविधि के अनुसार ही सही चुनाव करें।

निष्कर्ष  

सत्तू और प्रोटीन पाउडर दोनों की अपने-अपने स्थान पर अलग भूमिका है। कौन-सा विकल्प आपके लिए बेहतर है, यह पूरी तरह से आपकी उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति, भोजन की आदतों और आपके दैनिक शारीरिक श्रम पर निर्भर करता है। किसी एक को दूसरे से कमतर या बेहतर मानने के बजाय, अपनी व्यक्तिगत शारीरिक जरूरत को पहचानना और उसके अनुसार सही चुनाव करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। यदि असमंजस की स्थिति हो, तो किसी विशेषज्ञ से मिलकर अपने शरीर के अनुसार आहार चार्ट बनवाना सबसे उत्तम रहेगा।

 संदर्भ लिंक्स :

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

 हाँ, सत्तू में प्राकृतिक रूप से प्रोटीन होता है (लगभग 18-20%), लेकिन इसकी मात्रा और उद्देश्य रिफाइंड प्रोटीन पाउडर से बिल्कुल अलग होते हैं।

इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर लिया जा सकता है क्योंकि यह पेट को भरा रखता है, लेकिन केवल सत्तू पीने से वजन कम नहीं होता।

बिल्कुल नहीं। यदि आपके सामान्य घर के भोजन से आपके शरीर के वजन के अनुसार पर्याप्त प्रोटीन मिल रहा है, तो आपको इसकी कोई जरूरत नहीं है।

यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनका कसरत का स्तर क्या है और वे अपने बाकी के पूरे आहार से कुल कितना प्रोटीन प्राप्त कर रहे हैं।

पारंपरिक रूप से इसकी ठंडी तासीर के कारण इसे गर्मियों में अधिक पिया जाता है, लेकिन सर्दियों में इसे हल्के गुनगुने पानी या अन्य रूपों में सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।

यदि इसे बिना जरूरत के, अत्यधिक मात्रा में या खराब ब्रांड का लिया जाए, तो यह पाचन खराब होने या किडनी पर दबाव जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

हाँ, उम्र और पाचन शक्ति के अनुसार इसकी थोड़ी मात्रा बच्चों को दी जा सकती है। बहुत छोटे शिशुओं के लिए पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

कुछ विशेष परिस्थितियों में खिलाड़ी ऐसा करते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से व्यक्ति की व्यक्तिगत पोषण आवश्यकताओं और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp

Treatment for other disease

Book Free Consultation Call Us