Diseases Search
Close Button
 
 

Sattu Sharbat इतना popular क्यों हो रहा है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

तेज़ चिलचिलाती धूप, पसीने से तर-बतर शरीर और प्यास से सूखता गला गर्मियों का मौसम आते ही हम सभी किसी ऐसी चीज़ की तलाश में रहते हैं जो तुरंत ठंडक और राहत दे। कुछ समय पहले तक लोग प्यास बुझाने के लिए फ्रिज में रखी कोल्ड ड्रिंक्स या महंगे पैक्ड जूस की तरफ भागते थे। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आजकल जिम जाने वाले युवाओं से लेकर ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स तक, हर किसी के हाथ में 'सत्तू का शरबत' क्यों नज़र आने लगा है? कभी उत्तर प्रदेश और बिहार तक सीमित रहने वाला यह देसी पेय आज अचानक एक 'ग्लोबल सुपरफूड' का दर्ज़ा कैसे हासिल कर चुका है?

दरअसल, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने हमें यह समझा दिया है कि रंग-बिरंगे पैकेट्स में मिलने वाले ड्रिंक्स सिर्फ चीनी का घोल हैं। दूसरी तरफ, भुने हुए चने से बना सत्तू एक ऐसा पावरहाउस है जो शरीर को तुरंत एनर्जी देने के साथ-साथ अंदर से रिपेयर भी करता है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि सत्तू का यह लौटता हुआ ट्रेंड कोई सोशल मीडिया फैड नहीं है, बल्कि हमारी उस जड़ों की तरफ वापसी है जो सदियों से हमें चिलचिलाती गर्मी और बीमारियों से बचाती आ रही है।

सत्तू शरबत पीने के दौरान शरीर में क्या होता है?

जब आप चिलचिलाती धूप से आकर एक गिलास ठंडा सत्तू शरबत पीते हैं, तो शरीर में तुरंत एक अद्भुत प्रक्रिया शुरू होती है। सत्तू की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह पेट में जाते ही एसिडिटी और जलन को शांत कर देता है। इसमें मौजूद कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स चीनी की तरह अचानक 'शुगर स्पाइक' नहीं देते, बल्कि धीरे-धीरे खून में घुलकर लंबे समय तक ऊर्जा  देते रहते हैं।

इसके अलावा, सत्तू में प्रचुर मात्रा में मौजूद इनसॉल्युबल फाइबर (घुलनशील रेशा) स्पंज की तरह काम करता है। यह आंतों में पहुँचकर वहां चिपकी गंदगी को अपने साथ बांध लेता है और पाचन तंत्र की सफाई शुरू कर देता है। पसीने के ज़रिए जो सोडियम और पोटैशियम शरीर से बाहर निकल गया था, सत्तू (खासकर जब इसमें जीरा और काला नमक मिला हो) तुरंत उन इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई कर देता है। यही कारण है कि इसे पीते ही आपकी थकान छूमंतर हो जाती है और शरीर रिफ्रेश हो जाता है।

क्या सत्तू सिर्फ "गरीबों का प्रोटीन" है?

जी नहीं, यह सबसे बड़ा भ्रम है। एक वक्त था जब सत्तू को इसके सस्ते होने के कारण 'गरीबों का खाना' कहकर कम आंका जाता था। लेकिन आज बड़े-बड़े न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटिशियन इसे 'इंडियन व्हे प्रोटीन' (Indian Whey Protein) का नाम दे रहे हैं।

100 ग्राम सत्तू में लगभग 20-22 ग्राम शुद्ध, आसानी से पचने वाला प्लांट-बेस्ड प्रोटीन होता है। जो लोग महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट्स खरीदकर अपनी किडनी और लिवर पर दबाव डाल रहे हैं, वे नहीं जानते कि सत्तू न सिर्फ प्रोटीन देता है, बल्कि इसमें आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम का भी खज़ाना छिपा है। समस्या सत्तू में नहीं, बल्कि हमारी उस मानसिकता में थी जो देसी चीज़ों को कमतर और विदेशी सप्लीमेंट्स को बेहतर मानती है।

रोज़ाना सत्तू शरबत पीने से आपकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जब हम अपनी डेली डाइट में सत्तू को शामिल करते हैं, तो शरीर के अंदर कई जादुई बदलाव होते हैं:

  • वज़न का तेज़ी से कम होना: सत्तू फाइबर से भरपूर होता है। इसे पीने के बाद घंटों तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे आप जंक फूड या ओवरईटिंग से बच जाते हैं।
  • चेहरे पर प्राकृतिक निखार: सत्तू शरीर से विषैले तत्वों (Toxins) को बाहर निकालता है और खून को साफ करता है। खून साफ होने से कील-मुंहासे दूर होते हैं और स्किन ग्लो करने लगती है।
  • कब्ज़ से हमेशा के लिए छुटकारा: इसका भारी फाइबर आंतों के मूवमेंट को तेज़ करता है। जिन लोगों को सुबह पेट साफ न होने की शिकायत रहती है, उनके लिए सत्तू किसी रामबाण से कम नहीं है।
  • पेट की आग (एसिडिटी) का शमन: सत्तू पेट की एक्स्ट्रा एसिडिटी को सोख लेता है, जिससे सीने की जलन और खट्टी डकारों की समस्या जड़ से खत्म हो जाती है।

क्या यह देसी शरबत शरीर में किसी बड़ी परेशानी का समाधान बन सकता है?

अगर सत्तू को सही तरीके और सही मात्रा में लिया जाए, तो यह कई गंभीर लाइफस्टाइल बीमारियों को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है:

  • ब्लड शुगर (Diabetes) कंट्रोल: सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बहुत कम होता है। इसका मतलब है कि यह खून में ग्लूकोज़ को बहुत धीरे-धीरे छोड़ता है, जो मधुमेह के रोगियों के लिए एकदम परफेक्ट है।
  • लू (Heatstroke) से ढाल: उत्तर भारत की जानलेवा लू से बचाने में सत्तू से बेहतर कुछ नहीं। यह शरीर के आंतरिक तापमान (Core Temperature) को बढ़ने नहीं देता और हीट स्ट्रोक से बचाता है।
  • हाई कोलेस्ट्रॉल पर लगाम: सत्तू की फाइबर-रिच प्रॉपर्टी नसों में जमे बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करती है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा घटता है।
  • एनीमिया (खून की कमी) से बचाव: महिलाओं में अक्सर आयरन की कमी होती है। सत्तू आयरन का एक बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत है जो रेड ब्लड सेल्स (RBC) को बढ़ाकर शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सुधारता है।

प्राचीन आयुर्वेद सत्तू को किस नज़रिए से देखता है?

आयुर्वेद के अनुसार, सत्तू स्वभाव से 'शीतवीर्य' (ठंडी तासीर वाला) और 'रूक्ष' (सूखा) होता है। गर्मियों में जब सूरज की गर्मी हमारे शरीर के तरल पदार्थों को सुखा देती है और 'पित्त दोष' (Pitta Dosha) भड़क जाता है, तब सत्तू एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है।

आयुर्वेद मानता है कि सत्तू हमारे शरीर के 'रस धातु' (Plasma/Hydration) को तुरंत रीचार्ज करता है। महर्षि चरक और सुश्रुत संहिताओं में भी सत्तू के सेवन का ज़िक्र मिलता है। आयुर्वेद यह भी स्पष्ट करता है कि सत्तू कभी भी सूखा नहीं खाना चाहिए, इसे हमेशा पानी या मट्ठे (छाछ) में घोलकर, लिक्विड फॉर्म में लेना चाहिए ताकि यह जठराग्नि (पाचन अग्नि) को शांत किए बिना शरीर को ठंडक पहुँचाए।

स्वाद और सेहत दोगुना करने वाले सत्तू के बेहतरीन साथी

प्रकृति ने हमें सत्तू के साथ मिलाने के लिए कुछ ऐसी चीज़ें दी हैं, जो इसके फायदों को कई गुना बढ़ा देती हैं

  • भुना जीरा और काला नमक: सत्तू में थोड़ा सा भुना जीरा और काला नमक मिलाने से गैस्ट्रिक समस्याएं नहीं होतीं और स्वाद में चार चाँद लग जाते हैं।
  • नींबू और पुदीने की पत्तियां: नींबू विटामिन सी जोड़कर सत्तू के आयरन को शरीर में एब्जॉर्ब (अवशोषित) करने में मदद करता है, और पुदीना पेट को अतिरिक्त ठंडक देता है।
  • बारीक कटा प्याज: सत्तू में कच्चा प्याज मिलाने से यह लू से बचने का एक अजेय फॉर्मूला बन जाता है।
  • देसी गुड़ (मीठे शरबत के लिए): अगर आप मीठा सत्तू पीना चाहते हैं, तो सफेद चीनी की जगह हमेशा थोड़े से गुड़ का इस्तेमाल करें। यह आयरन के स्तर को और बढ़ा देगा।

वो आम गलतियाँ जो सत्तू के फायदों को नुकसान में बदल देती हैं

हम अक्सर जाने-अनजाने में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिससे इस अमृत जैसे शरबत का फायदा मिलने की बजाय पेट खराब हो जाता है:

  • रात के समय सत्तू पीना: आयुर्वेद में सत्तू को रात में पीने की सख्त मनाही है। ठंडी तासीर होने के कारण यह रात में कफ (बलगम) बढ़ा सकता है और पचने में भारी होने के कारण नींद खराब कर सकता है।
  • सफेद चीनी का प्रयोग: मीठा सत्तू बनाने के लिए रिफाइंड चीनी मिलाना इसकी सारी पौष्टिकता को मार देता है और इन्फ्लेमेशन (सूजन) बढ़ाता है।
  • बिना पानी के या बहुत गाढ़ा पीना: कई बार लोग इसे बहुत कम पानी में गाढ़ा-गाढ़ा घोलकर पी लेते हैं। इससे पेट में ब्लॉकेज या भयंकर कब्ज़ होने का खतरा रहता है। सत्तू हमेशा पतला होना चाहिए।
  • खाना खाने के तुरंत बाद पीना: सत्तू अपने आप में एक पूरा भोजन है। अगर आप पेट भर खाना खाने के बाद इसे पिएंगे, तो पाचन तंत्र ओवरलोड हो जाएगा और ब्लोटिंग (पेट फूलना) शुरू हो जाएगी।

महंगे सप्लीमेंट्स की जगह इस आसान तरीके से लें असली प्राकृतिक रिकवरी

जो लोग जिम जाते हैं या रोज़ाना दौड़ लगाते हैं, उन्हें वर्कआउट के बाद तुरंत प्रोटीन की ज़रूरत होती है। बाज़ार के व्हे प्रोटीन (Whey Protein) से कई लोगों को एक्ने (मुंहासे) या लैक्टोज़ इनटॉलरेंस के कारण पेट फूलने की समस्या हो जाती है।

आप इसकी जगह 'सत्तू प्रोटीन शेक' आज़मा सकते हैं। एक गिलास पानी में 3-4 चम्मच सत्तू, थोड़ा सा सेंधा नमक, आधा नींबू और भुना जीरा मिलाकर पिएं। यह प्राकृतिक एमिनो एसिड्स से भरा है, पचने में सबसे हल्का है, और किसी भी आर्टिफिशियल प्रिजर्वेटिव से 100% मुक्त है। यह आपकी थकी हुई मांसपेशियों को बिना किसी साइड-इफेक्ट के रिपेयर करेगा।

आयुर्वेद इस देसी सुपरफूड पर इतना भरोसा क्यों करता है?

आयुर्वेद सिर्फ लक्षणों पर काम नहीं करता, बल्कि शरीर के 'दोषों' (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने पर ज़ोर देता है। आयुर्वेद मानता है कि ज़्यादातर बीमारियां पेट की अत्यधिक गर्मी और जमा हुए 'आम' (Toxins) के कारण होती हैं। सत्तू एक ऐसा अद्भुत आहार है जो 'आम' को शरीर से बाहर धकेलता है और पेट की गर्मी को सोखता है। यह जठराग्नि पर बोझ डाले बिना 'ओजस' (जीवन ऊर्जा) को बढ़ाता है, जिससे हमारा शरीर भविष्य की बीमारियों से लड़ने के लिए अपने आप मज़बूत हो जाता है।

सत्तू के सेवन के दौरान डॉक्टर के पास भागने की नौबत कब आ सकती है?

हालांकि सत्तू 100% सुरक्षित और प्राकृतिक है, लेकिन कुछ स्थितियों में आपको सावधानी बरतनी चाहिए और समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए:

  • चना या लेग्यूम से एलर्जी: अगर आपको चने या फलियों से एलर्जी है, तो सत्तू पीने से त्वचा पर लाल चकत्ते (Rashes) या गले में सूजन आ सकती है।
  • गंभीर गैस्ट्रिक ब्लॉकेज: अगर आप बहुत कम पानी पीते हैं और बहुत गाढ़ा सत्तू रोज़ खा/पी रहे हैं, तो इससे आंतों में भयंकर रुकावट या कब्ज़ हो सकती है। लगातार पेट दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  • किडनी स्टोन की गंभीर समस्या: चने में ऑक्सालेट्स होते हैं। जिन लोगों को बार-बार पथरी (Kidney Stone) बनती है, उन्हें बहुत अधिक मात्रा में सत्तू का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।

सत्तू शरबत और बाज़ार के कोल्ड ड्रिंक्स/सप्लीमेंट्स में सबसे बड़े अंतर क्या हैं?

तुलना का आधार देसी सत्तू शरबत (Sattu Sharbat) कोल्ड ड्रिंक्स / सिंथेटिक ड्रिंक्स
पोषक तत्व (Nutrients) शुद्ध प्लांट-प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम सिर्फ चीनी, आर्टिफिशियल कलर्स और प्रिजर्वेटिव्स
ऊर्जा का प्रकार (Energy) कॉम्प्लेक्स कार्ब्स (लंबे समय तक टिकाऊ ऊर्जा) सिंपल शुगर (अचानक स्पाइक और फिर सुस्ती)
पाचन पर असर (Digestion) आंतों को साफ करता है और एसिडिटी मिटाता है आंतों के गुड बैक्टीरिया को मारता है, सूजन बढ़ाता है
हाइड्रेशन (Hydration) इलेक्ट्रोलाइट्स का प्राकृतिक संतुलन बनाता है कैफीन और चीनी के कारण शरीर को डिहाइड्रेट करता है
कीमत और शुद्धता बेहद सस्ता, घर पर आसानी से उपलब्ध और 100% शुद्ध काफी महंगे और केमिकल्स से भरे हुए

निष्कर्ष

हमेशा याद रखें कि सबसे बेहतरीन सेहत दवाइयों की शीशियों में नहीं, बल्कि हमारी अपनी रसोई और प्रकृति की गोद में छुपी है। सत्तू का दोबारा से लोकप्रिय होना इस बात का प्रमाण है कि हम धीरे-धीरे ही सही, अपनी उन पुरानी और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध जीवनशैलियों की ओर लौट रहे हैं, जिन्हें हमने मॉडर्नाइजेशन की अंधी दौड़ में पीछे छोड़ दिया था। सत्तू केवल एक शरबत नहीं है; यह भीषण गर्मी से बचाने वाली एक ढाल है, एक प्राकृतिक औषधि है और हमारे शरीर के लिए संपूर्ण पोषण है। इस गर्मी, केमिकल से भरे पैकेटबंद ड्रिंक्स को ना कहें और मिट्टी की सोंधी महक से जुड़े इस 'देसी सुपरफूड' को गले लगाएं। जब शरीर अंदर से ठंडा और बीमारियों से मुक्त रहेगा, तो आप खुद को हर दिन तरोताज़ा और ऊर्जा से भरा हुआ महसूस करेंगे।

References

FSSAI gazettes stds for rice, cassava, chana sattu, mixed masala, spices

Standardization and quality profile of sattu mix - PMC

(PDF) Sattu, the Indigenous Cold Drink of Bihar: Nutritional, Health and Economic Facts

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

Sattu bhune hue chane se bana ek traditional Indian drink hai jo garmiyon mein hydration aur energy deta hai.

Haan, iski thandi taseer sharir ko andar se cool rakhne aur heat stress kam karne mein madad karti hai.

Bilkul. Sattu mein plant-based protein hota hai jo muscles aur body recovery ko support karta hai.

Haan, ismein fiber adhik hota hai jo pet ko lambe samay tak bhara rakhta hai aur overeating kam karta hai.

Simit matra mein aur bina chini ke, sattu low glycemic food hone ke karan faydemand ho sakta hai.

Haan, kai logon ko sattu se pet ki jalan aur acidity mein aaram milta hai.

Subah ya mid-morning mein peena adhik upyogi mana jata hai.

Haan, namak aur jeera ke saath liya gaya sattu electrolyte balance support kar sakta hai.

Adhikansh swasth logon ke liye haan, lekin santulit matra mein.

Jinhe chane se allergy ho ya kidney stone ki gambhir samasya ho, unhe doctor ki salah leni chahiye.

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us