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Aam Panna, Sattu, Buttermilk — गर्मी के ये 5 Desi Drinks किसी Supplement से कम नहीं

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

गर्मियां आते ही सूरज की तेज़ धूप शरीर का सारा पानी और एनर्जी सोखने लगती है। बाहर थोड़ा सा भी निकलें तो पसीना बहने लगता है और घर बैठे-बैठे ही थकान, चक्कर या सिरदर्द होने लगता है। ऐसे में हमारा पहला रिएक्शन होता है, फ्रिज से ठंडा पानी निकालना या कोई पैकेट वाली कोल्ड ड्रिंक गटक लेना।

लेकिन पसीने के रास्ते शरीर सिर्फ पानी नहीं खोता, बल्कि अपने ज़रूरी मिनरल्स भी गँवा देता है। इसलिए इस चिलचिलाती गर्मी में बॉडी को सिर्फ चीनी वाली ड्रिंक्स की नहीं, बल्कि ठंडक और पोषण के सही तालमेल की ज़रूरत होती है। यहीं पर हमारी रसोई में मौजूद पारंपरिक देसी ड्रिंक्स अपना असली जादू दिखाते हैं और शरीर को अंदर से रीचार्ज करते हैं।

आयुर्वेद की नज़र में गर्मी और शरीर का संतुलन

आयुर्वेद के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु (गर्मियों) का सीधा कनेक्शन 'पित्त दोष' (शरीर की गर्मी) और तरल पदार्थों के कम होने से है। बाहर की तेज़ गर्मी हमारे शरीर की प्राकृतिक नमी को सुखा देती है और हमारी पाचन अग्नि को कमज़ोर कर देती है। इसलिए, इस मौसम में आयुर्वेद हमेशा ऐसे आहार और पेयों (Drinks) की सलाह देता है जो तासीर में ठंडे हों, पचने में हल्के हों और शरीर को तुरंत पोषण दें। यही कारण है कि सदियों से हमारी दादी-नानी गर्मियों में कुछ खास तरह के शरबत और देसी ड्रिंक्स बनाती आई हैं, जो शरीर के लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं हैं।

क्यों सिर्फ पानी पीना पर्याप्त नहीं होता?

पानी जीवन है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन गर्मियों में सिर्फ सादा पानी पीते रहना काफी नहीं होता। जब आपको बहुत पसीना आता है, तो पानी के साथ-साथ सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे बेहद ज़रूरी 'इलेक्ट्रोलाइट्स' (Electrolytes) भी शरीर से बह जाते हैं।

अगर आप इन खनिजों की कमी को पूरा किए बिना सिर्फ लीटर-लीटर पानी पीते रहेंगे, तो आपको अचानक कमज़ोरी, मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps) और थकान महसूस होने लगेगी। शरीर को इस टूट-फूट से बचाने के लिए उन पेयों की ज़रूरत होती है, जिनमें पानी के साथ-साथ ये सारे ज़रूरी तत्व भी प्राकृतिक रूप से मौजूद हों।

गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने वाले 5 देसी पेय

चिलचिलाती धूप में सिर्फ सादा पानी पीना काफी नहीं होता। पसीने के साथ शरीर के ज़रूरी खनिज भी बह जाते हैं। ऐसे में यह 5 पारंपरिक देसी पेय शरीर को तुरंत तरोताज़ा और ठंडा रखते हैं। यह सब सदियों से हमारे घरों में बनते आए हैं और आज भी उतने ही असरदार हैं।

  • आम पन्ना: कच्चे आम, पुदीने और काले नमक से बना यह पेय लू के थपेड़ों से बचाता है और पेट की गर्मी को शांत करता है। गर्मियों में बाहर निकलने से पहले एक गिलास आम पन्ना पीना बहुत फायदेमंद माना जाता है।
  • सत्तू का शरबत: भुने चने का यह शरबत ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत है। यह शरीर के तापमान को काबू में रखता है, पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और तुरंत ताज़गी देता है।
  • मसाला छाछ: दोपहर के खाने के बाद भुने जीरे और पुदीने वाली छाछ पीना अमृत के समान है। यह एसिडिटी दूर करती है, पाचन दुरुस्त रखती है और शरीर को अंदर से ठंडक देती है।
  • बेल का शरबत: पेट और आँतों की सेहत के लिए यह सबसे बेहतरीन पेय है। भयंकर गर्मी में भी कब्ज, पेट की जलन और बेचैनी से राहत देता है। इसकी तासीर ठंडी होती है जो पित्त को तुरंत शांत करती है।
  • नारियल पानी: प्राकृतिक खनिजों से भरपूर यह पेय धूप से होने वाली थकान और पानी की कमी को पल भर में दूर कर देता है। किसी भी एनर्जी ड्रिंक से बेहतर और पूरी तरह प्राकृतिक है।

इन देसी पेयों को Supplement जैसा क्यों माना जा सकता है?

आजकल के युवा हर कमज़ोरी को दूर करने के लिए मेडिकल स्टोर से एनर्जी पाउडर, इलेक्ट्रोलाइट पाउच या महंगे सप्लीमेंट्स खरीदते हैं। लेकिन ज़रा सोचिए, हमारे ये पारंपरिक पेय भी तो बिल्कुल वही काम कर रहे हैं!

इन देसी ड्रिंक्स में पानी है, प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट्स (तुरंत ऊर्जा के लिए) हैं, विटामिन्स हैं और पसीने में बह जाने वाले सारे खनिज (Sodium, Potassium) हैं। और सबसे बड़ी बात, इन्हें पचाने के लिए शरीर को कोई एक्सट्रा मेहनत नहीं करनी पड़ती।

इन पेयों को पीते समय किन गलतियों से बचना चाहिए?

अक्सर सेहत बनाने के चक्कर में हम अनजाने में ये छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे इन ड्रिंक्स का फायदा आधा हो जाता है। इन बातों का थोड़ा सा ध्यान रखेंगे, तो ये पारंपरिक पेय आपकी बॉडी को बिना किसी नुकसान के असली ठंडक और पूरा पोषण पहुंचाएंगे। 

  • अत्यधिक चीनी मिलाना: स्वाद के चक्कर में इनमें भर-भरकर सफेद चीनी न डालें। इसके बजाय धागे वाली मिश्री, गुड़ या सादे नमक/जीरे का इस्तेमाल करें।
  • बर्फ डालकर अत्यधिक ठंडा करना: आयुर्वेद बहुत ठंडी (Chilled) चीज़ों को पाचन के लिए ज़हर मानता है। इनको घड़े (मटके) के ठंडे पानी में बनाएं।
  • लंबे समय तक बाहर रखना: सुबह का बना छाछ या बेल का शरबत रात को न पिएं। इन्हें हमेशा ताज़ा बनाकर ही पिएं।
  • खाना खाने से ठीक पहले पीना: भोजन से ठीक पहले भरपेट शरबत पीने से पाचन अग्नि बुझ जाती है।

किस प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के लोगों के लिए कौन-सा पेय बेहतर है?

हर इंसान का शरीर अलग होता है, इसलिए ड्रिंक भी अपनी प्रकृति के अनुसार चुनें:

  • पित्त प्रकृति (जिन्हें बहुत गर्मी और एसिडिटी होती है): आपके लिए आम पन्ना, नारियल पानी और बेल का शरबत सबसे बेहतरीन है। ये शरीर की आग को शांत करते हैं।
  • वात प्रकृति (जिन्हें गैस, दर्द और रूखापन रहता है): आपके लिए थोड़ी सी हींग, जीरा और काला नमक मिली हुई छाछ, और सत्तू का संतुलित सेवन बहुत फायदेमंद रहेगा।
  • कफ प्रकृति (जिन्हें सुस्ती, सर्दी-खांसी जल्दी होती है): आपको सत्तू का सेवन बहुत सीमित मात्रा में करना चाहिए। आपके लिए अदरक, काली मिर्च और जीरे से मसालेदार की गई ताज़ी छाछ सबसे अच्छा विकल्प है।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए कौन-से विकल्प उपयुक्त हैं?

  • बच्चों के लिए: बच्चे अक्सर धूप में खेलकर निढाल हो जाते हैं। उन्हें आम पन्ना, नारियल पानी और मिश्री मिला हुआ बेल का शरबत दें। यह उन्हें डिहाइड्रेशन से बचाएगा।
  • बुजुर्गों के लिए: बढ़ती उम्र में पाचन कमज़ोर हो जाता है। इसलिए बुजुर्गों के लिए जीरे वाली ताज़ी छाछ और नारियल पानी सबसे सुरक्षित और सुपाच्य (आसानी से पचने वाले) विकल्प हैं।

गर्मी में Hydration बढ़ाने के लिए अतिरिक्त आयुर्वेदिक सुझाव

  • खाली पेट बाहर न जाएं: चिलचिलाती धूप में खाली पेट निकलने से बचें। हमेशा कुछ खाकर या छाछ/नारियल पानी पीकर ही निकलें।
  • वाटर-रिच फ्रूट्स: अपनी डाइट में तरबूज, खरबूजा और खीरा जैसी चीज़ें शामिल करें जिनमें प्राकृतिक रूप से 90% पानी होता है।
  • दोपहर की धूप से बचें: दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच की तीखी धूप से शरीर को बचाएं।
  • पर्याप्त नींद: शरीर को रिकवर करने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद ज़रूर लें।

निष्कर्ष

गर्मियों के इस मुश्किल मौसम में खुद को एक्टिव, हाइड्रेटेड और सेहतमंद बनाए रखने के लिए आपको किसी फैंसी सुपरमार्केट या महंगी सप्लीमेंट की दुकान पर जाने की ज़रूरत नहीं है। हमारी भारतीय परंपरा और रसोई में मौजूद ये 5 देसी 'सुपर ड्रिंक्स' आम पन्ना, सत्तू, छाछ, बेल का शरबत और नारियल पानी सदियों से हमें गर्मी के कहर से बचाते आए हैं।

बस ज़रूरत है तो अपनी जड़ों की तरफ वापस लौटने की। सही मात्रा, सही समय और थोड़ी सी समझदारी के साथ अगर आप इन पेयों को अपनी गर्मियों की दिनचर्या का हिस्सा बना लेंगे, तो चिलचिलाती धूप भी आपकी सेहत और एनर्जी का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। तो आज से ही महंगे डिब्बाबंद ड्रिंक्स को 'ना' कहें और अपनी रसोई में रखे इन प्राकृतिक अमृत को अपनाएं!

References

How summer heat impacts health and how to #KeepCool

Summer Heat: Making a Consistent Health Impact - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हां, डायबिटीज़ के मरीज चीनी की जगह सेंधा नमक और भुना जीरा मिलाकर छाछ या सत्तू का सेवन आराम से कर सकते हैं। बस उन्हें बेल के शरबत जैसी मीठी चीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के पीने से बचना चाहिए।

सत्तू को सुबह के नाश्ते में या दोपहर के भोजन से थोड़ा पहले पीना सबसे बेहतरीन माना जाता है क्योंकि यह पचाने में भारी होता है। इसे शाम को या रात के समय पीने से पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि उस वक्त यह पेट में भारीपन कर सकता है।

बिल्कुल, बिना चीनी के सत्तू और छाछ जैसे पारंपरिक ड्रिंक्स मेटाबॉलिज़्म को तेज करते हैं और पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं। इससे फालतू की भूख नहीं लगती और गर्मियों में बढ़ते हुए वज़न को कंट्रोल करने में बहुत मदद मिलती है।

घड़े या मटके का पानी बिल्कुल नेचुरल तरीके से ठंडा होता है। यह हमारे शरीर के तापमान को बिना कोई नुकसान पहुँचाए एकदम नॉर्मल बनाए रखता है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि मिट्टी के अंदर जो अपने औषधीय गुण होते हैं, वे इन देसी ड्रिंक्स के पोषण को और इसके असली स्वाद को भी कई गुना बढ़ा देते हैं।

सच कहें तो आयुर्वेद में रात के समय छाछ पीने से साफ़ मना किया गया है। इसके पीछे वजह यह है कि छाछ की तासीर काफी ठंडी होती है। अगर आप इसे रात में पीते हैं, तो यह शरीर में कफ दोष को बहुत तेज़ी से बढ़ा सकती है।

देखिए, अगर आपको सर्दी-खांसी की दिक्कत है, तो ऐसी स्थिति में आम पन्ना या बेल का शरबत पीने से थोड़ा बचना चाहिए। हाँ, आप चाहें तो ताज़ा छाछ में थोड़ी सी सोंठ और पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर आराम से पी सकते हैं। बस एक बात का सबसे खास ख्याल रखें कि इस हालत में कोई भी ड्रिंक फ्रिज की या बहुत ज़्यादा ठंडी नहीं होनी चाहिए।

आप इन्हें बोतल में ले जा सकते हैं, लेकिन कोशिश करें कि इन्हें बनाने के दो से तीन घंटे के भीतर ही पीकर खत्म कर लें। लंबे समय तक बंद रहने से छाछ खट्टी हो सकती है और प्राकृतिक जूस का न्यूट्रिशन कम हो जाता है।

सुबह खाली पेट सादा गुनगुना पानी पीना ही सबसे बेस्ट है, इसलिए किसी भी भारी शरबत को एकदम सुबह खाली पेट न पिएं। सत्तू या आम पन्ना जैसे ड्रिंक्स को हमेशा सोकर उठने के कम से कम एक से दो घंटे बाद ही लेना सही रहता है।

ये सारे पारंपरिक ड्रिंक्स शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं और पेट की उस भयंकर गर्मी को शांत करते हैं जो मुहासों की वजह बनती है। जब पेट अंदर से साफ और ठंडा रहता है, तो चेहरे की स्किन पर अपने आप प्राकृतिक ग्लो आने लगता है।

हां, सत्तू को पानी की जगह ताजी छाछ में घोलकर पीना पेट के लिए बहुत ही हल्का और दोगुना फायदेमंद हो जाता है। यह कॉम्बिनेशन न सिर्फ शरीर को बेहतरीन ठंडक देता है बल्कि गर्मियों में सुस्त पड़े डाइजेशन को भी मजबूत बनाता है।

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