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शरीर में जलन और बेचैनी - Body Heat कम करने के आयुर्वेदिक उपाय

Information By Dr. Keshav Chauhan

ठंडे पाउडर, ड्रिंक्स और एंटासिड (गैस की गोलियों) का इस्तेमाल शरीर की गर्मी (Body Heat) और तलवों की जलन को कम करने के लिए काफी आम है। ये चीज़ें पेट के एसिड को कुछ समय के लिए शांत कर देती हैं या शरीर को तुरंत ऊपरी ठंडक का एहसास कराती हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि उसकी परेशानी खत्म हो गई है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि तेज़ गर्मियों में या इन ठंडी चीज़ों का असर खत्म होने के तुरंत बाद फिर से भयंकर घबराहट, तलवों में जलन और सीने में आग लगने जैसी समस्या होने लगती है। यह बेचैनी पहले से भी भयंकर रूप में वापस आ जाती है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे लगातार एंटासिड के इस्तेमाल से पाचन तंत्र का कमज़ोर होना, या सबसे महत्वपूर्ण—शरीर के अंदर मौजूद बेकाबू 'पित्त दोष' और टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना बहुत ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और शरीर को अंदरूनी नुकसान से बचाया जा सके।

शरीर में जलन और बेचैनी (Body Heat) की समस्या क्या है?

शरीर में जलन एक ऐसी स्थिति है, जहाँ बिना किसी बुखार के भी व्यक्ति को अपने अंदर से भयंकर गर्मी, सीने में जलन, हथेलियों और पैरों के तलवों से आग निकलने जैसा एहसास होता है। एक सामान्य इंसान में शरीर का तापमान और पाचन एक संतुलित प्रक्रिया है, लेकिन गर्मी से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में 'पित्त' (अग्नि तत्व) बेकाबू हो जाता है। जब खून में यह अतिरिक्त गर्मी और एसिड (Acid) मिल जाता है, तो यह पूरे शरीर में फैलकर बेचैनी और घबराहट पैदा करता है। आमतौर पर लोग इसका शिकार बहुत ज़्यादा तीखा खानपान, कम पानी पीने, तेज़ धूप में रहने, मानसिक तनाव या रात-रात भर जागने के कारण होते हैं। ठंडी ड्रिंक्स लेने पर कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन ये शरीर के अंदर मौजूद उस पित्त दोष को ठीक नहीं करतीं जिसके कारण गर्मी बार-बार बनती है। बिना सोचे-समझे रोज़ाना गैस की दवाएँ खाना लिवर और आँतों पर बहुत खराब असर डालता है।

पित्त और शरीर की गर्मी से जुड़ी बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

शरीर में अतिरिक्त गर्मी और जलन से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं:

  • बर्निंग फीट सिंड्रोम (Burning Feet Syndrome): इसमें खासकर रात के समय पैरों के तलवों में बहुत तेज़ जलन और सुई चुभने जैसा दर्द होता है।
  • एसिडिटी और जीईआरडी (GERD): इसमें पेट का एसिड भोजन नली में वापस आ जाता है, जिससे सीने और गले में भयंकर जलन होती है।
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI): शरीर की गर्मी बढ़ने से पेशाब में तेज़ जलन, दर्द और बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है।
  • स्किन रैशेज़ और अर्टिकेरिया (Urticaria): खून में गर्मी (पित्त) बढ़ने से त्वचा पर अचानक लाल चकत्ते (Hives) और तेज़ खुजली होने लगती है

शरीर में गर्मी और जलन बढ़ने के लक्षण और संकेत

ऊपरी ठंडक से आराम मिलने के बाद बीमारी का बार-बार लौट आना कई अंदरूनी समस्याओं का संकेत है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • तलवों और हथेलियों में आग: ऐसा महसूस होना जैसे पैरों और हाथों के तलवों से भयंकर आँच निकल रही हो।
  • बेचैनी और घबराहट: बिना किसी कारण के दिल की धड़कन तेज़ होना, पसीना आना और एक जगह टिक कर न बैठ पाना।
  • आँखों में जलन और लालिमा: आँखों का हमेशा गर्म रहना, जलना और सूखी-सूखी महसूस होना।
  • भयंकर प्यास और मुँह सूखना: बार-बार पानी पीने के बाद भी गला सूखना और प्यास न बुझना।
  • नींद न आना: शरीर की गर्मी और घबराहट के कारण रात-रात भर करवटें बदलना और नींद पूरी न होना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

बार-बार शरीर में आग और बेचैनी लौटने के मुख्य कारण क्या हैं?

बार-बार शरीर में आग जैसी जलन होने के पीछे सिर्फ मौसम का तापमान नहीं, बल्कि कई गहरे अंदरूनी कारण हो सकते हैं:

  • पित्त और आम का संचय: गलत खान-पान जैसे बहुत ज़्यादा तीखी, खट्टी और तली-भुनी चीज़ें खाने से शरीर में 'आम' (गंदगी) बनता है। यह खून में मिलकर पित्त दोष को भड़का देता है।
  • कम पानी पीना (Dehydration): शरीर में पानी की कमी होने से अंदर की गर्मी पसीने या पेशाब के ज़रिए बाहर नहीं निकल पाती और शरीर में ही घबराहट पैदा करती है।
  • रात में जागना: प्राकृतिक नींद चक्र के बिगड़ने से शरीर का वात और पित्त दोनों असंतुलित हो जाते हैं, जो शरीर के तापमान और रूखेपन को बढ़ा देते हैं।
  • मानसिक तनाव और गुस्सा: आयुर्वेद के अनुसार, बहुत ज़्यादा स्ट्रेस, गुस्सा और चिंता सीधे तौर पर शरीर के पित्त को बढ़ाते हैं।
  • चाय, कॉफी और कैफीन: कैफीन शरीर को अंदर से सुखा देता है और एसिड का निर्माण करता है।

शरीर की गर्मी के जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

अगर सही समय पर इसका अंदरूनी इलाज न मिले, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • लिवर पर दबाव: पित्त का मुख्य स्थान लिवर होता है। गर्मी बढ़ने से लिवर कमज़ोर हो जाता है और पीलिया (Jaundice) का खतरा रहता है।
  • पेट में अल्सर: लगातार एसिड और गर्मी बढ़ने से पेट और आँतों की अंदरूनी परत में गहरे घाव हो जाते हैं।
  • हार्मोनल असंतुलन: खासकर महिलाओं में शरीर की गर्मी बढ़ने से पीरियड्स के दौरान भारी ब्लीडिंग और दर्द की समस्या बढ़ जाती है।
  • बालों का झड़ना और सफेद होना: बढ़ा हुआ पित्त सिर की त्वचा (Scalp) तक पहुँचकर बालों की जड़ों को जला देता है, जिससे बाल तेज़ी से झड़ते और सफेद होते हैं।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से शरीर में जलन सिर्फ एक सामान्य गर्मी नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'दाह' (Daha) या 'पित्त प्रकोप' की श्रेणी में रखा जाता है। यह माना जाता है कि जब शरीर में पित्त दोष (जिसका गुण गर्म और तीक्ष्ण होता है) बुरी तरह बिगड़ जाता है और 'रक्त धातु' (Blood) को दूषित कर देता है, तब पूरे शरीर में आग जैसी जलन होती है। डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं पेट में 'आम' यानी टॉक्सिन्स तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने जठराग्नि (पाचन) को खराब कर दिया है। जब तक यह बढ़ा हुआ पित्त और दूषित खून शरीर में रहेगा, बेचैनी और जलन की तकलीफ बार-बार लौटकर आती रहेगी। आयुर्वेद में बस ऊपरी ठंडक देना मकसद नहीं है, वे चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, खून साफ हो, तनाव कम हो और शरीर की शीतलता प्राकृतिक रूप से वापस आए।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके शरीर के अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: जलन के समय (दिन या रात) और घबराहट की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: इस्तेमाल की गई गैस की दवाएँ और एंटीबायोटिक्स का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • वातावरण और डाइट: मरीज़ के रोज़ाना के खान-पान, पानी पीने की आदत, चाय-कॉफी की लत और नींद को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: इन सभी बातों का विश्लेषण करने के बाद ही बिगड़े हुए पित्त को शांत करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

शरीर की गर्मी (Body Heat) कम करने के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में खून को साफ करने, पित्त शांत करने और शरीर को अंदरूनी ठंडक देने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • धनिया (Coriander): धनिया शरीर की भयंकर गर्मी और यूरिन इन्फेक्शन को दूर करने में चमत्कारिक है। रात भर भीगे हुए धनिए का पानी सुबह पीने से पित्त तुरंत शांत होता है।
  • गिलोय (Giloy): यह खून में मौजूद गर्मी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है। यह एक बेहतरीन पित्तनाशक औषधि है।
  • आँवला (Amla): यह विटामिन सी से भरपूर होता है और शरीर के एसिड को बेअसर करता है। यह पेट को साफ रखता है और जलन को जड़ से खत्म करता है।
  • चंदन (Sandalwood): चंदन की तासीर बेहद ठंडी होती है। इसका लेप माथे या पैरों के तलवों पर लगाने से घबराहट और जलन तुरंत कम हो जाती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म: शरीर की अंदरूनी सफाई

  • गहरी सफाई और पित्त शमन: जब शरीर में गर्मी सालों पुरानी हो और हाथ-पैरों से आग निकलती हो, तो जीवा आयुर्वेद में विरेचन और शिरोधारा जैसी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • पित्त को बाहर निकालना (विरेचन): इसमें मरीज़ को औषधीय जड़ी-बूटियों से पेट साफ कराया जाता है। इससे आँतों और लिवर में जमा पुराना पित्त मल के रास्ते पूरी तरह बाहर निकल जाता है।
  • तनाव और बेचैनी के लिए शिरोधारा: माथे पर ठंडे औषधीय तेल या दूध की लगातार धारा गिराई जाती है, जिससे नर्वस सिस्टम की गर्मी शांत होती है और मन को गहरी शांति मिलती है।

Body Heat के रोगी के लिए शुद्ध आहार (कौन सी चीज़ें बिल्कुल Avoid करनी चाहिए)

जीवा आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में जलन और बेचैनी दूर करने के लिए हल्का और पित्त दोष को शांत करने वाला आहार चुनना बहुत ज़रूरी है:

कौन सी  चीज़ें बिल्कुल Avoid करनी चाहिए?

लाल मिर्च और गरम मसाले: बहुत ज़्यादा स्पाइसी खाना, हरी और लाल मिर्च, अदरक और लहसुन शरीर में तुरंत आग (पित्त) पैदा करते हैं। इन्हें पूरी तरह कम कर दें।

  • खट्टी और फर्मेंटेड चीज़ें: खट्टा दही, अचार, इमली, सिरका और इडली-डोसा जैसी फर्मेंटेड चीज़ें शरीर में एसिड बढ़ाती हैं और खून को दूषित करती हैं।
  • चाय और कॉफी: इनमें मौजूद कैफीन शरीर को डिहाइड्रेट करता है और खून में एसिडिटी बढ़ाता है, जिससे जलन और बेचैनी तेज़ हो जाती है।
  • जंक फूड और मैदा: बाहर का तला-भुना खाना और पैकेटबंद चिप्स पचने में भारी होते हैं और शरीर में 'आम' बनाकर गर्मी पैदा करते हैं।
  • शराब और धूम्रपान (Alcohol & Smoking): शराब की तासीर भयंकर गर्म होती है। यह लिवर को भारी नुकसान पहुँचाकर सीधे तौर पर शरीर में बेचैनी और जलन बढ़ाती है।

क्या खाएँ?

  • पानी वाले फल और सब्ज़ियाँ: तरबूज़, खरबूजा, खीरा, लौकी और पेठा खाएँ। ये शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखते हैं।
  • गाय का घी और ताज़ा छाछ: खाने में एक चम्मच शुद्ध गाय का घी वात और पित्त दोनों को शांत करता है। भुना जीरा डालकर घर की ताज़ा छाछ पिएँ।
  • नारियल पानी और सौंफ: दिन भर में नारियल पानी पिएँ। खाना खाने के बाद सौंफ और मिश्री चबाने से मुँह का स्वाद सुधरता है और पेट ठंडा रहता है।

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच कैसे होती है

यहाँ मरीज़ की जाँच सिर्फ ऊपर-ऊपर से लक्षण देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, जलन होने के समय और घबराहट को आराम से सुना जाता है।
  • आपके खाने-पीने, तीखी चीज़ें लेने और पानी पीने की आदतों को गहराई से समझा जाता है।
  • आपकी नींद, मानसिक तनाव और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति को परखा जाता है।
  • नाड़ी जाँच से शरीर की प्रकृति (Prakriti) और बिगड़े हुए पित्त को जाना जाता है।

इन सब चीज़ों को समझने के बाद आपके लिए एक ऐसा इलाज प्लान बनाया जाता है, जो आपके शरीर को पूरी तरह शांत और शीतल करे।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर जलन और एसिडिटी की शुरुआत है, तो आमतौर पर 3 से 4 हफ्तों में ही आराम मिलने लगता है और घबराहट दूर हो जाती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर तलवों में भयंकर जलन सालों पुरानी है, तो खून साफ होने और दोषों को संतुलित होने में 3 से 6 महीने भी लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है और भविष्य में बिना किसी ठंडे पाउडर के भी जलन की संभावना खत्म हो जाती है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य जलन, एलर्जी या एसिडिटी जैसे लक्षणों को नियंत्रित करना शरीर के संतुलन, पाचन सुधार और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना
नज़रिया समस्या को एसिड, एलर्जी या अन्य चिकित्सीय कारणों से जुड़ी स्थिति के रूप में देखना इसे वात-पित्त असंतुलन, ‘आम’ और शरीर की आंतरिक गर्मी से जोड़कर देखना
उपचार तरीका एंटासिड, एंटी-एलर्जी दवाएँ, जीवनशैली सुधार और आवश्यकता अनुसार अन्य उपचार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ, पंचकर्म, पाचन संतुलन और दिनचर्या सुधार
डाइट और लाइफस्टाइल हल्का भोजन, ट्रिगर फूड से बचाव, पर्याप्त पानी और तनाव नियंत्रण की सलाह पित्त-शामक, सुपाच्य आहार और नियमित दिनचर्या पर ज़ोर
लंबा असर कई लोगों में लंबे समय तक प्रबंधन और चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता हो सकती है समग्र संतुलन और जीवनशैली सुधार के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य सपोर्ट पर ध्यान

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

समय पर सलाह लेने से शरीर को बड़ी जटिलताओं और अल्सर से बचाया जा सकता है।

  • पेशाब में बहुत ज़्यादा जलन हो और पेशाब का रंग गहरा पीला या लाल हो जाए।
  • सीने या पेट में भयंकर दर्द हो जो गैस की दवा से भी कम न हो रहा हो।
  • आँखें एकदम लाल हो जाएँ और घबराहट के कारण साँस लेने में दिक्कत हो।
  • लगातार उल्टी हों और उनमें पीला पानी (पित्त) दिखाई दे।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में भयंकर जलन (Body Heat) और बेचैनी मुख्य रूप से पित्त दोष के भड़कने और रक्त के दूषित होने का परिणाम है। तीखा खान-पान, तनाव और कम पानी पीने से शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बनता है, जो अंदरूनी ठंडक को खत्म कर देता है। सिर्फ ठंडे पाउडर या गैस की गोलियों से स्थायी आराम नहीं मिलता। स्वस्थ रहने के लिए पित्त शमन, धनिया-गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों का सेवन और ठंडी तासीर वाला आहार अपनाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

FAQs

बुखार में थर्मामीटर पर शरीर का तापमान बढ़ा हुआ दिखता है, जबकि 'बॉडी हीट' में थर्मामीटर पर तापमान बिल्कुल सामान्य रहता है, लेकिन व्यक्ति को अंदर से आग लगने या भयंकर जलन का एहसास होता है।

रात को सोने से पहले पैरों के तलवों पर शुद्ध गाय का घी या नारियल का तेल लगाकर अच्छे से मालिश करें। इसके अलावा चंदन का लेप लगाने से भी तुरंत ठंडक मिलती है।

बिल्कुल नहीं। बर्फ का पानी पीने से पेट की पाचन अग्नि (जठराग्नि) तुरंत बुझ जाती है। इससे खाना ठीक से पचता नहीं है और शरीर में गंदगी बनकर वह और ज़्यादा गर्मी और बेचैनी पैदा करता है।

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार बहुत ज़्यादा तनाव, चिंता और गुस्से से शरीर का नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे वात और पित्त बिगड़ते हैं और पूरे शरीर में बेचैनी व गर्मी महसूस होने लगती है।

तरबूज़, खरबूजा, खीरा, मीठे अंगूर और नारियल पानी पित्त को कम करने और शरीर को प्राकृतिक रूप से अंदर से ठंडा रखने में सबसे अच्छे माने जाते हैं।

हाँ, धनिया एक बेहतरीन पित्तनाशक है। रात भर पानी में एक चम्मच सूखा धनिया भिगोकर सुबह खाली पेट उसका पानी पीने से शरीर की गर्मी और पेशाब की जलन में बहुत आराम मिलता है।

हाँ, प्राकृतिक नींद चक्र बिगड़ने से शरीर में वात और पित्त दोनों तेज़ी से बढ़ जाते हैं, जिससे अगले दिन शरीर में रूखापन, थकान, आँखों में जलन और घबराहट महसूस होती है।

बिल्कुल। जब शरीर का अतिरिक्त पित्त सिर की त्वचा (Scalp) तक पहुँचता है, तो वह बालों की जड़ों को कमज़ोर कर देता है, जिससे बाल तेज़ी से झड़ने और समय से पहले सफेद होने लगते हैं।

हाँ, शुद्ध गाय का घी पित्त दोष को शांत करने की सबसे बेहतरीन औषधि है। यह शरीर को अंदर से ठंडी चिकनाई देता है और वात व पित्त दोनों को संतुलित करता है।

हाँ, आयुर्वेद सिर्फ बाहरी तेल नहीं लगाता, बल्कि विरेचन (Panchakarma), गिलोय और सही डाइट के ज़रिए दूषित रक्त और पित्त को शरीर से बाहर निकालता है, जिससे तलवों की जलन जड़ से खत्म हो जाती है।

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