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Thyroid Eye Disease (Bulging Eyes) — आयुर्वेद से रोकथाम

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

शीशे के सामने खड़े होकर जब आप अपनी आंखों को देखते हैं, तो क्या आपको अपनी ही आंखें कुछ बदली हुई, बड़ी और बाहर की ओर निकली हुई सी लगती हैं? ऐसा लगना जैसे आप लगातार किसी चीज़ को घूर रहे हों, जबकि आप सामान्य रूप से देख रहे होते हैं। आंखों में लगातार चुभन, पानी आना, और ऐसा महसूस होना जैसे आंखों के अंदर रेत के कण चले गए हों हम अक्सर इसे प्रदूषण, स्क्रीन टाइम या नींद की कमी मानकर आई ड्रॉप्स Eye Drops डालकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

लेकिन यह महज़ आंखों की कोई आम एलर्जी या थकावट नहीं है। यह आपके शरीर के अंदर चल रहे एक बड़े ऑटोइम्यून Autoimmune युद्ध का संकेत है, जिसे 'थायरॉइड आई डिजीज' Thyroid Eye Disease या TED कहा जाता है। जब आपका अपना ही इम्यून सिस्टम आपकी आंखों के पीछे मौजूद मांसपेशियों और फैट पर हमला करने लगता है, तो आंखें सूज कर अपनी जगह से बाहर की ओर धकेल दी जाती हैं। इस 'बल्जिंग आइज' Bulging Eyes की स्थिति को अगर सिर्फ आंखों की समस्या मानकर टाल दिया जाए, तो यह आगे चलकर आपकी देखने की क्षमता Vision को हमेशा के लिए छीन सकता है।

थायरॉइड आई डिजीज Bulging Eyes शरीर में क्या संकेत देती है?

थायरॉइड आई डिजीज मुख्य रूप से 'ग्रेव्स डिजीज' Graves' Disease नामक हाइपरथायरॉइडिज़्म Hyperthyroidism से जुड़ी एक ऑटोइम्यून स्थिति है। इसमें आपका इम्यून सिस्टम गलती से आपकी आंखों के आसपास के ऊतकों Tissues को दुश्मन समझकर उन पर हमला कर देता है।

  • मांसपेशियों में भारी सूजन: आंखों को घुमाने वाली मांसपेशियों Extraocular muscles में भारी सूजन आ जाती है, जिससे आंखों का मूवमेंट मुश्किल हो जाता है और दोहरा दिखाई Double Vision देने लगता है।
  • आंखों का बाहर की ओर धकेलना Proptosis: आंखों के सॉकेट Orbital cavity में जगह कम होती है। जब फैट और मांसपेशियां सूज जाती हैं, तो वे आंखों के गोलक Eyeball को बाहर की तरफ धकेल देती हैं, जिससे आंखें डरावनी और घूरती हुई प्रतीत होती हैं।
  • पलकों का सिकुड़ना Lid Retraction: आंखों के सूजने और बाहर आने से पलकें पूरी तरह बंद नहीं हो पातीं। सोते समय भी आंखें थोड़ी खुली रह जाती हैं, जो कॉर्निया Cornea को बुरी तरह सुखा देती हैं।
  • ऑप्टिक नर्व पर दबाव: अगर यह सूजन बहुत अधिक बढ़ जाए, तो यह आंखों से दिमाग तक सिग्नल ले जाने वाली मुख्य नस Optic Nerve को कुचल सकती है, जिससे स्थायी अंधापन हो सकता है।

थायरॉइड आई डिजीज और आंखों का डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का शरीर और उसके त्रिदोष अलग होते हैं। थायरॉइड के कारण आंखों पर पड़ने वाला यह प्रभाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान डैमेज: इस स्थिति में आंखों में भयंकर रूखापन Dryness आ जाता है। ऐसा लगता है जैसे आंखों में लगातार धूल या रेत चुभ रही हो। पलकें झपकाने में दर्द होता है और ठंडी हवा या एसी AC में बैठने पर आंखों में तेज़ दर्द और फड़कन महसूस होती है।
  • पित्त-प्रधान डैमेज: इसमें आंखों के अंदर भारी गर्मी और जलन Burning Sensation होती है। आंखें हमेशा लाल Bloodshot रहती हैं और उनमें से लगातार पानी बहता रहता है। मरीज़ तेज़ रोशनी सूरज या लाइट को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाता Photophobia।
  • कफ-प्रधान डैमेज: इस अवस्था में आंखों के आसपास भारी सूजन Puffiness/Edema आ जाती है। आंखों के नीचे भारी बैग्स बन जाते हैं। आंखों की मांसपेशियां इतनी भारी हो जाती हैं कि उन्हें हिलाना मुश्किल हो जाता है और व्यक्ति को एक चीज़ के दो प्रतिबिंब Double Vision दिखाई देने लगते हैं।

क्या आपकी आंखों में भी डैमेज के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

थायरॉइड आई डिजीज अचानक एक दिन में आंखें बाहर नहीं निकालती। यह बीमारी बहुत पहले से अलार्म बजाती है, जिसे हम आई-स्ट्रेन मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं:

  • चेहरे के हाव-भाव में बदलाव: लोगों का यह टोकना कि आप हमेशा गुस्से में या किसी को 'घूरते' हुए लग रहे हैं, जबकि आप सामान्य हैं।
  • पलकों का भारीपन और सूजन: सुबह उठने पर आंखों के ऊपर और नीचे भारी सूजन का होना, जो दिन चढ़ने के साथ भी कम न हो।
  • सोते समय आंखें खुली रहना: नींद में भी पलकों का पूरी तरह न जुड़ पाना, जिससे सुबह उठने पर आंखें लाल और एकदम सूखी Dry मिलती हैं।
  • आंखों के पीछे दबाव का दर्द: आंखों को ऊपर, नीचे या साइड में घुमाते समय आंखों के ठीक पीछे एक खिंचाव और भारी दर्द महसूस होना।

इस समस्या को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

आंखों की इस लालिमा और चुभन से तुरंत राहत पाने के लिए मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो इस ऑटोइम्यून बीमारी को और भड़का देते हैं:

  • सिर्फ आई-ड्रॉप्स पर निर्भर रहना: आंखों के रूखेपन के लिए दिन में दसियों बार आर्टिफिशियल टियर्स Lubricating drops डालना, लेकिन थायरॉइड और ऑटोइम्यून के मूल कारण का इलाज न करना।
  • धूम्रपान Smoking करते रहना: सिगरेट पीना थायरॉइड आई डिजीज के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर है। धूम्रपान करने वालों में यह बीमारी होने और इसके गंभीर रूप लेने का खतरा 8 गुना अधिक होता है।
  • यह सोचना कि थायरॉइड कंट्रोल तो आंखें भी ठीक: कई मरीज़ सोचते हैं कि उनकी थायरॉइड की गोली चल रही है और रिपोर्ट नॉर्मल है, तो आंखें खुद ठीक हो जाएंगी। जबकि थायरॉइड आई डिजीज का अपना एक अलग चक्र होता है, जो हार्मोन नॉर्मल होने के बाद भी बढ़ता रह सकता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए, तो कॉर्निया का सूखकर डैमेज होना Corneal Ulcer और सर्जरी Orbital Decompression ही एकमात्र रास्ता बचता है, जिसमें हड्डियां काटकर आंखों को पीछे धकेला जाता है।

आयुर्वेद थायरॉइड आई डिजीज और आंखों के बाहर आने को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे थायरॉइड आई डिजीज या ऑटोइम्यून डिसऑर्डर कहता है, आयुर्वेद उसे 'अग्नि' के बिगड़ने, 'आम' Toxins के बनने और 'ऊर्ध्वजत्रुगत' गर्दन के ऊपर के रोगों के विज्ञान से गहराई से समझता है।

  • अग्नि की विकृति और 'आम' का निर्माण: जब मेटाबॉलिज्म जठराग्नि और धात्वाग्नि बिगड़ता है, तो शरीर में भारी मात्रा में 'आम' विषाक्त पदार्थ बनता है। यही 'आम' जब इम्यून सिस्टम को भ्रमित करता है, तो शरीर 'ओजस' Immunity के खिलाफ ही काम करने लगता है ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया।
  • वात-पित्त का ऊर्ध्व गति करना: बिगड़ा हुआ वात और पित्त दोष शरीर में ऊपर की ओर Urdhva जाकर आंखों नेत्र में जमा हो जाते हैं। पित्त वहां भारी जलन और लालिमा पैदा करता है, जबकि वात आंखों की नमी को सुखाकर उन्हें बाहर की ओर धकेलने वाला दबाव बनाता है।
  • मांस और मेद धातु की विकृति: आंखों के पीछे की मांसपेशियां मांस धातु और फैट मेद धातु इस 'आम' के कारण सूज जाते हैं, जिससे आंखों के गोलक के लिए जगह कम पड़ जाती है।

आंखों की खुश्की मिटाने और वात-पित्त शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके इम्यून सिस्टम को भड़का भी सकता है और उसे शांत भी कर सकता है। थायरॉइड आई डिजीज की सूजन को कम करने और आंखों को बचाने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अनिवार्य रूप से अपनाएं।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - पित्त-शामक और आंखों के लिए लाभकारी क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - गर्मी और सूजन बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, जौ, ओट्स, मूंग दाल, ज्वार। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, अत्यधिक खमीर वाला भोजन।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी आंखों के लिए अमृत, नारियल का तेल। रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक मक्खन या चीज़।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, पेठा, पालक, गाजर, परवल सभी पकी हुई। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, बैंगन, तीखी मिर्च, टमाटर।
फल और मेवे Fruits & Nuts आंवला, मीठे सेब, पपीता, रात भर भीगे हुए बादाम, मुनक्का। डिब्बाबंद फल, बाज़ार के रोस्टेड व नमकीन नट्स, खट्टे फल।
पेय पदार्थ Beverages धनिया का पानी, ताज़ा आंवला जूस, सौंफ का पानी। कैफीन कॉफी आंखों को सुखाती है, शराब, कोल्ड ड्रिंक्स।

आंखों को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के आंखों की सूजन को खींच लेते हैं और ऑटोइम्यून अटैक को रोकते हैं:

  • आंवला Amla: आयुर्वेद में इसे 'चाक्षुष्य' आंखों के लिए सबसे हितकारी कहा गया है। यह विटामिन सी से भरपूर है, पित्त की गर्मी को शांत करता है और आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखता है।
  • गिलोय Giloy: यह सबसे बेहतरीन 'इम्यूनोमॉड्यूलेटर' है। शरीर के अंदरूनी 'आम' को खत्म करके गिलोय इम्यून सिस्टम को वापस सही तरीके से काम करना सिखाती है।
  • कांचनार Kanchanar: थायरॉइड ग्रंथि की किसी भी प्रकार की विकृति और ग्रंथि Glandular सूजन को कम करने के लिए कांचनार गुग्गुलु एक अचूक औषधि है।
  • शतावरी Shatavari: यह एक ठंडी और पौष्टिक जड़ी-बूटी है, जो आंखों के सूखेपन को दूर करती है और सूजी हुई मांसपेशियों मांस धातु को प्राकृतिक नमी देती है।
  • त्रिफला Triphala: पेट की गर्मी और कब्ज़ को दूर करने के साथ-साथ, त्रिफला के पानी से आंखें धोने से लालिमा और जलन में तुरंत आराम मिलता है।

आंखों की नसें खोलने और सूजन मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब आंखों के पीछे की मांसपेशियां पूरी तरह सूज चुकी हों और आंखें बाहर आ रही हों, तो केवल मौखिक दवाइयां काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ डैमेज को तेज़ी से रिवर्स करती हैं:

  • नेत्र तर्पण Netra Tarpana: इस जादुई थेरेपी में आंखों के चारों ओर उड़द की दाल का आटा लगाकर एक बाउंड्री बनाई जाती है और उसमें औषधीय गुणों वाला गुनगुना शुद्ध गाय का घी भरा जाता है। यह सूखी हुई पलकों और कॉर्निया को भारी चिकनाई देता है और आंखों के बाहर आने के दबाव को कम करता है।
  • नस्य Nasya: नाक के ज़रिए औषधीय तेल डालने की यह थेरेपी 'ऊर्ध्वजत्रुगत' रोगों के लिए रामबाण है। यह सीधे दिमाग, थायरॉइड ग्रंथि और आंखों की ब्लॉक हुई नसों को खोलती है।
  • शिरोधारा Shirodhara: चूंकि थायरॉइड सीधे स्ट्रेस तनाव से जुड़ा है, इसलिए माथे पर औषधीय तेल की लगातार धार गिराने वाली यह थेरेपी नर्वस सिस्टम को जादुई शांति और फौलादी ठंडक प्रदान करती है।
  • विरेचन Virechana: शरीर में बढ़ी हुई एक्स्ट्रा पित्त गर्मी और टॉक्सिन्स को मल के ज़रिए बाहर निकालने की यह विधि ऑटोइम्यून सूजन को तेज़ी से गिराती है।

आंखों के पूरी तरह रिपेयर होने और सूजन खत्म होने में कितना समय लगता है?

ऑटोइम्यून बीमारी के कारण सूजी हुई आंखों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से आपका पाचन सुधरेगा। आंखों की लगातार होने वाली जलन, लालिमा और आंसू बहने में भारी कमी आएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से थायरॉइड ग्रंथि का काम नियमित होने लगेगा। आंखों के पीछे की सूजन Puffiness कम होगी और दोहरा दिखना Double vision बंद होने लगेगा।
  • 5-6 महीने: ऑटोइम्यून अटैक शांत हो जाएगा। आंखों का बाहर की ओर धकेलना Bulging रुक जाएगा और आंखें अपनी प्राकृतिक अवस्था और नमी में वापस आ जाएंगी। आप बिना किसी स्टेरॉयड के स्वस्थ जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

थायरॉइड आई डिजीज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य सूजन को तुरंत दबाने के लिए हाई डोज़ स्टेरॉयड्स Corticosteroids और इम्यूनोसप्रेसेन्ट्स देना। आम' को पचाना, इम्यून सिस्टम को नेचुरली शांत करना और आंखों को प्राकृतिक रूप से पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल आंखों के पीछे के टिश्यूज़ की सूजन और थायरॉइड एंटीबॉडीज़ का एक मैकेनिकल डैमेज मानना। इसे कमज़ोर अग्नि, बिगड़े हुए वात-पित्त और ओजस की विकृति का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल आर्टिफिशियल टियर्स की सलाह, लेकिन डाइट या अग्नि पाचन पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-पित्त शामक डाइट, धूम्रपान छोड़ना, तनाव प्रबंधन और शुद्ध गाय के घी को इलाज का बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर स्टेरॉयड के गंभीर साइड-इफेक्ट्स होते हैं। एडवांस स्टेज में हड्डियां काटकर ऑर्बिटल डीकंप्रेशन सर्जरी करनी पड़ती है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है। बिना सर्जरी के ऑटोइम्यून अटैक रुकता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से स्वस्थ रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपनी आंखों में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • रोशनी का अचानक कम होना: अगर आपको एकदम से धुंधला दिखने लगे या रंगों की पहचान खत्म हो जाए यह ऑप्टिक नर्व के दबने का संकेत है।
  • पलकों का बिल्कुल बंद न होना: अगर आंखें इतनी बाहर आ जाएं कि सोते समय पलकें बिल्कुल भी कॉर्निया को ढक न पाएं।
  • आंखों को घुमाने पर असहनीय तेज़ दर्द: अगर आंखें स्थिर हो जाएं और ऊपर या नीचे देखने पर असहनीय दर्द हो।
  • कॉर्निया पर छाले Ulcer: अगर आंखों के काले हिस्से Cornea पर सफेद धब्बे या छाले दिखाई देने लगें।

निष्कर्ष

अपनी बड़ी और घूरती हुई आंखों को चश्मे Sunglasses के पीछे छिपाना इस समस्या का हल नहीं है। थायरॉइड आई डिजीज आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका इम्यून सिस्टम भटक गया है, अग्नि कमज़ोर हो चुकी है और आपकी आंखों की नसें भारी दबाव में दम तोड़ रही हैं। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना केवल आर्टिफिशियल आई-ड्रॉप्स और भारी स्टेरॉयड्स से दबाते हैं, तो आप अपनी आंखों को हील करने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से कमज़ोर कर रहे होते हैं। इस ऑटोइम्यून खतरे के चक्र से बाहर निकलें। धूम्रपान छोड़ें, अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी, आंवला और लौकी शामिल करें। गिलोय, कांचनार और शतावरी जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और नेत्र तर्पण व नस्य थेरेपी से अपनी सूखी हुई आंखों को प्राकृतिक जीवन दें। थायरॉइड के कारण अपनी आंखों की रोशनी को खतरे में न डालें, और अपने शरीर व इम्यून सिस्टम को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

सामान्य एलर्जी धूल या मौसम से होती है और कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। लेकिन थायरॉइड आई डिजीज में आंखों के पीछे की मांसपेशियां सूज जाती हैं, जिससे आंखें बाहर की तरफ उभर आती हैं, दोहरा दिखाई देता है और लगातार भयंकर दर्द व लालिमा बनी रहती है।

यह सबसे बड़ा भ्रम है। थायरॉइड आई डिजीज (TED) थायरॉइड ग्रंथि की बीमारी से स्वतंत्र होकर चलती है। रक्त में थायरॉइड हार्मोन (T3/T4) नॉर्मल होने के बाद भी ऑटोइम्यून एंटीबॉडीज़ आपकी आंखों पर हमला करना जारी रख सकती हैं। इसलिए आंखों का अलग से आयुर्वेदिक इलाज ज़रूरी है।

बिल्कुल। मेडिकल रिसर्च और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि धूम्रपान शरीर में भारी टॉक्सिन्स (आम) और रूखापन (वात) बढ़ाता है। धूम्रपान करने वालों में TED का खतरा कई गुना बढ़ जाता है और इलाज का असर भी बहुत धीमा होता है।

आंखों की सूजन कम करने के लिए सोते समय अपने सिर को तकियों की मदद से शरीर से थोड़ा ऊंचा (Elevated) रखें। इससे गुरुत्वाकर्षण के कारण आंखों के आसपास जमा हुआ तरल पदार्थ (Fluid) नीचे की ओर आ जाता है और सुबह आंखों में कम सूजन मिलती है।

नहीं। आई ड्रॉप्स केवल आंखों के रूखेपन (Dryness) को बाहरी तौर पर कुछ घंटों के लिए कम करते हैं। बीमारी की असली वजह—इम्यून सिस्टम का हमला और मांसपेशियों की सूजन—को ठीक करने के लिए अंदरूनी आयुर्वेदिक औषधियों और अग्नि को सुधारने की ज़रूरत होती है।

हाँ, यह अत्यधिक सुरक्षित और असरदार है। नेत्र तर्पण में इस्तेमाल होने वाला औषधीय गाय का घी वात और पित्त को गहराई से शांत करता है, आंखों के रूखेपन को खत्म करता है और सूजी हुई मांसपेशियों को रिलैक्स करके उन्हें प्राकृतिक जगह पर वापस जाने में मदद करता है।

जब ऑटोइम्यून हमले के कारण आंखों को घुमाने वाली मांसपेशियां सूज जाती हैं और सख्त हो जाती हैं, तो दोनों आंखें एक साथ मिलकर काम नहीं कर पातीं (Alignment बिगड़ जाता है)। इसी कारण से दिमाग को एक ही वस्तु की दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई देने लगती हैं।

हाँ, अगर बीमारी की शुरुआती अवस्था (Active Phase) में ही आयुर्वेदिक औषधियों, पंचकर्म (नस्य, तर्पण) और डाइट का सही इस्तेमाल किया जाए, तो ऑटोइम्यून अटैक को रोका जा सकता है और सूजन कम की जा सकती है, जिससे सर्जरी की नौबत ही नहीं आती।

आप काम कर सकते हैं, लेकिन अपनी आंखों को नियमित ब्रेक दें (20-20-20 रूल अपनाएं)। स्क्रीन की रोशनी कम रखें और काम करते समय आंखों को झपकाना न भूलें, क्योंकि TED में आंखें पहले से ही बहुत सूखी और कमज़ोर होती हैं।

बिल्कुल। तनाव आपके शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ाता है जो सीधे आपके इम्यून सिस्टम और थायरॉइड ग्रंथि को ट्रिगर करता है। आयुर्वेद मानता है कि मानसिक तनाव प्राण वात को बिगाड़ता है, जिससे यह ऑटोइम्यून बीमारी और भी अधिक उग्र (Aggressive) हो जाती है। इसलिए ध्यान और अश्वगंधा/ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटियां इसमें बहुत लाभ देती हैं।

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