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बढ़ती गर्मी और बीमारियाँ — क्लाइमेट चेंज का स्वास्थ्य पर गहरा असर

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह सूरज निकलते ही घर से बाहर कदम रखना और अचानक गर्म हवा के थपेड़ों का चेहरे पर लगना। फिर दिन भर एसी AC वाले ऑफिस में बैठना और शाम को वापस उसी तपती हुई भट्टी जैसी गर्मी में सफर करना। बीते कुछ सालों में, क्लाइमेट चेंज ने गर्मियों के मौसम को केवल पसीने वाले दिनों से बदलकर हीटवेव Heatwave और झुलसा देने वाले खतरनाक मौसम में तब्दील कर दिया है। इस भयानक गर्मी के बीच, जब अचानक सिर में तेज़ दर्द उठता है, पेट में जलन होने लगती है या बिना कोई भारी काम किए शरीर निढाल हो जाता है, तो हम इसे केवल मौसम की आम थकावट मानकर ग्लूकोज़ पी लेते हैं।

लेकिन यह साधारण थकावट नहीं है; यह आपके शरीर का वह अलार्म है जो बता रहा है कि वातावरण का बढ़ता तापमान आपके अंदर के सिस्टम को जला रहा है। जब Heat Exhaustion और डिहाइड्रेशन आपकी रोज़ की स्थिति बन जाए, तो समझ लीजिए कि क्लाइमेट चेंज और यह भीषण गर्मी आपके शरीर के त्रिदोष संतुलन विशेषकर पित्त को राख कर रही है, जिसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर गंभीर ऑर्गन डैमेज और पुरानी बीमारियों का कारण बन सकता है।

यह भयंकर गर्मी शरीर में क्या संकेत देती है?

बढ़ता Global Warming हमारे शरीर के कूलिंग सिस्टम पर एक ऐसा भारी दबाव डालता है, जिसके लिए हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से तैयार नहीं है। वातावरण की यह आग शरीर के अंदर भी कई बदलाव लाती है-

  • पित्त दोष का भयंकर प्रकोप- बाहर की गर्मी सीधे तौर पर शरीर के पित्त अग्नि और जल तत्व को भड़काती है इस असंतुलन के कारण एसिडिटी, सीने में जलन, अल्सर और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसी समस्याएँ आम हो जाती हैं।
  • डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी- भीषण गर्मी में शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए अत्यधिक पसीना निकालता है। इसके साथ शरीर के ज़रूरी इलेक्ट्रोलाइट्स सोडियम, पोटेशियम बह जाते हैं, जिससे नसों में खिंचाव,चक्कर आना और ब्लड प्रेशर लो होने लगता है।
  • जठराग्नि का मंद पड़ना- आयुर्वेद के अनुसार, गर्मी के मौसम ग्रीष्म ऋतु में वातावरण की गर्मी तो बढ़ती है, लेकिन शरीर के अंदर की जठराग्नि बुझने लगती है यही कारण है कि गर्मी में भारी खाना पचता नहीं है और उल्टी या डायरिया की शिकायत बढ़ जाती है।
  • सनस्ट्रोक और नर्वस सिस्टम पर तनाव- अत्यधिक तापमान सीधे मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम पर वार करता है शरीर का थर्मोरेग्युलेशन तापमान नियंत्रण फेल होने पर लू लग जाती है, जो एक जानलेवा स्थिति बन सकती है।

क्लाइमेट चेंज और बढ़ती गर्मी का असर किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति अलग होती है। क्लाइमेट चेंज और इस झुलसाती गर्मी का प्रभाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है-

  • पित्त-प्रधान प्रभाव- इस स्थिति में शरीर अंदर से जलने लगता है। आँखों में भयंकर जलन, त्वचा पर लाल दाने, बालों का झड़ना, बहुत ज़्यादा पसीना आना और छोटी-छोटी बातों पर भयंकर गुस्सा Irritability आना इसके मुख्य लक्षण हैं। ऐसे लोग धूप में 10 मिनट भी खड़े नहीं रह पाते।
  • वात-प्रधान प्रभाव- गर्म और सूखी हवाएँ लू शरीर का सारा प्राकृतिक मॉइस्चर सोख लेती हैं। इसमें होंठ फटना, त्वचा का रूखा होना, जोड़ों में अचानक कट-कट की आवाज़ आना और भयंकर मानसिक बेचैनी Anxiety महसूस होती है। शरीर का पानी सूख जाने से मल कड़ा कब्ज़ हो जाता है।
  • कफ-प्रधान प्रभाव- जो लोग कफ प्रकृति के होते हैं, उन्हें इस गर्मी में अत्यधिक सुस्ती और भारीपन घेर लेता है। उनका मेटाबॉलिज़्म इतना धीमा हो जाता है कि कुछ भी खाने का मन नहीं करता, बस सारा दिन पानी पीने और लेटे रहने की इच्छा होती है। पसीना बहुत आता है लेकिन शरीर चिपचिपा रहता है।

क्या आपके शरीर में भी गर्मी से होने वाली बीमारियों के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

गंभीर हीटस्ट्रोक रातों-रात नहीं होता। क्लाइमेट चेंज का यह असर बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाता है, जिसे हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ-

  • बिना वजह तेज़ सिरदर्द Summer Headache- धूप से वापस आते ही या दोपहर के समय माथे और कनपटी में धड़कता हुआ दर्द होना।
  • पेशाब का रंग गहरा पीला होना- यह शरीर में पानी की भयंकर कमी Dehydration का सबसे पहला और स्पष्ट संकेत है।
  • अचानक चक्कर आना या आँखों के आगे अंधेरा छाना- अचानक खड़े होने पर या धूप में चलते हुए बैलेंस बिगड़ना, जो इलेक्ट्रोलाइट ड्रॉप को दर्शाता है।
  • त्वचा पर रैशेज़ और खुजली- पीठ, छाती या जांघों के आसपास लाल दाने घमौरियाँ निकलना और उनमें सुई चुभने जैसी जलन होना।

इस बढ़ती गर्मी में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

गर्मी से तुरंत राहत पाने की जल्दबाज़ी में लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो शरीर के सिस्टम को अंदर से डैमेज कर देते हैं-

  • फ्रिज का चिल्ड बर्फ वाला पानी पीना- चिलचिलाती धूप से आकर सीधा फ्रिज का ठंडा पानी पीना शरीर की पहले से कमज़ोर जठराग्नि को पूरी तरह बुझा देता है। यह धमनियों को सिकोड़ देता है, जिससे गला खराब होने के साथ-साथ हृदय पर भारी ज़ोर पड़ता है।
  • एसी AC से धूप में और धूप से एसी में जाना- अचानक तापमान में 15-20 डिग्री का बदलाव शरीर का थर्मोरेग्युलेशन बिगाड़ देता है, जिससे थर्मल शॉक Thermal Shock लगता है। यही फेशियल पैरालिसिस, माइग्रेन और अचानक बुखार का सबसे बड़ा कारण बनता है।
  • कोल्ड ड्रिंक्स और कैफीन का अधिक सेवन- प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स या आइस-टी पीना। इनमें मौजूद कैफीन और शुगर शरीर को और ज़्यादा डिहाइड्रेट करते हैं और वात-पित्त को भड़काते हैं।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ- अगर शरीर की इस बढ़ी हुई गर्मी Pitta accumulation को शांत न किया जाए, तो यह आगे चलकर क्रोनिक एसिडिटी, किडनी स्टोन, लिवर की कमज़ोरी और भयंकर चर्म रोगों Skin diseases का रूप ले लेती है।

आयुर्वेद क्लाइमेट चेंज और भयंकर गर्मी के प्रभाव को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे हीट एग्जॉशन या क्लाइमेट चेंज का असर कहता है, आयुर्वेद उसे आदान काल Adana Kala और ग्रीष्म ऋतुचर्या के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • आदान काल सूर्य का बलशाली होना- आयुर्वेद के अनुसार, गर्मियों में सूर्य का बल सबसे अधिक होता है और वह पृथ्वी और मनुष्य के शरीर से सारा सौम्य अंश Cooling essence/Moisture सोख लेता है। इससे शरीर कमज़ोर और रूखा होने लगता है।
  • पित्त संचय Accumulation of Pitta- इस मौसम में वातावरण की गर्मी के कारण शरीर में पित्त दोष इकट्ठा होने लगता है। यदि सही खान-पान न रखा जाए, तो यही पित्त रक्त में मिलकर शरीर को अंदर से जलाता है और बीमारियों को जन्म देता है।
  • ओजस Ojas का क्षय- अत्यधिक पसीना बहने और गलत जीवनशैली के कारण शरीर की इम्यूनिटी ओजस कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति आसानी से इन्फेक्शन और लू की चपेट में आ जाता है।

गर्मी से बचने और शरीर को ठंडा रखने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके शरीर की गर्मी को बढ़ा भी सकता है और एसी AC की तरह अंदर से ठंडा भी कर सकता है। क्लाइमेट चेंज की इस भीषण गर्मी से बचने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - शरीर को ठंडा रखने वाले और पित्त शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - शरीर में गर्मी और एसिडिटी बढ़ाने वाले
अनाज Grains जौ Barley, पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल, गेहूं। बाज़रा, मक्का, वाइट ब्रेड, मैदा, ज़्यादा मसालेदार नूडल्स।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी पित्त शांत करने के लिए अमृत, नारियल का तेल। सरसों का तेल यह बहुत गर्म होता है, रिफाइंड तेल, अत्यधिक मक्खन।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, परवल, खीरा, पुदीना, धनिया, पेठा Ash gourd। बहुत ज़्यादा लहसुन, प्याज़, बैंगन, कच्चा पपीता, लाल मिर्च।
फल Fruits तरबूज़, खरबूजा, नारियल पानी, अंगूर, मीठा अनार, मुसम्मी। बिना मौसम के फल, बहुत खट्टे या कच्चे फल जो एसिडिटी बढ़ाते हैं।
पेय पदार्थ Beverages सत्तू का शर्बत, बेल का शर्बत, ताज़ा मट्ठा Chaach जीरे के साथ, आम पन्ना। बहुत ज़्यादा चाय/कॉफी, पैक्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब Alcohol।

गर्मी से बचाने और फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के शरीर की भयंकर गर्मी को सोख लेते हैं और डैमेज हुए सिस्टम को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं-

  • चंदन और उशीर Khus- ये दोनों जड़ी-बूटियाँ शरीर के लिए प्राकृतिक एसी AC का काम करती हैं। यह नसों, रक्त और त्वचा में घुसी हुई भयंकर गर्मी को खींचकर शरीर को जादुई ठंडक प्रदान करती हैं।
  • आंवला Amla- विटामिन सी से भरपूर आंवला सबसे बेहतरीन पित्त-शामक है। यह गर्मी के कारण कमज़ोर हुई इम्यूनिटी को फौलादी बनाता है और पेट की एसिडिटी को जड़ से खत्म करता है।
  • ब्राह्मी Brahmi- गर्मी के कारण जब दिमाग सुन्न, भारी और चिड़चिड़ा होने लगता है, तो ब्राह्मी नर्वस सिस्टम को शांत करके मानसिक ठंडक और तनाव-मुक्ति देती है।
  • गिलोय Giloy / Guduchi- लू लगने पर या गर्मी के कारण होने वाले बुखार Summer fever और शरीर के अंदरूनी आम Toxins को खत्म करने के लिए गिलोय एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है।
  • अनंतमूल Sariva- यह त्वचा के रैशेज़, घमौरियों और रक्त की गर्मी को शांत करने के लिए आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटियों में से एक है।

शरीर की गर्मी निकालने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब पित्त और गर्मी बहुत गहराई तक शरीर की नसों और रक्त में जम चुकी हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं-

  • तक्रधारा Takradhara- माथे पर औषधीय छाछ Medicated Buttermilk की लगातार धार गिराई जाती है। यह थेरेपी सनस्ट्रोक, हीट एग्जॉशन और गर्मी से होने वाले माइग्रेन के लिए रामबाण है। यह दिमाग की पूरी गर्मी खींच लेती है।
  • अभ्यंग Abhyanga- ठंडे औषधीय तेलों जैसे चंदनबला लाक्षादी तेल या नारियल तेल से की जाने वाली मालिश शरीर की सूखी और झुलसी हुई त्वचा को तुरंत पोषण देती है और थकान मिटाती है।
  • विरेचन Virechana- यह पंचकर्म की सबसे मुख्य थेरेपी है, जिसमें औषधियों के माध्यम से आंतों में जमा हुए अत्यधिक पित्त और टॉक्सिन्स को मल के रास्ते शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। यह शरीर की पूरी सर्विसिंग कर देता है।
  • लेपम Lepam- चंदन, खस और मुल्तानी मिट्टी जैसी ठंडी जड़ी-बूटियों का लेप पूरे शरीर या प्रभावित हिस्से पर लगाया जाता है, जिससे सनबर्न और त्वचा की जलन तुरंत शांत होती है।

गर्मी के प्रभाव से पूरी तरह रिकवर होने में कितना समय लगता है?

मौसम की मार और गलत लाइफस्टाइल के कारण जमा हुए पित्त को शांत करने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है-

  • शुरुआती 1-2 हफ्ते- शरीर का हाइड्रेशन स्तर सुधरेगा। औषधियों से एसिडिटी, चक्कर आना और सिरदर्द जैसी एक्यूट acute समस्याओं में भारी कमी आएगी।
  • 1-2 महीने- पित्त-शामक जड़ी-बूटियों के प्रभाव से त्वचा की जलन, घमौरियाँ और पाचन संबंधी समस्याएँ खत्म होने लगेंगी। शरीर में नई ऊर्जा महसूस होगी।
  • 3-4 महीने- पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से आपका शरीर अंदर से इतना मज़बूत हो जाएगा कि अगली बार तेज़ गर्मी या क्लाइमेट चेंज का आपके शरीर पर कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। आपकी इम्युनिटी फौलादी हो जाएगी।।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

क्लाइमेट चेंज और बढ़ती गर्मी से होने वाली बीमारियों के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य ग्लूकोज़ चढ़ाना, बुखार के लिए पैरासिटामोल और एसिडिटी के लिए एंटासिड देना। पित्त को शांत करना, जठराग्नि को संतुलित करना और शरीर को प्राकृतिक शीतलता Cooling देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल पानी की कमी या बाहर के तापमान का एक अस्थायी असर मानना। इसे ऋतुचर्या के उल्लंघन, जठराग्नि के कमज़ोर होने और पित्त-संचय का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल ओआरएस ORS पीने और एसी में रहने की सलाह। खान-पान तासीर पर कोई खास ज़ोर नहीं। ठंडी तासीर वाली डाइट सत्तू, बेल, धूप से बचने के नियम और औषधीय जल को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर हर बार गर्मी आते ही व्यक्ति फिर से बीमार पड़ता है। इम्यूनिटी कमज़ोर ही रहती है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, थर्मल टॉलरेंस गर्मी सहने की क्षमता बढ़ती है और बीमारियाँ वापस नहीं लौटतीं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस क्लाइमेट चेंज के असर को बेहतरीन तरीके से संभाल सकता है, लेकिन अगर गर्मी के मौसम में आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है-

  • अत्यधिक गर्मी के बावजूद पसीना न आना- अगर शरीर भट्टी की तरह तप रहा हो लेकिन पसीना बिल्कुल बंद हो जाए, तो यह गंभीर हीटस्ट्रोक का लक्षण है।
  • बार-बार उल्टियां होना- अगर पानी पीने के बाद भी लगातार उल्टियां हो रही हों और शरीर कुछ भी पचा नहीं पा रहा हो।
  • मानसिक भ्रम या बेहोशी- गर्मी के कारण अचानक व्यक्ति का बहकी-बहकी बातें करना, भ्रमित Confused होना या अचानक बेहोश होकर गिर जाना।
  • पेशाब का बिल्कुल रुक जाना- डिहाइड्रेशन के कारण अगर कई घंटों तक पेशाब न आए या भयंकर जलन के साथ केवल कुछ बूंदें आएं।

निष्कर्ष

क्लाइमेट चेंज और बढ़ता तापमान आज की कड़वी सच्चाई बन चुका है। हीटवेव और लू अब केवल कुछ दिनों की बात नहीं रही, बल्कि महीनों तक चलने वाली एक चुनौती है। भीषण गर्मी के बीच शरीर में होने वाली कमज़ोरी, तेज़ सिरदर्द और त्वचा की जलन आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं है। यह आपके शरीर का वह अलार्म है जो बता रहा है कि आपका पित्त दोष भड़क चुका है और आपका सिस्टम ओवरहीट Overheat हो रहा है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना ठंडे कोल्ड-ड्रिंक्स और एसिडिटी की गोलियों से दबाते हैं, तो आप अपने शरीर को हील करने के बजाय उसके प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम को स्थायी रूप से बर्बाद कर रहे होते हैं। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपनी जीवनशैली को मौसम के अनुकूल बनाएं, हाइड्रेशन का ध्यान रखें और अपनी डाइट में सत्तू, बेल का शर्बत और पुदीना शामिल करें। आंवला, ब्राह्मी और चंदन जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और तक्रधारा व अभ्यंग मालिश से अपने तपते हुए शरीर को प्राकृतिक ठंडक देकर नया जीवन दें। क्लाइमेट चेंज के कारण अपने शरीर को कमज़ोर न पड़ने दें, और अपने शरीर व इम्यूनिटी को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हीट एग्जॉशन में शरीर से बहुत ज़्यादा पसीना निकलता है, कमज़ोरी लगती है और चक्कर आते हैं। लेकिन हीटस्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है, पसीना आना बंद हो जाता है, शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है और इंसान बेहोश भी हो सकता है।

हाँ। आयुर्वेद के अनुसार अचानक बहुत ठंडा पानी पीने से पेट की पाचक अग्नि (जठराग्नि) पूरी तरह बुझ जाती है। इससे खाया हुआ भोजन पचता नहीं बल्कि सड़ता है, जो शरीर में आम (Toxins) पैदा करता है और नसों को सिकोड़ देता है।

बिल्कुल। लगातार एसी में रहने से शरीर की स्वेद ग्रंथियां (Sweat glands) प्राकृतिक रूप से काम करना भूल जाती हैं। इससे शरीर की बाहरी तापमान को सहने की क्षमता कम हो जाती है और ज़रा सी धूप में निकलते ही लू लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

नहीं, यह सबसे बड़ा मिथक है। कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद भारी मात्रा में चीनी, कैफीन और कार्बन डाइऑक्साइड शरीर को अंदर से और ज़्यादा डिहाइड्रेट करते हैं। यह पेट में जाकर पित्त (एसिडिटी) को बहुत तेज़ी से भड़काते हैं।

धूप से आने के तुरंत बाद नहाना शरीर को थर्मल शॉक (Thermal shock) दे सकता है। हमेशा घर आकर कम से कम 20-30 मिनट आराम करें, जब तक कि शरीर का तापमान सामान्य न हो जाए और पसीना सूख न जाए। उसके बाद ही ताज़े (सामान्य) पानी से स्नान करें।

तेज़ धूप आँखों और माथे की नसों को फैला देती है। इसके अलावा इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी और डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिससे मस्तिष्क तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती और तेज़ सिरदर्द शुरू हो जाता है।

भुने हुए चने और जौ से बना सत्तू आयुर्वेद में उत्तम शीतवीर्य (Cooling) माना गया है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, पेट की गर्मी को शांत करता है और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को प्राकृतिक रूप से पूरा करके लू से बचाता है।

बाज़ार के टेलकम पाउडर पसीने के रोमछिद्रों (pores) को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और समस्या बढ़ जाती है। आयुर्वेद में इसके लिए चंदन, खस या मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाने की सलाह दी जाती है जो रोमछिद्रों को खोलकर ठंडक देता है।

सनस्क्रीन केवल त्वचा को यूवी किरणों (UV rays) से जलने से बचाती है। यह आपके शरीर को अंदर से होने वाले डिहाइड्रेशन या लू से नहीं बचा सकती। अंदरूनी सुरक्षा के लिए सही डाइट, हाइड्रेशन और शरीर को ढककर रखना ही एकमात्र उपाय है।

बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में बहुत जल्दी डिहाइड्रेट होता है। उन्हें तेज़ धूप (दोपहर 12 से 4 बजे) में बाहर न जाने दें। उनके पानी की बोतल में थोड़ा नींबू और सेंधा नमक मिलाकर दें, और रोज़ाना उन्हें नारियल पानी या ताज़ा मट्ठा पीने की आदत डालें।

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