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हाई Uric Acid के साथ High BP - दोनों एक ही जड़ से क्यों जुड़े हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 22 May, 2026
  • category-iconUpdated on 11 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5024

जब सुबह उठते ही आपके पैरों के अंगूठे या एड़ियों में भयंकर चुभन और दर्द होता है, तो आप तुरंत समझ जाते हैं कि शरीर में यूरिक एसिड (Uric Acid) बढ़ गया है। लेकिन उसी दौरान, जब आप रूटीन चेकअप के लिए अपना ब्लड प्रेशर नापते हैं, तो मशीन की रीडिंग हमेशा से काफी ऊपर दिखाई देती है। ज़्यादातर लोग और यहाँ तक कि कई विशेषज्ञ भी इन दोनों को अलग-अलग बीमारियाँ मानकर जोड़ों के दर्द की अलग और बीपी की अलग गोलियाँ खाना शुरू कर देते हैं।

हकीकत यह है कि हाई यूरिक एसिड और हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) कोई दो अलग-अलग बीमारियाँ नहीं हैं; ये एक ही बिगड़े हुए मेटाबॉलिज़्म और डैमेज हो रहे सिस्टम के दो चेहरे हैं। जब आपके खून में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स तैरते हैं, तो वे केवल जोड़ों में ही जमा नहीं होते, बल्कि वे आपकी रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) को अंदर से खुरच कर उन्हें सख्त बना देते हैं। इस 'सिस्टम चोक' को समझे बिना अगर आप केवल बीपी या केवल दर्द की दवा खा रहे हैं, तो आप अंदर ही अंदर अपने पूरे नर्वस सिस्टम और किडनी को तबाह कर रहे हैं।

यूरिक एसिड बढ़ने पर ब्लड प्रेशर अचानक हाई क्यों होने लगता है?

मेडिकल साइंस अब इस बात को पूरी तरह प्रमाणित कर चुका है कि यूरिक एसिड केवल गाउट (Gout) या जोड़ों के दर्द की बीमारी नहीं है। जब इसका स्तर बढ़ता है, तो यह आपके कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को इन तरीकों से डैमेज करता है:

  • नाइट्रिक ऑक्साइड (Nitric Oxide) का कम होना: हमारी नसें नाइट्रिक ऑक्साइड नामक रसायन के कारण लचीली रहती हैं और फैलती हैं। बढ़ा हुआ यूरिक एसिड नसों से इस रसायन को सोख लेता है, जिससे नसें सख्त (Stiff) हो जाती हैं। नसों के कड़क होने से हृदय को खून पंप करने में भयंकर ज़ोर लगाना पड़ता है, जिससे बीपी शूट कर जाता है।
  • किडनी (Kidneys) पर भारी दबाव: यूरिक एसिड को फिल्टर करके शरीर से बाहर निकालने का काम किडनी का होता है। जब खून में यूरिक एसिड बहुत ज़्यादा होता है, तो किडनी की बारीक नलियों में सूजन आ जाती है। चूंकि किडनी ही हमारे ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का मुख्य सेंसर है, इसलिए इसका स्ट्रेस में आना सीधे हाई बीपी का कारण बनता है।
  • नसों के अंदर भयंकर सूजन (Endothelial Dysfunction): यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स (Crystals) नसों की अंदरूनी दीवारों को डैमेज करते हैं। इस डैमेज को ठीक करने के लिए शरीर का इम्यून सिस्टम वहां पहुंचता है, जिससे नसों में भयंकर सूजन आ जाती है और खून का रास्ता संकरा हो जाता है।

हाई यूरिक एसिड और हाई बीपी का यह कॉम्बो किन प्रकारों में सामने आता है?

यह डबल अटैक हर इंसान के शरीर में एक ही कारण से नहीं होता। आपकी लाइफस्टाइल और अंदरूनी अंगों की स्थिति के आधार पर यह कॉम्बो इन अलग-अलग रूपों में आपको परेशान कर सकता है:

  • मेटाबॉलिक-प्रेरित (Metabolic Syndrome): यह सबसे आम प्रकार है। इसमें शरीर का पाचन तंत्र इतना खराब हो चुका होता है कि वह खाए गए प्रोटीन को सही से पचाने के बजाय यूरिक एसिड में बदल देता है। इसके साथ ही इंसुलिन रेजिस्टेंस और वज़न का बढ़ना भी बीपी को बेकाबू कर देते हैं।
  • दवाइयों से प्रेरित (Diuretic-induced): यह एक भयंकर चक्रव्यूह है। जब आपका बीपी हाई होता है, तो अक्सर डॉक्टर मूत्रवर्धक (Diuretics) गोलियाँ देते हैं ताकि पेशाब के रास्ते शरीर का पानी बाहर निकले। लेकिन पानी कम होने से खून गाढ़ा हो जाता है और यूरिक एसिड का स्तर अचानक बहुत खतरनाक रूप से बढ़ जाता है।
  • किडनी-प्रेरित (Renal Uricemia): इसमें शरीर बहुत ज़्यादा यूरिक एसिड नहीं बना रहा होता, बल्कि आपकी किडनी उसे बाहर निकालने में पूरी तरह असमर्थ हो जाती है, जिससे बीपी और यूरिक एसिड दोनों एक साथ ऊपर जाते हैं।

शरीर के किन खामोश संकेतों से पहचानें यह डबल अटैक?

जब यूरिक एसिड और हाई बीपी दोनों एक साथ आपके सिस्टम पर हमला कर रहे होते हैं, तो शरीर बहुत ही बारीक लेकिन गंभीर अलार्म बजाता है, जिन्हें कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए:

  • सुबह उठते ही एड़ी और सिर में भारीपन: बिस्तर से पैर नीचे रखते ही एड़ियों या अंगूठे में भयंकर चुभन होना, और उसी समय सिर के पिछले हिस्से में ऐसा भारीपन महसूस होना मानो किसी ने जकड़ लिया हो।
  • दिन भर भयंकर थकावट: दोनों समस्याओं के एक साथ होने पर नसों में ऑक्सीजन का फ्लो कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति को थोड़ा सा चलने पर भी क्रोनिक फटीग और सुस्ती महसूस होती है।
  • दिमाग पर धुंध (Brain Fog): नसों के सिकुड़ने और खून में टॉक्सिन्स बढ़ने से फोकस टूटता है और लगातार ब्रेन फॉग रहता है, इंसान चीज़ें भूलने लगता है।
  • सीढ़ियाँ चढ़ने पर घबराहट: थोड़ा सा शारीरिक श्रम करने पर दिल की धड़कन का असामान्य रूप से तेज़ हो जाना और साँस फूलना।

इस समस्या को कंट्रोल करने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

एक तरफ जोड़ों का दर्द और दूसरी तरफ हाई बीपी का खौफ—इस झुंझलाहट से बचने के लिए लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो शरीर को हमेशा के लिए अपाहिज कर देते हैं:

  • पेनकिलर्स का रोज़ाना सेवन: जोड़ों के दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना भारी पेनकिलर्स (NSAIDs) खाना। ये दवाइयाँ सीधे आपकी किडनी को डैमेज करती हैं, जिससे यूरिक एसिड और बीपी दोनों भयंकर रूप से बेकाबू हो जाते हैं।
  • प्रोटीन पूरी तरह छोड़ देना (Crash Dieting): यूरिक एसिड के डर से लोग दालें, बीन्स और हर तरह का प्रोटीन खाना बिल्कुल बंद कर देते हैं। इससे शरीर में नसों की कमज़ोरी आ जाती है और मांसपेशियाँ सूखने लगती हैं, जो बीपी को और बिगाड़ता है।
  • स्ट्रेस को इग्नोर करना: अपनी खराब जीवनशैली और मानसिक तनाव को इग्नोर करना। स्ट्रेस शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ाता है, जो यूरिक एसिड और बीपी दोनों का सबसे बड़ा ट्रिगर है।

आयुर्वेद यूरिक एसिड और हाई बीपी के इस कनेक्शन को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे प्यूरीन (Purine) मेटाबॉलिज़्म और हाइपरटेंशन का कॉम्बिनेशन कहता है, आयुर्वेद उसे 'वातरक्त' (Vatarakta), दूषित रक्त धातु और 'अपान वात' के भयंकर असंतुलन के विज्ञान से समझता है:

  • वातरक्त (Vatarakta) की विकृति: जब वात दोष भड़कता है और खून (रक्त) में अशुद्धियाँ (टॉक्सिन्स) मिल जाती हैं, तो वे दोनों आपस में टकराकर 'वातरक्त' पैदा करते हैं। यह दूषित खून नसों में ब्लॉकेज करता है (हाई बीपी) और छोटे जोड़ों में सूजन (यूरिक एसिड दर्द) पैदा करता है।
  • मंदाग्नि और 'आम' (Toxins): जब जठराग्नि (Metabolism) धीमी होती है, तो भोजन सही से पच नहीं पाता। यह अधपचा भोजन एक चिपचिपा ज़हर 'आम' बनाता है। यही 'आम' असल में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स हैं जो नसों को कड़क कर देते हैं।
  • अपान वात का ब्लॉक होना: शरीर से मल, मूत्र और यूरिक एसिड जैसे टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम 'अपान वात' (पेल्विक और किडनी एरिया की ऊर्जा) करता है। जब इसका रास्ता ब्लॉक हो जाता है, तो यूरिक एसिड शरीर में ही घूमने लगता है।

यूरिक एसिड और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने 'प्रोसेसर' (मेटाबॉलिज़्म) को ठीक रखने और नसों की सूजन को उतारने के लिए आपको अपने खानपान में बदलाव करना होगा। इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएँ:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - यूरिक एसिड और पथरी को बाहर निकालने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - प्यूरीन और रक्त अशुद्धि बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, दलिया, ओट्स, ज्वार, मूंग दाल की पतली खिचड़ी। नया चावल, मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, कद्दू, सहजन (Drumsticks), धनिया। टमाटर (विशेषकर बीज), बैंगन, मशरूम, पालक (अधिक मात्रा में)।
दालें और प्रोटीन (Pulses) छिलके वाली मूंग दाल (सीमित मात्रा में), मसूर दाल। भारी राजमा, छोले, उड़द की दाल, मटर, सोयाबीन और सोया चंक्स।
फल (Fruits) सेब, पपीता, जामुन, ताज़ा नारियल, आंवला (अमृत समान)। अत्यधिक खट्टे फल (जैसे कच्चा संतरा), कोल्ड स्टोरेज के फल।
पेय पदार्थ (Beverages) धनिया और सौंफ का गर्म पानी, लौकी का रस, ताज़ा मट्ठा। शराब (Alcohol), बहुत अधिक चाय/कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेटबंद जूस।

नसों को खोलने और यूरिक एसिड को बाहर निकालने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे रसायन दिए हैं जो नसों की दीवारों (Endothelium) को मज़बूत करते हैं और बिना किडनी को डैमेज किए यूरिक एसिड को फ्लश आउट (Flush out) करते हैं:

  • गिलोय: वातरक्त (Gout) और यूरिक एसिड के लिए आयुर्वेद में इससे बड़ी कोई औषधि नहीं है। यह खून की गर्मी को शांत करती है, सूजन उतारती है और नसों के अंदर জমে हुए क्रिस्टल्स को पिघलाकर बाहर निकालती है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): इसके नाम का अर्थ ही है 'शरीर को नया करने वाला'। यह किडनी के फंक्शन को गज़ब की ताकत देती है। यह शरीर से अतिरिक्त पानी और यूरिक एसिड को मूत्र के रास्ते बाहर निकालती है, जिससे बीपी तुरंत नीचे आता है।
  • अश्वगंधा: जब हाई बीपी का कारण नर्वस सिस्टम का स्ट्रेस हो और दर्द के कारण नींद पूरी न होना आपकी आदत बन चुकी हो, तो अश्वगंधा दिमाग को शांत करता है और ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करता है।
  • त्रिफला: यह केवल कब्ज़ की दवा नहीं है। त्रिफला शरीर के सबसे सूक्ष्म स्रोतों (Channels) में जाकर 'आम' और टॉक्सिन्स को खुरच कर बाहर फेंकता है, जिससे मेटाबॉलिज़्म तेज़ होता है।

शरीर को डिटॉक्स करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और 'आम' नसों व जोड़ों में बहुत गहराई तक जम चुका हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ पूरे शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • विरेचन थेरेपी: शरीर से अत्यधिक पित्त, अशुद्ध रक्त और यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को आंतों के रास्ते बाहर निकालने के लिए की जाने वाली यह डीप-क्लीनिंग थेरेपी वातरक्त (Gout) का सबसे अचूक इलाज है।
  • अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और नसों में प्राकृतिक लचीलापन (Elasticity) वापस लाने के लिए शुद्ध औषधीय तेलों (जैसे क्षीरबला तेल) से पूरे शरीर की मालिश की जाती है।
  • शिरोधारा थेरेपी: हाई ब्लड प्रेशर अक्सर अकारण एँग्जायटी और स्ट्रेस से जुड़ा होता है। सिर पर गुनगुने औषधीय तेल की लगातार धार गिराने से नर्वस सिस्टम तुरंत शांत होता है और बीपी की दवाइयों पर निर्भरता कम होने लगती है।

शरीर के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

लगातार गलत खानपान और पेनकिलर्स से डैमेज हुए सिस्टम और नसों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से आपका बढ़ा हुआ वात और पित्त शांत होंगे। जोड़ों का दर्द, भयंकर सुबह की जकड़न (Stiffness) और ब्लड प्रेशर के अचानक शूट (Shoot) होने की समस्या में काफी राहत मिलेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (विरेचन) और रसायनों के प्रभाव से खून साफ होने लगेगा। नसों की अकड़न खत्म होगी और आपकी अगली ब्लड रिपोर्ट में यूरिक एसिड का स्तर नीचे आना शुरू हो जाएगा।
  • 5-6 महीने: आपकी किडनी और पूरा मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह पोषित हो जाएगा। आप बिना किसी पेनकिलर के, एक प्राकृतिक, ऊर्जावान और दर्दरहित जीवन जीना शुरू कर देंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

इस दोहरी मेटाबॉलिक समस्या के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड को ब्लॉक करने के लिए गोलियाँ देना और पथरी को लेज़र या सर्जरी से निकालना। जठराग्नि को बढ़ाना, रक्त को शुद्ध करना और पथरी को प्राकृतिक रूप से गलाकर बाहर निकालना।
बीमारी को देखने का नज़रिया गठिया और किडनी स्टोन को दो बिल्कुल अलग-अलग बीमारियों के रूप में देखना। इसे अशुद्ध रक्त, कमज़ोर पाचन और भड़के हुए वात दोष (वातरक्त और अश्मरी) का सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल प्रोटीन और दालें बंद करने पर ज़ोर, खाने की तासीर पर कोई खास ध्यान नहीं। वात-पित्त शामक आहार, कब्ज़ दूर करना और पाचन और आयुर्वेद (Ayurveda and digestion) के नियमों को आधार मानना।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर यूरिक एसिड तुरंत वापस बढ़ता है और पथरी दोबारा बन जाती है। शरीर का मेटाबॉलिज़्म इतना मज़बूत हो जाता है कि वह प्राकृतिक रूप से एसिड को बाहर फेंकना और पथरी रोकना सीख जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपके यूरिक एसिड और ब्लड प्रेशर को प्राकृतिक रूप से पूरी तरह कंट्रोल कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये भयंकर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में जाना ज़रूरी हो जाता है:

  • सीने में तेज़ दबाव या जकड़न (Chest Pain): अगर आपको जोड़ों के दर्द के साथ-साथ सीने के बीचों-बीच भयंकर दबाव महसूस हो और साँस फूलने लगे (यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है)।
  • अत्यधिक चक्कर और धुंधलापन: अगर बीपी इतना बेकाबू हो जाए कि आपको भयंकर चक्कर आएँ, आँखों के आगे अंधेरा छा जाए और उल्टी होने लगे।
  • जोड़ों का भयंकर लाल होना और सूजना: अगर पैर का अंगूठा या टखना इतना लाल और गर्म हो जाए कि उसे हल्का सा छूना भी असहनीय सज़ा बन जाए।
  • पेशाब का अचानक बहुत कम आना: अगर आपको महसूस हो कि पूरे दिन में पेशाब बहुत कम आ रहा है या पैरों में भयंकर सूजन (Edema) आ गई है (यह किडनी के अचानक फेल होने का अलार्म है)।

निष्कर्ष

अपने शरीर को एक मशीन की तरह समझें जिसका ऑयल फिल्टर (किडनी) और पाइपलाइन (नसें) आपस में जुड़े हुए हैं। जब आपका यूरिक एसिड बढ़ता है, तो वह केवल पैर के अंगूठे में दर्द नहीं करता; वह आपके खून में कांच के टुकड़ों (Crystals) की तरह तैरता है, जो आपकी नसों को अंदर से छीलकर सख्त बना देते हैं। सुबह उठते ही एड़ियों में दर्द, सीढ़ियाँ चढ़ते हुए साँस फूलना, और ब्लड प्रेशर का हमेशा बढ़ा हुआ रहना, ये कोई अलग-अलग बीमारियाँ नहीं हैं; यह एक अलार्म है कि आपका 'प्रोसेसर' (जठराग्नि) प्रोटीन को सही से डिकोड नहीं कर पा रहा है और आपका रक्त धातु पूरी तरह अशुद्ध हो चुका है। केवल दर्द की गोलियाँ खाकर इस भयंकर 'वातरक्त' (Gout) को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपकी किडनी और हृदय को हमेशा के लिए अपाहिज कर सकता है।

पेनकिलर्स की लत और प्रोटीन के खौफ से बाहर निकलें। बाहर के रूखे जंक फूड और शराब को छोड़कर हमेशा हल्का, सुपाच्य और प्राकृतिक भोजन खाएँ। अपनी डाइट में जौ, लौकी और जीरे का पानी शामिल करें। गिलोय, पुनर्नवा और त्रिफला जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की विरेचन व अभ्यंग मालिश से अपनी सूखी व ब्लॉक हो रही नसों को प्राकृतिक सफाई देकर नया जीवन दें। यूरिक एसिड और बीपी के इस दोहरे खतरे को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें, और अपने कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम व किडनी को स्थायी रूप से सुरक्षित करने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। यह सबसे बड़ा भ्रम है। सभी दालों में प्यूरीन (Purine) ज़्यादा नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार छिलके वाली मूंग दाल सबसे सुरक्षित और पचने में आसान होती है। भारी दालें जैसे राजमा, छोले और उड़द को सीमित करना चाहिए, लेकिन प्रोटीन पूरी तरह छोड़ने से शरीर में भयंकर कमज़ोरी आ जाती है।

हाँ, ज़्यादातर हाई बीपी के मरीज़ों को डॉक्टर डाययूरेटिक्स (Diuretics/Water pills) देते हैं। ये दवाइयाँ पेशाब के ज़रिए शरीर का पानी बाहर निकालती हैं ताकि नसों पर दबाव कम हो। लेकिन पानी कम होने से खून गाढ़ा हो जाता है और उसमें यूरिक एसिड का कंसंट्रेशन (Concentration) अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है।

कुछ रिसर्च और आयुर्वेद मानते हैं कि टमाटर (विशेषकर उसके बीज) खून में एसिडिटी (पित्त) और यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकते हैं। जब आपको भयंकर दर्द हो, तो टमाटर, पालक और बैंगन से पूरी तरह परहेज़ करना चाहिए।

शत-प्रतिशत। नींबू भले ही स्वाद में खट्टा होता है, लेकिन शरीर के अंदर जाकर यह एल्कलाइन (Alkaline) प्रभाव डालता है। यह खून में जमे यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को पिघलाने में मदद करता है और विटामिन सी बीपी को भी स्थिर रखता है।

हाँ, हल्का व्यायाम या रोज़ाना 30 मिनट की ब्रिस्क वॉक (Brisk walk) मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करती है और ब्लड सर्कुलेशन सुधारती है, जिससे किडनी को यूरिक एसिड बाहर निकालने में मदद मिलती है। लेकिन भयंकर दर्द (Gout attack) के दौरान चलने से बचना चाहिए।

बियर (Beer) यूरिक एसिड का सबसे बड़ा ट्रिगर है क्योंकि इसमें यीस्ट (Yeast) और प्यूरीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके अलावा, किसी भी तरह की शराब किडनी के फिल्टरेशन को धीमा कर देती है और नसों को सिकोड़ कर तुरंत ब्लड प्रेशर शूट (Shoot) कर देती है।

यह बहुत आम है। कभी-कभी खून का सारा यूरिक एसिड निकलकर जोड़ों (Joints) में जमा हो जाता है। ऐसे समय में जब आप ब्लड टेस्ट कराते हैं, तो खून में यूरिक एसिड नॉर्मल दिखता है, जबकि वह जोड़ों के अंदर क्रिस्टल बनकर भयंकर दर्द पैदा कर रहा होता है।

नमक कम करना हाई बीपी के लिए ज़रूरी है, लेकिन अगर आपका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, तो नसों में सूजन (Inflammation) बनी रहेगी। जब तक आप यूरिक एसिड को कम करके नसों की इस अंदरूनी सूजन को खत्म नहीं करेंगे, केवल नमक कम करने से बीपी पूरी तरह कंट्रोल नहीं होगा।

बिल्कुल। जब आप अत्यधिक तनाव में होते हैं, तो शरीर स्ट्रेस हॉर्मोन (कॉर्टिसोल) रिलीज़ करता है। कॉर्टिसोल शरीर के मेटाबॉलिज़्म को बिगाड़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और किडनी की यूरिक एसिड को बाहर निकालने की क्षमता को कम कर देता है।

हाँ, बहुत लंबा या निर्जला उपवास (Crash fasting) करने से शरीर डिहाइड्रेट (Dehydrate) हो जाता है और ऊर्जा के लिए अपनी ही मांसपेशियों को तोड़ने लगता है। इस टूटन से खून में प्यूरीन और यूरिक एसिड का स्तर अचानक बहुत खतरनाक रूप से बढ़ सकता है।

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