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Tea-biscuit breakfast: छोटी habit, बड़ा metabolic impact

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हमारे देश में सुबह की शुरुआत बिना चाय के शायद ही किसी घर में होती हो। सुबह उठते ही सबसे पहले "एक कप चाय" की मांग होती है, और खाली पेट चाय न पीनी पड़े, इसलिए उसके साथ दो-चार बिस्किट खा लिए जाते हैं।

यह नाश्ता इतना आम इसलिए है क्योंकि इसमें कोई मेहनत नहीं लगती। आपको कुछ काटना-पकाना नहीं पड़ता, डिब्बा खोला, बिस्किट निकाला, चाय में डुबोया और खा लिया। पेट भी ऐसा लगता है कि भर गया है। लेकिन जो चीज़ हमारे लिए इतनी आसान और सुविधाजनक है, क्या वह हमारे शरीर के लिए भी सही है?

जिस आदत को हम सालों से अपनाते आ रहे हैं, वह धीरे-धीरे हमारे पाचन, वज़न और दिन भर की एनर्जी पर बहुत गहरा असर डाल रही होती है। 

सुबह का पहला खाना शरीर के लिए इतना ज़रूरी क्यों है?

जब हम रात को सोते हैं, तो हमारा शरीर 8-10 घंटे तक बिना कुछ खाए-पिए रहता है। यह एक तरह का उपवास होता है। इस पूरी रात के दौरान शरीर अपने आप को रिपेयर करता है, जिसमें बहुत सारी एनर्जी खर्च होती है।

जब आप सुबह उठते हैं, तो शरीर की एनर्जी लगभग खत्म हो चुकी होती है। उसे फिर से काम पर लगने के लिए एक अच्छे और मज़बूत खाने की ज़रूरत होती है। सुबह का नाश्ता शरीर के इंजन को फिर से चालू करने का काम करता है।

अगर आप इस इंजन में अच्छा तेल डालेंगे, तो गाड़ी दिन भर बहुत अच्छी चलेगी। लेकिन अगर आप इसमें सिर्फ मीठा और मैदा (बिस्किट) डालेंगे, तो गाड़ी थोड़ी दूर जाकर फिर से रुक जाएगी।

चाय और बिस्किट का कॉम्बिनेशन: शरीर को क्या नहीं मिलता?

सिर्फ मीठा और मैदा: बाजार में मिलने वाले ज़्यादातर बिस्किट मैदे, बहुत सारी चीनी और रिफाइंड तेल से बनते हैं। चाय में भी हम अलग से चीनी मिलाते हैं। जब यह मीठा और मैदा सुबह-सुबह खाली पेट शरीर में जाते हैं, तो यह खून में बहुत तेज़ी से घुल जाते हैं।

प्रोटीन और फाइबर की भारी कमी: एक अच्छे नाश्ते में प्रोटीन (जैसे दालें, पनीर, अंडा) और फाइबर (जैसे ओट्स, फल, सब्जियां) होना चाहिए, क्योंकि ये पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं। चाय और बिस्किट में न तो प्रोटीन होता है और न ही फाइबर। यह एक ऐसा खाना है जो सिर्फ पेट की जगह घेरता है, लेकिन शरीर को ताकत बिल्कुल नहीं देता।

चाय-बिस्किट आपके ब्लड शुगर पर क्या असर होता है?

एनर्जी आना और फिर गायब हो जाना: जब आप सुबह खाली पेट चाय और बिस्किट खाते हैं, तो बिस्किट की चीनी और मैदा आपके खून में शुगर (ग्लूकोज) को एकदम से बहुत ऊपर ले जाते हैं। आपको कुछ मिनटों के लिए बहुत अच्छी एनर्जी महसूस होती है और नींद उड़ जाती है।

लेकिन शरीर इस अचानक बढ़ी हुई शुगर को कंट्रोल करने के लिए तेज़ी से इंसुलिन छोड़ता है। नतीजतन, कुछ ही देर में यह शुगर एकदम से नीचे गिर जाती है। जब शुगर गिरती है, तो आपको बहुत तेज़ सुस्ती आती है।

बार-बार भूख लगना: शुगर के इस तरह से एकदम चढ़ने और गिरने के कारण आपको नाश्ते के सिर्फ एक या दो घंटे बाद ही फिर से तेज़ भूख लगने लगती है। और क्योंकि आपको भूख लगती है, आप लंच से पहले ही कुछ न कुछ (अक्सर जंक फूड) खा लेते हैं। यही वजह है कि चाय-बिस्किट खाने वाले लोगों को बार-बार कुछ न कुछ खाने की आदत पड़ जाती है।

लंबे समय में यह आदत शरीर को कैसे खराब करती है?

सरल शब्दों में कहें तो, सुबह की यह एक छोटी सी गलती वक्त के साथ आपके शरीर के पूरे सिस्टम को धीमे जहर की तरह खोखला कर देती है।

  • मोटापा और पेट की चर्बी: जब शरीर में शुगर बार-बार ऊपर-नीचे होती है और आप बार-बार खाते हैं, तो आपका वज़न बढ़ना तय है। बिस्किट का मैदा और तेल सीधा आपके पेट के आसपास चर्बी (टायर) के रूप में जमा होने लगता हैं।
  • इंसुलिन का खराब होना: अगर आप सालों तक सुबह-सुबह बहुत ज़्यादा मीठा और मैदा खाते रहेंगे, तो शरीर की शुगर पचाने वाली मशीन (इंसुलिन) थकने लगती है। आगे चलकर यही आदत शुगर (डायबिटीज़) की बीमारी का सबसे बड़ा कारण बन सकती है।
  • दिन भर थकान और चिड़चिड़ापन: जब शरीर को सुबह के समय सही ताकत (प्रोटीन) नहीं मिलती, तो दिमाग भी ठीक से काम नहीं करता। आपको दिन भर काम में आलस आता है, बहुत जल्दी गुस्सा आने लगता है और किसी काम में ध्यान नहीं लगता।

आयुर्वेद इस चाय-बिस्किट की आदत को कैसे देखता है?

आयुर्वेद शरीर को एक अलग नज़रिए से समझता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि हमारे पेट में खाना पचाने वाली एक 'अग्नि' (जठराग्नि) होती है। सुबह के समय यह आग बहुत तेज़ होती है, ताकि हम जो भी खाएँ वह अच्छे से पच सके।

अगर हम इस तेज़ अग्नि में चाय जैसा गर्म और एसिड बनाने वाला पेय, और बिस्किट जैसा सूखा और पचने में भारी (मैदा) खाना डालते हैं, तो पेट की अग्नि खराब हो जाती है। खाली पेट चाय पीने से शरीर में 'वात' (गैस और हवा) बढ़ जाती है, जिससे दिन भर पेट फूला हुआ रहता है और कब्ज़ की शिकायत हो जाती है। बिस्किट का मीठा शरीर में 'कफ' (भारीपन और सुस्ती) बढ़ाता है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

खाली पेट चाय-बिस्कुट खाने से ब्लड शुगर तेज़ी से बढ़ती है, जिससे पेट की चर्बी, एसिडिटी और इंसुलिन रेजिस्टेंस (डायबिटीज़) का खतरा बढ़ता है। सुबह चाय की जगह 1-2 गिलास गुनगुना पानी पिएं और नाश्ते में मूंग दाल चीला, ओट्स या पोहा जैसे प्रोटीन व फाइबर से भरपूर आहार लें। 

किन लोगों को यह नाश्ता तुरंत छोड़ देना चाहिए?

वैसे तो यह नाश्ता किसी के लिए भी अच्छा नहीं है, लेकिन कुछ लोगों को इसे आज ही बंद कर देना चाहिए:

  • जिन्हें पहले से शुगर (डायबिटीज़) है या होने का डर है।
  • जो अपना वज़न कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वज़न कम नहीं हो रहा है।
  • जिन महिलाओं को PCOD या हार्मोंस की दिक्कत है।
  • जो लोग दिन भर कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं (कोई कसरत नहीं करते)।
  • जिन्हें सुबह उठते ही गैस बनती है या सीने में जलन होती है।

भारत के घरों में बनने वाले कुछ आसान और सेहतमंद नाश्ते

आपको नाश्ते के लिए बाजार से कोई महंगी चीजें (सुपरफूड) लाने की ज़रूरत नहीं है। हमारी रसोई में ही ऐसे कई विकल्प हैं जो सुबह के लिए बेस्ट हैं:

  • मूंग दाल या बेसन का चीला: यह झटपट बनता है और इसमें खूब सारा प्रोटीन होता है।
  • सब्जियों वाला पोहा या उपमा: इसमें ढेर सारी सब्जियां डालें और ऊपर से मूंगफली या पनीर डाल लें।
  • इडली-सांभर: यह पचने में सबसे हल्का होता है।
  • दलिया या ओट्स: दूध वाला दलिया या सब्जियों वाला नमकीन दलिया दोनों ही बहुत अच्छे हैं।
  • स्टफ्ड रोटी: अगर रोटी खानी है, तो उसमें पनीर या दाल भरकर खाएं और साथ में थोड़ा दही ले लें।

सुबह की कुछ अच्छी आदतें जो आपको दिन भर फिट रखेंगी

अच्छी सेहत सिर्फ एक अच्छे नाश्ते से नहीं, बल्कि सुबह की कुछ छोटी-छोटी आदतों से बनती है:

  • उठते ही पानी पिएं: खाली पेट चाय पीने से पहले 1-2 गिलास हल्का गुनगुना पानी ज़रूर पिएं। यह पेट को साफ करता है और गैस नहीं बनने देता।
  • चबा-चबाकर खाएं: नाश्ते को जल्दबाजी में निगलने के बजाय आराम से बैठकर चबाकर खाएं।
  • रोज थोड़ा हिलें-डुलें: सुबह 15-20 मिनट की वॉक, हल्की कसरत या योग ज़रूर करें। इससे शरीर की मशीन खुल जाती है।
  • रात को अच्छी नींद लें: अगर नींद पूरी नहीं होगी, तो सुबह उठने पर कुछ भी अच्छा खाने का मन नहीं करेगा।

निष्कर्ष

'चाय और बिस्किट' देखने में बहुत ही सीधा-साधा और मासूम सा नाश्ता लगता है, लेकिन असल में यह आपकी सेहत को अंदर ही अंदर बहुत नुकसान पहुंचा रहा है।

हर रोज़ बार-बार भूख लगना, अचानक से वज़न बढ़ना, गैस बनना और दिन भर सुस्ती रहना—ये सब सिर्फ एक खराब नाश्ते के नतीजे हो सकते हैं।

अगर आप सुबह के समय शरीर को ऐसा खाना देंगे जिसमें प्रोटीन, फाइबर और अच्छी ताकत हो, तो आपका पेट भी लंबे समय तक भरा रहेगा और आप दिन भर फुर्तीले बने रहेंगे। याद रखिए, सेहत रातों-रात खराब नहीं होती और न ही रातों-रात बनती है। यह रोजमर्रा की इन्हीं छोटी-छोटी आदतों से तय होती है। तो क्यों न कल सुबह से ही इस छोटी सी आदत को बदलकर एक अच्छी शुरुआत की जाए?

References

Tea and Health: Studies in Humans - PMC

Mechanisms of Body Weight Reduction and Metabolic Syndrome Alleviation by Tea - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

अगर चाय में चीनी भी नहीं है, तब भी ज़्यादातर बिस्किट मैदा और रिफाइंड तेल से बने होते हैं। इसलिए सिर्फ चीनी हटाने से यह नाश्ता संतुलित नहीं बन जाता। बेहतर होगा कि चाय के साथ प्रोटीन या फाइबर वाला विकल्प चुनें।

"डाइजेस्टिव" या "मल्टीग्रेन" लिखे होने का मतलब यह नहीं कि बिस्किट पूरी तरह हेल्दी हैं। इनमें भी अक्सर मैदा, चीनी और रिफाइंड तेल हो सकते हैं। खरीदने से पहले पोषण संबंधी जानकारी (Nutrition Label) ज़रूर पढ़ें।

चाय को खाली पेट पीने के बजाय पौष्टिक नाश्ता करने के बाद या उसके साथ सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है। इससे पेट पर कम असर पड़ता है और एसिडिटी की संभावना भी घट सकती है।

रात में थोड़ी तैयारी करके आप सुबह जल्दी मूंग दाल चीला का बैटर, ओवरनाइट ओट्स, उबले अंडे, दही के साथ फल या पनीर सैंडविच जैसे विकल्प आसानी से खा सकते हैं। इनमें पोषण भी अच्छा मिलता है और समय भी कम लगता है।

अगर बाकी भोजन संतुलित है और बिस्किट कभी-कभार खाए जाते हैं, तो आमतौर पर बड़ी समस्या नहीं होती। लेकिन रोज़ाना इन्हें नाश्ते का मुख्य हिस्सा बनाना लंबे समय में स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

बढ़ते बच्चों को प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और फाइबर की ज़रूरत होती है। केवल चाय और बिस्किट उनकी पोषण संबंधी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें संतुलित नाश्ता देना बेहतर होता है।

नहीं। केवल चाय पीने से शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। नाश्ता छोड़ने के बाद में ज़्यादा भूख लग सकती है और दिनभर खाने की आदतें भी बिगड़ सकती हैं।

अगर घर के बने बिस्किट साबुत अनाज, कम चीनी और अच्छे फैट से बनाए गए हैं, तो वे अपेक्षाकृत बेहतर हो सकते हैं। फिर भी वे संतुलित नाश्ते का विकल्प नहीं, बल्कि कभी-कभार खाए जाने वाला स्नैक होने चाहिए।

ये मसाले स्वाद बढ़ा सकते हैं और अपने-अपने स्वास्थ्य लाभ भी रखते हैं, लेकिन वे चाय-बिस्किट वाले नाश्ते की पोषण संबंधी कमी को पूरा नहीं कर सकते। संतुलित नाश्ता फिर भी ज़रूरी है।

चाय अचानक छोड़ने की ज़रूरत नहीं है। पहले अपने नाश्ते में प्रोटीन और फाइबर शामिल करें, फिर धीरे-धीरे बिस्किट की मात्रा कम करें। चाहें तो चाय के साथ भुने चने, मूंगफली, पनीर या फल जैसे बेहतर विकल्प चुन सकते हैं।

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