यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी यूटीआई की यह सबसे बड़ी और सबसे परेशान करने वाली सच्चाई है। यह बीमारी एक बार आकर इतनी आसानी से पीछा नहीं छोड़ती और बार-बार पलटकर वार करती है। बहुत से लोग, खासकर महिलाएं, इस बात से बेहद परेशान रहती हैं कि आखिर सब कुछ सही करने के बाद भी यह जलन बार-बार क्यों लौट आती है। कई बार तो ऐसा लगता है कि दवाइयाँ सिर्फ कुछ दिनों के लिए दर्द को दबा देती हैं, उसे जड़ से खत्म नहीं कर पातीं। तो चलिए, आज आराम से बैठकर इस बात की पूरी गहराई को समझते हैं कि आखिर वह कौन सी गलतियां या वजहें हैं, जिनकी वजह से यह जलन बार-बार हमारे दरवाज़े पर आकर खड़ी हो जाती है।
दवाई का कोर्स बीच में ही छोड़ देना
यह हम इंसानों की एक बहुत ही आम आदत है कि जैसे ही हमें बीमारी के लक्षणों से थोड़ा आराम मिलता है, हम खुद को बिल्कुल ठीक मान लेते हैं। यूटीआई के मामले में भी यही सबसे बड़ी भूल होती है। जब आप एंटीबायोटिक या कोई अन्य दवाई शुरू करते हैं, तो शुरुआती दो-तीन दिनों में ही लगभग अस्सी प्रतिशत बैक्टीरिया मर जाते हैं और आपकी जलन काफी कम हो जाती है। जलन कम होते ही हम अक्सर दवाई खाना बंद कर देते हैं या खुराक भूलने लगते हैं, जो आगे चलकर सबसे घातक साबित होता है।
असल में, जो बीस प्रतिशत बैक्टीरिया अंदर बच जाते हैं, वे बहुत ज़्यादा जिद्दी और खतरनाक होते हैं। जब आप दवाई बीच में छोड़ देते हैं, तो इन बचे हुए बैक्टीरिया को दोबारा से अपनी फौज खड़ी करने का पूरा मौका मिल जाता है। इस बार जब वे अपनी संख्या बढ़ाते हैं, तो उनके ऊपर पुरानी दवाई का कोई असर नहीं होता क्योंकि वे उसे झेलना सीख चुके होते हैं। यही वजह है कि ठीक होने के कुछ ही दिनों बाद इन्फेक्शन और भी ज़्यादा उग्र रूप में वापस लौट आता है और यूरिन की वह तेज़ जलन दोबारा शुरू हो जाती है।
बैक्टीरिया का ज़्यादा ताकतवर बन जाना
जब हम बार-बार बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से कोई भी एंटीबायोटिक या दर्द कम करने की दवा खा लेते हैं, तो हमारे शरीर के भीतर मौजूद बैक्टीरिया बहुत चालाक हो जाते हैं। वे उस दवाई के काम करने के तरीके को समझ लेते हैं और खुद को इस तरह बदल लेते हैं कि अगली बार वह दवाई उन पर पूरी तरह बेअसर हो जाए। इसे मेडिकल की भाषा में रेजिस्टेंस कहा जाता है, लेकिन सरल शब्दों में कहें तो बैक्टीरिया अब पहले से ज़्यादा ताकतवर और जिद्दी हो चुके हैं।
इस स्थिति में, आप जो भी आम दवाइयाँ लेते हैं, वे बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म नहीं कर पातीं। वे ब्लैडर या यूरिन की नली में कहीं छिपकर बैठे रहते हैं और सही समय का इंतजार करते हैं। जैसे ही आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कम होती है या आप किसी दिन कम पानी पीते हैं, ये ताकतवर बैक्टीरिया फिर से हमला कर देते हैं। इस वजह से आपको ऐसा लगता है कि इन्फेक्शन कभी पूरी तरह ठीक ही नहीं हुआ था और वह बार-बार लौटकर आपको परेशान करता रहता है।
पानी पीने में कंजूसी करने के नुकसान
पानी कम पीने से शरीर के भीतर बैक्टीरिया को पनपने और अपनी संख्या बढ़ाने का पूरा मौका मिल जाता है:
- यूरिन: कम पानी पीने से यूरिन गाढ़ा और एसिडिक हो जाता है जिससे नसों में तेज़ जलन होने लगती है।
- फ्लशिंग: बार-बार यूरिन न आने के कारण ब्लैडर में मौजूद बैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से बाहर नहीं निकल पाते हैं।
- टॉक्सिंस: शरीर के भीतर के हानिकारक तत्व बाहर न निकलने से इन्फेक्शन का खतरा हमेशा बना रहता है।
- ब्लैडर: मूत्राशय में यूरिन के लंबे समय तक रुके रहने से बैक्टीरिया को दीवारों पर चिपकने की जगह मिल जाती है।
साफ-सफाई से जुड़ी कुछ आम गलतियां
कई बार हम अनजाने में अपनी रोजमर्रा की कुछ ऐसी आदतें अपना लेते हैं जो बैक्टीरिया को बाहर से हमारे यूरिन ट्रैक्ट के अंदर जाने का सीधा रास्ता दे देती हैं। उदाहरण के लिए, वॉशरुम जाने के बाद शरीर की सफाई का गलत तरीका बैक्टीरिया को बहुत आसानी से फैला देता है। इसके अलावा, बहुत ज़्यादा तंग कपड़े या सिंथेटिक अंडरगारमेंट्स पहनने से उस हिस्से में हवा नहीं पहुँच पाती, जिससे वहां पसीना और नमी जमा होने लगती है।
यह नमी बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे मुफीद जगह होती है। अगर आप पब्लिक टॉयलेट का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं और वहां सफाई का ध्यान नहीं रखते, तो भी बैक्टीरिया बहुत जल्दी आपके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जब तक आप इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद जरूरी आदतों को नहीं सुधारेंगे, तब तक आप कितनी भी दवाइयाँ खा लें, बाहर से नए बैक्टीरिया लगातार अंदर जाते रहेंगे और आपको बार-बार जलन की समस्या झेलनी पड़ेगी।
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में बढ़ा हुआ पित्त
आयुर्वेद में यूटीआई और यूरिन की जलन को 'मूत्रकृच्छ्र' की श्रेणी में रखा जाता है। इसका सीधा संबंध हमारे शरीर के पित्त दोष से होता है। पित्त का मतलब है शरीर की आंतरिक गर्मी और एसिड का स्तर। जब हम बहुत ज़्यादा मिर्च-मसालेदार खाना खाते हैं, चाय या कॉफी का जरूरत से ज़्यादा सेवन करते हैं, या चिलचिलाती धूप में बहुत ज़्यादा घूमते हैं, तो हमारे शरीर का पित्त दोष बुरी तरह भड़क जाता है।
यह बढ़ा हुआ पित्त जब यूरिन के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश करता है, तो वहां की नाजुक त्वचा और नसों में तेज़ जलन पैदा करता है। भले ही आप एलोपैथिक दवाइयों से बैक्टीरिया को मार दें, लेकिन अगर आपके शरीर के अंदर की यह गर्मी और एसिडिटी शांत नहीं हुई है, तो यह जलन बार-बार लौटती रहेगी। इसलिए आयुर्वेद कहता है कि इन्फेक्शन को दोबारा लौटने से रोकने के लिए शरीर को अंदर से ठंडा रखना और पित्त को शांत करना बेहद जरूरी है।
शरीर की अंदरूनी कमजोरी और दूसरी बीमारियां
बार-बार इन्फेक्शन लौटने का एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि आपके शरीर की अपनी डिफेंसिव प्रणाली यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ चुकी है। जब शरीर अंदर से कमजोर होता है, तो वह हल्के से बैक्टीरिया के हमले को भी झेल नहीं पाता और बार-बार बीमार पड़ जाता है। जिन लोगों को शुगर यानी डायबिटीज की बीमारी होती है, उनके यूरिन में शक्कर की मात्रा ज़्यादा होती है, जो बैक्टीरिया का सबसे पसंदीदा भोजन है।
इसके अलावा, अगर किसी के गुर्दे यानी किडनी में छोटी-मोटी पथरी है, तो वह पथरी भी यूरिन के बहाव को थोड़ा रोक देती है। रुके हुए यूरिन में बैक्टीरिया बहुत तेज़ी से पनपते हैं। ऐसी स्थिति में जब तक आप उस मुख्य बीमारी या कमजोरी का इलाज नहीं करेंगे, तब तक यूटीआई की यह जलन बार-बार लौटकर आपको अपनी चपेट में लेती रहेगी। इसलिए अपने शरीर की अंदरूनी ताकत को पहचानना और उसका इलाज करना बहुत आवश्यक है।
इस बार-बार होने वाली जलन से बचने के तरीके
अपनी कुछ आदतों में थोड़ा सा बदलाव करके आप इस जिद्दी इन्फेक्शन और जलन को हमेशा के लिए दूर रख सकते हैं:
- पानी: दिनभर में कम से कम आठ से दस ग्लास पानी जरूर पिएं ताकि ब्लैडर पूरी तरह साफ रहे।
- क्रैनबेरी: क्रैनबेरी का जूस बिना चीनी के पीने से बैक्टीरिया ब्लैडर की दीवारों पर चिपक नहीं पाते हैं।
- धनिया: रात को धनिये के बीज भिगोकर सुबह उसका पानी पीने से शरीर की आंतरिक गर्मी शांत होती है।
- नारियल: रोज सुबह खाली पेट नारियल का पानी पीने से यूरिन का एसिडिक स्तर कम होता है और जलन मिटती है।
निष्कर्ष
तो दोस्तों, चाय की चुस्कियों के साथ हुई इस चर्चा का सीधा सा मतलब यही है कि यूटीआई की बार-बार लौटने वाली जलन कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका इलाज न हो सके। बस जरूरत है थोड़ा सा सावधान रहने की और अपने शरीर के संकेतों को समझने की। दवाइयों का कोर्स हमेशा पूरा करें, पानी पीने में कभी कोई लापरवाही न बरतें, और अपने खान-पान को जितना हो सके सादा और ठंडा रखें।
यह जलन आपके शरीर का एक तरीका है आपको यह बताने का कि अंदर कुछ गड़बड़ है और उसे थोड़े आराम और सफाई की जरूरत है। अपनी रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव कीजिए, अपने शरीर को पूरा समय दीजिए और इस भागदौड़ भरी लाइफ के चक्कर में अपनी सेहत को नजरअंदाज मत कीजिए। खुद का ध्यान रखिए, सही आदतें अपनाइए, और फिर देखिए यह जलन कैसे हमेशा के लिए आपका पीछा छोड़ देती है!
REFERENCES -
Ministry of Ayush, Government of India













