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जो आप Ignore कर रहे हैं, वही सबसे बड़ा कारण हो सकता है

Information By Dr. Keshav Chauhan

हल्का सा सिरदर्द हुआ तो पेनकिलर खा ली, गैस बनी तो एंटासिड पी लिया, और नींद नहीं आई तो स्लीपिंग पिल ले ली। हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इतने व्यस्त हैं कि शरीर को 'म्यूट' (Mute) पर रखकर काम करते रहते हैं। हम लक्षणों को तो तुरंत दबा देते हैं, लेकिन उन 'कारणों' को पूरी तरह इग्नोर कर देते हैं जिनकी वजह से वह परेशानी पैदा हुई। क्या आप जानते हैं कि कम पानी पीना, पेशाब या छींक को रोकना, लगातार तनाव लेना या खाना खाते समय मोबाइल चलाना—ये महज़ 'खराब आदतें' नहीं हैं? ये वो खामोश ट्रिगर्स (Triggers) हैं जो आपके शरीर के अंदर किसी भयंकर बीमारी की नींव रख रहे हैं। जब हम इन छोटी-छोटी गलतियों को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो अंदर ही अंदर पल रही छोटी सी गड़बड़ी एक भयंकर और लाइलाज बीमारी का रूप ले लेती है। शरीर पहले फुसफुसाता है, और जब हम नहीं सुनते, तब वह बीमारी के रूप में चीखता है। इस खतरे को समय रहते पहचानना ही गंभीर बीमारियों से बचने की असली चाबी है। इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि वे कौन सी रोज़मर्रा की बातें हैं जिन्हें आप इग्नोर कर रहे हैं, इसके पीछे कौन से खतरे छिपे हैं, और कैसे आयुर्वेद की मदद से आप अपनी जीवनशैली को सुधारकर खुद को हमेशा के लिए स्वस्थ रख सकते हैं।

जिन्हें आप नज़रअंदाज़ कर रहे हैं: क्या वे भयंकर बीमारियों का अलार्म हैं?

अगर आप अपनी दिनचर्या में इन छोटी बातों को इग्नोर कर रहे हैं, तो आप अनजाने में शरीर के अंदरूनी सिस्टम को फेल कर रहे हैं।

  • प्राकृतिक वेगों को रोकना (Suppressing Natural Urges): मीटिंग या सफर के दौरान पेशाब, मल, छींक, या यहाँ तक कि आँसुओं को रोकना एक बहुत आम बात हो गई है। यह नर्वस सिस्टम पर भारी दबाव डालता है और शरीर में टॉक्सिन्स को वापस खून में धकेल देता है।
  • नींद से समझौता (Ignoring Sleep Debt): "वीकेंड पर सोकर नींद पूरी कर लेंगे"—यह सोच शरीर के लिए सबसे घातक है। रोज़ाना 7-8 घंटे की गहरी नींद न लेना आपके हार्मोन्स को बिगाड़ता है, इम्युनिटी गिराता है और सीधा हार्ट अटैक या डिप्रेशन को न्योता देता है।
  • हल्के दर्द या थकान को सहना (Chronic Ignored Pain): अगर बिना मेहनत किए हर समय थकान या कमर/गर्दन में दर्द रहता है, तो यह 'बैड पोस्चर' (Bad Posture) या अंदरूनी सूजन (Inflammation) का संकेत है, जो भविष्य में सर्वाइकल या अर्थराइटिस बन सकता है।
  • प्यास को इग्नोर करना (Chronic Dehydration): काम के चक्कर में घंटों तक पानी न पीना खून को गाढ़ा कर देता है। इससे लिवर और किडनी पर गंदगी बाहर निकालने का दबाव कई गुना बढ़ जाता है, जो किडनी स्टोन या यूरिक एसिड बढ़ने का मुख्य कारण है।

आयुर्वेद इस खामोशी को कैसे समझता है? (निदान परिवर्जन और वेग धारण)

आधुनिक विज्ञान जिसे 'लाइफस्टाइल डिसऑर्डर' कहता है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले ही बहुत गहराई से समझा दिया था:

  • निदान परिवर्जन (Avoiding the Root Cause): आयुर्वेद का सबसे पहला सिद्धांत है—'जो बीमारी का कारण है, सबसे पहले उसे छोड़ो।' अगर आप गैस की दवा खा रहे हैं लेकिन बासी और तीखा खाना इग्नोर नहीं कर रहे, तो कोई भी दवा काम नहीं करेगी।
  • प्रज्ञापराध (Crimes Against Wisdom): हम जानते हैं कि देर रात तक जागना या जंक फूड खाना गलत है, फिर भी हम वह करते हैं। अपनी ही समझ के खिलाफ जाना 'प्रज्ञापराध' है, जो सभी बीमारियों की सबसे बड़ी जड़ है।
  • वेग धारण (Suppressing Urges): आयुर्वेद में 13 प्रकार के 'अधारणीय वेग' (Natural Urges) बताए गए हैं (जैसे भूख, प्यास, नींद, मल, मूत्र, छींक आदि)। इन्हें रोकने से 'वात दोष' भयंकर रूप से कुपित हो जाता है, जो ट्यूमर, हार्ट ब्लॉकेज और लकवा (Paralysis) जैसी बीमारियों का मुख्य कारण बनता है।

 जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?  

हम आपको सिर्फ दर्द निवारक गोलियाँ (Painkillers) या विटामिन देकर इन चेतावनियों को दबाने का काम नहीं करते। हमारा लक्ष्य आपके शरीर की असली पुकार को सुनकर बीमारी की जड़ (Root cause) को हमेशा के लिए ठीक करना है।

  • नाड़ी से बीमारी की पहचान: हम लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि नाड़ी परीक्षा से शरीर के अंदर चल रहे वात, पित्त और कफ के असली असंतुलन को पकड़ते हैं कि आप असल में किस चीज़ को इग्नोर कर रहे हैं।
  • कारणों को हटाना (Detoxification): सबसे पहले आपकी दिनचर्या की उन गलतियों को ठीक किया जाता है जो बीमारी पैदा कर रही हैं, और नसों में फैले हुए 'आम' (गंदगी) को जड़ी-बूटियों के ज़रिए बाहर निकाला जाता है।
  • धातु पोषण (Rejuvenation): जब शरीर अंदर से साफ हो जाता है, तब डैमेज हो चुकी कोशिकाओं (Cells) को दोबारा ताकत देने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विशेष रसायन औषधियाँ दी जाती हैं।

शरीर को हील करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें शरीर की डैमेज मशीनरी को रिपेयर करने, तनाव कम करने और अंगों को प्राकृतिक रूप से ताकत देने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं।

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): इग्नोर किए गए तनाव (Stress) और थकान को जड़ से खत्म करने के लिए अश्वगंधा एक जादुई रक्षक है। यह शरीर को अंदरूनी बल और गहरी नींद देता है।
  • त्रिफला (Triphala): गलत खान-पान से आँतों में जमा हुई सालों पुरानी गंदगी को डिटॉक्स करने और पाचन तंत्र को 'पुनः नया' करने में त्रिफला सबसे बेहतरीन है।
  • ब्राह्मी (Brahmi): अगर आप मानसिक थकावट और दिमागी धुंधलापन (Brain Fog) इग्नोर कर रहे हैं, तो ब्राह्मी नर्वस सिस्टम को शांत कर दिमाग को नई ऊर्जा देती है।
  • गिलोय (Giloy): बार-बार बीमार पड़ने के उन सिग्नल्स को जिन्हें आप मौसम का बदलाव मानते हैं, गिलोय खून को साफ करके और इम्युनिटी बढ़ाकर हमेशा के लिए खत्म कर देती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी शरीर को कैसे नया बनाती है?

जब आप छोटे सिग्नल्स इग्नोर कर देते हैं और वात, पित्त, कफ भयंकर रूप से बिगड़ जाते हैं, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी शरीर की डीप क्लीनिंग करती है।

  • अभ्यंग (Abhyanga): औषधीय गर्म तेलों से पूरे शरीर की मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन तुरंत तेज़ होता है और सालों से इग्नोर किया गया शारीरिक दर्द और वात दोष शांत हो जाता है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): माथे पर लगातार औषधीय तेल की धार गिरने से नर्वस सिस्टम को तुरंत शांति मिलती है। यह एंग्ज़ायटी, स्ट्रेस और नींद की कमी के लिए जादुई काम करती है।
  • बस्ती (Basti): वात दोष को संतुलित करने और शरीर के निचले हिस्से (Colon) से सारे ज़हरीले तत्वों को बाहर निकालने के लिए इसे आयुर्वेद की 'अर्ध-चिकित्सा' माना जाता है।

बीमारियों को रोकने के लिए त्रिदोष-शामक डाइट प्लान

आप जो खाते हैं, वह सीधे तय करता है कि शरीर में ऊर्जा बनेगी या बीमारी। शरीर की इन खामोश चेतावनियों को रोकने के लिए सही डाइट का पालन करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

आहार का सिद्धांत:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): सात्विक, गर्म, ताज़ा और आसानी से पचने वाला भोजन लें जो शरीर को ऊर्जा दे और वात को शांत करे।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): बासी, फ्रिज में कई दिनों तक रखा खाना, और खाते समय टीवी/मोबाइल देखना जो पाचन अग्नि को कमज़ोर करता है।

प्राकृतिक पोषण:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): मौसमी फल, हरी सब्ज़ियां, गाय का शुद्ध घी, और साबुत अनाज शामिल करें।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): ज़्यादा मैदा, रिफाइंड चीनी, पैकेटबंद (Processed) फूड जो शरीर में 'आम' (ज़हरीला कचरा) बढ़ाते हैं।

विरुद्ध आहार से बचें:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): संतुलित और संगत (Compatible) खाद्य संयोजन अपनाएँ।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): दूध के साथ खट्टे फल, नमक या मछली का सेवन, और ठंडे पानी के साथ बहुत गर्म खाना जो शरीर के सिस्टम को कन्फ्यूज़ कर देता है।

दैनिक पेय:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): दिन भर में पर्याप्त गुनगुना पानी, ग्रीन टी, या हर्बल काढ़ा पिएं।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): बर्फ का ठंडा पानी जो जठराग्नि को बुझा देता है, और कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप इन छोटे-छोटे संकेतों को इग्नोर करके किसी बड़ी बीमारी का शिकार हो जाते हैं, तब हम आपकी परेशानी की जड़ तक पहुँचने के लिए गहराई से जाँच करते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि आपके अंदर 'वात', 'पित्त', और 'कफ' का स्तर कितना बिगड़ चुका है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: डॉक्टर आपकी आँखें, त्वचा, जीभ (Tongue) और नाखूनों को बहुत बारीकी से चेक करते हैं ताकि अंदरूनी कमज़ोरी का सही पता चल सके।
  • पाचन का विश्लेषण: यह देखना कि आपका पेट साफ रहता है या नहीं, क्योंकि 90% बीमारियाँ खराब गट हेल्थ से ही शुरू होती हैं।
  • लाइफस्टाइल चेक: आपके काम करने के तरीके, तनाव का स्तर, और दिनचर्या की उन गलतियों को गहराई से समझा जाता है जिन्हें आप अनजाने में इग्नोर कर रहे हैं।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसी जादुई पेनकिलर गोली नहीं है जो एक रात में दर्द दबा दे। शरीर की अंदरूनी मशीनरी और आपकी खराब आदतों के डैमेज को दोबारा रिपेयर होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपका पेट साफ होगा; ऊर्जा का स्तर बढ़ेगा और शरीर में जो बिना वजह का भारीपन और थकावट थी, वह काफी हद तक कम हो जाएगी।
  • 1 से 3 महीने तक: शरीर की अंदरूनी सूजन और दर्द कम होने लगेगा। नींद सुधरेगी और जो लक्षण आप इग्नोर कर रहे थे, वे प्राकृतिक रूप से गायब होने लगेंगे।
  • 3 से 6 महीने और उससे अधिक: आपका पूरा शरीर अंदर से डिटॉक्स हो जाएगा। इम्युनिटी मज़बूत हो जाएगी और आप खराब लाइफस्टाइल के डर से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

लक्षणों को समझने और इलाज के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को लेकर दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को तुरंत दबाना (Symptomatic Relief) मूल कारण (Root Cause) हटाना, निदान परिवर्जन और दोष संतुलन
शरीर को देखने का नज़रिया बीमारी को एक अंग की समस्या मानना शरीर, मन और दिनचर्या को एक साथ (Holistic) देखना
डाइट और जीवनशैली की भूमिका दवाइयों पर ज़्यादा निर्भरता, आदतों पर कम ध्यान दिनचर्या सुधार और वात-शामक डाइट को मुख्य उपचार मानना
लंबा असर दवा का असर खत्म होते ही लक्षण वापस आदतों में सुधार और जड़ी-बूटियों से स्थायी नियंत्रण

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

जिन चीज़ों को आप रोज़ इग्नोर कर रहे हैं, अगर वे नीचे दिए गए गंभीर सिग्नल्स में बदल जाएं, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • साँस लेने में अचानक तकलीफ: अगर हल्का काम करने पर भी सांस फूलने लगे या सीने में भारीपन हो, तो इसे महज़ थकान मानकर इग्नोर न करें।
  • लगातार पेट दर्द और मल में बदलाव: अगर पेट में भयंकर दर्द हो, कब्ज़ लगातार बनी रहे या मल में खून आए, तो यह आंतों की गंभीर बीमारी का अलार्म है।
  • अचानक और तेज़ सिरदर्द: ऐसा सिरदर्द जो पहले कभी न हुआ हो, और साथ में उल्टी या चक्कर आएं, तो यह ब्रेन या नर्वस सिस्टम का इमरजेंसी सिग्नल हो सकता है।
  • शरीर के किसी हिस्से का सुन्न होना: हाथों या पैरों में अचानक सुन्नपन आना या झनझनाहट होना नसों के भयंकर ब्लॉकेज का संकेत है।

निष्कर्ष

हमारा शरीर कुदरत की बनाई एक बेहतरीन मशीन है, जो हमें हमेशा सुरक्षित रखने की कोशिश करती है। प्यास लगना, नींद आना, थकान महसूस होना या हल्का दर्द—ये महज़ परेशानियाँ नहीं, बल्कि शरीर के द्वारा भेजे गए 'SOS' मैसेज हैं। जब हम काम या आलस के चक्कर में इन चेतावनियों को इग्नोर करते हैं या सिर्फ पेनकिलर्स से काम चलाते हैं, तो हम असल में अपनी बीमारी को अंदर ही अंदर किसी बड़े धमाके के लिए तैयार कर रहे होते हैं। लक्षण दबाना इस समस्या का हल नहीं है। आयुर्वेद आपको 'निदान परिवर्जन' (कारणों को हटाने) का बेहद सुरक्षित रास्ता दिखाता है। अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों, प्राकृतिक डिटॉक्स (पंचकर्म) और सही दिनचर्या को अपनाकर आप अपने शरीर को दोबारा हील कर सकते हैं। अपने शरीर की खामोश पुकार को सुनें, उन गलतियों को इग्नोर करना बंद करें, और जीवा आयुर्वेद के साथ खुद को हमेशा के लिए रोग-मुक्त और स्वस्थ बनाएं।

FAQs

बिल्कुल! आयुर्वेद के अनुसार प्राकृतिक वेगों को रोकने से शरीर का 'वात दोष' भड़क जाता है। यह टॉक्सिन्स को शरीर में रोक देता है, जिससे पथरी, प्रोस्टेट, ट्यूमर और हार्ट की बीमारियां होती हैं।

प्यास शरीर का सिग्नल है कि उसे पानी की ज़रूरत है। इसे इग्नोर करने से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और किडनी पर भारी दबाव पड़ता है।

लगातार कम सोने से शरीर 'कॉर्टिसोल' (स्ट्रेस हार्मोन) बनाता है। यह आपकी इम्युनिटी को कमज़ोर करता है, वज़न बढ़ाता है और दिमाग को सुन्न (Brain Fog) कर देता है।

नहीं। दर्द शरीर का तरीका है यह बताने का कि कहीं कुछ डैमेज हो रहा है। रोज़ाना पेनकिलर खाकर इसे इग्नोर करने से अंदरूनी सूजन बढ़ जाती है जो क्रॉनिक डिज़ीज़ बन सकती है।

निदान परिवर्जन का मतलब है बीमारी के 'कारणों को छोड़ना'। जैसे अगर कब्ज़ है, तो सिर्फ चूर्ण खाने के बजाय सूखा और बासी खाना बंद करना। यही सबसे पहला और सच्चा इलाज है।

अगर आपको हर समय थकान रहती है, सुबह उठने पर फ्रेश फील नहीं होता, बात-बात पर गुस्सा आता है और बाल झड़ रहे हैं, तो इसका मतलब है आप अपनी हेल्थ की चेतावनियों को इग्नोर कर रहे हैं।

जी हाँ। ऐसा करने से आपका दिमाग खाने पर फोकस नहीं कर पाता, जिससे पाचन अग्नि (Digestive Fire) कमज़ोर हो जाती है और खाना पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है।

लंबे समय तक तनाव को इग्नोर करने से गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) खराब हो जाता है। इससे IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम), डिप्रेशन और ऑटोइम्यून बीमारियां पैदा होती हैं।

सुबह उठकर 10 मिनट शांति से बैठें, शरीर पर ध्यान दें। समय पर खाएं, प्यास लगने पर पानी पिएं और शरीर जब आराम मांगे, तो उसे आराम दें।

जीवा आयुर्वेद के वैद्य सिर्फ दवाई नहीं देते। वे सबसे पहले उन गलतियों (Hetu) को पहचानते हैं जिन्हें आप इग्नोर कर रहे थे, और आपके लिए एक पूरा कस्टमाइज्ड लाइफस्टाइल और डाइट प्लान बनाते हैं।

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