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PCOD diagnosis के बाद crash dieting क्यों नुकसान कर सकती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 29 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 29 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि PCOD का पता चलते ही आपने वज़न घटाने के लिए अचानक खाना-पीना छोड़ दिया हो? पीसीओडी महिलाओं में एक बहुत ही आम परेशानी बन गई है। इसका नाम सुनते ही ज़्यादातर महिलाएँ डर जाती हैं और तेज़ी से पतले होने की होड़ में क्रैश डाइटिंग शुरू कर देती हैं। उन्हें लगता है कि भूखे रहने से बीमारी जल्दी ठीक हो जाएगी। लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? या यह शरीर को अंदर से और ज़्यादा खोखला कर रहा है? इस ब्लॉग में हम इसी उलझन को सुलझाएँगे और जानेंगे कि क्रैश डाइट क्यों नुकसानदायक है।

एक्सपर्ट की क्या राय है

मेडिकल फील्ड के बड़े एक्सपर्ट्स और स्त्री रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि पीसीओडी कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो भूखे रहने से ठीक हो जाए। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस बीमारी में शरीर के हॉर्मोन्स पहले से ही असंतुलित होते हैं। जब आप क्रैश डाइट करती हैं, तो शरीर को ज़रूरी विटामिन्स और मिनरल्स नहीं मिल पाते। डॉक्टरों की राय में, जब महिलाएँ अचानक से कार्बोहाइड्रेट्स या फैट बिल्कुल बंद कर देती हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह से बिगड़ जाता है। इससे वज़न घटने के बजाय शरीर में भारी कमज़ोरी आ जाती है। इसलिए इसे बीमारी का सही इलाज बिल्कुल नहीं माना जा सकता है।

PCOD diagnosis के बाद crash dieting क्यों नुकसान कर सकती है?

यह एक बहुत ज़रूरी सवाल है कि आखिर पीसीओडी में खाना छोड़ना नुकसान क्यों पहुँचाता है। असल में, पीसीओडी में महिलाओं के शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है, जिसका मतलब है कि शरीर शुगर को सही से पचा नहीं पाता। जब आप क्रैश डाइटिंग करती हैं, तो ब्लड शुगर लेवल अचानक से तेज़ी से गिरता है और फिर एकदम से बढ़ जाता है। इस भारी उतार-चढ़ाव से शरीर में तनाव वाले हॉर्मोन तेज़ी से बढ़ने लगते हैं। इससे आपके पीरियड्स और ज़्यादा अनियमित हो जाते हैं। इसके अलावा, बालों का झड़ना और चेहरे पर दाने निकलने की परेशानी भी तेज़ी से बढ़ जाती है।

गलत डाइटिंग का सच: क्या कहते हैं आँकड़े?

यह जानना काफी दिलचस्प है कि कितनी महिलाएँ इस तरह की गलत डाइटिंग के चक्कर में फँस जाती हैं। हेल्थ सर्वे के आँकड़े बताते हैं कि पीसीओडी का पता चलते ही लगभग 80% महिलाएँ तुरंत कोई न कोई क्रैश डाइट शुरू कर देती हैं।

इसके कारणों पर नज़र डालें तो:

  • 45% मामलों में सीधा कारण इंटरनेट पर मौजूद गलत और अधूरी जानकारी है।
  • 30% महिलाएँ दोस्तों या रिश्तेदारों की सलाह पर बिना सोचे-समझे खाना-पीना कम कर देती हैं।
  • 25% मामलों में समाज का यह दबाव ज़िम्मेदार होता है कि पीसीओडी से उबरने के लिए जल्द से जल्द दुबला होना ही इकलौता रास्ता है।

क्रैश डाइट से शरीर में अचानक बेचैनी क्यों होती है?

भूखे रहने या क्रैश डाइट करने से घबराहट और बेचैनी होना एक आम बात है। पीसीओडी में शरीर पहले से ही अंदरूनी तनाव से जूझ रहा होता है। जब आप अचानक खाना कम कर देती हैं, तो दिमाग को सही मात्रा में ऊर्जा और ग्लूकोज़ नहीं मिल पाता। ग्लूकोज़ की इस अचानक भारी कमी से दिमाग के अंदर खुशी देने वाले रसायनों का स्तर बहुत तेज़ी से गिर जाता है। इसी वजह से महिलाओं को बिना किसी बात के बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ापन, घबराहट और तेज़ बेचैनी महसूस होने लगती है। कई बार तो दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है और रातों की नींद पूरी तरह उड़ जाती है।

किन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए?

यह बिल्कुल सही है कि डाइटिंग के दौरान कमज़ोरी होना आम बात है। लेकिन पीसीओडी में जब शरीर गंभीर इशारे दे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इन लक्षणों को कभी भी अनदेखा न करें:

  • चक्कर खाकर गिरना: अगर शरीर में कमज़ोरी इतनी बढ़ जाए कि आँखों के आगे अंधेरा छा जाए।
  • पीरियड्स रुकना: डाइट शुरू करने के बाद अगर आपके पीरियड्स बिल्कुल आने बंद हो जाएँ।
  • बालों का टूटना: कंघी करते समय अगर बाल बहुत ज़्यादा झड़ने लगें।
  • भयंकर दर्द: शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों में लगातार भारी दर्द रहने लगे।

क्या PCOD की दवा इसका कारण हो सकती है?

जी हाँ, कई बार पीसीओडी को कंट्रोल करने के लिए हम जो दवाइयाँ लेते हैं, उनके साथ क्रैश डाइटिंग करना बड़ी परेशानी बन जाता है। बहुत सी महिलाओं को ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाली दवाइयाँ दी जाती हैं। जब आप एक तरफ से ये दवाइयाँ खा रही होती हैं और दूसरी तरफ शरीर को खाना नहीं देतीं, तो शरीर टूटने लगता है। इन दवाइयों का काम खाने को पचाना है, लेकिन खाली पेट इन्हें खाने से चक्कर आना, उल्टी होना और भारी एसिडिटी शुरू हो जाती है। इसलिए दवा और डाइट का सही तालमेल होना बहुत ज़रूरी होता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के ग्रंथों के अनुसार, हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ दोषों पर निर्भर करता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, पीसीओडी मुख्य रूप से कफ और वात दोष के बहुत ज़्यादा बिगड़ने का नतीजा है। जब महिला क्रैश डाइट करती है और भूखी रहती है, तो शरीर में वात दोष भयंकर रूप से बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ वात दोष शरीर की प्राकृतिक नमी को सुखा देता है और प्रजनन तंत्र को कमज़ोर करता है। आयुर्वेद कहता है कि बीमारी को खाना छोड़कर नहीं, बल्कि पौष्टिक आहार लेकर कफ और वात को शांत करके ही ठीक किया जा सकता है।

नुकसान से राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए?

अगर आपने क्रैश डाइटिंग से अपने शरीर को कमज़ोर कर लिया है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। आप कुछ बेहद प्राकृतिक और आसान घरेलू तरीके अपनाकर वापस अपने शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बना सकती हैं:

  • संतुलित आहार लें: अपनी डाइट में प्रोटीन, ताज़े फल और हरी सब्ज़ियाँ शामिल करें, खाना बिल्कुल न छोड़ें।
  • देसी घी खाएँ: दिन में एक चम्मच शुद्ध गाय का घी खाएँ, यह हॉर्मोन्स को सुधारता है।
  • भरपूर पानी पिएँ: शरीर की गंदगी बाहर निकालने के लिए दिन भर खूब सारा पानी पिएँ।
  • मेवे और बीज: रोज़ाना भिगोए हुए बादाम और अलसी के बीज खाएँ।

क्या तनाव भी इसकी वजह हो सकती है?

आजकल की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव एक ऐसी बीमारी है जो पीसीओडी को कई गुना ज़्यादा बिगाड़ देती है। जब आप क्रैश डाइट करती हैं, तो शरीर को लगता है कि भुखमरी का समय आ गया है। इस डर से शरीर में कोर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन काफी ज़्यादा बढ़ जाता है। इस हार्मोन के बढ़ने से इंसुलिन का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाता है और आपका शरीर पतला होने के बजाय ज़्यादा चर्बी जमा करने लगता है। इसके अलावा, बढ़ा हुआ तनाव दिमाग को शांत नहीं होने देता। असल में तनाव आपकी सारी मेहनत खराब कर देता है।

PCOD में सही डाइट के उपाय क्या हैं?

अगर आप पीसीओडी में सुरक्षित तरीके से अपना वज़न कम करना चाहती हैं, तो क्रैश डाइट छोड़कर कुछ स्वस्थ उपाय अपनाने होंगे। जीवनशैली सुधारकर आप बिना कमज़ोरी के फिट हो सकती हैं:

  • थोड़ा-थोड़ा खाएँ: तीन बार भारी भोजन की जगह, अपना खाना पाँच छोटे हिस्सों में बाँटें।
  • चीनी बिल्कुल छोड़ें: मीठी चीज़ें और पैकेट बंद खाना पूरी तरह बंद कर दें, ये बड़े दुश्मन हैं।
  • नियमित व्यायाम: रोज़ आधा घंटा हल्का योगा या वॉक करें, जिससे खून का दौरा अच्छा रहे।
  • अच्छी नींद लें: तनाव कम करने के लिए रोज़ रात को पूरी नींद लेना सबसे ज़रूरी है।

आयुर्वेदिक और आधुनिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
नज़रिया पीसीओडी के लक्षणों, हार्मोनल बदलाव और संबंधित समस्याओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार, जीवनशैली और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार दवाइयाँ, हार्मोनल उपचार, वजन प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय उपाय अपनाए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, योग, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
डाइट और जीवनशैली संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखने की सलाह दी जाती है। पौष्टिक आहार, नियमित दिनचर्या, योग और प्राकृतिक जीवनशैली को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और उनके लाभ व संभावित दुष्प्रभावों की निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही मात्रा में ही लेनी चाहिए।
दीर्घकालिक लक्ष्य हार्मोन संतुलन, मासिक धर्म में सुधार और पीसीओडी से जुड़ी जटिलताओं का प्रबंधन। समग्र स्वास्थ्य, संतुलित जीवनशैली और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार पर बल।

तुरंत डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

पीसीओडी में सही डाइट और व्यायाम करने से शरीर खुद-ब-खुद ठीक होने लगता है। लेकिन हमें मालूम होना चाहिए कि कब क्रैश डाइटिंग की स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और हमें तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए:

  • भयंकर कमज़ोरी: अगर आपको इतनी भारी कमज़ोरी लगे कि आप अपने बिस्तर से भी उठ न पाएँ।
  • लगातार उल्टियाँ: खाना खाते ही अगर तुरंत उल्टी हो जाए और पानी भी न पच रहा हो।
  • धड़कन तेज़ होना: अगर अचानक तेज़ घबराहट हो और दिल की धड़कन काबू से बाहर हो जाए।
  • गंभीर तनाव: उदासी इतनी ज़्यादा बढ़ जाए कि किसी भी काम में मन न लगे।

निष्कर्ष

पीसीओडी महिला के जीवन में एक ऐसी चुनौती है जिसे सही समझदारी से जीता जा सकता है। क्रैश डाइटिंग वज़न कम करने का कोई शॉर्टकट नहीं है, बल्कि यह शरीर को अंदर से पूरी तरह बर्बाद करने का रास्ता है। यह बीमारी भूखे रहने से नहीं, बल्कि सही और संतुलित जीवनशैली से ही ठीक होती है। अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें और हॉर्मोन्स का हमेशा सम्मान करें। पौष्टिक खानपान, नियमित हल्का व्यायाम और तनाव-मुक्त जीवन ही आपका सच्चा साथी है। अगर आपको पीसीओडी है, तो हमेशा किसी विशेषज्ञ की सलाह से डाइट प्लान करें, यही आपकी अच्छी दवा है।

References

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10833093/

https://www.fda.gov/consumers/womens-health-topics/polycystic-ovary-syndrome-pcos

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10047373/

https://www.healthline.com/health-news/pcos-renamed-pmos-improve-diagnosis-care-multisystem-disease

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, शुरुआत में पानी कम होने से वज़न घटता हुआ लग सकता है। लेकिन कुछ ही दिनों में मेटाबॉलिज़्म धीमा पड़ जाता है, जिससे वज़न कम होना रुक जाता है और शरीर में भारी कमज़ोरी आ जाती है।

जी हाँ, इसे यो-यो इफेक्ट कहते हैं। जैसे ही आप वापस नॉर्मल खाना शुरू करती हैं, आपका शरीर बचे हुए खाने को तेज़ी से फैट में बदल देता है, जिससे वज़न पहले से भी ज़्यादा बढ़ जाता है।

पीसीओडी वाली महिलाओं के लिए विटामिन डी और विटामिन बी12 बहुत ज़रूरी होते हैं। ये दोनों शरीर में इंसुलिन को कंट्रोल करने और कमज़ोरी को पूरी तरह से दूर भगाने में बहुत बड़ी मदद करते हैं।

सफेद चावल में कार्बोहाइड्रेट्स बहुत ज़्यादा होते हैं जो शरीर में शुगर बढ़ाते हैं। अगर आप चावल खाना चाहती हैं, तो ब्राउन राइस का इस्तेमाल करें। यह आपके शरीर को फाइबर देता है और नुकसान बिल्कुल नहीं करता है।

खाना छोड़ने से शरीर में प्रोटीन की भारी कमी हो जाती है जिससे बाल टूटते हैं। अपने खाने में दालें, पनीर और अंडे शामिल करें। प्रोटीन मिलते ही बालों का झड़ना खुद-ब-खुद काफी कम हो जाएगा।

नहीं, दोनों बिल्कुल अलग हैं। क्रैश डाइट में आप शरीर को भूखा मारते हैं, जबकि सही तरीके से की गई फास्टिंग (जैसे इंटरमिटेंट फास्टिंग) में शरीर को आराम मिलता है। लेकिन इसे भी हमेशा डॉक्टर से पूछकर ही शुरू करें।

बिल्कुल नहीं। डाइट आपके शरीर को पोषण देती है, लेकिन इंसुलिन को कंट्रोल करने और हॉर्मोन्स को सही जगह पर लाने के लिए रोज़ाना हल्का व्यायाम और योगासन करना शरीर के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी होता है।

जब आप भूखी रहती हैं, तो शरीर में भारी तनाव बढ़ता है। इस तनाव से पुरुष हॉर्मोन (एंड्रोजन) का स्तर तेज़ी से ऊपर चला जाता है। इसी हॉर्मोन की वजह से चेहरे पर अनचाहे बाल और मोटे दाने निकलने लगते हैं।

कुछ महिलाओं को डेयरी प्रोडक्ट्स से सूजन और गैस की शिकायत हो जाती है। अगर आपको दूध पीने से चेहरे पर दाने निकलते हैं या पेट खराब होता है, तो आप बादाम का दूध या सोया दूध आसानी से ले सकती हैं।

सच कहें तो इसका कोई जादुई परमानेंट इलाज नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह से मैनेज किया जा सकता है। सही खानपान, तनाव से दूरी, खुश रहना और रोज़ाना व्यायाम ही इसे कंट्रोल करने की सबसे अच्छी और पक्की दवा है।

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