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Menopause में weight, mood और sleep क्यों बदलते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 28 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 28 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि अचानक रातों की नींदें उड़ जाएँ, बिना ज़्यादा खाए वज़न बढ़ने लगे और बात-बात पर गुस्सा आने लगे? यह वह दौर है जिससे एक उम्र के बाद हर महिला को गुज़रना पड़ता है, जिसे हम मेनोपॉज़ कहते हैं। इस समय शरीर में हॉर्मोन्स का ऐसा हो जाता है कि सब कुछ बदला-बदला लगता है। महिलाएँ सोचने लगती हैं कि शरीर को अचानक क्या हो गया है? क्या कोई बीमारी है या यह सिर्फ बढ़ती उम्र का असर है? इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि मेनोपॉज़ में वज़न, मूड और नींद में बदलाव आखिर क्यों आते हैं।

एक्सपर्ट की क्या राय है

मेडिकल फील्ड के बड़े एक्सपर्ट्स और स्त्री रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि मेनोपॉज़ कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर का एक बिल्कुल प्राकृतिक बदलाव है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नाम के दो बहुत ज़रूरी हॉर्मोन्स होते हैं। जब उम्र 45 से 55 साल के बीच पहुँचती है, तो शरीर में इन हॉर्मोन्स का बनना काफी कम हो जाता है। डॉक्टरों की राय में, जब महिलाएँ शिकायत करती हैं कि वज़न बढ़ रहा है या बेवजह रोने का मन करता है, तो वे समझाते हैं कि यह हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव का नतीजा है। इसे बीमारी नहीं बल्कि नए चरण के रूप में अपनाना चाहिए।

मेनोपॉज़ में ये बदलाव क्यों आते हैं?

यह एक बहुत सामान्य सवाल है और इसके पीछे मुख्य रूप से हॉर्मोन्स की कमी ज़िम्मेदार होती है। स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि मेनोपॉज़ से गुज़र रही लगभग 80% महिलाएँ वज़न बढ़ने, नींद न आने और मूड स्विंग्स की शिकायत करती हैं। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत (Percentage) में बाँटें, तो तस्वीर कुछ इस तरह नज़र आती है। लगभग 45% मामलों में इसका कारण सीधे तौर पर एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी होती है। 25% मामलों में यह बढ़ती उम्र और कमज़ोर मांसपेशियों के कारण होता है। 20% मामलों में तनाव और बचे हुए दस प्रतिशत में आपकी जेनेटिक्स या थायरॉइड बीमारी ज़िम्मेदार होती है।

वज़न, मूड और नींद में अचानक बदलाव क्यों होता है?

वज़न बढ़ना, मूड खराब होना और रातों की नींदें गायब होना, ये तीनों चीजें आपस में गहराई से जुड़ी हैं। जब शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन गिरता है, तो मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा हो जाता है। इससे पेट और कमर के आसपास तेज़ी से चर्बी जमा होने लगती है। एस्ट्रोजन की कमी से दिमाग में 'सेरोटोनिन' नाम के खुशी देने वाले केमिकल का स्तर भी गिरता है, जिससे बेवजह उदासी या चिड़चिड़ापन होता है। जब आप तनाव में होती हैं या रात में अचानक तेज़ पसीना आता है, तो नींद टूट जाती है। नींद खराब होने से अगले दिन थकावट रहती है, मूड बिगड़ता है और यह पूरा चक्र ऐसे ही चलता रहता है।

किन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए?

यह बिल्कुल सही है कि मेनोपॉज़ के दौरान शरीर में बदलाव होना एक बहुत ही आम बात है और इससे घबराना नहीं चाहिए। लेकिन शरीर जब कुछ खास तरह के इशारे दे, तो हमें सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि ये किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकते हैं:

  • लगातार रक्तस्राव: पीरियड्स बंद होने के एक साल बाद भी अचानक ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो सतर्क हो जाएँ।
  • गंभीर डिप्रेशन: मूड स्विंग्स इतने बढ़ जाएँ कि मन में खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आने लगें।
  • छाती में दर्द: अचानक घबराहट के साथ छाती में जकड़न और बहुत पसीना आना।
  • हड्डियों में भयंकर दर्द: ज़रा सी चोट पर हड्डी टूटना अंदरूनी कमज़ोरी का इशारा है।

क्या मेनोपॉज़ की दवाइयाँ (HRT) इसका कारण हो सकती हैं?

जी हाँ, कई बार मेनोपॉज़ के लक्षणों को कम करने के लिए जो दवाइयाँ हम लेते हैं, वे भी शरीर में अजीब बदलावों का कारण बन जाती हैं। बहुत सी महिलाओं को हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जाती है ताकि एस्ट्रोजन की कमी को पूरा किया जा सके। इसका मुख्य काम पसीना लाना और हड्डियों की कमज़ोरी दूर करना है। लेकिन इन दवाइयों के कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। जब शरीर बाहरी हॉर्मोन्स के साथ तालमेल बिठाता है, तो महिलाओं को शरीर में पानी जमा होने के कारण वज़न बढ़ा हुआ महसूस होता है। अगर आपको लगे कि दवा से परेशानी ज़्यादा बढ़ रही है, तो अपने डॉक्टर से खुलकर बात ज़रूर करें।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के ग्रंथों के अनुसार, हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ इन तीन महत्वपूर्ण दोषों पर निर्भर करता है। मेनोपॉज़ को आयुर्वेद में उस पड़ाव के रूप में देखा जाता है जब शरीर में पित्त से वात दोष की तरफ बदलाव होता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, जब शरीर में वात दोष हद से ज़्यादा बढ़ जाता है, तो नींद न आना, जोड़ों में दर्द और बेचैनी जैसी समस्याएँ पैदा होती हैं। वहीं, पित्त दोष असंतुलित होने पर अचानक पसीना आना और भारी गुस्सा महसूस होता है। आयुर्वेद कहता है कि बीमारी को सिर्फ बाहरी दवाइयों से दबाना काफी नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर से वात-पित्त को शांत करना बहुत ज़रूरी है।

इन समस्याओं से राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए?

जब आपका वज़न तेज़ी से बढ़ने लगे, मूड खराब रहे या नींदें गायब हो जाएँ, तो घबराने के बजाय कुछ घरेलू तरीके आजमाने चाहिए। ये प्राकृतिक तरीके सुरक्षित हैं और बहुत जल्दी आराम पहुँचाते हैं:

  • सही आहार: रोज़ के खाने में सोयाबीन, अलसी के बीज और सफेद तिल को ज़रूर शामिल करें।
  • सोने का माहौल: सूती कपड़े पहनें और कमरे का तापमान ठंडा रखें ताकि पसीने से नींद न टूटे।
  • गहरी साँसें: सुबह शांत जगह बैठकर ध्यान करें, इससे दिमाग को ताज़ा ऑक्सीजन मिलती है।
  • हल्की मालिश: रात को सोते समय पैरों के तलवों की तेल से मालिश करें, इससे बहुत अच्छी नींद आती है।

क्या तनाव (टेंशन) भी इसकी वजह हो सकती है?

आजकल की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में टेंशन एक ऐसी चीज़ है जो महिलाओं को अंदर ही अंदर कमज़ोर बना रही है। जब उम्र के साथ शरीर में बदलाव आ रहे होते हैं, तब महिलाएँ अक्सर घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों और अपने काम को लेकर ज़रूरत से ज़्यादा सोचने लगती हैं।जब आप लगातार चिंता में रहती हैं, तो शरीर में स्ट्रेस बढ़ाने वाला हॉर्मोन (कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ जाता है। इसके बढ़ने से शरीर का सिस्टम बिगड़ता है और वज़न तेज़ी से बढ़ने लगता है।इतना ही नहीं, टेंशन की वजह से दिमाग को कभी आराम ही नहीं मिल पाता, जिससे न तो रात को ठीक से नींद आती है और न ही मन खुश रहता है। इसलिए अगर आपका वज़न बढ़ रहा है या आप परेशान महसूस कर रही हैं, तो टेंशन इसका एक बहुत बड़ा और छुपा हुआ कारण हो सकता है।

मेनोपॉज़ में इन समस्याओं से बचने के उपाय क्या हैं?

अगर आप चाहती हैं कि इन परेशानियों का सामना न करना पड़े, तो दिनचर्या में कुछ असरदार बदलाव करने होंगे। एक अच्छी जीवनशैली अपनाकर आप कई बीमारियों से आसानी से बच सकती हैं:

  • नींद का रूटीन: रात को एक ही समय पर सोने की आदत डालें। सात घंटे की नींद बहुत ज़रूरी है।
  • कैफीन कम करें: ज़्यादा चाय-कॉफी पीने से बचें, खासकर शाम के समय इसे बिल्कुल बंद कर दें।
  • नियमित व्यायाम: रोज़ सुबह आधा घंटा हल्की सैर या योगा ज़रूर करें, इससे वज़न कंट्रोल में रहता है।
  • मी-टाइम: दिन भर की भागदौड़ से कुछ समय अपने लिए निकालें और मन को बिल्कुल शांत रखें।

आयुर्वेदिक और आधुनिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
नज़रिया मेनोपॉज़ के लक्षणों का मूल्यांकन कर वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, आहार-विहार और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार दवाइयाँ, हार्मोन थेरेपी (उपयुक्त मामलों में) और अन्य चिकित्सकीय उपाय अपनाए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, योग, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की निगरानी में दी जाती हैं और उनके लाभ व संभावित दुष्प्रभावों का आकलन किया जाता है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए।
जीवनशैली नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, अच्छी नींद और तनाव प्रबंधन की सलाह दी जाती है। आहार-विहार, योग और स्वस्थ दिनचर्या को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
दीर्घकालिक लक्ष्य लक्षणों को नियंत्रित कर जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखना। समग्र स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल देना।

तुरंत डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

मेनोपॉज़ के दौरान नींद कम आना, वज़न बढ़ना या मूड खराब रहना आम बात है। लेकिन हमें अंदाज़ा होना चाहिए कि कब स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और तुरंत नज़दीकी डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • अचानक ब्लीडिंग: पीरियड्स बंद हुए एक साल से ज़्यादा बीत चुका हो और अचानक फिर से खून आने लगे।
  • सीने में दर्द: छाती के बीचों-बीच तेज़ दर्द लगे और वह दर्द बाएँ हाथ तक जाने लगे।
  • गंभीर तनाव: उदासी इतनी बढ़ जाए कि आप कमरे में खुद को बंद कर लें और बस रोती रहें।
  • स्तन में गाँठ: स्तनों में कोई नई गाँठ या तेज़ दर्द महसूस हो, तो तुरंत अपनी जाँच करवाएँ।

निष्कर्ष

मेनोपॉज़ महिला के जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण और प्राकृतिक हिस्सा है। यह बताता है कि शरीर नए चरण में प्रवेश कर रहा है और अब सेहत का ज़्यादा ध्यान रखना है। वज़न बढ़ना, नींद उड़ना और मूड खराब होना किसी एक कारण से नहीं होता। हॉर्मोन्स का उतार-चढ़ाव, बढ़ती उम्र, तनाव और बदलती जीवनशैली इसकी बड़ी वजह हैं। अपनी सेहत के प्रति हमेशा जागरूक रहें। शरीर की आवाज़ को सुनें। अच्छी नींद और खानपान से सब ठीक होगा। लेकिन परेशानी लगातार तंग करे, तो डॉक्टर से सलाह लेने में कोई संकोच न करें। खुद को तनावमुक्त और खुश रखना ही आपकी सबसे बड़ी और असरदार दवा है।

References:

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC8373626/

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2667368126000148

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9258798/

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/menopause

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, सही डाइट और रोज़ाना व्यायाम से आप इसे कंट्रोल कर सकती हैं और फिट रह सकती हैं।

हाँ, शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन कम होने से मूड स्विंग्स होते हैं, जिससे रोने का मन करता है।

सोने से पहले पैरों की तेल से मालिश करें और कमरे में पूरी तरह से अंधेरा रखें।

 हाँ, हॉर्मोनल असंतुलन की वजह से बालों की जड़ें कमज़ोर हो जाती हैं और बाल झड़ने लगते हैं।

ठंडा पानी पिएँ, हमेशा सूती कपड़े पहनें और किसी खुली हवादार जगह पर जाकर बैठ जाएँ।

हाँ, दोनों बीमारियों में वज़न बढ़ना और बहुत ज़्यादा थकान रहने जैसे समान लक्षण दिखाई देते हैं।

शरीर में कैल्शियम कम होने से ऐसा होता है, इसलिए धूप लें और दूध का सेवन बढ़ाएँ।

हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग और नियमित योगासन करना शरीर के लिए सबसे ज़्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होता है।

हाँ, ज़्यादा चीनी खाने से शरीर में चिड़चिड़ापन और वज़न दोनों बहुत तेज़ी से बढ़ने लगते हैं।

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ जैसे शतावरी, सफेद तिल और अलसी के बीज का नियमित सेवन काफी फायदेमंद होता है।

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