आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमारे काम को बहुत आसान बना दिया है। हमें जो चाहिए होता है, हमें घर बैठे-बैठे ही मिल जाता है। चाहे वो राशन हो कपडे हो या अन्य काम की चीज़े सब कुछ अब घर बैठे ही मिल जाती हैं। अब तो पढ़ाई भी घर से होने लगी है और ऑफिस के काम भी अब घर से होने लगे हैं। इसके मुख्य फायदे यह हैं कि इससे समय की बचत होती है और यह आजकल की व्यस्त दिनचर्या के लिए उपयुक्त है। जब पहले इसका परिचय हुआ था तो इसका उद्देश्य तेल की बचत करना और ट्रैफिक को कम करना था पर दूसरे दौर में इसका उद्देश्य महामारी के कारण था जब लोग अपने घर से निकल नहीं पा रहे थे तो दफ्तरों का कार्य रुके नहीं इसलिए वर्क फ्रॉम होम शुरू किया गया था।
वर्क फ्रॉम होम ने काम करने के तरीके को बहुत आसान बना दिया हैं , न ट्रैफिक की झंझट न ऑफिस जाने की चिंता। अब काम आराम से बेड पर बैठके हो जाता है पर आप जानते है लम्बे समय तक बेड पे बैठके काम करने से आपके शरीर और मांशपेशियां प्रभावित होती है।
ऐसा इसलिए क्योंकि लम्बे समय तक आराम करने वाली जगह पे काम करने से शरीर, मांसपेशियां और मानसिक सतर्कता प्रभावित होती है, शुरू में आपको बेड आरामदायक लग सकता है पर लम्बे समय तक काम करने से आपकी मांसपेशियों पे प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आपको और थकान महसूस हो सकती है।
बेड पर बैठकर काम करने से शरीर इतना क्यों थक जाता है?
बेड पर बैठके काम करना बहुत आरामदायक हैं, लेकिन अगर आपने ध्यान दिया होगा तो आपको महसूस हुआ होगा की लम्बे समय तक बेड पे बैठकर काम करने से शरीर में थकान महसूस होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा बेड आराम करने के लिए बना है न कि काम करने के लिए,जब आप बेड पे लैपटॉप खोल के बैठते हैं तो हमारे शरीर को वो सपोर्ट नहीं मिलता जो उसे मिलना चाहिए इसी वजह से हमे शारीरिक और मानसिक तनाव महसूस होता है। इसलिए हम बेड पर बैठकर काम करते हुए थकान महसूस करते हैं। आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है:
खराब पोस्चर के कारण:
जब हम बेड पे बैठके काम करते हैं तो हमारा पोस्चर बिगड़ जाता हैं , क्योंकि बेड पे बैठते समय पीठ सीधी रखना मुश्किल होता हैं और जब हम काम करते हैं तो झुक कर काम करते हैं या फिर तकिये का सहारा लेते हैं जिससे हमारी रीढ़ की हड्डी पर प्रभाव पढता है।
जिस वजह से हमारी मांसपेशियों को हमे स्थिर रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती हैं, जिससे हमारे शरीर और मस्तिष्क में अधिक तनाव और थकान बढ़ती हैं।
दिमाग और शरीर का सम्बन्ध:
हमारा दिमाग बिस्तर को आराम करने की जगह समझता हैं, जब हम आराम करने की जगह पर काम करते हैं तो इससे हमारा दिमाग भ्रमित होता हैं। उसे समझ नहीं आता की आराम करना हैं ये काम इसे तनाव होता हैं और हम थकान महसूस करते हैं और हमारे शरीर में सुस्ती आ जाती हैं।
शरीर में कोई गतिविधि न होना
जब हम बिस्तर पे बैठके काम करते हैं तो हमारा शरीर ज्यादा काम नहीं कर पाता, जितना वो ऑफिस में करता हैं; जैसे पानी भरने जाना या किसी सहकर्मी से बात करने जाना इससे हमारे शरीर में सतर्कता रहती हैं, पर जब हम बिस्तर पे काम करते हैं तो हमारा शरीर लम्बे समय तक एक ही स्थिति में रहता हैं जिससे शरीर में सुस्ती और थकान बढ़ जाती है।
स्क्रीन पर काम करने से आँखों को तनाव
जब हम बेड पे बैठके काम करते हैं तब हमारा लैपटॉप या मोबाइल एक सही लेवल पे नहीं रह पता जिससे हमारी गर्दन झुकी रहती हैं और स्क्रीन पे लगातार काम करने से आँखों और मस्तिष्क में तनाव होता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद के अनुसार एक उचित दिनचर्या में हर चीज़ का संतुलन होना आवश्यक हैं जैसे शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और उचित खान पान आदि। वर्क फ्रॉम होम में बेड पे बैठके काम करने से जो हमारे शरीर में थकान होती हैं वो स्वाभाविक हैं। क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार हमारा बेड आराम और सोने के लिए बना हैं न की काम करने के लिए और जब हम उस जगह पे बैठके काम करते हैं तो यह हमारे दोष, पाचन और मानसिक ऊर्जा को प्रभावित करता है।
ऐसा इसलिए होता हैं क्योकि हम एक ही जगह पे स्थिर हो कर बैठते हैं और काम करते हैं जिससे हमारे शरीर में थकान और सुस्ती आना स्वाभाविक हैं। जब हम एक ही जगह पे स्थिर हो कर बैठते हैं और कोई भी गतिविधि नहीं करते तो इससे हमारा वात और कफ दोष बढ़ता हैं फलस्वरूप हमारे मस्तिष्क में थकान और शरीर में सुस्ती आती हैं।
इसे दूर करने के लिए हमे बीच-बीच में ब्रेक लेना चाहिए और पानी पीते रहना चाहिए, स्ट्रेचिंग और थोड़ा टहलना भी चाहिए ,इससे मस्तिष्क और शरीर सक्रिय रहता हैं और थकान कम होती हैं।
थकान को दूर करने के उपाय
वर्क फ्रॉम होम में बेड पे बैठ कर काम करने से थकान होना स्वाभाविक है। क्योंकि बिस्तर पे बैठकर काम करने से शरीर का पोस्चर बिगड़ जाता है,जिससे हमारी मांसपेशियों को और अधिक काम करना पड़ता हैं और एक ही जगह बैठके काम करने से शरीर में वात और कफ दोष बढ़ जाता हैं जिससे शरीर थका हुआ और सुस्त महसूस करता हैं।
इस थकान को दूर भी किया जा सकता है। उसके उपाय हैं:
- काम करने की जगह को अलग: काम और आराम की जगह को अलग रखना चाहिए, क्योंकि बेड पर काम करने से हमारा पोस्चर बिगड़ जाता हैं , क्योंकि बिस्तर हमे वो सपोर्ट नहीं दे पाता हैं, जिससे हमारी मांसपेशियों पर तनाव बढ़ता है।
- बीच-बीच में अपनी जगह से उठना: एक ही जगह पर स्थिर हो कर काम नहीं करना चाहिए बीच बीच में उठते रहना चाहिए ब्रेक के लिए, पानी पिने के लिए, थोड़ा टहलने के लिए, क्योंकि एक जगह बैठे रहने से हमारा शरीर का वात दोष बढ़ता हैं जिससे भारी थकान, सुस्ती और बदन दर्द बढ़ता है।
- लैपटॉप और मोबाइल की लेंथ: लैपटॉप और मोबाइल की हाइट लेवल में होनी चाहिए जिससे गर्दन को झुकना न पड़े और आँखों पे भी ज़्यादा ज़ोर न पड़े इससे गर्दन की मांसपेशियों पर कम तनाव पड़ेगा और वो सही संतुलन से काम करेग।
- एक जगह पर स्थिर न रहें: काम करते हुए बीच-बीच में ब्रेक भी लेना चाहिए, न कि एक जगह पर स्थिर रहना चाहिए। एक जगह पे स्थिर रहने से वात दोष बढ़ता हैं, जिससे रक्त संचार और पाचन पे प्रभाव पड़ता है, जिससे शरीर में (आम) बढ़ने लगता हैं, उससे भरी मात्रा में भारी थकान और सुस्ती होने लगती हैं।
निष्कर्ष
वर्क फ्रॉम होम ने काम को और आसान बना दिया हैं ये समय बचाता हैं और इससे ट्रैफिक की भी कोई झंझट नहीं हैं, इसमें कोई संशय नहीं की इसने कार्य को आसान बना दिया हैं पर इसकी वजह से शरीर और मस्तिष्क में पीड़ा और थकान भी अब स्वाभाविक हैं। बेड पर बैठके काम करने से हमारी शारीरिक गतिविधि बिलकुल न के बराबर हो जाती हैं, हमारा पोस्चर भी बिगड़ जाता हैं जिससे हमारी रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ता हैं। आयुर्वेद के अनुसार, एक ही जगह पर स्थिर रहने से हमारे शरीर में वात दोष बढ़ जाता हैं, फलस्वरूप हमारा शरीर थका हुआ और सुस्त महसूस करता हैं। इस थकान को दूर करने के उपाय हैं की हमे काम करने की और आराम करने की जगह को अलग रखना चाहिए और बीच-बीच में अपनी जगह से उठते रहना चाहिए और खान पान पर भी ध्यान देना चाहिए।
References
Work from home and employee well-being: a double-edged sword - PMC
Workplace stress: A neglected aspect of mental health wellbeing - PMC













