बहुत से लोगों को लगता है कि लिवर की बीमारी या हेपेटाइटिस सिर्फ उन्हीं को होता है जो दिन-रात शराब पीते हैं, लेकिन हेपेटाइटिस का सीधा सा मतलब लिवर में सूजन आना है जो किसी को भी हो सकता है। यह गंदा पानी पीने, दूषित खाना खाने, संक्रमित सुई से या कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट्स से भी फैल सकता है। बिना शराब छुए भी लोग इसका शिकार हो जाते हैं। इसलिए, इसके सही कारणों और बचाव के तरीकों को समझना हर इंसान के लिए बहुत ज़रूरी है ताकि टाइम पर helth की रक्षा की जा सके।
Hepatitis क्या है और यह कैसे होता है?
हेपेटाइटिस का मतलब है लिवर में सूजन आना। यह हमारे शरीर का एक बहुत ही ज़रूरी अंग है जो खाना पचाने और शरीर से गंदगी बाहर निकालने का काम करता है। जब लिवर में किसी वजह से संक्रमण या खराबी आ जाती है, तो उसे हेपेटाइटिस कहते हैं।यह परेशानी मुख्य रूप से पाँच तरह के वायरस A, B, C, D, E की वजह से होती है। हेपेटाइटिस A और E आमतौर पर गंदा पानी पीने या गंदा खाना खाने से शरीर में फैलते हैं। वहीं, हेपेटाइटिस B और C संक्रमित ब्लड के संपर्क में आने से या एक ही सुई का दोबारा इस्तेमाल करने या शारीरिक सम्बन्ध के के माध्यम से फैलता हैं। इसके अलावा, बहुत ज़्यादा शराब पीने, कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट्स या शरीर के इम्यून सिस्टम में खराबी होने से भी लिवर में सूजन आ सकती है।
एक्सपर्ट्स की राय है ?
एक्सपर्ट्स के अनुसार हेपेटाइटिस लिवर की सूजन है, जिसे केवल शराब से जोड़ना गलत है। डॉक्टरों का कहना है कि यह मुख्य रूप से पाँच वायरस के संक्रमण से होता है। गंदा पानी, खराब खानपान, संक्रमित सुई और असुरक्षित शारीरिक संबंध के कारण होता है। इसके अलावा खराब जीवनशैली, मोटापा और डाइबिटीज़ से होने वाला फैटी लिवर भी इसका एक मुख्य कारण बन चुका है। इसलिए विशेषज्ञ समय पर टीकाकरण, सुरक्षित खान-पान और नियमित रक्त जाँच की सलाह देते हैं।
Hepatitis सिर्फ शराब से नहीं होता: 7 ज़रूरी बातें क्या हैं?
- वायरल संक्रमण: हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई जैसे वायरस इसके सबसे मुख्य कारण हैं, जो लिवर कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुँचाते हैं।
- दूषित पानी और भोजन: हेपेटाइटिस ए और ई वायरस मुख्य रूप से गंदे पानी, खराब खान-पान और संक्रमित भोजन के सेवन से शरीर में फैलते हैं।
- संक्रमित रक्त और सुई: हेपेटाइटिस बी और सी दूषित खून चढ़ाने, संक्रमित सुई के दोबारा इस्तेमाल से किसी को भी हो सकते हैं।
- असुरक्षित शारीरिक संबंध: हेपेटाइटिस बी का वायरस संक्रमित साथी के साथ असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने के कारण भी तेज़ी से एक से दूसरे में फैलता है।
- नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर: जो लोग बिल्कुल शराब नहीं पीते, उन्हें मोटापा, डाइबिटीज़ और खराब जीवनशैली के कारण होने वाले फैटी लिवर से भी हेपेटाइटिस हो सकता है।
- ऑटोइम्यून समस्या: कभी-कभी शरीर की इम्यूनिटी खुद ही लिवर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला कर देती है, जिससे सूजन आती है।
- दवाओं के साइडइफेक्ट्स: कुछ विशेष एलोपैथिक दवाओं, सप्लीमेंट्स, रसायनों या ज़हरीले तत्वों के अत्यधिक और गलत इस्तेमाल से लिवर संक्रमित हो सकता है।
आयुर्वेदिक दृश्टिकोण क्या है
आयुर्वेद के अनुसार हेपेटाइटिस केवल शराब से नहीं, बल्कि अत्यधिक पित्त बढ़ाने वाले आहार, गलत खाद्य संयोजनों और मानसिक तनाव से होता है, जो लिवर को दूषित करते हैं। इसके उपचार और लिवर की रक्षा के लिए पाचन की कमज़ोरी को दूर करने के साथ-साथ भूमि आंवला कुटकी, कालमेघ और पुनर्नवा जैसी जड़ी-बूटियों तथा मृदु विरेचन चिकित्सा का उपयोग किया जाता है।
फैटी लिवर से कितने प्रतिशत लोग परेशान हैं?
भारत में लगभग 30 से 40% लोग किसी न किसी लिवर की समस्या से परेशान हैं। इनमें सबसे ज़्यादा मामले फैटी लिवर के सामने आ रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह हमारी खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड और शारीरिक मेहनत कम करना है। ज़रूरी बात यह है कि लिवर की बीमारी शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखाती, इसलिए ज़्यादातर लोगों को इसका पता ही नहीं चलता। इससे बचने के लिए घर का खाना, ज़्यादा पानी पीना और थोड़ी एक्सरसाइज़ करना बहुत ज़रूरी है।
फैटी लिवर से बचने के आसान उपाय:
- वज़न कंट्रोल मोटापा इसकी बड़ी वजह है, इसलिए अपना वज़न न बढ़ने दें।
- सही खानपान जंक फूड, चीनी और तली-भुनी चीज़ों से बचें। डाइट में हरी सब्ज़ियाँ और फल लें।
- रोज़ एक्सरसाइज़ दिन में कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या योग करें।
- शराब से दूरी बनाएँ। शराब लिवर को डैमेज करती है, इसलिए इससे पूरी तरह बचें।
- पर्याप्त पानी दिनभर में खूब पानी पिएं ताकि शरीर की सारी गंदगी बाहर निकल सके।
क्या Hepatitis पूरी तरह ठीक हो सकता है?
हेपेटाइटिस पूरी तरह ठीक हो सकता है बस इसे सही समय पर पहचाना जाए। आयुर्वेद में हेपेटाइटिस को कामला रोग कहा गया है, जो मुख्य रूप से पित्त दोष के बिगड़ने से होता है। हेपेटाइटिस A, E और तीव्र हेपेटाइटिस B के मामलों में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ जैसे भूमि आमलकी, कटुकी, पुनर्नवा और कालमेघ लिवर की सूजन को कम करके कोशिकाओं को पूरी तरह स्वस्थ बना देती हैं। क्रोनिक या पुराने मामलों में आयुर्वेद विरेचन जैसी पंचकर्म चिकित्सा द्वारा शरीर से खतरनाक टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है जिससे लिवर को दोबारा नया जीवन मिलता है। हालांकि, गंभीर क्रोनिक हेपेटाइटिस B या C में पूरी तरह वायरस मुक्त होने में लंबा समय लग सकता है, लेकिन दवाओं से लिवर डैमेज को रोका जा सकता है।
Hepatitis के शुरुआती लक्षण कौन से हो सकते हैं?
- लगातार थकान और शरीर में कमज़ोरी महसूस होना
- भूख कम लगना और वज़न घटना
- मतली या उल्टी आना
- हल्का बुखार और बदन दर्द
- पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन
डॉक्टर से कब मिलना चाहिए ?
- त्वचा और आँखों में पीलापन: यदि शरीर या आँखों में पीलिया के लक्षण दिखाई दें।लगातार
- उल्टी और मतली: जब कुछ भी खाया-पिया न पचे और कमज़ोरी बढ़े।
- पेट में तेज़ दर्द: पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द होना।
- गहरे रंग का पेशाब: चाय या गहरे पीले रंग का पेशाब आने पर।
- अत्यधिक थकान: बिना वजह बहुत ज़्यादा कमज़ोरी और हल्का बुखार लगातार रहना।
निष्कर्ष:
हेपेटाइटिस या लिवर की बीमारी सिर्फ शराब से होती है, यह एक बड़ी भूल है। खराब लाइफस्टाइल, दूषित पानी, संक्रमित सुई और जंक फूड भी इसके मुख्य कारण हैं। आज के समय में 30-40% लोग फैटी लिवर से परेशान हैं, जो एक बड़ी चेतावनी है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर पहचान, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।भारत में कितने प्रतिशत लोग लिवर की बीमारी से परेशान हैं?
References
https://www.who.int/health-topics/hepatitis












