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काम खत्म होने के बाद भी दिमाग ‘office mode’ में क्यों रहता है?

Information By Dr. VD Aggarwal     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 26 Aug, 2026
  • category-iconUpdated on 26 Aug, 2026
  • category-iconMental Health
  • blog-view-icon5007

जब हम सारे दिन अपने ऑफिस के काम में लगे रहते हैं और तरह-तरह की चीज करते रहते हैं ,तो हम काफी busy रहते हैं , हमारी busyness खत्म हो जाती है जब हमारा ऑफिस का टाइम पूरा हो जाता है और शाम को जब हम घर लौट रहे होते हैं तोह कुछ हद तक हमारा दिमाग ठीक रहता है, लेकिन जैसे ही हम घर आ जाते है अपने दैनिक कार्यो से फ्री होते है तो हमारे मन में एक अजीब सी बेचैनी होती है और दिमाग में ऑफिस की चीज़े आने लगती है जैसे की mail चेक करनी है ,डेडलाइन से पहले काम करना है , बॉस से बात करनी है, और मीटिंग कैसे करनी है वगेरा , जिसका मतलब यह होता है की हमारा दिमाग अभी भी उसी zone है,ध्यान दे यह समस्या कही आपको mentally और physically बीमार भी कर सकती है |

ऑफिस से बाहर आने के बावजूद भी दिमाग काम क्यों करता रहता है ?

दिमाग किसी मशीन की तरह नहीं है जिसे ऑफिस से निकलते ही बंद किया जा सके ,पूरे दिन के काम के दौरान हमारा ध्यान,डेड लाइन ,मैसेज, decision और Responsibility पर लगा रहता है काम खत्म होने के बाद भी brain को इन चीजों से मानसिक रूप में अलग होने में कुछ समय लगता है अगर दिनभर का कोई task का अधूरा रह गया, तो दिमाग उसे बार-बार याद कर सकता है,इसे unfinished task का असर समझा जा सकता है इसकी वजह यह है कि रात को आराम करते समय अचानक याद आता है अर्थात अधूरा काम आपके दिमाग को व्यस्त रखता है | 

Office Mode से बाहर आने के लिए क्या करें ?

इसके लिए किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है,कुछ छोटी habits मददगार साबित हो सकती है

काम खत्म करने की Routine बनाएं

ऑफिस छोड़ने से पहले अगले दिन के जरूरी काम लिख ले ,इससे बार-बार उन्हें याद रखने की जरूरत कम हो सकती है |

घर पहुंचने के बाद खुद को टाइम दे

ऑफिस से घर आते ही तुरंत काम या फोन में न लगे कुछ मिनट शांत बैठे हल्की walk करें ,परिवार के साथ चाय पीना ,दिमाग को रूटीन में बदलने का संकेत दे सकता है |

रात को वर्क रिलेटेड स्क्रीन टाइम कम करें

सोने से ठीक पहले ईमेल से या pending task चेक करने की आदत दिमाग को फिर से अलर्ट मोड में डाल सकती है रात में कुछ समय ऐसा रखें जो पूरी तरह personal हो

थोड़ी physical activities करे 

सारा दिन की sedentary lifestyle में थोड़ा सा खुद को शारीरक गतिविधि में ढालने की कोशिश करे जिससे आपको थोड़ा एक्टिव फील हो और आपका मैं काम से हटे |

कब ध्यान देना जरूरी है ?

कभी कभार ऑफिस के बारे में सोचना सामान्य है ,लेकिन अगर आप लगभग हर दिन काम के बाद भी दिमाग शांत नहीं कर पा रहे हैं आपकी नींद प्रभावित होने लगी है, लगातार चिड़चिड़ापन रहता है या छुट्टी के दिन भी काम का तनाव बना रहता है तो इसे नजर अंदाज बिल्कुल ना करें ऐसी स्थिति में अपने workload, working hours और work life boundaries पर ध्यान देना बहुत जरूरी है ,जरूरत पड़ने पर किसी मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से भी बात करना भी मददगार हो सकता है,

ध्यान दे,आप जो काम करते हैं उसे पर आपकी जगह कोई और काम कर सकता है लेकिन अगर आप अपनी ही मानसिक स्थिति से परेशान हो बैठे तो क्या होगा,इसलिए अपनी मानसिक तथा शारीरिक स्थिति को ठीक रखने पर भी ध्यान दें काम करना ही जीवन का एकमात्र सत्य नहीं है,खुद को स्वस्थ रखना भी बहुत जरूरी होता है|

किन बीमारियों के आशंका हो सकती है ?

अगर आपका काम खत्म करने के बावजूद भी आपका दिमाग ऑफिस मोड़ से नहीं निकलता है और आप इस पर ध्यान नहीं देते हैं तो आपको कुछ इस प्रकार की बीमारियों से गुजरना पड़ सकता है ,या ऐसे कुछ symptoms आपको हो सकते हैं जैसे

तनाव कम करने के लिये आयुर्वेदिक उपाय

तनाव को दवा से दबाने के बजाय आयुर्वेद उसे भीतर से संतुलित करता है। यहां उपचार केवल मन को शांत करने के लिये नहीं बल्कि पूरे तंत्र को स्थिर रखने के लिये किया जाता है ताकि आप तनाव को सहन भी कर सकें और उससे बाहर भी आ सकें।

नस्य

नस्य का मतलब नाक में औषधीय तेल डालना होता है। यह मस्तिष्क, नसों और मन को सीधा प्रभाव देता है। तिल के तेल या ब्राह्मी घृत का हल्का नस्य मानसिक तनाव को कम करता है। इसे सुबह के समय करना अधिक लाभकारी माना गया है।

शिरोधारा

शिरोधारा वह आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें गर्म औषधीय तेल को धीरे-धीरे माथे पर डाला जाता है। यह मन की गति को धीमा करता है और विचारों की अनियंत्रित उथल-पुथल को शांत करता है। कई लोग बताते हैं कि शिरोधारा के बाद उनकी एंग्जायटी काफी कम हो जाती है।

अभ्यंग

अभ्यंग का प्रभाव शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर होता है। जब आप गर्म तिल के तेल से पूरे शरीर की मालिश करते हैं तो वात शांत होता है। यही शांत वात मन को भी स्थिर बनाता है।

पंचकर्म

अगर तनाव पुराना हो और शरीर में आम जमा हो तो वैद्य पंचकर्म की सलाह देते हैं। इसमें वमन, विरेचन, बस्ती आदि प्रक्रियाएँ शामिल हो सकती हैं। यह शरीर में जमा विषाक्तता को कम करती हैं जिससे मन भी हल्का होने लगता है।

आखिर में 

ऑफिस से निकलना और mentally ऑफिस से निकलना दोनों में फर्क है और दोनों अलग-अलग चीज हैं लैपटॉप बंद करने से काम खत्म हो जाता है, लेकिन दिमाग में काम चलता ही रहता है,अधूरे टास्क, नोटिफिकेशंस, वर्क का स्ट्रेस और घर से काम करने की आदत इस office mode को लंबे समय तक बनाए रख सकती है इसलिए दिन खत्म करते समय सिर्फ यह मत सोचिए कि मेरा काम पूरा हुआ या नहीं ,कभी-कभी यह भी जरूरी है कि आप अपने दिमाग को बताएं कि आज के लिए इतना काफी है बाकी कल |

References

Occupational Stress in Central Government Employees Practicing Yoga and Employees Who do not Practice Yoga

WORKPLACE STRESS: A collective challenge

Mental health at work

Stress and Job Satisfaction level among Government and Private Sector Bank Employees

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

दिमाग कोई मशीन नहीं है कि हम उसे तुरंत बंद कर दें। पूरे दिन काम के दौरान हम डेडलाइन, मेसेज, जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त रहते हैं कि शाम को घर आने पर भी दिमाग आराम नहीं करता। इसके अलावा अधूरा काम या टास्क अगर रह जाता है तो उसे याद करते रहना स्वाभाविक है। इसे हम unfinished task effect कह सकते हैं, जो दिमाग को व्यस्त रखता है।

सीधे-सीधे तो नहीं, पर हम दिमाग को धीरे-धीरे ऑफिस के तनाव से बाहर निकाल सकते हैं। इसके लिए छोटे-छोटे बदलाव और दिनचर्या में सुधार करना जरूरी होता है, जैसे कि अगले दिन के टास्क लिख लेना, घर आकर ध्यान लगाना, स्क्रीन टाइम कम करना आदि।

ऑफिस छोड़ने से पहले अगले दिन के जरूरी काम लिख लें ताकि बार-बार याद ना करना पड़े।घर आने पर तुरंत फोन या काम में न लगें, थोड़ी देर कूल डाउन करें, हल्की वॉक या परिवार के साथ चाय पीना मददगार होगा।सोने से पहले ईमेल या वर्क टास्क देखकर दिमाग फिर से चौकस हो जाता है, इसलिए यह आदत छोड़ें। पूरे दिन की बैठे रहने वाली दिनचर्या से खुद को थोड़ा हिलाएं-डुलाएं, इससे दिमाग को भी राहत मिलती है।

अगर यह स्थिति रोज होती है, आपकी नींद खराब हो रही है, आप ज्यादा चिड़चिड़े हो रहे हैं या छुट्टियों में भी तनाव बना रहता है तो इसका मतलब है कि आपको अपनी वर्क-लाइफ बैलेंस पर ध्यान देना होगा। ज़रूरत पड़ने पर किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करना भी लाभदायक हो सकता है।

अगर दिमाग लगातार तनाव में बना रहता है तो इससे आपको निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं:डिप्रेशन (अवसाद),बीपी नियंत्रण की समस्या,तनाव और चिंता (Stress and Anxiety)आंखों में सूखापन,धीमा मेटाबोलिज्म,डायबिटीज,उच्च कोर्टिसोल स्तर,पाचन संबंधी समस्याएं

नस्य नाक में तिल का तेल या ब्राह्मी घृत डालना, जो मानसिक तनाव को कम करता है।शिरोधारा माथे पर गर्म औषधीय तेल धीरे-धीरे डालना, जिससे मन की अनियंत्रित गतिविधि शांत होती है।अभ्यंग पूरे शरीर की मालिश करना, जो वात को शांत कर मानसिक स्थिरता देता है।पंचकर्म जब तनाव पुराना हो और शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा हो, तब यह प्रक्रिया बहुत कारगर होती है।

अगर आप दिन भर की थकान खत्म होने के बाद भी बेचैन, तनावग्रस्त या मानसिक रूप से परेशान महसूस करते हैं, नींद में खलल आता है, या चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, तो यह संकेत हैं कि आपको अपने दिमाग को आराम देने की जरूरत है। ऐसे समय में अपने काम और आराम की सीमा बनाना ज़रूरी है।

सबसे जरूरी है खुद से कहना कि "आज के लिए इतना ही काफी है, बाकी कल देखेंगे।" लैपटॉप बंद करने से काम नहीं खत्म होता, दिमाग का ऑफिस मोड बंद करना ज़रूरी है। अधूरे टास्क लिख लें, समय पर ब्रेक लें, और दिन के अंत में खुद को मानसिक शांति दें। इससे आपकी सेहत, मानसिक और शारीरिक दोनों, बेहतर बनेगी।

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