जब हम सारे दिन अपने ऑफिस के काम में लगे रहते हैं और तरह-तरह की चीज करते रहते हैं ,तो हम काफी व्यस्त रहते हैं , हमारी कार्यरतता खत्म हो जाती है जब हमारा ऑफिस का टाइम पूरा हो जाता है और शाम को जब हम घर लौट रहे होते हैं तोह कुछ हद तक हमारा दिमाग ठीक रहता है, लेकिन जैसे ही हम घर आ जाते है अपने दैनिक कार्यो से फ्री होते है तो हमारे मन में एक अजीब सी बेचैनी होती है और दिमाग में ऑफिस की चीज़े आने लगती है जैसे की mail चेक करनी है ,डेडलाइन से पहले काम करना है , बॉस से बात करनी है, और मीटिंग कैसे करनी है वगेरा , जिसका मतलब यह होता है की हमारा दिमाग अभी भी उसी zone है,ध्यान दे यह समस्या कही आपको मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार भी कर सकती है |
ऑफिस से बाहर आने के बावजूद भी दिमाग काम क्यों करता रहता है
दिमाग किसी मशीन की तरह नहीं है जिसे ऑफिस से निकलते ही बंद किया जा सके ,पूरे दिन के काम के दौरान हमारा ध्यान,डेड लाइन ,मैसेज,फ़ैसला और ज़िम्मेदारी पर लगा रहता है काम खत्म होने के बाद भी brain को इन चीजों से मानसिक रूप में अलग होने में कुछ समय लगता है अगर दिनभर का कोई task का अधूरा रह गया, तो दिमाग उसे बार-बार याद कर सकता है,इसे अधूरे काम का असर समझा जा सकता है इसकी वजह यह है कि रात को आराम करते समय अचानक याद आता है अर्थात अधूरा काम आपके दिमाग को व्यस्त रखता है |
Office Mode से बाहर आने के लिए क्या करें
इसके लिए किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है,कुछ छोटी habits मददगार साबित हो सकती है
काम खत्म करने की Routine बनाएं
ऑफिस छोड़ने से पहले अगले दिन के जरूरी काम लिख ले ,इससे बार-बार उन्हें याद रखने की जरूरत कम हो सकती है |
घर पहुंचने के बाद खुद को टाइम दे
ऑफिस से घर आते ही तुरंत काम या फोन में न लगे कुछ मिनट शांत बैठे हल्की walk करें ,परिवार के साथ चाय पीना ,दिमाग को रूटीन में बदलने का संकेत दे सकता है |
रात को वर्क रिलेटेड स्क्रीन टाइम कम करें
सोने से ठीक पहले ईमेल से या लंबित कार्य चेक करने की आदत दिमाग को फिर से अलर्ट मोड में डाल सकती है रात में कुछ समय ऐसा रखें जो पूरी तरह निजी हो
थोड़ी शारीरिक गतिविधियाँ करे
सारा दिन की आसीन जीवन शैली में थोड़ा सा खुद को शारीरक गतिविधि में ढालने की कोशिश करे जिससे आपको थोड़ा एक्टिव फील हो और आपका मैं काम से हटे |
कब ध्यान देना जरूरी है ?
कभी कभार ऑफिस के बारे में सोचना सामान्य है ,लेकिन अगर आप लगभग हर दिन काम के बाद भी दिमाग शांत नहीं कर पा रहे हैं आपकी नींद प्रभावित होने लगी है, लगातार चिड़चिड़ापन रहता है या छुट्टी के दिन भी काम का तनाव बना रहता है तो इसे नजर अंदाज बिल्कुल ना करें ऐसी स्थिति में अपने काम का बोझ, काम के घंटे और काम और निजी ज़िंदगी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है ,जरूरत पड़ने पर किसी मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से भी बात करना भी मददगार हो सकता है,
ध्यान दे,आप जो काम करते हैं उसे पर आपकी जगह कोई और काम कर सकता है लेकिन अगर आप अपनी ही मानसिक स्थिति से परेशान हो बैठे तो क्या होगा,इसलिए अपनी मानसिक तथा शारीरिक स्थिति को ठीक रखने पर भी ध्यान दें काम करना ही जीवन का एकमात्र सत्य नहीं है,खुद को स्वस्थ रखना भी बहुत जरूरी होता है|
किन बीमारियों के आशंका हो सकती है ?
अगर आपका काम खत्म करने के बावजूद भी आपका दिमाग ऑफिस मोड़ से नहीं निकलता है और आप इस पर ध्यान नहीं देते हैं तो आपको कुछ इस प्रकार की बीमारियों से गुजरना पड़ सकता है ,या ऐसे कुछ symptoms आपको हो सकते हैं जैसे
- अवसाद (depression)
- BP कण्ट्रोल में दिक्कत
- तनाव और चिंता
- Dry eyes
- मेटाबॉलिज़्म धीमा होना
- डायबिटीज
- High Cortisol
- पाचन संबंधी समस्याएं
तनाव कम करने के लिये आयुर्वेदिक उपाय
तनाव को दवा से दबाने के बजाय आयुर्वेद उसे भीतर से संतुलित करता है। यहां उपचार केवल मन को शांत करने के लिये नहीं बल्कि पूरे तंत्र को स्थिर रखने के लिये किया जाता है ताकि आप तनाव को सहन भी कर सकें और उससे बाहर भी आ सकें।
नस्य
नस्य का मतलब नाक में औषधीय तेल डालना होता है। यह मस्तिष्क, नसों और मन को सीधा प्रभाव देता है। तिल के तेल या ब्राह्मी घृत का हल्का नस्य मानसिक तनाव को कम करता है। इसे सुबह के समय करना अधिक लाभकारी माना गया है।
शिरोधारा
शिरोधारा वह आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें गर्म औषधीय तेल को धीरे-धीरे माथे पर डाला जाता है। यह मन की गति को धीमा करता है और विचारों की अनियंत्रित उथल-पुथल को शांत करता है। कई लोग बताते हैं कि शिरोधारा के बाद उनकी एंग्जायटी काफी कम हो जाती है।
अभ्यंग
अभ्यंग का प्रभाव शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर होता है। जब आप गर्म तिल के तेल से पूरे शरीर की मालिश करते हैं तो वात शांत होता है। यही शांत वात मन को भी स्थिर बनाता है।
पंचकर्म
अगर तनाव पुराना हो और शरीर में आम जमा हो तो वैद्य पंचकर्म की सलाह देते हैं। इसमें वमन, विरेचन, बस्ती आदि प्रक्रियाएँ शामिल हो सकती हैं। यह शरीर में जमा विषाक्तता को कम करती है, जिससे मन भी हल्का होने लगता है।
आखिर में
ऑफिस से निकलना और मानसिक ऑफिस से निकलना दोनों में फर्क है और दोनों अलग-अलग चीज हैं लैपटॉप बंद करने से काम खत्म हो जाता है, लेकिन दिमाग में काम चलता ही रहता है,अधूरे टास्क, नोटिफिकेशंस, वर्क का स्ट्रेस और घर से काम करने की आदत इस office mode को लंबे समय तक बनाए रख सकती है इसलिए दिन खत्म करते समय सिर्फ यह मत सोचिए कि मेरा काम पूरा हुआ या नहीं ,कभी-कभी यह भी जरूरी है कि आप अपने दिमाग को बताएं कि आज के लिए इतना काफी है बाकी कल |
References
WORKPLACE STRESS: A collective challenge
Stress and Job Satisfaction level among Government and Private Sector Bank Employees







