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Chronic constipation में सिर्फ चूर्ण लेना काफी क्यों नहीं होता?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर जब किसी का पेट साफ नहीं होता, तो घर में लोग कहते हैं, "रात को गर्म पानी के साथ एक चम्मच चूर्ण फांक लेना, सुबह सब ठीक हो जाएगा।" लेकिन क्या हो जब आपको हफ्ते में दो-तीन बार वह चूर्ण लेना पड़े? क्या होगा जब महीनों तक बिना किसी चूर्ण या गोली के आपका पेट साफ ही न हो?

अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है, तो यह कोई छोटी-मोटी दिक्कत नहीं है। जब कब्ज़ बहुत पुरानी हो जाती है, तो शरीर आपको बता रहा होता है कि अंदर कुछ गड़बड़ है। बहुत से लोग इस इशारे को नहीं समझते और बार-बार चूर्ण पर निर्भर हो जाते हैं।

कब्ज़ का असली इलाज सिर्फ पेट खाली करना नहीं है, बल्कि अपनी आंतों को दोबारा मज़बूत और स्वस्थ बनाना है। यही कारण है कि पुरानी कब्ज़ में सिर्फ चूर्ण खाना काफी नहीं होता। 

क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन क्या होता है और इसे कैसे पहचानें?

अगर एक-दो दिन पेट साफ न हो, तो उसे नॉर्मल कब्ज़ कहते हैं। लेकिन क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन तब होता है जब यह परेशानी आपकी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाए।

अगर आपको नीचे दी गई बातों में से कुछ भी महसूस होता है, तो आपको पुरानी कब्ज़ है:

  • हफ्ते में 3 बार से भी कम पॉटी जाना।
  • पॉटी का बहुत सख्त (कठोर) या सूखा आना।
  • पेट साफ करने के लिए बहुत ज़्यादा ज़ोर (ताकत) लगाना।
  • टॉयलेट से आने के बाद भी ऐसा लगता है कि पेट पूरा साफ नहीं हुआ है।

कब्ज़ सिर्फ टॉयलेट तक सीमित नहीं रहती। जब पेट साफ नहीं होता, तो पूरा दिन भारीपन, गैस, सिरदर्द, भूख न लगना और सुस्ती रहती हैं। आपका किसी काम में मन नहीं लगता और आप पूरा दिन चिड़चिड़े रहते हैं।

सिर्फ चूर्ण पर निर्भर रहना सही समाधान क्यों नहीं है?

अगर आपके घर की छत से पानी टपक रहा है, तो क्या सिर्फ नीचे बाल्टी रख देने से छत ठीक हो जाएगी? नहीं! आपको उस दरार को भरना होगा जहां से पानी आ रहा है।

बाजार में मिलने वाले चूर्ण या गोलियां भी उस 'बाल्टी' की तरह ही हैं। जब आप चूर्ण खाते हैं, तो वह आपकी आंतों में एक झटका पैदा करता है या बहुत सारा पानी खींचकर मल को पतला कर देता है। इससे अगले दिन पेट साफ हो जाता है। लेकिन चूर्ण इस बात को ठीक नहीं करता कि कब्ज़ हुई क्यों थी!

अगर आप दिन भर में सिर्फ दो गिलास पानी पीते हैं, सारा दिन कुर्सी पर बैठे रहते हैं, खाने में सिर्फ मैदा या जंक फूड खाते हैं और बहुत टेंशन लेते हैं, तो दुनिया का कोई भी चूर्ण आपकी कब्ज़ को जड़ से खत्म नहीं कर सकता।

अगर आप चूर्ण के सहारे बैठे रहेंगे, तो कुछ दिनों बाद कब्ज़ फिर लौट आएगी और धीरे-धीरे आपका शरीर उस चूर्ण का आदी हो जाएगा।

कब्ज़ के पीछे छिपे असली कारण 

कब्ज़ कोई बीमारी नहीं है, यह हमारी खराब आदतों का नतीजा है। आइए देखते हैं कि हम कहां गलती करते हैं:

  1. भोजन में फाइबर (रेशे) की कमी: आजकल हम पिज्जा, बर्गर, सफेद ब्रेड और मैदा बहुत खाते हैं। इन चीज़ो में फाइबर (रेशा) बिल्कुल नहीं होता। फाइबर हमारी आंतों के लिए झाड़ू का काम करता है। जब हम सलाद, फल, हरी सब्जियां और छिलके वाली दालें नहीं खाते, तो खाना आंतों में चिपक जाता है और आगे नहीं खिसकता, जिससे कब्ज़ होती है।
  2. पानी कम पीना: आपकी आंतों को पॉटी को नरम बनाने और आगे धकेलने के लिए बहुत सारे पानी की ज़रूरत होती है। अगर आप पानी कम पिएंगे, तो शरीर मल (पॉटी) में से सारा पानी सोख लेगा। इससे पॉटी सूखकर एकदम पत्थर जैसी सख्त हो जाएगी और बाहर निकलने में बहुत दर्द होगा।
  3. हिलना-डुलना बंद कर देना (शारीरिक गतिविधि की कमी): अगर आपका काम पूरा दिन कंप्यूटर के सामने बैठे रहने का है, तो आपकी आंतें भी सुस्त हो जाती हैं। जब हम पैदल चलते हैं या हल्की कसरत करते हैं, तो हमारे पेट की मांसपेशियां हिलती हैं और खाना नीचे की तरफ खिसकता है।
  4. टेंशन और नींद पूरी न होना: हमारा दिमाग और हमारा पेट एक ही तार से जुड़े हैं। जब आप बहुत ज़्यादा टेंशन लेते हैं, तो आपकी आंतें सिकुड़ जाती हैं और अपना काम ठीक से नहीं कर पाती हैं। अगर आप रात को ठीक से सो नहीं रहे हैं, तो आपका पेट सुबह कभी साफ नहीं होगा।
  5. कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट: कई बार हम खून बढ़ाने की गोलियां (आयरन), पेनकिलर (दर्द की दवा) या डिप्रेशन की दवाइयां खाते हैं, जिनसे बहुत तेज़ कब्ज़ हो जाती है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह 

कभी-कभार कब्ज़ होने पर राहत के लिए चूर्ण या लैक्सेटिव लेना सामान्य हो सकता है, लेकिन पुरानी कब्ज़ में सिर्फ चूर्ण पर निर्भर रहना नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। चूर्ण केवल आंतों को कृत्रिम रूप से उत्तेजित करके फौरी राहत देते हैं, लेकिन ये कब्ज़ के मूल कारण, जैसे डाइट में फाइबर की कमी, पानी का कम सेवन या सुस्त मेटाबॉलिज्म, को ठीक नहीं करते। लंबे समय तक लगातार चूर्ण का इस्तेमाल करने से आंतों की प्राकृतिक गतिशीलता कमज़ोर हो जाती है और शरीर इनका आदी बन जाता है। यदि आपको लगातार कब्ज़ रहती है, तो सिर्फ चूर्ण के भरोसे रहने के बजाय अपनी जीवनशैली व खानपान में बदलाव करें और सही इलाज के लिए डॉक्टर से परामर्श लें। 

बार-बार चूर्ण या गोली लेने के भारी नुकसान

अगर आप सोच रहे हैं कि "चलो कोई बात नहीं, मैं तो रोज़ रात को एक गोली या चूर्ण खा लूंगा, क्या फर्क पड़ता है?" तो आपको इसके नुकसान जानने चाहिए:

  • आंतों का काम करना बंद कर देना: जब आप रोज़ चूर्ण खाते हैं, तो आपकी आंतें आलसी हो जाती हैं। वे यह भूल जाती हैं कि उन्हें खुद भी सिकुड़कर पॉटी को बाहर धकेलना है। वे पूरी तरह से चूर्ण पर निर्भर हो जाती हैं।
  • कमज़ोरी और चक्कर आना: बहुत ज़्यादा चूर्ण खाने से शरीर का ज़रूरी पानी और मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) मल के साथ बाहर निकल जाते हैं, जिससे आपको कमज़ोरी और चक्कर आ सकते हैं।
  • बीमारी को छिपाना: हो सकता है कि कब्ज़ किसी बड़ी बीमारी (जैसे थायरॉयड या आंत की सूजन) का इशारा हो। चूर्ण खाकर आप उस अलार्म को बंद कर देते हैं और असली बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है।

आयुर्वेद पुरानी कब्ज़ को कैसे देखता है?

आयुर्वेद कहता है कि कब्ज़ शरीर में 'वात' (गैस/हवा) के बढ़ने और पेट की 'अग्नि' के कमज़ोर होने की वजह से होती है। जब हम गलत समय पर सोते हैं, रूखा-सूखा या बासी खाना खाते हैं, तो शरीर में वात बढ़ जाता है, जो आंतों को सुखा देता है। आयुर्वेद में सिर्फ पेट साफ करने की दवा नहीं दी जाती, बल्कि पेट में चिकनाई लाने (जैसे गाय का घी या अरंडी का तेल) और पाचन को दोबारा मज़बूत करने पर ज़ोर दिया जाता है।

कब्ज़ से छुटकारा पाने के आसान उपाय

अगर आप चूर्ण से पीछा छुड़ाना चाहते हैं, तो अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में ये छोटे-छोटे बदलाव करें:

  • सुबह का गर्म पानी: सुबह उठते ही बिना कुल्ला किए 2 से 3 गिलास हल्का गर्म (गुनगुना) पानी पिएं। यह आंतों को धोने का काम करता है।
  • फाइबर को बढ़ाएं: अपनी प्लेट का आधा हिस्सा कच्चे सलाद, हरी सब्जियों और ताजे फलों से भरें। सेब, पपीता और अमरूद कब्ज़ के दुश्मन हैं।
  • थोड़ा पैदल चलें: दिन में कम से कम 30-40 मिनट तेज़-तेज़ चलें। अगर सुबह पेट साफ न हो, तो टॉयलेट जाने से पहले 10 मिनट वॉक कर लें।
  • टॉयलेट को न रोकें: जब भी आपको प्रेशर महसूस हो, तो कोई भी काम छोड़कर तुरंत टॉयलेट जाएं। इसे रोकने से मल सूख जाता है।
  • देसी घी का इस्तेमाल: रात को सोने से पहले एक कप गर्म दूध में एक चम्मच शुद्ध गाय का घी डालकर पिएं। यह आंतों में चिकनाई लाता है।
  • नींद पूरी लें: रात को समय पर सोएं और 7-8 घंटे की गहरी नींद लें।

कब डॉक्टर के पास भागना ज़रूरी हो जाता है?

अगर आपकी कब्ज़ बहुत पुरानी हो गई है, तो आपको डॉक्टर को ज़रूर दिखाना चाहिए, खासकर अगर आपको ये चीज़े नज़र आएं:

इन लक्षणों को गैस या कब्ज़ समझकर नज़रअंदाज न करें, तुरंत अच्छे डॉक्टर से मिलें।

निष्कर्ष

सिर्फ रात को चूर्ण फांक कर सुबह पेट हल्का कर लेना कोई इलाज नहीं है। जब तक आप पानी ज़्यादा नहीं पिएंगे, अपनी डाइट में फाइबर नहीं लाएंगे, कुर्सी से उठकर थोड़ा चलेंगे नहीं और अपने दिमाग को शांत नहीं रखेंगे, तब तक कोई भी चूर्ण आपको हमेशा के लिए ठीक नहीं कर सकता।

याद रखिए, एक अच्छा और स्वस्थ पेट किसी दुकान से खरीदे गए चूर्ण से नहीं मिलता, बल्कि आपकी अच्छी और सादी आदतों से बनता है!

References

Constipation - StatPearls - NCBI Bookshelf 

Etiological factors of constipation in the elderly, with emphasis on functional causes 

Constipation | MedlinePlus 

Constipation: Evaluation and Management - PMC 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं। हर व्यक्ति की मल त्याग की आदत अलग हो सकती है। यदि मल आसानी से निकल रहा है, दर्द या ज़ोर नहीं लगाना पड़ता और कोई अन्य लक्षण नहीं हैं, तो रोज़ एक ही समय पर टॉयलेट न जाना हमेशा कब्ज़ नहीं माना जाता।

हाँ। लगातार ज़ोर लगाकर मल त्याग करने से बवासीर (Piles) और गुदा में छोटी दरार (Anal Fissure) होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए कब्ज़ का समय पर इलाज करना जरूरी है।

कुछ लोगों में लंबे समय तक कब्ज़ रहने से पेट फूला हुआ या सामान्य से बड़ा दिखाई दे सकता है। हालांकि लगातार पेट बढ़ा रहना किसी अन्य बीमारी का भी संकेत हो सकता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर जांच करानी चाहिए।

कुछ लोगों में दही, छाछ और अन्य प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ आंतों के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इससे पाचन बेहतर हो सकता है, लेकिन यह हर व्यक्ति में समान रूप से प्रभावी नहीं होते।

कुछ लोगों को कब्ज़ के दौरान त्वचा बेजान लगना या मुंहासों की शिकायत महसूस हो सकती है। हालांकि त्वचा संबंधी समस्याओं के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल कब्ज़ को इसका कारण नहीं माना जा सकता।

हाँ। कुछ मामलों में हाइपोथायरॉयडिज्म, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी लंबे समय तक कब्ज़ रह सकती है। यदि कब्ज़ लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर आवश्यक जांच की सलाह दे सकते हैं।

हल्की शारीरिक गतिविधि दिन के किसी भी समय फायदेमंद हो सकती है। हालांकि कई लोगों को सुबह की वॉक या नाश्ते के बाद हल्की गतिविधि से मल त्याग में आसानी महसूस होती है।

बार-बार एनीमा का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए। इसकी आदत पड़ सकती है और कुछ मामलों में यह आंतों के सामान्य कामकाज को भी प्रभावित कर सकता है।

हाँ। जब आंतों में मल लंबे समय तक रुका रहता है, तो कुछ लोगों को पेट भरा-भरा महसूस होता है, जिससे भूख कम लग सकती है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

यदि कब्ज़ लंबे समय से बनी हुई है, बार-बार लौटती है या इसके साथ खून आना, एनीमिया, वजन घटना या गंभीर पेट दर्द जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर कारण जानने के लिए खून की जांच, थायरॉयड टेस्ट, कोलोनोस्कोपी या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।

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