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पानी कम पीना सिर्फ dehydration नहीं, इससे और क्या हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

नमस्ते! यह सच है कि पानी की कमी सिर्फ प्यास या डिहाइड्रेशन तक सीमित नहीं है; यह आपके शरीर के हर अंग के काम करने के तरीके को बदल सकती है। जब हम शरीर को पर्याप्त "ईंधन" (पानी) नहीं देते, तो अंदरूनी सिस्टम धीमा पड़ना लगता है। यहाँ एक विस्तृत लेख है जो आपको यह समझने में मदद करेगा कि पानी की कमी (Hypohydration) आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी गंभीर हो सकती है।

प्यास से कहीं ज्यादा: जब आपका शरीर पानी के लिए तरसता है

हम अक्सर सोचते हैं कि गला सूखना ही पानी की कमी का एकमात्र संकेत है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक डरावनी है। हमारा शरीर लगभग 60-70% पानी से बना है, और जब यह स्तर गिरता है, तो आपका दिमाग, किडनी और यहाँ तक कि आपका मूड भी बिगड़ने लगता है। अगर इसे नज़रअंदाज़ किया गया, तो यह साधारण सी थकान से बढ़कर अंगों के फेल होने (Organ failure) तक पहुँच सकती है। समय रहते जागना ज़रूरी है, क्योंकि आपका शरीर हर पल आपको छोटे-छोटे संकेत दे रहा होता है—बस आपको उन्हें सुनने की ज़रूरत है।

आखिर क्या है 'क्रोनिक डिहाइड्रेशन'?

सरल शब्दों में कहें तो, जब आपके शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ (पसीने, पेशाब के जरिए) की मात्रा आपके द्वारा लिए गए पानी से अधिक हो जाती है, तो उसे डिहाइड्रेशन कहते हैं। लेकिन जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे 'क्रोनिक डिहाइड्रेशन' कहा जाता है। यह कोई छोटी समस्या नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जहाँ आपका खून गाढ़ा होने लगता है और कोशिकाओं (cells) को अपना काम करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

पानी की कमी के विभिन्न पड़ाव (Stages)

इसे हम तीन मुख्य चरणों में समझ सकते हैं:

  • हल्का (Mild): जब आप बस थोड़ा थका हुआ महसूस करते हैं और मुँह सूखता है।
  • मध्यम (Moderate): यहाँ धड़कन तेज होने लगती है और त्वचा का लचीलापन कम हो जाता है।
  • गंभीर (Severe): यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें चक्कर आना, बेहोशी और किडनी पर सीधा असर पड़ता है।

शरीर की पुकार: इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

जब पानी कम होता है, तो शरीर ये लाल झंडे (Red Flags) दिखाता है:

  • लगातार सिरदर्द और भारीपन: दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और फ्लूइड नहीं मिल पाते।
  • पेशाब का गहरा रंग: गहरे पीले रंग का मतलब है कि किडनी कचरे को बाहर निकालने के लिए संघर्ष कर रही है।
  • पुरानी थकान और चिड़चिड़ापन: बिना किसी कारण के सुस्ती महसूस होना।
  • मुँह की बदबू: लार (Saliva) कम बनने से बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।
  • मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps): इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ना।

क्यों सूख रहा है आपका शरीर? (प्रमुख कारण)

पानी कम पीने के अलावा भी कई कारण हो सकते हैं:

  • अत्यधिक पसीना: जिम या गर्मी में ज्यादा वक्त बिताना।
  • बीमारी: बुखार, दस्त या उल्टी के कारण अचानक फ्लूइड लॉस।
  • दवाइयां: कुछ ब्लड प्रेशर की दवाएं (Diuretics) शरीर से पानी बाहर निकालती हैं।
  • कैफीन का मोह: ज्यादा चाय या कॉफी पीना जो शरीर को डिहाइड्रेट करती है।

जोखिम और जटिलताएं: क्या हो सकता है अंजाम?

जोखिम कारक (Risk Factors)

गंभीर जटिलताएं (Complications)

उम्र: बच्चे और बुजुर्ग जल्दी प्रभावित होते हैं।

किडनी स्टोन और फेलियर: कचरा जमा होकर पत्थर बन जाता है।

एथलीट: भारी कसरत करने वाले लोग।

हीट स्ट्रोक: शरीर अपना तापमान नियंत्रित नहीं कर पाता।

मधुमेह (Diabetes): बार-बार पेशाब आने से पानी कम होना।

दौरे (Seizures): इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन से दिमाग पर असर।

पहाड़ी इलाकों में रहना: हवा शुष्क होने से सांस के जरिए पानी निकलना।

हाइपोवोलेमिक शॉक: खून की मात्रा इतनी कम होना कि हार्ट पंप न कर पाए।

बीमारी की पहचान: आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद का संगम

आधुनिक निदान (Modern Diagnosis)

डॉक्टर आमतौर पर ब्लड टेस्ट (इलेक्ट्रोलाइट्स और क्रिएटिनिन की जांच के लिए) और यूरिन एनालिसिस (पेशाब की सघनता देखने के लिए) का सहारा लेते हैं। इसके अलावा, स्किन टर्गोर टेस्ट (त्वचा को खींचकर देखना) से भी तुरंत पता चल जाता है।

आयुर्वेद और दोष-आधारित वर्गीकरण

आयुर्वेद में पानी की कमी को शरीर के 'ओज' और 'जलयुक्त' तत्वों के असंतुलन के रूप में देखा जाता है।

अपनी प्रकृति (Dosha) पहचानें:

  • वात (Vata): यदि आपकी त्वचा बहुत रूखी है और आपको कब्ज रहता है, तो आप वात प्रधान हैं। आपको गुनगुना पानी घूँट-घूँट कर पीना चाहिए।
  • पित्त (Pitta): यदि आपको बहुत गर्मी लगती है और पसीना ज्यादा आता है, तो आपको ठंडे (मटके के) पानी और नारियल पानी की अधिक आवश्यकता है।
  • कफ (Kapha): इन्हें पानी की ज़रूरत कम होती है, लेकिन मेटाबॉलिज्म सही रखने के लिए संतुलित जल अनिवार्य है।

आयुर्वेद की दृष्टि में जल का अभाव: जब शरीर का 'अम्बु' तत्व बिगड़ता है

आयुर्वेद में जल को 'जीवन' कहा गया है। पानी की कमी को केवल प्यास नहीं, बल्कि 'उदकवह स्रोतस' (जल ले जाने वाले मार्ग) में असंतुलन माना जाता है। जब हमारे शरीर में वात और पित्त दोष बढ़ जाते हैं, तो वे शरीर की नमी को सोख लेते हैं, जिससे धातुएं (Tissues) सूखने लगती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इसका मूल कारण केवल पानी कम पीना नहीं, बल्कि अग्नि (Metabolism) का असंतुलन और गलत खान-पान भी है, जो शरीर के सूक्ष्म चैनलों को अवरुद्ध कर देता है।

जीवा आयुर्वेद का विशेष दृष्टिकोण: जड़ से उपचार

जीवा आयुर्वेद में हम केवल पानी पिलाने पर ज़ोर नहीं देते, बल्कि यह देखते हैं कि आपका शरीर उस पानी को सोख क्यों नहीं पा रहा है। जीवा के 'आयुनीक' (Ayunique™) दृष्टिकोण के माध्यम से, हम व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) का विश्लेषण करते हैं। उपचार का लक्ष्य अग्नि को संतुलित करना और शरीर के स्रोतों को शुद्ध करना है ताकि कोशिकाएं नमी को लंबे समय तक रोक सकें। यह उपचार पूरी तरह से व्यक्तिगत (Personalized) होता है, जो आपकी जीवनशैली और बीमारी के मूल कारण पर आधारित है।

प्रकृति का वरदान: हाइड्रेशन के लिए जादुई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

कुछ खास जड़ी-बूटियाँ शरीर में जल तत्व को बनाए रखने और अंगों को पोषण देने में अद्भुत काम करती हैं:

  • शतावरी (Shatavari): यह शरीर में नमी बनाए रखने और ऊतकों को हाइड्रेटेड रखने के लिए सबसे अच्छी 'कूलिंग' हर्ब है।
  • अनंतमूल (Anantamul): यह रक्त को साफ करती है और पित्त के कारण होने वाली अंदरूनी जलन को शांत करती है।
  • आंवला (Amla): विटामिन C से भरपूर यह फल शरीर में तरलता (Fluids) को नियंत्रित करता है और प्यास को शांत करता है।
  • गिलोय (Giloy): यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और डिहाइड्रेशन के कारण आई कमजोरी को दूर करती है।

पंचकर्म और विशेष थैरेपी: सुकून और शुद्धता का संगम

गंभीर डिहाइड्रेशन या इसके कारण शरीर में आई जकड़न को दूर करने के लिए जीवा आयुर्वेद में कुछ विशेष बाह्य उपचार (External Therapies) दिए जाते हैं:

  • अभ्यंग (Abhyanga): औषधीय तेलों से मालिश, जो त्वचा के जरिए नमी को अंदर तक पहुँचाती है और वात को शांत करती है।
  • तर्पण (Tarpan): विशेष रूप से आँखों की खुश्की दूर करने के लिए दी जाने वाली थैरेपी।
  • बस्ती (Basti): यह पंचकर्म का एक हिस्सा है जो बड़ी आँत के सूखेपन को दूर कर पूरे शरीर को हाइड्रेट करता है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): तनाव और डिहाइड्रेशन से होने वाले सिरदर्द में मानसिक शांति और राहत देती है।

आहार ही औषधि है: क्या खाएं और क्या छोड़ें

एक सही डाइट चार्ट आपके शरीर में पानी के स्तर को स्वाभाविक रूप से बहाल करने में मदद करता है।

क्या भरपूर खाएं (Include)

किनसे दूरी बनाएं (Avoid)

ताजे फल: तरबूज, अंगूर, खरबूजा और अनार।

अत्यधिक कैफीन: ज्यादा चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स।

सब्जियां: लौकी, तोरई, खीरा और कद्दू (जो जल से भरपूर हों)।

तला-भुना खाना: समोसे, पकौड़े और ज्यादा मसालेदार भोजन।

तरल पदार्थ: नारियल पानी, ताजा छाछ (Buttermilk) और नींबू पानी।

पैकेट बंद जूस: जिनमें प्रिजर्वेटिव्स और चीनी की मात्रा अधिक हो।

देसी घी: यह शरीर के अंदरूनी सूखेपन (Dryness) को खत्म करता है।

अत्यधिक नमक: ज्यादा नमक शरीर से पानी को बाहर खींचता है।

जीवा में आपकी सेहत का आंकलन: सिर्फ बीमारी नहीं, जड़ की पहचान

जीवा आयुर्वेद में हम केवल आपकी रिपोर्ट नहीं देखते, बल्कि आपको एक संपूर्ण व्यक्ति के रूप में समझते हैं। हमारी परामर्श प्रक्रिया (Consultation Process) काफी गहरी होती है:

  • नाड़ी परीक्षण (Pulse Diagnosis): हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी कलाई की धड़कन से यह जान लेते हैं कि शरीर के अंदर कौन सा दोष (वात, पित्त, कफ) असंतुलित है।
  • प्रकृति विश्लेषण (Prakriti Analysis): हर व्यक्ति का शरीर अलग है। हम यह पहचानते हैं कि आपकी जन्मजात प्रकृति क्या है।
  • प्रश्न-उत्तर सत्र: आपकी जीवनशैली, तनाव का स्तर और खान-पान की आदतों पर विस्तार से चर्चा की जाती है ताकि रोग के मानसिक और शारीरिक कारणों को समझा जा सके।

आपकी रिकवरी का सफर: कदम-दर-कदम देखभाल

जीवा में उपचार एक यात्रा की तरह है:

  1. गहन परामर्श: डॉक्टर के साथ विस्तार से बातचीत।
  2. व्यक्तिगत उपचार योजना: आपकी प्रकृति के अनुसार दवाएं और डाइट चार्ट तैयार करना।
  3. निरंतर मार्गदर्शन: हमारे स्वास्थ्य कोच समय-समय पर आपसे जुड़ते हैं ताकि आप उपचार के साथ सही राह पर रहें।
  4. जीवनशैली में सुधार: योग और ध्यान के साथ स्वास्थ्य को स्थायी बनाना।

सुधार की समयसीमा: कब दिखेगा असर?

आयुर्वेद कोई जादू नहीं है, यह एक विज्ञान है। आमतौर पर, पानी की कमी से जुड़ी साधारण समस्याओं (जैसे थकान या कब्ज) में 7 से 15 दिनों में सुधार दिखने लगता है। हालांकि, अगर किडनी स्टोन या क्रोनिक समस्याएं हैं, तो पूर्ण रिकवरी में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। धीरज ही यहाँ सबसे बड़ी औषधि है।

परिणाम की उम्मीद: क्या होगा बदलाव?

जब आप जीवा के साथ जुड़ते हैं, तो बदलाव केवल बीमारी तक सीमित नहीं रहता।

समस्या बनाम समाधान: एक नजर में

वर्तमान समस्या (Problem)

उपचार के बाद का परिणाम (Solution)

लगातार थकान और ऊर्जा की कमी

दिन भर स्फूर्ति और सक्रिय महसूस करना

पाचन में गड़बड़ी और कब्ज

संतुलित मेटाबॉलिज्म और साफ पेट

त्वचा का सूखापन और बेजान चेहरा

प्राकृतिक चमक और हाइड्रेटेड त्वचा

बार-बार होने वाला सिरदर्द

मानसिक स्पष्टता और दर्द से मुक्ति

कमजोर इम्यूनिटी

बीमारियों से लड़ने की बेहतर क्षमता

जीवा आयुर्वेद में इलाज की अनुमानित लागत

अपनी सेहत के लिए ज़रूरी आर्थिक निवेश को समझना ज़रूरी है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं की लागत में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी मेडिकल ज़रूरतों के हिसाब से सबसे सही विकल्प चुन सकें।

इलाज की लागत

जो मरीज़ नियमित, लगातार देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और कंसल्टेशन की मासिक लागत आमतौर पर 3,000 रुपये से 3,500 रुपये के बीच होती है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित शुरुआती लागत है। अंतिम लागत मरीज़ की बीमारी की सही प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है।

प्रोटोकॉल

ज़्यादा व्यापक और व्यवस्थित तरीके के लिए, हम खास पैकेज प्रोटोकॉल देते हैं। ये प्लान शारीरिक लक्षणों और पूरी जीवनशैली में सुधार, दोनों पर ध्यान देने के लिए बनाए गए हैं। पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल की लागत में एक बार में 15,000 रुपये से 40,000 रुपये तक का पेमेंट शामिल होता है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

जिन मरीज़ों को गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की ज़रूरत होती है, उनके लिए हमारे जीवाग्राम केंद्र बेहतरीन इलाज का अनुभव देते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में बना एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है, और यह ये सुविधाएँ देता है:

  • असली पंचकर्म थेरेपी
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक इलाज सेवाएँ
  • आरामदायक रहने की जगह
  • और भी कई जीवन-स्तर सुधारने वाली सुविधाएँ

जीवाग्राम में 7 दिनों के लिए पूरी तरह से समर्पित वेलनेस स्टे की लागत लगभग 1 लाख रुपये है, जो आपके शरीर और मन को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए लगातार, व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

पिछले कुछ सालों में, जीवा आयुर्वेद ने हज़ारों ऐसे मरीजों का भरोसा जीता है जो प्राकृतिक और पर्सनलाइज़्ड हेल्थकेयर समाधान ढूंढ रहे हैं। जीवा आयुर्वेद पर मरीजों के भरोसे के कुछ मुख्य कारण ये हैं:

पारंपरिक इलाज के उलट, जो सिर्फ़ बीमारी के लक्षणों पर ध्यान देते हैं, आयुर्वेदिक इलाज बीमारी की जड़ को ठीक करने और शरीर में मौजूद उन अंदरूनी असंतुलनों को ठीक करने पर ज़ोर देता है जिनकी वजह से बीमारी होती है।

  • अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर

जीवा आयुर्वेद के पास अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक बहुत बड़ी टीम है, जो किसी भी बीमारी के लिए इलाज सुझाने से पहले हर मरीज की स्थिति की अच्छी तरह से जांच करते हैं।

  • पर्सनलाइज़्ड "Ayunique" इलाज का तरीका

आयुर्वेदिक इलाज बहुत ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड होता है और हर व्यक्ति की प्रकृति और जीवनशैली के हिसाब से तैयार किया जाता है।

  • संपूर्ण इलाज

आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ़ दवाओं तक ही सीमित नहीं है; इसमें खान-पान और जीवनशैली में बदलाव, सांस लेने की तकनीकें, और तनाव को मैनेज करने के तरीके भी शामिल हैं, ताकि शरीर और मन का पूरी तरह से इलाज हो सके।

  • पूरे भारत में मरीजों का भरोसा

बहुत बड़ी संख्या में मरीजों ने Jiva के इलाज के तरीकों और सुझावों को अपनाने के बाद अपनी सेहत में सुधार देखा है। इससे पता चलता है कि आयुर्वेदिक इलाज के लिए लोग जीवा आयुर्वेद पर कितना भरोसा करते हैं।

  • 95% मरीजों ने इलाज शुरू करने के 3 महीने के अंदर ही अपनी सेहत में काफ़ी सुधार देखा।
  • 88% मरीजों ने एलोपैथिक दवाएँ पूरी तरह से लेना बंद कर दिया।
  • हर दिन 8000+ मरीजों का कंसल्टेशन होता है।
  • दुनिया भर में 15 लाख से ज़्यादा संतुष्ट मरीज़
  • 30+ वर्षों की आयुर्वेदिक विशेषज्ञता
  • पूरे भारत में 80+ क्लिनिक

आधुनिक vs  आयुर्वेदिक: सेहत की दो राहें

पानी की कमी का इलाज केवल "पानी पीना" नहीं है। यहाँ देखें कि आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद इस समस्या को कैसे देखते हैं:

विशेषता (Feature)

आधुनिक उपचार (Modern Medicine)

जीवा आयुर्वेदिक उपचार (Ayurveda)

मुख्य फोकस

लक्षणों को कम करना (Quick Relief)

जड़ से इलाज (Root Cause Analysis)

उपचार का आधार

ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट्स (ORS)

दोष संतुलन, जड़ी-बूटियाँ और आहार

व्यक्तिगत ध्यान

एक ही दवा सबके लिए (Standard)

आपकी 'प्रकृति' के अनुसार विशेष योजना

दीर्घकालिक लाभ

तत्काल राहत, पर बार-बार हो सकता है

शरीर की सोखने की क्षमता में स्थायी सुधार

दुष्प्रभाव

रसायनों के कारण संभव

पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित

डॉक्टर से कब मिलें? खतरे के संकेत

अगर आपको या आपके किसी अपने को ये लक्षण दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें:

  • लगातार चक्कर आना या बेहोश होना।
  • 8-10 घंटे तक पेशाब न आना
  • बहुत ज्यादा धड़कनें तेज होना।
  • भ्रम (Confusion) या चिड़चिड़ापन बढ़ना।

संपर्क करें:

आपकी सेहत हमारी प्राथमिकता है। जीवा आयुर्वेद के विशेषज्ञ डॉक्टरों से बात करने के लिए आज ही कॉल करें या हमें लिखें:

  • कॉल: 0129-4264323
  • वेबसाइट: www.jiva.com
  • परामर्श: पूरे भारत में ऑनलाइन और 80+ क्लिनिक उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष

पानी की कमी सिर्फ एक प्यास नहीं, बल्कि आपके शरीर का एक मौन संदेश है। इसे नज़रअंदाज़ करने के बजाय, अपनी जीवनशैली में छोटे आयुर्वेदिक बदलाव लाएं। सही समय पर परामर्श और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर आप न केवल डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं, बल्कि एक ऊर्जावान और रोगमुक्त जीवन जी सकते हैं।

FAQs

हाँ! कई बार हमारा शरीर प्यास के संकेत देना भूल जाता है। प्यास लगने का इंतज़ार करना मतलब शरीर पहले ही डिहाइड्रेट हो चुका है।

नारियल पानी "प्राकृतिक ORS" है। इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो सादे पानी की तुलना में शरीर को जल्दी हाइड्रेट करते हैं।

तांबा पानी को शुद्ध करता है और पाचन अग्नि को बढ़ाता है, जिससे शरीर पानी को बेहतर तरीके से सोख पाता है।

 बिल्कुल नहीं! कैफीन शरीर से पानी बाहर निकालता है। एक कप कॉफी के बाद आपको एक एक्स्ट्रा गिलास पानी पीना चाहिए।

हमेशा मटके का! फ्रिज का बहुत ठंडा पानी आपकी पाचन अग्नि को बुझा देता है और कब्ज का कारण बनता है।

अजीब लग सकता है, लेकिन हाँ! जब शरीर में पानी कम होता है, तो वह चर्बी जलाने की प्रक्रिया धीमी कर देता है और टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं।

बैठकर पिएं, छोटे-छोटे घूँट (sips) लेकर पिएं और खाने के तुरंत पहले या बाद में पानी पीने से बचें।

जी हाँ, जीवा में बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक फॉर्मूलेशन उपलब्ध हैं।

 बिल्कुल। पानी की कमी से स्कैल्प सूख जाता है और बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं।

 हाँ, हमारे डॉक्टर आपकी वर्तमान दवाओं को ध्यान में रखकर ही उपचार शुरू करते हैं।

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