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आपकी आदतें आपको अंदर से कमज़ोर बना रही हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल सुबह उठने पर शरीर में भारीपन, दिन भर काम करने की इच्छा न होना और बात-बात पर चिड़चिड़ापन आना बहुत आम हो गया है। हम अक्सर इन संकेतों को 'बढ़ती उम्र' या 'काम का प्रेशर' मानकर इग्नोर कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपको कोई बीमारी नहीं, बल्कि आपकी अपनी ही आदतें अंदर से खोखला कर रही हैं? देर रात तक जागना, समय पर खाना न खाना और घंटों कुर्सी पर बैठे रहना-ये कोई सामान्य लाइफस्टाइल नहीं, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज़्म और ऊर्जा को तबाह करने वाले हथियार हैं। जिन चीज़ों को हम मॉडर्न लाइफस्टाइल मानते हैं, वे खामोशी से हमारी नसों और हड्डियों का रस चूस रही हैं। आइए समझें कि कैसे आपकी आदतें आपको कमज़ोर बना रही हैं और आयुर्वेद की मदद से आप अपनी खोई हुई ताकत कैसे वापस पा सकते हैं।

कमज़ोर करने वाली भयानक आदतें: शरीर का खामोश डैमेज

हम अक्सर अपनी रोज़मर्रा की गलतियों को 'आदत' मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन शरीर के लिए यह एक भयंकर तबाही है जो आपको खोखला कर रही है।

  • लगातार बैठे रहना: शरीर को चलने और मेहनत करने के लिए बनाया गया है। घंटों कुर्सी पर बैठे रहने से ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है, माँसपेशियाँ सिकुड़ जाती हैं और शरीर का प्राकृतिक स्टैमिना पूरी तरह खत्म हो जाता है।
  • नींद से भयंकर समझौता : रात को 12-1 बजे तक स्क्रीन (फोन) देखना और सुबह थका हुआ उठना। इससे शरीर की मरम्मत (Repair) की प्रक्रिया रुक जाती है और इंसान सुबह से ही खुद को कमज़ोर महसूस करता है।
  • खाने में पोषण की कमी: जंक फूड, मैदा और पैकेटबंद खाने में सिर्फ कैलोरी होती है, असली पोषण नहीं। यह खाना शरीर में जाकर सिर्फ ब्लोटिंग (Bloating) और आलस पैदा करता है।
  • पानी कम पीना: दिन भर में पानी न पीने की आदत से खून गाढ़ा हो जाता है। इससे अंगों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती और आप हमेशा थका हुआ महसूस करते हैं।

आयुर्वेद इस कमज़ोरी को कैसे समझता है? 

आधुनिक विज्ञान जिसे केवल 'लाइफस्टाइल डिसऑर्डर' कहता है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले ही शरीर की 'अग्नि' के बुझने और 'प्रज्ञापराध' के रूप में गहराई से समझाया था।

  • प्रज्ञापराध: हमें पता होता है कि देर तक जागना या गलत खाना हमारे लिए खराब है, फिर भी हम अपनी समझ के खिलाफ जाकर वह करते हैं। आयुर्वेद इसे सभी बीमारियों की सबसे बड़ी जड़ मानता है।
  • ओजस का सूखना: ओजस हमारे शरीर का अंतिम पोषण है जो हमें इम्युनिटी और ताकत देता है। तनाव, जंक फूड और खराब नींद से यह 'ओजस' सूख जाता है, जिससे आप अंदर से कमज़ोर और बीमार रहने लगते हैं।
  • अग्नि का बुझना और 'आम' का निर्माण: जब आप गलत समय पर सोते और खाते हैं, तो पेट की अग्नि बुझ जाती है। बिना पचा खाना आँतों में सड़कर 'आम' (ज़हरीला कचरा) बनाता है, जो खून में घुलकर शरीर को सुस्त कर देता है।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

हम आपको सिर्फ तुरंत ऊर्जा देने वाले एनर्जी ड्रिंक्स या विटामिन्स देकर इन चेतावनियों को दबाने का काम नहीं करते। हमारा लक्ष्य आपकी दिनचर्या को सुधारकर कमज़ोरी की असली जड़ को हमेशा के लिए ठीक करना है।

  • नाड़ी से बीमारी की पहचान: हम लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि नाड़ी परीक्षा से शरीर के अंदर चल रहे वात, पित्त और कफ के असली असंतुलन को पकड़ते हैं।
  • अग्नि दीपन और डिटॉक्स: सबसे पहले आपकी मेटाबॉलिक अग्नि को मज़बूत किया जाता है और शरीर में फैले हुए 'आम' (गंदगी) को जड़ी-बूटियों के ज़रिए बाहर निकाला जाता है।
  • दिनचर्या और धातु पोषण: आपकी प्रकृति के अनुसार सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक का एक सही रूटीन सेट किया जाता है और कमज़ोर धातुओं को 'रसायन' देकर ताकतवर बनाया जाता है।

खोई हुई ताकत वापस लाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें खराब आदतों से शरीर में आई कमज़ोरी को दूर करने और नई ऊर्जा भरने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं।

  • अश्वगंधा: खराब आदतों और तनाव के कारण शरीर में आई भयंकर कमज़ोरी को दूर कर यह शरीर में नई प्राकृतिक ऊर्जा (Stamina) भरता है।
  • शिलाजीत : यह शरीर की हर कोशिका (Cell) में नई ऊर्जा पैदा करता है। मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करने और अंदरूनी कमज़ोरी को जड़ से खत्म करने में इसका कोई मुकाबला नहीं है।
  • शतावरी: यह शरीर की सूखी हुई धातुओं (Tissues) को गहरा पोषण देती है और नर्वस सिस्टम को शांत कर भयंकर थकान से राहत दिलाती है।
  • गिलोय: यह गलत लाइफस्टाइल से कमज़ोर हुई इम्युनिटी को दोबारा ताकतवर बनाती है और खून में फैले हुए टॉक्सिन्स को साफ करती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी शरीर को कैसे नया बनाती है?

जब गलत आदतों के कारण शरीर में गंदगी बहुत ज़्यादा भर जाती है और ये वॉर्निंग साइंस भयंकर बीमारियों का रूप लेने लगते हैं, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी शरीर की डीप क्लीनिंग करती है।

  • अभ्यंग: भागदौड़ और तनाव से बढ़े हुए वात को शांत करने के लिए औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। यह रूखी त्वचा और कमज़ोर नसों को तुरंत ताकत देती है।
  • शिरोधारा: नींद न आना और भयंकर एंग्जायटी के लिए यह एक जादुई थेरेपी है। माथे पर तेल की लगातार धारा गिराने से दिमाग का सारा तनाव बहकर निकल जाता है।
  • विरेचन : यह बाहर का जंक फूड खाने से खराब हुए फैटी लिवर के लिए सबसे अचूक इलाज है। इसमें दस्त लगाकर लिवर और खून की सारी एसिडिटी बाहर निकाल दी जाती है।

शरीर में ऊर्जा भरने के लिए वात-शामक डाइट प्लान

आप जो खाते हैं और जिस तरह खाते हैं, वही आपकी ऊर्जा का स्तर तय करता है। अपनी आदतों को सुधारने और ताकत वापस पाने के लिए सही डाइट का पालन करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

आहार का सिद्धांत:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): सात्विक, हल्का, गर्म और ताज़ा भोजन लें। खाने का एक फिक्स समय तय करें और हमेशा बैठकर शांति से चबाकर खाएं।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): बासी, फ्रिज में रखा ठंडा खाना, खड़े होकर या चलते-फिरते खाना, और बहुत देर रात भोजन करना।

प्राकृतिक पोषण:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): गाय का शुद्ध घी, ताज़ी हरी सब्ज़ियाँ, मूंग की दाल, भीगे हुए बादाम और खजूर।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): पैकेटबंद और प्रोसेस्ड भोजन, रिफाइंड चीनी, और बहुत ज़्यादा मैदा जो 'आम' बनाता है।

विरुद्ध आहार से बचें:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): संतुलित और संगत (Compatible) खाद्य संयोजन अपनाएँ।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): दूध के साथ खट्टे फल, नमक या मछली का सेवन जो पेट में सीधे ज़हर बनाता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप इन छोटी-छोटी गलतियों को इग्नोर करके किसी बड़ी बीमारी (जैसे थायरॉयड या डिप्रेशन) का शिकार हो जाते हैं, तब हम आपकी परेशानी की जड़ तक पहुँचने के लिए गहराई से जाँच करते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि आपके अंदर 'वात', 'पित्त', और 'कफ' का स्तर कितना बिगड़ चुका है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: डॉक्टर आपकी जीभ, आँखें, और त्वचा का रूखापन बहुत बारीकी से चेक करते हैं।
  • पाचन का विश्लेषण: यह देखना कि आपका पेट साफ रहता है या नहीं, क्योंकि कब्ज़ और ब्लोटिंग ही खराब आदतों का सबसे पहला अलार्म होते हैं।
  • लाइफस्टाइल चेक: आपके सोने, जागने, काम करने के तरीके और स्क्रीन टाइम को बहुत गहराई से समझा जाता है, क्योंकि बीमारी का ट्रिगर यहीं है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसी जादुई गोली नहीं है जो बिना आपकी आदत बदले आपको रातों-रात ठीक कर दे। शरीर की अंदरूनी मशीनरी को दोबारा रिसेट होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपका पेट साफ होगा; भारीपन, गैस और एसिडिटी काफी कम होने लगेगी। शरीर हल्का महसूस होगा और नींद अच्छी आएगी।
  • 1 से 3 महीने तक: मेटाबॉलिज़्म सुधरने से वज़न का प्राकृतिक रूप से संतुलन शुरू होगा। दिन भर रहने वाली सुस्ती और चिड़चिड़ापन गायब हो जाएगा।
  • 3 से 6 महीने और उससे अधिक: आपका पूरा शरीर अंदर से डिटॉक्स हो जाएगा। ओजस और इम्युनिटी इतनी मज़बूत हो जाएगी कि आप पुरानी खराब आदतों के डर से मुक्त होकर एक ऊर्जावान जीवन जी सकेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

अपनी आदतों से पैदा हुई कमज़ोरी के इलाज के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को लेकर दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य थकान दूर करने के लिए तुरंत असर वाले विटामिन्स और एनर्जी ड्रिंक्स ‘अग्नि’ को सुधारकर और ‘ओजस’ बढ़ाकर प्राकृतिक स्टैमिना वापस लाना
शरीर को देखने का नजरिया थकान या नींद की कमी को अलग समस्या मानकर दवाओं से इलाज ‘प्रज्ञापराध’ (गलत आदतों) को मूल कारण मानकर शरीर को संपूर्ण इकाई की तरह देखना
डाइट और जीवनशैली सप्लीमेंट्स पर अधिक ज़ोर, आदतों में बदलाव पर कम ध्यान ‘दिनचर्या’ (उठना, खाना, सोना) को ही मुख्य उपचार मानना
इलाज का तरीका त्वरित राहत के लिए सप्लीमेंट्स और ड्रिंक्स आहार, दिनचर्या और जड़ी-बूटियों से अंदरूनी संतुलन
लंबा असर सप्लीमेंट्स बंद करते ही थकान दोबारा लौटना शरीर को अंदर से मज़बूत कर दीर्घकालिक ऊर्जा और स्थायी स्वास्थ्य

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अपनी खराब आदतों के साइड इफ़ेक्ट्स को सिर्फ 'आलस' मानकर इग्नोर न करें। अगर आपको शरीर में ये गंभीर संकेत दिखें, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • थोड़ा सा चलने पर सीने में भारीपन और साँस फूलना: अगर काम करते समय या सीढ़ियाँ चढ़ते हुए सीने में जकड़न होती है, तो यह हृदय (Heart) की भयंकर कमज़ोरी का सीधा संकेत है।
  • बिना कारण लगातार वज़न गिरना या बढ़ना: अगर आपकी डाइट में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है फिर भी वज़न कंट्रोल से बाहर हो रहा है, तो यह शुगर या थायरॉयड का अलार्म है।
  • आँखों के आगे अंधेरा छाना या चक्कर आना: अगर बिस्तर से उठते ही आपको भयंकर चक्कर आते हैं, तो यह लो ब्लड प्रेशर या खून की भारी कमी (Anemia) का संकेत है।
  • लगातार कई रातों तक नींद न आना: अगर फोन चलाने की आदत के कारण नींद पूरी तरह उड़ चुकी है और भयंकर एंग्जायटी होती है, तो यह नर्वस सिस्टम के क्रैश होने का संकेत है।

निष्कर्ष

हमारा शरीर एक बेहतरीन मशीन है, लेकिन हमारी ही खराब आदतें इस मशीन के पुर्ज़ों में जंग लगा रही हैं। हर समय थकान महसूस होना, चिड़चिड़ापन और बिना काम किए साँस फूलना—ये सब उम्र का असर नहीं, बल्कि आपकी रूखी और असंतुलित लाइफस्टाइल का नतीजा हैं। जब हम इन शुरुआती संकेतों को पेनकिलर या एनर्जी ड्रिंक्स से दबा देते हैं, तो शरीर अंदर से पूरी तरह खोखला होने लगता है। अपनी आदतों का गुलाम बनकर भविष्य में बड़ी बीमारियों का शिकार होने की कोई ज़रूरत नहीं है। आयुर्वेद आपको शरीर की पुकार सुनने और प्राकृतिक रूप से ताकत वापस पाने का एक सुरक्षित रास्ता दिखाता है। अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों, सही दिनचर्या और जीवा आयुर्वेद के साथ जुड़कर अपनी आदतों को सुधारें और एक ऊर्जावान व स्वस्थ जीवन जिएँ।

FAQs

बिल्कुल! आयुर्वेद के अनुसार, घंटों एक ही जगह बैठने से शरीर में 'कफ दोष' और सुस्ती बढ़ जाती है। ब्लड सर्कुलेशन धीमा होने से कोशिकाओं (Cells) को सही ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे इंसान अंदर से थका हुआ महसूस करता है।

रात का समय शरीर की टूट-फूट को रिपेयर करने का होता है। जब आप जागते हैं, तो शरीर को मजबूरन 'वात' और 'पित्त' बढ़ाना पड़ता है। इससे 'ओजस' सूख जाता है और सुबह उठने पर भारी कमज़ोरी लगती है।

नहीं, जंक फूड में कोई न्यूट्रिशन नहीं होता। यह पेट में जाकर 'आम' (ज़हर) बनाता है। यह आम आपकी नसों को ब्लॉक कर देता है, जिससे आपको थकान, ब्रेन फॉग (Brain fog) और हार्मोनल असंतुलन का सामना करना पड़ता है।

ओजस शरीर में बनने वाला सबसे शुद्ध और अंतिम तत्व है जो आपको ताकत, चमक और बीमारियों से लड़ने की शक्ति (Immunity) देता है। गलत आदतें इसी ओजस को सुखा देती हैं।

पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे दिल को खून पंप करने में बहुत ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यही कारण है कि पानी कम पीने वाले लोग हमेशा थके हुए और आलस से भरे रहते हैं।

नहीं, जंक फूड में कोई न्यूट्रिशन नहीं होता। यह पेट में जाकर आम (ज़हर) बनाता है। यह आम आपकी नसों को ब्लॉक कर देता है, जिससे आपको थकान, ब्रेन फॉग (Brain fog) और हार्मोनल असंतुलन का सामना करना पड़ता है।

अश्वगंधा एक जादुई रसायन है जो शरीर के स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) को कम करता है। यह नर्वस सिस्टम को आराम देता है और शरीर की कोशिकाओं में प्राकृतिक स्टैमिना और ऊर्जा वापस लाता है।

जी हाँ! औषधीय तेलों से रोज़ाना मालिश करने से नसों का रूखापन खत्म होता है। यह गलत आदतों के कारण बढ़े हुए वात (वायु) को तुरंत शांत करती है और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर शरीर को भारी ऊर्जा देती है।

बिल्कुल! खाली पेट चाय पीने से पेट का एसिड तेज़ी से बढ़ता है। यह आँतों की अंदरूनी परत को जला देता है, जिससे सारा दिन गैस, एसिडिटी और भारीपन की शिकायत रहती है।

बासी और पैकेटबंद खाने को छोड़कर ताज़ा और गर्म भोजन शुरू करें। अपनी डाइट में गाय का शुद्ध घी, मूंग की दाल और भीगे हुए बादाम शामिल करें। इससे अग्नि तेज़ होगी और तुरंत ऊर्जा मिलेगी।

सही आयुर्वेदिक डाइट (दिनचर्या) और जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से 2 से 3 हफ्तों में ही शरीर हल्का महसूस होने लगता है और नींद गहरी आती है। पूरी तरह ताकत वापस आने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं।

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