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Body के संकेत जिन्हें हम normal समझते हैं लेकिन वो warning होते हैं

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह उठने पर भयंकर थकान, दिन भर हल्का-हल्का सिरदर्द, खाना खाने के बाद पेट का फूलना या रातों की नींद उड़ जाना, आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण लाइफस्टाइल में हम इन सभी चीज़ों को बिल्कुल नॉर्मल मान चुके हैं। जब भी हमारा शरीर हमें कोई ऐसा संकेत देता है, तो हम एक पेनकिलर या गैस की गोली खाकर अपने काम पर वापस लौट जाते हैं। हमें लगता है कि यह सिर्फ काम की थकान या मौसम का बदलाव है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारा शरीर बहुत ही स्मार्ट मशीन है? कोई भी बड़ी बीमारी रातों-रात नहीं होती; शरीर महीनों पहले से अलार्म बजाना शुरू कर देता है। जिन छोटे-छोटे बदलावों को हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं, वे असल में शरीर की चीख-पुकार होते हैं जो बताते हैं कि अंदर की मशीनरी फेल हो रही है। इस खामोशी से बढ़ने वाले खतरे को समय रहते पहचानना ही एक स्वस्थ जीवन की असली चाबी है। इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि हमारे शरीर के वे कौन से आम संकेत हैं जो भविष्य की भयंकर बीमारियों की वॉर्निंग (Warning) हैं, हम उन्हें क्यों इग्नोर कर देते हैं, और कैसे आयुर्वेद की मदद से आप अपने शरीर की भाषा को समझकर खुद को हमेशा के लिए स्वस्थ रख सकते हैं।

हर समय थकान रहना: बैटरी का खत्म होना

थकान होना बहुत ही आम बात है, लेकिन अगर आप 8 घंटे की अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह सामान्य नहीं है। यह शरीर की अंदरूनी ऊर्जा के पूरी तरह खत्म होने का बहुत बड़ा संकेत है।

  • खून की भारी कमी (Anemia): जब शरीर में आयरन या हीमोग्लोबिन की कमी होती है, तो अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती, जिससे इंसान हर समय सुस्त और कमज़ोर रहता है।
  • थायरॉयड का असंतुलन: अगर आपकी थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid gland) सुस्त पड़ गई है, तो आपका मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिससे ऊर्जा बननी बंद हो जाती है और वज़न बढ़ने लगता है।
  • लिवर की कमज़ोरी: फैटी लिवर या कमज़ोर लिवर शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकाल पाता। खून में गंदगी (Toxins) भरे होने के कारण शरीर हमेशा भारी और थका हुआ लगता है।

पेट में लगातार भारीपन और गैस: पाचन तंत्र का डैमेज

हम अक्सर बाहर का खाना खाने के बाद होने वाली गैस को ईनो या चूर्ण से दबा देते हैं। लेकिन रोज़ाना पेट का फूलना और गैस बनना आपके पाचन तंत्र की बर्बादी का सबसे बड़ा और स्पष्ट अलार्म है।

  • गट फ्लोरा (Gut Flora) का मरना: जब आप लगातार जंक फूड या एंटीबायोटिक्स खाते हैं, तो आंतों के गुड बैक्टीरिया मर जाते हैं। इससे खाना पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है।
  • इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS): अगर गैस के साथ आपको बार-बार वॉशरूम जाना पड़ता है या मरोड़ होती है, तो यह तनाव (Stress) और कमज़ोर आंतों के कारण होने वाले IBS का संकेत है।
  • लिवर और गॉलब्लैडर की समस्या: खाना खाने के तुरंत बाद पेट का फूल जाना इस बात का वॉर्निंग साइन है कि आपका लिवर खाने को पचाने के लिए पर्याप्त रस (Bile juice) नहीं बना पा रहा है।

बार-बार सिरदर्द होना: शरीर का प्रेशर अलार्म

सिरदर्द होने पर पेनकिलर खाना हमारी सबसे बड़ी आदत बन चुकी है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि यह सिरदर्द बार-बार क्यों लौट रहा है? यह दिमाग का नहीं, बल्कि शरीर के दूसरे अंगों का शोर है।

  • पानी की भारी कमी (Dehydration): ज़्यादातर सिरदर्द शरीर में पानी की कमी के कारण होते हैं। खून गाढ़ा हो जाने से दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुँचती, जिससे दर्द शुरू हो जाता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension): अगर सिर के पीछे के हिस्से में या सुबह के समय भारीपन और दर्द रहता है, तो यह आपके अनियंत्रित और हाई ब्लड प्रेशर की एक बहुत बड़ी वॉर्निंग हो सकती है।
  • गैस्ट्रिक हेडेक और कब्ज: आयुर्वेद के अनुसार, जब पेट साफ नहीं होता और भयंकर गैस बनती है, तो वह गैस ऊपर की तरफ (दिमाग की ओर) उछलती है, जो भयंकर सिरदर्द (Migraine) का कारण बनती है।

वज़न का अचानक घटना या बढ़ना

अगर आप बिना किसी सख़्त डाइट या भारी जिम के अचानक बहुत पतले हो रहे हैं या आपका वज़न तेज़ी से बढ़ रहा है, तो इसे इग्नोर न करें। यह आपके अंदरूनी हार्मोन्स के बेकाबू होने का स्पष्ट संकेत है।

  • डायबिटीज़ (Diabetes) की आहट: अगर आपको बहुत ज़्यादा भूख और प्यास लग रही है, बार-बार यूरिन आ रहा है और वज़न तेज़ी से गिर रहा है, तो यह ब्लड शुगर के खतरनाक स्तर पर पहुँचने का संकेत है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): अगर आपका वज़न (खासकर पेट की चर्बी) बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि आपका शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है, जो आगे चलकर शुगर का कारण बनेगा।
  • हार्मोनल इम्बैलेंस (PCOD/Thyroid): महिलाओं में अचानक वज़न बढ़ना अक्सर पीसीओडी (PCOD) या थायरॉयड हार्मोन्स के बिगड़ने का सबसे पहला लक्षण होता है।

बालों का गुच्छों में झड़ना और रूखी त्वचा

हम बालों के झड़ने को शैम्पू या पानी की खराबी मानकर नए-नए ब्यूटी प्रोडक्ट्स बदलते रहते हैं। सच्चाई यह है कि बाल और त्वचा आपके शरीर के अंदरूनी पोषण का सीधा आइना होते हैं।

  • पोषक तत्वों की कमी: विटामिन B12, विटामिन D और आयरन की भारी कमी का सबसे पहला असर बालों की जड़ों पर पड़ता है, जिससे वे कमज़ोर होकर टूटने लगते हैं।
  • तनाव (Stress) का कहर: जब आप भयंकर मानसिक तनाव में होते हैं, तो शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बालों की बजाय ज़रूरी अंगों की तरफ चला जाता है, जिससे बाल गुच्छों में झड़ने लगते हैं।
  • खून की अशुद्धि (Toxins in Blood): त्वचा का बार-बार रूखा होना, खुजली होना या मुंहासे निकलना इस बात का संकेत है कि आपका लिवर खराब हो चुका है और खून में टॉक्सिन्स भर गए हैं।

नींद न आना या कच्ची नींद: नर्वस सिस्टम का डैमेज

रात को बिस्तर पर करवटें बदलते रहना और सुबह थका हुआ उठना आज की जनरेशन की सबसे बड़ी बीमारी है। इसे सिर्फ काम का स्ट्रेस मानकर इग्नोर करना बहुत बड़ी भूल है।

  • कॉर्टिसोल (Cortisol) का हमेशा हाई रहना: लगातार तनाव में रहने से शरीर का स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) रात में भी कम नहीं होता, जो दिमाग को अलर्ट रखता है और नींद नहीं आने देता।
  • वात दोष का भयंकर प्रकोप: आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वात (वायु) बढ़ने से दिमाग चंचल हो जाता है और नसों में रूखापन आ जाता है, जिससे गहरी नींद (Deep sleep) टूट जाती है।
  • हार्ट और रेस्पिरेटरी खतरे: अगर रात को सोते समय आपकी सांस टूटती है या आपको खर्राटे आते हैं (Sleep Apnea), तो यह भविष्य में हार्ट अटैक और हाई बीपी का बहुत बड़ा रिस्क है।

आयुर्वेद इन संकेतों को कैसे समझता है? (त्रिदोष का असंतुलन)

आधुनिक विज्ञान जिसे महज़ लाइफस्टाइल डिसऑर्डर कहता है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले ही शरीर के तीन मुख्य स्तंभों—वात, पित्त और कफ—के बिगड़ने के रूप में बहुत गहराई से समझा था।

  • अग्नि का मंद होना: आयुर्वेद मानता है कि सभी बीमारियों की जड़ कमज़ोर पाचन (अग्नि) है। जब अग्नि मंद पड़ती है, तो शरीर थकान और भारीपन (कफ दोष) का संकेत देता है।
  • आम (Toxins) का निर्माण: बिना पचा हुआ खाना जब पेट में सड़ता है, तो वह आम (ज़हर) बनाता है। यह आम खून में घुलकर सिरदर्द, गैस और स्किन की बीमारियाँ पैदा करता है।
  • दोषों का अपनी जगह छोड़ना: जब हम शरीर के इन शुरुआती संकेतों (जैसे डकार, मल-मूत्र का वेग) को रोकते हैं, तो वात-पित्त-कफ अपनी जगह छोड़कर शरीर के कमज़ोर अंगों पर हमला कर देते हैं।

शरीर को अंदर से ताकत देने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें शरीर के इन शुरुआती अलार्म्स को शांत करने और अंदरूनी डैमेज को रिपेयर करने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं।

  • अश्वगंधा यह थकान, कमज़ोरी और नींद न आने की समस्या के लिए एक जादुई रसायन है। यह कॉर्टिसोल को तुरंत कम करता है और शरीर में भारी ताकत भरता है।
  • गिलोय यह शरीर के अंदर की सूजन को खत्म करने और लिवर को डिटॉक्स करने की सबसे बेहतरीन औषधि है। यह इम्युनिटी को ताकतवर बनाती है।
  • त्रिफला पेट की गैस, कब्ज और भारीपन को जड़ से खत्म करने के लिए त्रिफला का कोई मुकाबला नहीं है। यह पेट को साफ रखकर नई बीमारियों को जन्म लेने से रोकता है।
  • ब्राह्मी बार-बार होने वाले सिरदर्द और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए यह सीधा नर्वस सिस्टम पर काम करती है और दिमाग को भारी शांति देती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी शरीर को कैसे नया बनाती है?

जब शरीर में गंदगी (टॉक्सिन्स) बहुत ज़्यादा भर जाती है और ये वॉर्निंग साइंस भयंकर बीमारियों का रूप लेने लगते हैं, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी शरीर की डीप क्लीनिंग करती है।

  • विरेचन (Virechana): यह फैटी लिवर, गैस और स्किन की समस्याओं के लिए सबसे अचूक इलाज है। इसमें औषधीय जड़ी-बूटियों से दस्त लगाकर खून और लिवर की सारी गंदगी शरीर से बाहर निकाल दी जाती है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): नींद न आना, भयंकर सिरदर्द और स्ट्रेस के लिए यह एक जादुई थेरेपी है। माथे पर औषधीय तेल की लगातार धारा गिराने से दिमाग का सारा तनाव बहकर निकल जाता है।
  • अभ्यंग (Abhyanga): थकान और शरीर के दर्द को दूर करने के लिए औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। यह रूखी त्वचा और कमज़ोर नसों को तुरंत नमी और ताकत देती है।

बीमारियों से बचने के लिए त्रिदोष-शामक डाइट प्लान

आप जो खाते हैं, वही आपके शरीर को या तो बीमारी देता है या उसे बीमारियों से बचाता है। इन सभी शुरुआती संकेतों को खत्म करने के लिए सही डाइट का पालन करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

श्रेणी क्या अपनाएँ (अनुशंसित) किनसे परहेज़ करें (वर्जित)
आहार का सिद्धांत सात्विक, हल्का, गर्म और ताज़ा भोजन लें जो गैस न बनाए बासी और फ्रिज में रखा ठंडा खाना
प्राकृतिक पोषण गाय का शुद्ध घी, हरी सब्जियाँ, मूंग की दाल और ताज़े फल शामिल करें रूखा, पोषणहीन और प्रोसेस्ड भोजन
विरुद्ध आहार से बचें संतुलित और संगत (Compatible) खाद्य संयोजन अपनाएँ दूध के साथ खट्टे फल, मछली या नमक का सेवन
दैनिक पेय दिन भर में कम से कम 3 लीटर गुनगुना पानी, सुबह जीरा या धनिया पानी पिएं पानी कम पीना या ठंडा/फ्रिज का पानी

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसी जादुई पेनकिलर गोली नहीं है जो एक रात में आपके शरीर की सालों की कमज़ोरी को खत्म कर दे। शरीर की अंदरूनी मशीनरी को दोबारा रिसेट होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपका पेट साफ होगा; गैस, एसिडिटी और शरीर का भारीपन काफी कम होने लगेगा। नींद पहले से गहरी आएगी और सुबह उठने पर आपको फ्रेशनेस महसूस होगा।
  • 1 से 3 महीने तक: मेटाबॉलिज़्म सुधरने से बिना कारण वज़न का घटना या बढ़ना रुक जाएगा। बालों का झड़ना कम होगा, सिरदर्द गायब हो जाएगा और शरीर में एक नई ऊर्जा (Energy) लौट आएगी।
  • 3 से 6 महीने और उससे अधिक: आपका पूरा शरीर अंदर से डिटॉक्स हो जाएगा। इम्युनिटी इतनी मज़बूत हो जाएगी कि छोटे-मोटे मौसम के बदलाव आपको बीमार नहीं कर पाएंगे और आप एक स्वस्थ जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

शरीर के इन शुरुआती संकेतों के इलाज के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को लेकर दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य बीमारी रिपोर्ट में आने के बाद इलाज शुरू करना और लंबे समय तक दवाइयों पर निर्भर रहना शुरुआती लक्षण (Warnings) पर ही शरीर को संतुलित कर रोकथाम (Prevention) पर फोकस
शरीर को देखने का नज़रिया हर समस्या के लिए अलग विशेषज्ञ (जैसे गैस्ट्रो, न्यूरो) शरीर को एक संपूर्ण इकाई मानकर ‘अग्नि’ और ‘दोषों’ का एक साथ उपचार
डाइट और जीवनशैली की भूमिका लक्षणों को दवाइयों से दबाने पर ज़ोर सात्विक डाइट, पर्याप्त पानी और डिटॉक्स को उपचार का मुख्य आधार
लंबा असर दवाइयाँ बंद करते ही समस्या का दोबारा तेज़ी से उभरना जड़ी-बूटियों से शरीर को अंदर से मज़बूत बनाकर दीर्घकालिक संतुलन और आत्म-देखभाल क्षमता

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

सीने में अचानक भारीपन या दर्द: अगर आपको सीने के बाएँ हिस्से में बहुत तेज़ दर्द उठे जो आपके जबड़े या बाएँ हाथ की तरफ जा रहा हो (यह हार्ट अटैक का स्पष्ट संकेत है)।

अचानक धुंधला दिखना या बोलने में लड़खड़ाना: अगर आपको अचानक आंखों से दिखना बंद हो जाए, आवाज़ लड़खड़ाने लगे या शरीर का एक हिस्सा सुन्न पड़ जाए (यह ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है)।

मल या उल्टी में खून आना: अगर आपके मल का रंग बिल्कुल काला (तारकोल जैसा) हो जाए या उल्टी में ताज़ा खून आए, तो यह पेट या आंतों में अल्सर फटने की निशानी है।

बिना कारण भयंकर दर्द: अगर पेट में या पीठ के निचले हिस्से में अचानक ऐसा दर्द उठे जो बर्दाश्त न हो रहा हो (यह किडनी स्टोन या अपेंडिक्स का संकेत हो सकता है)।

लगातार तेज़ बुखार: अगर आपको कई दिनों से 102 डिग्री से ऊपर बुखार है और वज़न बहुत तेज़ी से गिर रहा है, तो यह शरीर में किसी भयंकर इन्फेक्शन का अलार्म है।

निष्कर्ष

हमारा शरीर एक बहुत ही वफादार और स्मार्ट साथी है जो कभी भी बिना बताए बीमार नहीं पड़ता। लगातार रहने वाली थकान, पेट की गैस, बार-बार होने वाला सिरदर्द और रातों की खराब नींद, ये सब महज़ मौसम का बदलाव या काम का स्ट्रेस नहीं हैं। ये आपके शरीर के वो लाल झंडे (Red Flags) हैं जो आपको बता रहे हैं कि अंदर की मशीनरी खराब हो रही है और उसे तुरंत आपकी मदद की ज़रूरत है। जब हम इन संकेतों को पेनकिलर्स, गैस की गोलियों या कॉफी के ज़रिए दबा देते हैं, तो हम असल में अपनी बीमारी को अंदर ही अंदर फैलने का और ज़्यादा मौका दे रहे होते हैं। यही छोटी-छोटी अनदेखियाँ आगे चलकर फैटी लिवर, डायबिटीज़, थायरॉयड और ऑटोइम्यून बीमारियों का भयंकर रूप ले लेती हैं। इन अलार्म्स को नज़रअंदाज़ करके जीवन भर बीमारियों का गुलाम बनने की कोई ज़रूरत नहीं है। आयुर्वेद आपको शरीर की भाषा समझने का एक बेहद सुरक्षित और प्राकृतिक रास्ता दिखाता है। सही आयुर्वेदिक उपचार, गिलोय और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों, पंचकर्म की डिटॉक्स थेरेपी और सही सात्विक जीवनशैली को अपनाकर आप अपने शरीर की कमज़ोरियों को दूर कर सकते हैं और बीमारियों को जन्म लेने से पहले ही खत्म कर सकते हैं। अपने शरीर की आवाज़ को सुनें, दर्द को छुपने न दें, और जीवा आयुर्वेद के साथ अपने शरीर को हमेशा के लिए ऊर्जावान और स्वस्थ बनाएं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। अगर 8 घंटे की अच्छी नींद के बाद भी आप थक रहे हैं, तो यह खून की कमी (एनीमिया), थायरॉयड, या कमज़ोर लिवर का स्पष्ट संकेत है। शरीर को ऊर्जा नहीं मिल पा रही है, इसे इग्नोर न करें।

रोज़ गैस बनना इस बात का सबूत है कि आपकी पाचन अग्नि कमज़ोर हो चुकी है और खाना पचने के बजाय पेट में सड़ रहा है। लगातार गैस बनने से फैटी लिवर और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी बीमारियाँ पैदा होती हैं।

जी हाँ, यह बहुत गंभीर बात है। अचानक वज़न गिरना डायबिटीज़ (शुगर) का संकेत हो सकता है, और बिना ज़्यादा खाए वज़न बढ़ना थायरॉयड या पीसीओडी (PCOD) जैसे हार्मोनल असंतुलन की शुरुआत होती है।

लगातार नींद न आना बताता है कि आपके शरीर का स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) बहुत हाई है और आपका नर्वस सिस्टम खतरे में है। यह स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक और भयंकर डिप्रेशन का कारण बन सकती है।

बिल्कुल नहीं। पेनकिलर्स सिर्फ दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करते हैं और लंबे समय में लिवर और किडनी को बर्बाद कर देते हैं। सिरदर्द अक्सर पानी की कमी, गैस या हाई बीपी के कारण होता है, जिसकी जड़ को ठीक करना ज़रूरी है।

आयुर्वेद मानता है कि खराब जीवनशैली के कारण जब पेट की अग्नि मंद पड़ जाती है, तो शरीर में आम (गंदगी) बनता है। यही आम वात, पित्त और कफ दोषों को बिगाड़कर शरीर के हर हिस्से में ये बीमारियाँ पैदा करता है।

बालों का तेज़ी से झड़ना शरीर में भारी पोषण की कमी (जैसे विटामिन B12, आयरन) और बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव (Stress) का सीधा परिणाम है। यह सिर्फ शैम्पू बदलने से ठीक नहीं होता।

जी हाँ! पंचकर्म (जैसे विरेचन और शिरोधारा) शरीर की डीप क्लीनिंग करता है। यह सालों से लिवर, नसों और खून में जमे ज़हरीले टॉक्सिन्स को बाहर निकाल देता है, जिससे शरीर दोबारा एकदम नया और स्वस्थ महसूस करता है।

विरुद्ध आहार (जैसे दूध के साथ खट्टे फल या नमक) पेट में जाकर सीधा ज़हर बन जाता है। यह खून को अशुद्ध करता है और स्किन की एलर्जी, भारीपन और ऑटोइम्यून बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बनता है।

सही आयुर्वेदिक डाइट और जड़ी-बूटियों (जैसे अश्वगंधा, गिलोय) के इस्तेमाल से 2 से 3 हफ्तों में ही शरीर में नई ऊर्जा आ जाती है और गैस खत्म हो जाती है। पूरी तरह स्वस्थ और इम्युनिटी को मज़बूत होने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।

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