Diseases Search
Close Button
 
 

Gond Katira और Gond में क्या अंतर है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि पंसारी की दुकान पर मिलने वाला हर 'गोंद' एक ही होता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि सर्दियों में जो गोंद के लड्डू आपको भयंकर सर्दी से बचाते हैं, वही गोंद अगर आपने गर्मियों में खा लिया, तो आपके पेट में कितनी भयंकर गर्मी और जलन हो सकती है? दरअसल, 'गोंद' और 'गोंद कतीरा' दोनों दिखने में भले ही सगे भाई जैसे लगें, लेकिन दोनों का शरीर पर असर बिल्कुल उल्टा होता है। सिर्फ किसी के कहने पर कुछ भी खा लेने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि बढ़ सकती है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई आम कन्फ्यूजन नहीं है, बल्कि आपके शरीर की ज़रूरत के हिसाब से सही चीज़ चुनने का मामला है।

शरीर के अंदर जाकर ये दोनों गोंद असल में करते क्या हैं? (बुनियादी फर्क) बबूल या कीकर के पेड़ से निकलने वाले गोंद (Edible Gum) की तासीर बेहद गर्म होती है। जब आप इसे घी में भूनते हैं, तो यह फूल जाता है और आपके शरीर को अंदर से गर्माहट और ताकत देता है। वहीं दूसरी तरफ, गोंद कतीरा (Tragacanth Gum) की तासीर बर्फ जैसी ठंडी होती है। इसे पकाया या भुना नहीं जाता, बल्कि रात भर पानी में भिगोया जाता है। पानी में जाते ही यह जेली की तरह फूलकर अपने आकार से दस गुना बड़ा हो जाता है। जब गर्म हवाएँ चलती हैं, तो यह कतीरा आपके पेट की आग को शांत करता है।

क्या रंग-रूप एक जैसा होने का मतलब दोनों के फायदे भी एक हैं?

 जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार लोग बाज़ार से गोंद कतीरा समझकर सादा गोंद ले आते हैं और उसे पानी में भिगो देते हैं। सादा गोंद पानी में पूरी तरह घुल जाता है और चिपचिपा हो जाता है, जबकि कतीरा पानी में कभी नहीं घुलता, वह सिर्फ फूलता है। अगर आप कड़कड़ाती ठंड में यह सोचकर गोंद कतीरा खा रहे हैं कि इससे घुटनों का दर्द ठीक होगा, तो फायदे की जगह आपकी छाती में कफ जम जाएगा। समस्या दोनों गोंद में नहीं, बल्कि हमारी आधी-अधूरी जानकारी में है।

गलत मौसम में गलत गोंद खाने से आपकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

 जब हम बिना सोचे-समझे इनका इस्तेमाल करते हैं, तो शरीर के अंदर अजीबोगरीब बदलाव होते हैं:

 पेट की भयंकर गर्मी: अगर आप मई-जून की गर्मी में बबूल का सादा गोंद खा लें, तो शरीर में पित्त बहुत तेज़ी से बढ़ जाएगा। 

सर्दी-ज़ुकाम और कफ: सर्दियों के मौसम में गोंद कतीरा खाने से छाती में जकड़न और गले में खराश हो सकती है।

 कब्ज़ की शिकायत: गोंद कतीरा अगर बिना पर्याप्त पानी के खा लिया जाए, तो यह आँतों का सारा पानी सोख लेता है।

 वज़न का अचानक बढ़ना: सादे गोंद को हमेशा ढेर सारे घी और मीठे के साथ बनाया जाता है, जो तेज़ी से वज़न बढ़ा सकता है।

क्या इनका गलत इस्तेमाल शरीर में किसी बड़ी परेशानी का संकेत बन सकता है? 

अगर आप रोज़ाना गलत तरीके से इन दोनों में से किसी का भी सेवन कर रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करें। यह शरीर में कई दिक्कतें पैदा कर सकता है:

 गंभीर डिहाइड्रेशन: कतीरा बहुत पानी सोखता है, अगर आप इसके साथ पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो नसों में खुश्की आ सकती है।

 गैस्ट्रिक ब्लॉकेज: बिना ठीक से भीगा हुआ गोंद कतीरा आँतों में जाकर फँस सकता है, जिससे पेट में तेज़ दर्द उठता है। 

हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा: कमज़ोर पाचन वाले अगर रोज़ाना घी में तला हुआ भारी गोंद खाएँ, तो हार्ट की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

 स्किन एलर्जी: कुछ लोगों को पेड़ के गोंद से प्राकृतिक रूप से एलर्जी होती है, जिससे चकत्ते या खुजली हो सकती है।

प्राचीन आयुर्वेद इन दोनों चमत्कारी चीज़ों को किस नज़रिए से देखता है? 

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ का ही सारा खेल है। जब आप कमज़ोर महसूस करते हैं या जोड़ों में वात (हवा) बढ़ जाती है, तो आयुर्वेद सर्दियों में गर्म गोंद खाने की सलाह देता है, क्योंकि यह वात को शांत करके हड्डियों को ग्रीस (चिकनाई) देता है। इसके उलट, जब गर्मियों में शरीर का पित्त (गर्मी) बेकाबू हो जाता है, पेट में अल्सर या पेशाब में जलन होती है, तब आयुर्वेद गोंद कतीरा को अमृत मानता है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप मौसम और अपने दोष को नहीं समझेंगे, फायदा नहीं मिलेगा।

हड्डियों की कमज़ोरी और पेट की जलन दूर करने वाले इनके बेहतरीन साथी प्रकृति ने हमें इन दोनों गोंद के साथ मिलाने के लिए कुछ बेहतरीन चीज़ें दी हैं जो इनका असर दोगुना कर देती हैं:

 गर्म दूध और ड्राई फ्रूट्स: सादे गोंद को घी में भूनकर जब बादाम-अखरोट के साथ खाया जाता है, तो यह दिमाग और हड्डियों को फौलाद बना देता है।

 देसी गुलाब का शर्बत: गर्मियों में गोंद कतीरा को गुलाब के शर्बत में मिलाकर पीने से लू से तुरंत बचाव होता है। मिश्री और सौंफ: कतीरा को अगर धागे वाली मिश्री के साथ लिया जाए, तो यह पेट के अल्सर और एसिडिटी को एकदम से शांत करता है।

 सोंठ (सूखी अदरक): सर्दियों में गोंद के लड्डू में सोंठ डालने से यह घुटनों के दर्द को जादू की तरह खींच लेता है।

क्या कमज़ोर पाचन वालों के लिए भी दोनों तरह के गोंद सुरक्षित हैं?

 बिलकुल नहीं! आप जितना भारी खाना खाते हैं, शरीर को उसे पचाने के लिए उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है। बबूल का गोंद पचने में बहुत भारी होता है। अगर आपका हाज़मा पहले से कमज़ोर है, तो इसे पचाने के लिए आपके पेट को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलेगी, जिससे यह पेट में पड़ा-पड़ा गैस और बदहज़मी बनाएगा। वहीं गोंद कतीरा पचने में हल्का होता है और फाइबर से भरपूर होता है, लेकिन अगर इसे बिना अच्छे से फुलाए खा लिया, तो यह आँतों की सारी नमी खींचकर भयंकर कब्ज़ कर देगा।

वो आम गलतियाँ जो इन दोनों के फायदों को नुकसान में बदल देती हैं हम अक्सर जाने-अनजाने में इस्तेमाल के वक्त कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो परेशानी बढ़ा देता है:

  • गोंद कतीरा को गर्म दूध में उबालना: इससे इसके सारे ठंडे गुण खत्म हो जाते हैं और यह पेट खराब कर सकता है।
  • सादे गोंद को कच्चा चबाना: बिना घी में भुने सादा गोंद दाँतों में चिपकता है और पेट में भयंकर दर्द कर सकता है।
  • कतीरा भिगोने में जल्दबाज़ी: इसे सिर्फ 1-2 घंटे भिगोकर खाना खतरनाक है, इसे कम से कम 8-10 घंटे का समय चाहिए।
  • दोनों गोंद को एक साथ मिलाना: इनकी तासीर एकदम उल्टी है, इन्हें एक साथ खाने से शरीर का सिस्टम पूरी तरह बिगड़ सकता है।
  • चीनी का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल: इनके साथ ढेर सारी सफेद चीनी मिलाने से इनका औषधीय गुण खत्म हो जाता है।

किन दूसरी बीमारियों में बिना सोचे-समझे इन्हें खाना मुसीबत बन सकता है?

 कई बार आप बिल्कुल सही तरीके से इन्हें खाते हैं, फिर भी कुछ दूसरी अंदरूनी बीमारियों की वजह से ये नुकसान कर सकते हैं: 

अस्थमा (Asthma): गोंद कतीरा की ठंडी तासीर फेफड़ों में कफ जमा कर सकती है, जिससे साँस लेने में भारीपन आ सकता है। 

डायबिटीज़: गोंद के लड्डू अक्सर बहुत मीठे होते हैं, जो शुगर के मरीज़ों का ग्लूकोज़ लेवल तुरंत बढ़ा सकते हैं।

 खराब लिवर:अगर फैटी लिवर है, तो गोंद को पचाने के लिए ज़रूरी घी और फैट लिवर पर एक्स्ट्रा प्रेशर डालता है।

 लो ब्लड प्रेशर:बहुत ज़्यादा कतीरा खाने से शरीर एकदम ठंडा पड़ सकता है और बीपी और नीचे जा सकता है।

बाज़ार में मिलने वाले पैकेटबंद पाउडर का रोज़ाना इस्तेमाल कब बन जाता है खतरा?

 आजकल लोग समय बचाने के लिए बाज़ार से पिसा हुआ गोंद या कतीरा का पाउडर ले आते हैं या सप्लीमेंट खा लेते हैं। ये चीज़ें तुरंत इस्तेमाल में तो आसान लगती हैं, लेकिन रोज़ाना इनका भरोसा करना खतरनाक है। अक्सर पाउडर में मिलावट होती है या यह पता ही नहीं चलता कि वह असली कतीरा है या कोई और केमिकल। प्रकृति ने इन्हें जिस रूप में दिया है, शरीर उन्हें उसी रूप में सबसे अच्छे से पहचानता और पचाता है। अगर आप रोज़ नकली पाउडर खाएँगे, तो शरीर को कमज़ोरी के सिवा कुछ नहीं मिलेगा।

महंगे इलाजों की जगह इन आसान तरीकों से लें इनका असली मज़ा आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर इनके बेशुमार फायदों का आनंद ले सकते हैं:

रात को एक चम्मच गोंद कतीरा पानी में भिगो दें, सुबह उसमें थोड़ा नींबू और पुदीना डालकर पिएँ, पेट की गर्मी छूमंतर हो जाएगी। सर्दियों में कमर दर्द हो, तो सादे गोंद को देसी घी में हल्का फुलाकर क्रश कर लें और उसे गर्म दूध के साथ लें। महिलाओं में कमज़ोरी लगने पर गोंद को मखाने के साथ भूनकर स्नैक्स की तरह खाना बहुत ताकत देता है। गर्मियों में लू लग जाए, तो कतीरा को तरबूज़ के रस में मिलाकर पिएँ, यह शरीर को अंदर से एकदम तरोताज़ा कर देगा।

हमेशा जवान और फिट रहने के लिए इन्हें अपनी रूटीन में कैसे ढालें? 

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप इनका बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं: मौसम के हिसाब से चुनें: जैसे ही सर्दियाँ शुरू हों, किचन में सादा गोंद ले आएँ और गर्मियाँ आते ही उसे हटाकर गोंद कतीरा रख लें। 

पानी का भरपूर इस्तेमाल: कतीरा खाते समय दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएँ, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।

 मात्रा का ध्यान रखें: कोई भी गोंद हो, दिन भर में 1-2 चम्मच से ज़्यादा इसका इस्तेमाल बिल्कुल न करें। सही समय पर खाएँ: कतीरा हमेशा दिन में खाएँ ताकि वह पच जाए, और ताकत वाला गोंद सुबह या शाम को दूध के साथ लें।

आयुर्वेद शरीर की रिकवरी के लिए इन पर इतना भरोसा क्यों करता है?

 आयुर्वेद सिर्फ कमज़ोरी को नहीं छुपाता, बल्कि उसके जड़ तक जाता है। आयुर्वेद यह मानता है कि उम्र बढ़ने के साथ जो कमज़ोरी आती है, वह शरीर के टिशू (धातुओं) के सूखने की वजह से होती है। इसलिए नाड़ी वैद्य सर्दियों में गोंद देकर शरीर का 'स्नेहन' (चिकनाहट) करते हैं। वहीं, जब शरीर में ज़हरीले तत्व (टॉक्सिन्स) बढ़ जाते हैं, तो गोंद कतीरा देकर अंदरूनी सफाई (डिटॉक्स) की जाती है। आयुर्वेद में आपका डाइट प्लान कुछ इस तरह सेट किया जाता है जो आपके शरीर के सातों धातुओं को पोषण दे और इम्यूनिटी को बढ़ाए।

इनके इस्तेमाल के दौरान डॉक्टर के पास भागने की नौबत कब आ सकती है? 

घरेलू उपाय के तौर पर इन्हें खाने के बाद भी अगर कुछ अजीब महसूस हो, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

 गोंद कतीरा खाने के बाद गले में कुछ फँसा हुआ महसूस हो और साँस लेने में ज़रा भी दिक्कत होने लगे। गोंद खाने के तुरंत बाद शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाएँ या भयंकर खुजली शुरू हो जाए (यह एलर्जी का संकेत है)। कतीरा खाने के बाद कई दिनों तक भयंकर कब्ज़ हो जाए और पेट दर्द के साथ फूलने लगे। प्रेगनेंसी के दौरान अगर बिना डॉक्टर से पूछे आपने गलत तासीर का गोंद खा लिया हो और बेचैनी होने लगे।

साधारण गोंद और गोंद कतीरा के बीच के सबसे बड़े अंतर क्या हैं?

  • तुलना का आधार सादा गोंद (Edible Gum/Gond) गोंद कतीरा (Gond Katira)
    रंग और रूप हल्के भूरे या पीले रंग का होता है एकदम सफेद और पारदर्शी (क्रिस्टल जैसा) होता है
    पानी में घुलनशीलता पानी में पूरी तरह घुल जाता है पानी सोखकर स्पंज या जेली की तरह फूल जाता है
    तासीर (प्रकृति) बहुत अधिक गर्म तासीर वाला माना जाता है बर्फ जैसी ठंडी तासीर वाला माना जाता है
    खाने का तरीका आमतौर पर घी में भूनकर या तलकर खाया जाता है पानी या दूध में भिगोकर सेवन किया जाता है
    मुख्य फायदे हड्डियों और जोड़ों को मजबूती देने तथा सर्दियों की कमजोरी दूर करने में उपयोगी माना जाता है लू, एसिडिटी और नकसीर जैसी गर्मी से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है
    खाने का सही मौसम मुख्य रूप से सर्दियों (ठंड) में सेवन किया जाता है मुख्य रूप से गर्मियों में सेवन किया जाता है

निष्कर्ष

हमेशा याद रखें कि प्रकृति ने हमें जो कुछ भी दिया है, उसके पीछे एक गहरा विज्ञान छिपा है। आप जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर आपके शरीर के तापमान और पाचन पर पड़ता है। इसलिए गोंद और गोंद कतीरा को एक ही चीज़ मानकर इनका इस्तेमाल करने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपने शरीर की आवाज़ को सुनें। मौसम के हिसाब से अपने खानपान को बदलें, सही जानकारी जुटाएँ और सुनी-सुनाई बातों पर आँख बंद करके भरोसा न करें। जब आपका शरीर अंदर से संतुलित रहेगा, तो यकीनन आप हर मौसम में पूरी तरह से तंदुरुस्त और खुश रहेंगे।

References

Tragacanth - Wikipedia

Gum Tragacanth (GT): A Versatile Biocompatible Material beyond Borders - PMC

The effects of dietary gum tragacanth in man - PubMed

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

 बिल्कुल! गोंद कतीरा में भरपूर मात्रा में एंटी-एजिंग गुण और प्रोटीन होते हैं। गर्मियों में इसका नियमित सेवन करने से स्किन में कसाव आता है और शरीर की गर्मी शांत होने से बालों का झड़ना भी काफी हद तक कम हो जाता है।

 आमतौर पर 3 साल से छोटे बच्चों को कोई भी गोंद नहीं देना चाहिए क्योंकि उनका पाचन तंत्र इसे झेल नहीं सकता। बड़े बच्चों को सर्दियों में बहुत थोड़ी मात्रा में गोंद के लड्डू और गर्मियों में चुटकी भर कतीरा पानी में डालकर दिया जा सकता है।

 असली गोंद कतीरा पानी में डालते ही क्रिस्टल की तरह फूलने लगता है और एक गाढ़ी, बिना स्वाद वाली जेली बन जाता है। अगर आपका कतीरा पानी में घुल रहा है या उसका रंग पीला पड़ गया है, तो वह मिलावटी या सादा गोंद हो सकता है।

 गोंद कतीरा बहुत सख्त होता है, इसे सीधा चबाने से दाँत टूट भी सकते हैं। इसके अलावा बिना भीगा हुआ कतीरा गले में चिपक कर साँस की नली को ब्लॉक कर सकता है। इसलिए इसे हमेशा पानी में अच्छी तरह फुलाकर ही खाना चाहिए।

 पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अक्सर कमज़ोरी और कमर दर्द की शिकायत रहती है। ऐसे में सर्दियों के दिनों में सादे गोंद को घी में भूनकर खाने से शरीर को बहुत ताकत मिलती है और दर्द में काफी आराम पहुँचता है।

हाँ, गोंद कतीरा में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट बहुत कम होते हैं, और फाइबर बहुत ज़्यादा होता है। इसलिए डाइटिंग करने वाले लोग इसे अपनी स्मूदी या नींबू पानी में आसानी से शामिल कर सकते हैं, यह पेट को लंबे समय तक भरा रखता है।

 हाँ, अगर आपने ज़्यादा कतीरा भिगो लिया है, तो आप उस फूली हुई जेली को एक एयरटाइट डिब्बे में बंद करके फ्रिज में रख सकते हैं। यह 3 से 4 दिन तक बिल्कुल खराब नहीं होता और आप इसे थोड़ा-थोड़ा इस्तेमाल कर सकते हैं।

 हर पेड़ के गोंद का मेडिकल इस्तेमाल अलग होता है। नीम का गोंद खून साफ करने के लिए जाना जाता है, लेकिन यह आम खाने वाला गोंद नहीं है। किसी भी पेड़ का गोंद खाने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।

गोंद कतीरा की तासीर ठंडी होती है, इसे गर्म चाय या कॉफी में बिल्कुल नहीं मिलाना चाहिए। ऐसा करने से इसके सारे औषधीय गुण और फाइबर नष्ट हो जाते हैं, और यह पेट में जाकर गैस या एसिडिटी का कारण बन सकता है।

गोंद कतीरा सीधे तौर पर हार्मोन नहीं बदलता, लेकिन यह शरीर के स्ट्रेस लेवल और मेटाबॉलिज़्म को रिलैक्स करता है। PCOS या थायराइड में पेट की सूजन और गर्मी बढ़ जाती है, जिसे शांत करने में कतीरा एक बहुत ही बेहतरीन सपोर्टिव डाइट का काम करता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us