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Sabja Seeds और Chia Seeds में क्या फर्क है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि सुपरमार्केट या पंसारी की दुकान पर मिलने वाले काले-काले छोटे बीज एक ही होते हैं। सब्जा (Sabja) और चिया (Chia) सीड्स को लेकर लोगों में बहुत बड़ा कन्फ्यूजन है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जो चिया सीड्स वज़न घटाने और दिल को ताकत देने के लिए खाए जाते हैं, वहीं अगर आपने गर्मियों में शरीर को ठंडा करने के लिए चिया की जगह सब्जा समझकर गलत तरीके से खा लिया, तो आपके शरीर का सिस्टम कैसे बिगड़ सकता है?

दरअसल, 'सब्जा सीड्स' (Sweet Basil Seeds) और 'चिया सीड्स' दोनों दिखने में भले ही सगे भाई या चचेरे भाई जैसे लगें, लेकिन दोनों की तासीर, काम करने का तरीका और शरीर पर असर बिल्कुल अलग होता है। सिर्फ इंटरनेट पर कोई वीडियो देखकर या किसी के कहने पर कुछ भी खा लेने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि बढ़ सकती है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई आम कन्फ्यूजन नहीं है, बल्कि आपके शरीर की ज़रूरत के हिसाब से सही सुपरफूड चुनने का मामला है।

शरीर के अंदर जाकर ये दोनों बीज करते क्या हैं? 

सब्जा सीड्स (Sabja Seeds): ये मीठी तुलसी के बीज होते हैं और इनकी तासीर बर्फ जैसी ठंडी होती है। जैसे ही ये आपके पेट में जाते हैं, ये शरीर की एक्स्ट्रा गर्मी (पित्त) को सोख लेते हैं। पानी में डालते ही ये कुछ ही सेकंड में जेली की तरह फूल जाते हैं। जब गर्म हवाएँ चलती हैं या पेट में एसिडिटी की आग लगी होती है, तो सब्जा आपके पेट को तुरंत शांत करता है।

चिया सीड्स (Chia Seeds): दूसरी तरफ चिया सीड्स का काम शरीर को इंस्टेंट ठंडक देना नहीं, बल्कि उसे लंबी ऊर्जा और ताकत देना है। इनकी तासीर सामान्य (न बहुत गर्म, न बहुत ठंडी) मानी जाती है। ये ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और फाइबर का पावरहाउस हैं। शरीर के अंदर जाकर ये बहुत धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगती और आपके दिल व दिमाग को बेहतरीन पोषण मिलता है।

क्या रंग-रूप एक जैसा होने का मतलब दोनों के फायदे भी एक हैं?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार लोग बाज़ार से सब्जा समझकर चिया ले आते हैं और उसे फालूदा या शर्बत में डाल देते हैं।

ध्यान दें, सब्जा के बीज एकदम जेड ब्लैक (गहरे काले) रंग के होते हैं और आकार में आँसू की बूँद जैसे होते हैं। इन्हें पानी में डालते ही ये तुरंत एक पारदर्शी सफेद जेली की लेयर बना लेते हैं। जबकि चिया सीड्स का रंग मिला-जुला होता हैकुछ काले, कुछ सफेद और कुछ भूरे (Grey)। ये आकार में थोड़े बड़े और ओवल (अंडाकार) होते हैं। चिया को पानी में फूलने के लिए 20 से 30 मिनट का समय चाहिए होता है। अगर आप एसिडिटी दूर करने के लिए चिया खा रहे हैं, तो वह सब्जा की तरह तुरंत ठंडक का जादू नहीं दिखाएगा। समस्या इन बीजों में नहीं, बल्कि हमारी आधी-अधूरी जानकारी में है।

गलत मौसम और तरीके से गलत बीज खाने से आपकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जब हम बिना सोचे-समझे इनका इस्तेमाल करते हैं, तो शरीर के अंदर अजीबोगरीब बदलाव होते हैं:

  • पेट की भयंकर गर्मी और कब्ज़: अगर आप चिया सीड्स को बिना ठीक से भिगोए या पर्याप्त पानी पिए बिना खा लें, तो ये आँतों का सारा पानी सोख लेंगे और आपको भयंकर कब्ज़ हो जाएगी।
  • सर्दी-ज़ुकाम और कफ: कड़ाके की सर्दियों में अगर आप रोज़ाना सब्जा सीड्स का पानी पी रहे हैं, तो इसकी बेहद ठंडी तासीर आपकी छाती में कफ जमा देगी और गले में जकड़न पैदा कर देगी।
  • गले में चोकिंग (फँसना): सब्जा को कभी भी कच्चा या सूखा नहीं खाया जा सकता। अगर कोई इसे सूखा निगल ले, तो यह गले की नमी खींचकर तुरंत फूल जाएगा और साँस की नली को ब्लॉक कर सकता है।
  • ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना: सब्जा के ज़्यादा इस्तेमाल से ब्लड प्रेशर लो हो सकता है, इसलिए लो बीपी वालों को इसे संभलकर खाना चाहिए।

क्या इनका गलत इस्तेमाल शरीर में किसी बड़ी परेशानी का संकेत बन सकता है?

अगर आप रोज़ाना गलत तरीके से इन दोनों में से किसी का भी सेवन कर रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करें। यह शरीर में कई दिक्कतें पैदा कर सकता है:

  • गैस्ट्रिक ब्लॉकेज: चिया और सब्जा दोनों अपने वज़न से कई गुना ज़्यादा पानी सोखते हैं। कम पानी पीने वालों की आँतों में ये जेली का सख्त गोला बना सकते हैं, जिससे पेट में तेज़ दर्द उठता है।
  • खून का ज़्यादा पतला होना: चिया सीड्स ओमेगा-3 से भरपूर होते हैं, जो प्राकृतिक रूप से खून को पतला करते हैं। अगर आप पहले से ही ब्लड थिनर दवाइयाँ ले रहे हैं, तो चिया का रोज़ाना सेवन रिस्क बढ़ा सकता है।
  • हार्मोन्स में बदलाव: सब्जा सीड्स एस्ट्रोजन लेवल को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • गंभीर डिहाइड्रेशन: अगर इन्हें खाने के बाद आपने दिन भर भरपूर पानी नहीं पिया, तो नसों में खुश्की आ सकती है और सिरदर्द शुरू हो सकता है।

प्राचीन आयुर्वेद इन दोनों चमत्कारी चीज़ों को किस नज़रिए से देखता है?

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ का ही सारा खेल है।

सब्जा सीड्स भारत की ही उपज हैं और आयुर्वेद इन्हें 'पित्त नाशक' मानता है। जब गर्मियों में शरीर का पित्त (गर्मी) बेकाबू हो जाता है, पेट में अल्सर, पेशाब में जलन या मुहाँसे निकलते हैं, तब आयुर्वेद सब्जा को अमृत मानता है।

दूसरी ओर, चिया सीड्स विदेशी (मेक्सिको मूल के) हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इन्हें 'मधुर और स्निग्ध' (मीठा और चिकना) माना जाता है, जो शरीर के 'वात' दोष को शांत करते हैं। यह शरीर के टिशूज़ को मज़बूत करता है और ओजस बढ़ाता है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप मौसम और अपने दोष को नहीं समझेंगे, फायदा नहीं मिलेगा।

बेहतरीन पोषण और पेट की जलन दूर करने वाले इनके बेहतरीन साथी

प्रकृति ने हमें इन दोनों बीजों के साथ मिलाने के लिए कुछ बेहतरीन चीज़ें दी हैं जो इनका असर दोगुना कर देती हैं:

  • देसी गुलाब का शर्बत और सब्जा: गर्मियों में सब्जा को गुलाब के शर्बत या रूह अफ़ज़ा में मिलाकर पीने से लू से तुरंत बचाव होता है और पेट की आग बुझती है।
  • ओट्स, दूध और चिया: चिया सीड्स को रातभर दूध या बादाम के दूध में ओट्स के साथ भिगोकर सुबह खाने से यह दिमाग और हड्डियों को फौलाद बना देता है।
  • नींबू पानी और सब्जा: पेट की चर्बी घटाने और बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए सब्जा को ताज़े नींबू पानी में मिलाकर पीना जादू की तरह काम करता है।
  • दही और चिया: चिया सीड्स को ताज़े दही और ताज़े फलों के साथ लेने से आँतों के गुड बैक्टीरिया (Probiotics) को जबरदस्त ताकत मिलती है।

क्या कमज़ोर पाचन वालों के लिए भी दोनों तरह के बीज सुरक्षित हैं?

बिलकुल नहीं! आप जितना फाइबर खाते हैं, शरीर को उसे पचाने के लिए उतनी ही मेहनत करनी और पानी की ज़रूरत पड़ती है। चिया सीड्स पचने में काफी भारी होते हैं क्योंकि इनमें सॉल्युबल और इनसॉल्युबल दोनों तरह के फाइबर कूट-कूट कर भरे होते हैं। अगर आपका हाज़मा पहले से कमज़ोर है और आपको गैस की समस्या है, तो चिया सीड्स पेट में पड़ा-पड़ा गैस और भारीपन बनाएगा।

वहीं सब्जा सीड्स पचने में थोड़े हल्के होते हैं और कब्ज़ व एसिडिटी को तुरंत तोड़ते हैं, लेकिन दोनों ही मामलों में नियम एक ही है इन्हें बिना अच्छे से फुलाए और बिना खूब सारा पानी पिए खाना आँतों की सारी नमी खींचकर भयंकर कब्ज़ कर देगा।

वो आम गलतियाँ जो इन दोनों के फायदों को नुकसान में बदल देती हैं

हम अक्सर जाने-अनजाने में इस्तेमाल के वक्त कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो परेशानी बढ़ा देता है:

  • बीजों को कच्चा चबाना: सब्जा को सूखा खाना तो सीधा गले के लिए खतरा है, और चिया को सूखा खाने से उसके पोषक तत्व शरीर ठीक से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता।
  • भिगोने में जल्दबाज़ी: सब्जा 5 मिनट में तैयार हो जाता है, लेकिन चिया को कम से कम 30 मिनट से 2 घंटे तक का समय चाहिए।
  • गर्म चीज़ों में तुरंत डालना: इन्हें खौलते हुए दूध या पानी में उबालने से इनके विटामिन्स और ओमेगा-3 जैसे अनमोल गुण नष्ट हो जाते हैं।
  • चीनी का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल: फालूदा या शर्बत में इनके साथ ढेर सारी सफेद चीनी मिलाने से इनका असली औषधीय गुण खत्म हो जाता है और यह सिर्फ एक मीठी ड्रिंक बनकर रह जाते हैं।

किन दूसरी बीमारियों में बिना सोचे-समझे इन्हें खाना मुसीबत बन सकता है?

कई बार आप बिल्कुल सही तरीके से इन्हें खाते हैं, फिर भी कुछ दूसरी अंदरूनी बीमारियों की वजह से ये नुकसान कर सकते हैं:

  • अस्थमा (Asthma):सब्जा की ठंडी तासीर फेफड़ों में कफ जमा कर सकती है, जिससे अस्थमा के मरीज़ों को साँस लेने में भारीपन आ सकता है।
  • लो ब्लड प्रेशर: सब्जा खाने से शरीर एकदम ठंडा पड़ सकता है और बीपी और नीचे जा सकता है।
  • प्रोस्टेट कैंसर का रिस्क: कुछ पुरानी स्टडीज़ के मुताबिक, चिया में मौजूद बहुत अधिक एएलए (ALA) फैटी एसिड का ओवरडोज़ प्रोस्टेट की समस्याओं वाले पुरुषों के लिए ठीक नहीं माना जाता।
  • सर्जरी से पहले: क्योंकि चिया सीड्स खून पतला कर सकते हैं, इसलिए किसी भी सर्जरी से कुछ दिन पहले इनका सेवन बंद कर देना चाहिए।

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान शरीर की रिकवरी के लिए इन पर इतना भरोसा क्यों करता है?

आधुनिक विज्ञान और पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में ओमेगा-3 और कोलेजन की कमी होने लगती है। चिया सीड्स ओमेगा-3 देकर हार्ट ब्लॉकेज के रिस्क को कम करते हैं और हड्डियों के लिए कैल्शियम का शानदार सोर्स बनते हैं। वहीं, आयुर्वेद मानता है कि जब शरीर में ज़हरीले तत्व (टॉक्सिन्स) और एसिडिटी बढ़ जाती है, तो सब्जा सीड्स देकर अंदरूनी सफाई (डिटॉक्स) की जाती है। यह आपके शरीर को अंदर से धोकर साफ कर देता है और त्वचा पर गज़ब का निखार लाता है।

इनके इस्तेमाल के दौरान डॉक्टर के पास भागने की नौबत कब आ सकती है?

घरेलू उपाय के तौर पर इन्हें खाने के बाद भी अगर कुछ अजीब महसूस हो, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए

  • बीज खाने के बाद गले में कुछ फँसा हुआ महसूस हो और साँस लेने में ज़रा भी दिक्कत होने लगे (खासतौर पर बच्चों में)।
  • चिया खाने के बाद चेहरे, होंठ या जीभ पर सूजन आ जाए या भयंकर खुजली शुरू हो जाए (यह एलर्जी का संकेत है)।
  • इन्हें खाने के बाद कई दिनों तक भयंकर कब्ज़ हो जाए और पेट दर्द के साथ फूलने लगे।
  • खून को पतला करने वाली दवाइयाँ ले रहे हों और शरीर पर बिना वजह नीले निशान (Bruising) पड़ने लगें।

सब्जा सीड्स और चिया सीड्स के बीच के सबसे बड़े अंतर क्या हैं?

तुलना का आधार सब्जा सीड्स (Sabja / Sweet Basil Seeds) चिया सीड्स (Chia Seeds)
रंग और रूप एकदम गहरे काले (Jet Black) रंग के और आँसू के आकार के होते हैं। काले, सफेद और भूरे रंग के मिक्स, और आकार में अंडाकार (Oval) होते हैं।
पानी में घुलनशीलता पानी में डालते ही कुछ सेकंड में पारदर्शी जेली जैसी परत बना लेते हैं। पानी सोखने में समय लेते हैं (करीब 20-30 मिनट) और तब जाकर फूलते हैं।
तासीर (प्रकृति) बहुत अधिक ठंडी तासीर वाले माने जाते हैं। सामान्य तासीर (न बहुत ठंडी, न गर्म) वाले माने जाते हैं, शरीर को ऊर्जा देते हैं।
खाने का तरीका इन्हें कभी भी सूखा या कच्चा नहीं खाया जा सकता, हमेशा भिगोकर ही खाना चाहिए। इन्हें भिगोकर तो खाया ही जाता है, साथ ही सलाद आदि पर छिड़क कर सूखा भी खाया जा सकता है (पर्याप्त पानी के साथ)।
मुख्य फायदे पेट की गर्मी, एसिडिटी शांत करने और लू से बचाने में उपयोगी। ओमेगा-3, प्रोटीन और लंबी ऊर्जा (Stamina) देने में सबसे उपयोगी।
खाने का सही मौसम मुख्य रूप से गर्मियों के मौसम में सेवन किया जाता है। इन्हें साल भर किसी भी मौसम में खाया जा सकता है।

निष्कर्ष

हमेशा याद रखें कि प्रकृति ने हमें जो कुछ भी दिया है, उसके पीछे एक गहरा विज्ञान छिपा है। आप जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर आपके शरीर के तापमान, एनर्जी लेवल और पाचन पर पड़ता है। इसलिए 'सब्जा' और 'चिया' को एक ही चीज़ मानकर या सिर्फ वज़न घटाने की अंधी दौड़ में शामिल होकर इनका अंधाधुंध इस्तेमाल करने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपने शरीर की आवाज़ को सुनें। मौसम के हिसाब से अपने खानपान को बदलें, सही जानकारी जुटाएँ और सुनी-सुनाई बातों पर आँख बंद करके भरोसा न करें। जब आपका शरीर अंदर से संतुलित रहेगा, तो यकीनन आप हर मौसम में पूरी तरह से तंदुरुस्त और खुश रहेंगे।

References

The Chemical Composition and Nutritional Value of Chia Seeds—Current State of Knowledge - PMC

Chia seed - Wikipedia

Unravelling the secret of seed-based gels in water: the nanoscale 3D network formation - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, दोनों अलग-अलग बीज हैं। सब्जा मीठी तुलसी (Sweet Basil) के बीज होते हैं, जबकि चिया एक अलग पौधे से प्राप्त होते हैं।

चिया सीड्स में फाइबर और प्रोटीन अधिक होते हैं, जिससे लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है और वजन प्रबंधन में मदद मिल सकती है।

सब्जा सीड्स की ठंडी तासीर के कारण इन्हें पेट की गर्मी और एसिडिटी को शांत करने के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है।

हाँ। सब्जा को लगभग 5 मिनट और चिया को 20–30 मिनट या उससे अधिक समय तक भिगोकर खाना बेहतर रहता है।

सर्दियों में अधिक मात्रा में सेवन कुछ लोगों में कफ और गले की परेशानी बढ़ा सकता है।

चिया में ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन और कई महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं।

हाँ, सब्जा सीड्स का अधिक सेवन लो बीपी वालों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता।

हाँ, लेकिन हमेशा अच्छी तरह भिगोकर और सीमित मात्रा में देना चाहिए।

पर्याप्त पानी न पीने या सूखे बीज खाने पर कब्ज़ की समस्या हो सकती है।

सब्जा गर्मियों में और चिया पूरे साल संतुलित आहार के हिस्से के रूप में लिया जा सकता है।

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