Diseases Search
Close Button
 
 

Dinner plate में 3 बदलाव जो acidity और bloating कम कर सकते हैं

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

दिन भर सब कुछ एकदम ठीक रहता है। आप ऑफिस का काम करते हैं, भागदौड़ करते हैं, सब बढ़िया। लेकिन जैसे ही रात का खाना (डिनर) खत्म होता है और आप बिस्तर पर जाते हैं, असली खेल शुरू हो जाता है। पेट में गुड़गुड़, सीने में जलन, डकारें और पेट ऐसा तन जाता है जैसे उसमें हवा भर दी गई हो।

हम अक्सर इस जलन और भारीपन का दोष मसालेदार खाने, चाय-कॉफी या बाहर के जंक फूड को दे देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार बाहर का खाना नहीं, बल्कि घर में परोसी गई आपकी 'डिनर प्लेट' ही इस परेशानी की असली वजह होती है?

रात का समय हमारे शरीर के लिए आराम और मरम्मत का समय होता है। अगर आप अपने पेट को ऐसा खाना देंगे जिसे पचाने में उसे रात भर जागना पड़े, तो सीने में जलन और गैस होना तय है। अगर आप अपनी रात की प्लेट में कुछ बहुत ही आसान से 3 बदलाव कर लें, तो रात की एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। । 

रात में एसिडिटी और गैस ज़्यादा क्यों होती हैं?

जब दिन में सूरज ढल जाता है, तो हमारे शरीर की रफ्तार भी धीमी होने लगती है। दिन भर हमारे पाचन अग्नि बहुत तेज़ होती है, इसलिए दोपहर का भारी खाना आसानी से पच जाता है। लेकिन रात के समय हमारा पाचन थोड़ा सुस्त पड़ जाता है। अगर आप इस सुस्त पाचन में बहुत सारा तला-भुना, भारी खाना (जैसे छोले-भटूरे, पूरी, या भारी पुलाव) डाल देंगे, तो पेट उसे पचा नहीं पाएगा। भारी या अधिक मात्रा में खाया गया भोजन कुछ लोगों में पेट के देर से खाली होने, गैस बनने और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।  इसके अलावा, सबसे बड़ी गलती हम यह करते हैं कि रात को 10-11 बजे खाना खाते हैं और खाते ही सीधे बिस्तर पर जाकर लेट जाते हैं। जब हम सीधे लेट जाते हैं, तो पेट का तेज़ाब ऊपर भोजन की नली की तरफ आ जाता है, जिससे सीने में और गले में तेज़ जलन होती है। इसलिए, रात में आप 'क्या' खा रहे हैं और 'कब' खा रहे हैं, ये दोनों बातें बहुत ज़रूरी हैं।

बदलाव 1: अपनी आधी प्लेट सब्जियों से भरें 

हम सब की आदत होती है कि हम थाली में 3-4 रोटियां या ढेर सारे चावल रख लेते हैं और कोने में थोड़ी सी सब्जी। पेट की परेशानी यहीं से शुरू होती है। अगर आप गैस और एसिडिटी से बचना चाहते हैं, तो अपनी थाली का रूप बदल दीजिए।

आपकी थाली का पूरा आधा हिस्सा कच्ची या पकी हुई सब्जियों से भरा होना चाहिए। सब्जियां हमारे पेट के लिए झाड़ू का काम करती हैं, जिसे हम फाइबर (रेशा) कहते हैं। फाइबर पाचन को बेहतर बनाए रखने और भोजन की सामान्य गति को बनाए रखने में मदद करता है। जब खाना पेट में रुकता ही नहीं, तो वह सड़ेगा नहीं और गैस बिल्कुल नहीं बनेगी।

कौन-सी सब्जियां सबसे अच्छी हैं? रात के समय उन सब्जियों को चुनें जो पचने में बहुत हल्की हों। जैसे, लौकी, तोरी, टिंडा, कद्दू, पालक, गाजर और बीन्स। इन सब्जियों को कम से कम तेल और बहुत ही हल्के मसालों (जैसे सिर्फ जीरा, हल्दी और नमक) में पकाएं।

अगर आपको कच्चा सलाद (खीरा, मूली) खाने से रात में गैस बनती है, तो आप सलाद की जगह इन सब्जियों को हल्का सा भाप में पकाकर (Boil करके) या सूप बनाकर पी सकते हैं।

बदलाव 2: हल्का और अच्छा प्रोटीन शामिल करें

ज़्यादातर लोग रात को सिर्फ रोटी और आलू की सब्जी खा लेते हैं। इसमें प्रोटीन बिल्कुल नहीं होता। जब आपके खाने में प्रोटीन नहीं होता, तो आपको जल्दी भूख लगती है और आप रात को 12 बजे उठकर बिस्कुट या नमकीन खा लेते हैं, जो एसिडिटी की जड़ है।

प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है, जिससे देर रात बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है। 

रात के लिए कौन सा प्रोटीन सही है? रात को वह प्रोटीन चुनें जो पचने में आसान हो।

  • मूंग या मसूर की छिलके वाली दाल।
  • थोड़ा सा घर का बना ताज़ा पनीर।
  • थोड़े से राजमा या छोले (लेकिन इन्हें बहुत अच्छी तरह गलाकर बनाएं)।
  • ताज़ी दही (अगर दही खाने से आपको रात में गला खराब या गैस की दिक्कत नहीं होती, तो ही खाएं)।

ध्यान रखें कि प्रोटीन का मतलब यह नहीं कि आप ढेर सारा मक्खन डालकर दाल मखनी या कड़ाही पनीर खा लें। प्रोटीन को बिल्कुल सादे तरीके से बनाएं।

बदलाव 3: सफेद चावल और मैदे की जगह अच्छे कार्ब्स लें

हम सभी को रात में रोटी या चावल खाना बहुत पसंद है। लेकिन सफेद चावल और मैदे (या सिर्फ गेहूं) की रोटी पचने में बहुत ज़्यादा हल्की होती है। ये चीज़े पेट में जाकर तुरंत घुल जाती हैं और कई बार पेट में भारीपन महसूस कराती हैं।

इनकी जगह आपको वो अनाज खाने चाहिए जो पेट में धीरे-धीरे पचें।

  • सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस (भूरे चावल) खाएं।
  • सिर्फ गेहूं की रोटी खाने की बजाय, आटे में थोड़ा बेसन, रागी या ज्वार मिला लें (मल्टीग्रेन आटा)।
  • या फिर कभी-कभी रात में दलिया या खिचड़ी बनाकर खा लें।

ये विकल्प कई लोगों में रात के समय पेट पर अपेक्षाकृत हल्के पड़ सकते हैं और एसिडिटी की संभावना कम करने में मदद कर सकते हैं। 

डिनर (रात के खाने) में किन चीज़ो से बिल्कुल दूर रहें?

अगर आप नहीं चाहते कि रात को सीने में आग लगे, तो इन चीज़ो को अपने डिनर से बिल्कुल बाहर कर दें:

  • तली-भुनी चीज़ें: पकौड़े, समोसे, या बहुत ज़्यादा तेल वाली सब्जियां।
  • बहुत ज़्यादा मिर्च-मसाला: लाल मिर्च और गरम मसाला पेट के तेज़ाब को और भड़का देते हैं।
  • कोल्ड ड्रिंक और पैकेट वाले जूस: इनमें बहुत गैस और चीनी होती है, जो पेट को गुब्बारे की तरह फुला देती है।
  • मिठाइयां: रात को बहुत ज़्यादा चीनी या रसगुल्ले-गुलाबजामुन खाने से पाचन बिगड़ जाता है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

रात के खाने के बाद कभी-कभार हल्का भारीपन सामान्य हो सकता है, लेकिन रोज़-रोज़ सीने में जलन, एसिडिटी, अत्यधिक गैस या पेट का फूलना नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इसके लिए अपनी डिनर प्लेट में 3 मुख्य बदलाव करें, कच्चे सलाद की जगह उबली या हल्की पकी सब्जियां लें, राजमा/छोले की जगह मूंग दाल या खिचड़ी जैसा हल्का खाना चुनें, और रात में दही व अत्यधिक तीखे-खट्टे मसालों से पूरी तरह परहेज करें।

खाने का समय और चबाने का तरीका क्यों ज़रूरी हैं?

अगर आप देर रात भारी भोजन करने से कई लोगों में एसिडिटी, गैस और रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। 

  • सही समय: कोशिश करें कि आप अपना रात का खाना सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले खा लें। अगर आप 10 बजे सोते हैं, तो 7-8 बजे तक खाना खा लें। इससे शरीर को खाना पचाने का पूरा टाइम मिल जाता है।
  • चबा-चबाकर खाएं: टीवी या मोबाइल देखते हुए हम खाना बहुत जल्दी निगल लेते हैं। पेट के पास दांत नहीं होते। अगर आप खाने को मुंह में ही अच्छे से चबा लेंगे, तो पेट का आधा काम बच जाएगा और खाना आसानी से पच जाएगा।
  • भूख से कम खाएं: रात को कभी भी गले तक पेट भरकर न खाएं। पेट में थोड़ी जगह हवा और पानी के लिए खाली छोड़ दें।

क्या हर इंसान के लिए एक ही प्लेट सही है?

नहीं। हम सबका शरीर अलग है। किसी को रात में सेब खाने से फायदा होता है, तो किसी को सेब से गैस बन जाती है। किसी को दाल पच जाती है, तो किसी का पेट फूल जाता है। इसलिए, अपने शरीर की आवाज को सुनें। जो चीज़ खाने से आपको रात में परेशानी होती है, उसे अपनी प्लेट से हटा दें और उसकी जगह कोई दूसरी हल्की चीज़ खाएं।

अगर आपको ये सारे बदलाव करने के बाद भी लगातार गैस, सीने में जलन, पेट दर्द या उल्टी हो रही है, तो खुद डॉक्टर न बनें। 

कब गैस को हल्के में न लें और सीधे डॉक्टर के पास जाएं?

हम अक्सर सीने की जलन या पेट की दिक्कत को 'अरे बस गैस बन गई है' कहकर टाल देते हैं। लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें घरेलू चूर्ण या नुस्खों के भरोसे बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए। अगर आपको इनमें से कोई भी परेशानी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • दवा से भी एसिडिटी ठीक न होना: अगर हफ्ते में दो या उससे ज़्यादा बार सीने में जलन हो रही है और आम दवाइयां काम नहीं कर रही हैं।
  • गले में खाना अटकना: खाना या पानी निगलते समय गले या सीने में दर्द महसूस होना।
  • उल्टी या पॉटी में खून: अगर उल्टी में साफ खून आए या उल्टी का रंग कॉफी जैसा हो। इसके अलावा, अगर पॉटी एकदम गहरे काले रंग की हो रही है, तो इसे बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें, यह पेट के अंदर ब्लीडिंग (खून बहने) का सीधा इशारा है।
  • बिना वजह वज़न गिरना: आप कोई डाइटिंग या कसरत नहीं कर रहे हैं, फिर भी आपका वज़न तेज़ी से घटता जा रहा है।
  • लगातार उल्टियां होना: पेट में पानी की एक घूंट तक का न टिकना और बार-बार उल्टी आना।
  • सीने में दर्द: कई बार हार्ट अटैक का दर्द बिल्कुल गैस जैसा महसूस होता है। अगर सीने में बहुत ज़्यादा भारीपन, घुटन, पसीना या तेज़ दर्द हो रहा है, तो उसे गैस समझकर ईनो पीने की गलती न करें, तुरंत अस्पताल जाएं। 

निष्कर्ष

रात की एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या को दूर करने के लिए आपको कोई बहुत महंगी दवाई या बड़ा परहेज़ करने की ज़रूरत नहीं है।

बस अपनी थाली में ये 3 आसान बदलाव करें, आधी थाली को हल्की सब्जियों से भरें, थोड़ा सा प्रोटीन (जैसे दाल या पनीर) रखें, और हल्की रोटी या दलिया खाएं। सही समय पर खाएं, शांति से चबाकर खाएं और खाने के बाद थोड़ा सा टहलें। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से आपका पेट भी खुश रहेगा, आपको नींद भी अच्छी आएगी और अगली सुबह आप एकदम तरोताज़ा उठेंगे!

References

Pathophysiology, Evaluation, and Treatment of Bloating: Hope, Hype, or Hot Air? - PMC

Abdominal Bloating: Pathophysiology and Treatment - PMC 

Abdominal bloating: MedlinePlus Medical Encyclopedia 

Definition of bloating - NCI Dictionary of Cancer Terms 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, राजमा के साथ बनी कुछ भारी सब्जियाँ और अधिक मात्रा में प्याज़ कुछ लोगों में गैस और पेट फूलने का कारण बन सकती हैं। यह व्यक्ति की पाचन क्षमता पर भी निर्भर करता है।

नहीं। कुछ लोगों को रात में कच्चा सलाद खाने से गैस या भारीपन महसूस हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो हल्की पकी हुई सब्जियाँ बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

हल्की दाल, कम तेल में बनी सब्ज़ी, 1–2 रोटी या थोड़ी मात्रा में दलिया/खिचड़ी जैसे हल्के भोजन आमतौर पर बेहतर रहते हैं। बहुत तला-भुना, मसालेदार और भारी भोजन से बचना चाहिए।

हर व्यक्ति में IBS के ट्रिगर अलग हो सकते हैं। यदि कच्ची सब्जियों से गैस या पेट दर्द बढ़ता है, तो उन्हें हल्का पकाकर खाना अधिक आरामदायक हो सकता है।

यह हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। कुछ लोगों को दूध से थोड़ी राहत मिलती है, जबकि कुछ में विशेषकर फुल-फैट दूध एसिडिटी बढ़ा सकता है।

हाँ। लंबे समय तक खाली पेट रहने या बहुत कम खाने से कुछ लोगों में पेट का एसिड बढ़ सकता है, जिससे जलन और एसिडिटी महसूस हो सकती है।

आधी प्लेट सब्ज़ियाँ, एक भाग प्रोटीन (जैसे दाल, पनीर या अंकुरित अनाज) और सीमित मात्रा में रोटी या अन्य साबुत अनाज का संतुलित भोजन बेहतर माना जाता है।

हाँ। भोजन के बाद 10–15 मिनट हल्की सैर करने से पाचन बेहतर हो सकता है और एसिड रिफ्लक्स की संभावना कम हो सकती है। खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें।

यदि फल खाने से कोई परेशानी नहीं होती, तो पपीता, अमरूद या सेब जैसी सीमित मात्रा में फल कुछ लोगों के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं। भारी भोजन के तुरंत बाद अधिक मात्रा में फल खाने से बचें।

यदि खाना खाने के बाद पेट बहुत भरा हुआ महसूस हो, सुस्ती आए या लेटते ही भारीपन और एसिडिटी होने लगे, तो संभव है कि आपने ज़रूरत से अधिक खाया हो। रात में पेट भरने की बजाय लगभग 70–80% तक खाना बेहतर माना जाता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us