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मॉनसून में पानी कम पीने की आदत शरीर को चुपचाप कैसे प्रभावित कर सकती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मॉनसून आते ही मौसम ठंडा हो जाता है, साथ ही साथ हमारा शरीर भी ठंडा रहने लगता है जिसकी वजह से हमें कम पसीना आता है और प्यास लगना भी कम हो जाती है।  जिस वजह से हम गर्मी के मुकाबले कम पानी पीते हैं और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। 

हमे यह नॉर्मल लग सकता है लेकिन बरसात के मौसम में भी शरीर को पानी की ज़रूरत उतनी ही होती है जितनी गर्मियों में होती है। पुरे शरीर को ठीक तरह से काम करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है और ऐसे में अगर हम पानी ना पिए तो यह शरीर के अंगो पर नकारात्मक प्रभाव को सकता है।  

शरीर को पानी की ज़रूरत क्यों होती है?

जैसे किसी पौधे को जीवित रहने के लिए पानी की ज़रूरत रहती वैसे ही हमारे शरीर को जीवित रखने के लिए पानी की उतनी ही ज़रूरत होती है। अगर किसी पौधे को आप एक दिन पानी ना दे तो वह मुरझा जाता है वैसे ही अगर हम दिन में पर्याप्त पानी ना पिए तो यह शरीर भी वैसे ही मुरझा जाता है और इसकी वजह से शरीर के छोटे से लेके बड़ा अंग भी काफी प्रभावित होता है। 

पानी शरीर में क्या काम करता है?

पानी शरीर के अंदर बहुत एहम भूमिका निभाता है, शरीर लगभग 60% से 75% पानी से बना होता है जो शरीर के सारे हिस्सों को सुचारू रुप से काम करने में मदद करता है :

  • पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। 
  • यह खाने के अच्छे गुणों (पोषक तत्वों) को शरीर की सभी कोशिकाओं तक खून के ज़रिए पहुंचाता  है। 
  • यह शरीर के सारे विषैले तत्वों को शरीर से निकलने में मदद करता है। 
  • पानी हमारे जोड़ो में चिकनाहट और नमी बनाने में मदद करता है जिससे हमारे घुटने व जोड़ आसानी से मुड़ पाते है और हम ठीक से चल पाते है।
  • यह पाचन प्रक्रिया को ठीक रखता है और खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है।  

पानी कम पीने से शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर क्या प्रभाव पड़ता है? 

अगर आप कम पानी पीते हैं, शरीर के अलग-अलग अंगों पर अलग-अलग तरीके से प्रभाव पड़ सकता है, जो की इस प्रकार है :

  • किडनी: पर्याप्त पानी न मिलने पर किडनी शरीर की गंदगी और टॉक्सिन्स को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती है जिससे की उनके काम करने की क्षमता गिर जाती है।
  • पाचन तंत्र: पानी की कमी होने से हमारे भोजन ठीक से पच नहीं पाता जिसकी वजह से मल सख्त हो जाता है और भोजन को पचाने व पोषक तत्वों को सोखने की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। 
  • त्वचा और मुंह: पानी की कमी मुंह में लार (Saliva) का निर्माण कम होता है जिससे मुंह सूखने लगता है और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। साथ ही त्वचा की नमी खत्म होने लगती है और चेहरे पर झुर्रियां आने लगती हैं। 
  • जोड़ और मांसपेशियां: पानी जोड़ो में चिकनाई बनाने में मदद करता है जिससे उन्हें मज़बूती मिलती है। अगर शरीर में पानी की कमी हो तो जोड़ो व मांसपेशियों में कमज़ोरी आने लगती है। 
  • हृदय: पानी की कमी से हमारे खून गाढ़ा होने लगता है और खून की मात्रा भी घटने लग जाती है, जिससे दिल पर रक्त पंप करने का बहुत दबाव पड़ता है।
  • मस्तिष्क: शरीर में पानी की कमी होने से दिमाग सुस्त हो जाता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता कमज़ोर होने लगती है।

इसलिए शरीर में पानी की कमी ना होने दे और पर्याप्त पानी पूरे दिन में पिए जिससे शरीर के अंगों का संचालन अच्छे से बना रहे और सारे अंग अच्छे से काम करे। 

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

मानसून के ठंडे और नमी वाले मौसम में प्यास कम लगती है, जिससे शरीर में चुपचाप पानी की कमी हो सकती है। अगर आपको पेशाब का रंग बहुत गहरा पीला दिखे, पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस हो, या कमर के निचले हिस्से में अचानक तेज दर्द उठे, तो इसे बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें। ये यूरिन इन्फेक्शन (UTI) या किडनी स्टोन के साफ संकेत हैं, जो बरसात में पानी कम पीने की वजह से काफी आम हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

शरीर कैसे बताता है कि उसे पानी की ज़रूरत है?

हमारे शरीर में हमे छोटे छोटे संकेत देता है जिससे वह यह बताना चाह रहा होता है की उसके शरीर में पानी की कमी है:

  • पेशाब का रंग गहरा होना: अगर आप पर्याप्त पानी पी रहे है तो आपके पेशाब का रंग साफ या हल्का पीला होता है, लेकिन पानी की कमी होने पर यह गहरा पीला रंग का हो जाता है।
  • मुंह और होंठ सूखना: पानी की कमी के कारण मुंह में लार कम बनती जिस वजह से मुंह सूखा और चिपचिपा महसूस होता है। 
  • सिरदर्द और चक्कर: पानी की कमी से सिर में तेज़ दर्द या भारीपन होने लगता है।
  • त्वचा का रूखापन: पानी न मिलने के कारण त्वचा में नमी और लचीलापन खत्म होने लगते हैं।
  • थकान और सुस्ती: पानी की कमी के कारण आपको जल्दी थकान महसूस होने लगती है और सुस्ती आ जाती है।

इसलिए यह न समझे कि पानी की कमी होने पर बस ज़्यादा प्यास लगती है। हमारा शरीर हमें अन्य संकेत भी देता है जिनहे समझना बहुत ज़रूरी है।  

अगर इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करें तो क्या हो सकता है?

अगर हम इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करें तो निम्नलिखित बीमारियाँ या दिक्कतें हो सकती हैं:

  • आपकी हार्ट बीट का बढ़ सकती है और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
  • किडनी में पथरी और मूत्र मार्ग में इन्फेक्शन (UTI) का खतरा हो सकता है।
  • घुटनों और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है। इसके अलावा, मांसपेशियों में ऐंठन और जकड़न होती है।
  • झुर्रियां जल्दी आने लगती हैं। बालों की जड़ों को पोषण न मिलने से बाल कमज़ोर होकर झड़ने लगते हैं।
  • कब्ज़ (Constipation), गैस और अपच हो जाते हैं। 
  • लार कम बनने के कारण मुंह और होंठ सूखने लगते हैं और मुंह से बदबू आने लगती है।

आयुर्वेद इस परेशानी को कैसे समझता है?

आयुर्वेद हमारे शरीर को मौसम के हिसाब से ढालने पर ज़ोर देता है। आयुर्वेद में पानी को ज़िन्दगी माना गया है, लेकिन इसे पीने का तरीका और समय भी बहुत ज़रूरी है। आयुर्वेद कहता है कि बारिश के मौसम में हवा में बहुत सीलन (नमी) होती है और हमारा पाचन थोड़ा सुस्त हो जाता है। इसलिए, इस मौसम में बहुत ठंडा पानी या फ्रिज का पानी पीने से बचना चाहिए। ठंडे पानी से गला भी खराब हो सकता है और पाचन भी कमज़ोर हो सकता है। इसकी जगह नॉर्मल पानी या हल्का गुनगुना पानी पीना सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। यह पेट को भी साफ रखता है और गले को भी आराम देता है।

मॉनसून में शरीर का वाटर लेवल कैसे मेंटेन रखें?

पानी हमेशा धीरे-धीरे और घूंट-घूंट करके पीना चाहिए। आप इन आसान तरीकों से अपना वाटर लेवल ठीक रख सकते हैं:

  • सुबह की शुरुआत पानी से करें: सुबह सोकर उठते ही सबसे पहले एक गिलास हल्का गुनगुना पानी पिएं। यह आपके पेट को एक्टिव कर देगा।
  • बोतल हमेशा साथ रखें: चाहे आप ऑफिस में हों या घर पर टीवी देख रहे हों, पानी की एक बोतल अपने पास ज़रूर रखें। 
  • प्यास का इंतजार न करें: पानी पिने के लिए प्यास लगने का इंतज़ार ना करे। हर एक-दो घंटे में आधा या एक गिलास पानी पीने की आदत डालें।
  • पानी वाले फल खाएं: अगर आपको सादा पानी पीना बोरिंग लगता है, तो आप खीरा, तरबूज, पपीता या संतरे खा सकते हैं। इनमें बहुत पानी होता है।
  • चाय-कॉफी को पानी न समझें: चाय जरूर पिएं, लेकिन चाय पीने का मतलब यह नहीं है कि आपके पानी की कमी पूरी हो गई। पानी का महत्व अलग है तो लगातार पानी पीते रहे। 

निष्कर्ष 

पानी कम पीने का नुकसान एक ही दिन में नहीं दिखता। यह धीरे-धीरे थकान, सिरदर्द और कब्ज़ के रूप में बाहर आता है। इसलिए, मॉनसून के इस मौसम में पकौड़ों का मजा जरूर लें, चाय भी पिएं, लेकिन अपनी पानी की बोतल से कभी दोस्ती न तोड़ें।

पानी पीने के लिए प्यास का इंतजार मत कीजिए। थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहिए और अपने शरीर को अंदर से साफ और फ्रेश रखिए।

References

Water, Hydration and Health - PMC 

About Water and Healthier Drinks | Healthy Weight and Growth | CDC 

Healthy Drinking Water as a Necessity in Developing Countries Like India: A Narrative review - PMC 

Drinking-water 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, बारिश के दिनों में पानी में बैक्टीरिया और कीड़े पनपने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसलिए पेट को बीमारियों से बचाने के लिए पानी को उबालकर या अच्छे से फिल्टर करके पीना ही सबसे सुरक्षित है।

बिल्कुल नहीं! चाय या कॉफी पीने से हमें बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है, जिससे शरीर का पानी बाहर निकल जाता है। इसलिए चाय के कुछ देर बाद सादा पानी जरूर पिएं।

अगर सादा पानी पीने का मन नहीं है, तो आप अपनी पानी की बोतल में नींबू की कुछ बूंदें, पुदीने की पत्तियां या खीरे के टुकड़े डाल सकते हैं। इससे पानी का स्वाद भी अच्छा हो जाएगा और आप आसानी से पी पाएंगे।

तला हुआ और गरम खाने के एकदम बाद पानी (खासकर ठंडा पानी) पीने से बचना चाहिए। इससे आपका गला खराब हो सकता है और पेट में गैस बन सकती है। खाने के कम से कम 15-20 मिनट बाद हल्का गुनगुना पानी पिएं।

जी हाँ! AC हमारे आस-पास की हवा की नमी को सोख लेता है, जिससे हमारी स्किन और शरीर अंदर से सूखने लगता है। इसलिए AC में बैठने वालों को बिना पसीना आए भी पानी पीते रहना चाहिए।

हाँ, गरम सूप, नारियल पानी या फलों का रस शरीर को बहुत अच्छी नमी देते हैं। लेकिन ये सादे पानी की पूरी तरह जगह नहीं ले सकते, इसलिए सादा पानी पीना फिर भी सबसे जरूरी है।

गले में खराश या खिचखिच होने पर फ्रिज का या मटके का ठंडा पानी बिल्कुल न पिएं। पूरा दिन सिर्फ हल्का गुनगुना पानी पिएं। अगर पानी में थोड़ी सी तुलसी या अजवाइन उबाल लें, तो गले और हाजमे दोनों को बहुत आराम मिलेगा।

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