आजकल बहुत से लोग कहते हैं कि यार, कभी-कभी तो दिमाग बिल्कुल खाली हो जाता है, किसी भी काम में मन ही नहीं लगता। इसी को लोग 'ब्रेन फॉग' बोलते हैं। पिछले कुछ सालों में, खासकर कोरोना के बाद से, यह परेशानी बहुत ज़्यादा बढ़ गई है।
सच तो यह है कि यह कोई बीमारी नहीं है, बस एक इशारा है कि आपका दिमाग अब बुरी तरह थक चुका है। हर वक्त की चिकचिक, काम का बहुत ज़्यादा बोझ और ढंग से सोने या आराम न मिलने की वजह से ऐसा होता है। जब दिमाग को थोड़ा आराम नहीं मिलता, तो कुछ भी सोचना-समझना भारी लगने लगता है और किसी भी काम पर ध्यान टिकाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
जानिए एक्सपर्ट्स के अनुसार क्या हैं Brain Fog के कारण
आखिर Brain Fog के कारण क्या हैं? एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हमारी खराब जीवनशैली इसका सबसे बड़ा कारण है। जब आप रात में आठ घंटे की अच्छी नींद नहीं लेते हैं, तो दिमाग खुद को तरोताज़ा नहीं कर पाता। इसके अलावा, शरीर में खून की कमी, थायरॉइड की परेशानी या हार्मोन में होने वाले बदलाव भी इसके पीछे हो सकते हैं। आज के समय में हर कोई किसी न किसी बात को लेकर मानसिक तनाव में है। यह लगातार बना रहने वाला तनाव आपके दिमाग की नसों को थका देता है, जिससे आपको दिन भर सुस्ती और खालीपन महसूस होता है।
भूलने की आदत और अन्य Brain Fog के संकेत
अगर आपको भी लगता है कि आप चीज़ें रखकर भूल जाते हैं, तो यह Brain Fog के संकेत हो सकते हैं। इसका सबसे पहला लक्षण यही है कि आपकी याददाश्त कमज़ोर लगने लगती है और आप छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं। किसी एक काम पर ध्यान लगाना बहुत मुश्किल लगता है। कई बार ऐसा लगता है कि दिमाग में जैसे धुंध छा गई हो और कुछ भी साफ समझ नहीं आ रहा हो। इसके साथ ही, सिर में हल्का दर्द रहना, बिना काम किए थकान होना और बात करते समय सही शब्द न मिलना भी इसके बहुत ही आम लक्षण हैं।
मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन से बढ़ती दिमाग की उलझन
आज के समय में डिजिटल स्क्रीन भी इस परेशानी को बढ़ाने का बहुत बड़ा कारण बन गई है। हम अपना ज़्यादातर समय मोबाइल, लैपटॉप या टीवी के सामने बिताते हैं। लगातार स्क्रीन देखने से हमारी आँखों और दिमाग दोनों पर बहुत भारी दबाव पड़ता है। सोशल मीडिया पर एक के बाद एक वीडियो देखने से दिमाग को आराम करने का समय ही नहीं मिल पाता है। इस वजह से दिमाग की काम करने की गति धीमी पड़ जाती है। अगर आप भी फोन में बहुत ज़्यादा उलझे रहते हैं, तो यह आपके फोकस और याददाश्त को सीधे तौर पर खराब कर रहा है।
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खानपान की खराब आदतें भी हैं इसका एक बड़ा कारण
हमारा खानपान भी हमारे दिमाग की सेहत तय करता है। अगर आप रोज़ाना जंक फूड, बहुत ज़्यादा मीठा या बाहर का तला-भुना खाना खाते हैं, तो यह दिमाग की थकान को बुलावा देने जैसा है। ऐसे खाने से शरीर को ज़रूरी पोषण नहीं मिल पाता है। दिमाग को सही से काम करने के लिए विटामिन, ओमेगा-3 और पानी की काफी ज़रूरत होती है। जब शरीर में इन ज़रूरी चीज़ों की कमी होने लगती है, तो दिमाग थकने लगता है। इसके अलावा, बहुत ज़्यादा चाय या कॉफी पीने से भी शरीर में पानी की कमी होती है, जो दिमाग को सुस्त बनाती है।
जीवनशैली में बदलाव करके Brain Fog से कैसे बचें?
अब सवाल यह है कि Brain Fog से बचाव के उपाय क्या हैं? इसे दूर करने का सबसे पहला तरीका है अपनी नींद पूरी करना। रोज़ाना रात को कम से कम सात से आठ घंटे की अच्छी नींद ज़रूर लें। सोने से एक घंटे पहले मोबाइल या टीवी स्क्रीन से खुद को पूरी तरह दूर कर लें। दिन भर में खूब सारा पानी पिएँ ताकि शरीर में नमी बनी रहे। इसके साथ ही, रोज़ाना कम से कम आधा घंटा व्यायाम या योग करें। शारीरिक कसरत करने से दिमाग में खून का बहाव तेज़ होता है, जिससे सुस्ती दूर होती है और दिमाग खुलता है।
मानसिक शांति और ध्यान से करें दिमाग को एकदम तरोताज़ा
दिमाग को शांत रखना इस परेशानी को दूर करने का एक बहुत ही असरदार तरीका है। जब भी आपको लगे कि दिमाग उलझ रहा है, तो काम से थोड़ा ब्रेक लें और लंबी साँसें लें। आप ध्यान (मेडिटेशन) करने की आदत डाल सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव काफी हद तक कम होता है। इसके अलावा, प्रकृति के बीच समय बिताना, सुबह खुली हवा में टहलना या अपनी पसंद का कोई गाना सुनना भी दिमाग को बहुत राहत देता है। अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएँ और हंसने-मुस्कुराने के मौके ढूँढें, इससे दिमागी थकान बहुत ही जल्दी दूर हो जाती है।
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आयुर्वेद के अनुसार दिमागी थकान और सुस्ती दूर करने का तरीका
आयुर्वेद के अनुसार दिमागी सुस्ती शरीर में वात दोष के बढ़ने और जठराग्नि के कमज़ोर होने का परिणाम है। आयुर्वेद में दिमाग को शांत और तेज़ करने के लिए ब्राह्मी, शंखपुष्पी और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों का उपयोग बहुत ही फायदेमंद बताया गया है। रोज़ रात को सोने से पहले पैरों के तलवों की गुनगुने तेल से मालिश करने से बहुत अच्छी नींद आती है। ताज़ा आहार लेने से नसों को ताकत मिलती है और दिमागी उलझन पूरी तरह दूर हो जाती है।
निष्कर्ष
आज की भागदौड़ और तनाव से भरी ज़िंदगी में Brain Fog होना एक आम समस्या बन गई है, लेकिन इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर आप सही समय पर इसके संकेतों को पहचान लें और अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करें, तो इससे आसानी से बचा जा सकता है। अपनी नींद पूरी करें, स्क्रीन टाइम कम करें और योग व मेडिटेशन को अपने दिन का हिस्सा बनाएँ। आयुर्वेद में भी इसके लिए बहुत ही सरल और असरदार उपाय मौजूद हैं। अगर फिर भी आपकी परेशानी कम न हो और आपको लगातार दिमागी थकान महसूस हो, तो बिना देर किए किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
References
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12438890/
















