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ज़्यादा पानी पीना भी नुकसानदेह हो सकता है — Ayurveda में कब और कितना?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल हर फिटनेस इन्फ्लुएंसर, सेलेब्रिटी और डायटीशियन आपको एक ही सलाह देता नज़र आता है, "ग्लोइंग स्किन और वज़न कम करने के लिए दिन में कम से कम 4-5 लीटर पानी पिएं।" इस सलाह को मानकर हम अपने साथ हमेशा एक बड़ी सी पानी की बोतल लेकर चलते हैं और प्यास न होने पर भी अलार्म लगा-लगाकर पानी 'घूंटते' रहते हैं। हमें लगता है कि हम अपने शरीर को 'डिटॉक्स' (Detox) कर रहे हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना प्यास के ज़बरदस्ती पानी पीना आपके शरीर को डिटॉक्स नहीं, बल्कि आपके अंदरूनी सिस्टम को 'डुबा' (Drown) रहा है? अत्यधिक पानी पीना एक गंभीर मेडिकल स्थिति को जन्म दे सकता है जिसे 'वाटर इंटॉक्सिकेशन' (Water Intoxication) या इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस कहा जाता है। यह आपकी किडनी पर भारी दबाव डालता है, खून को पतला कर देता है और आपके शरीर की 'पाचन अग्नि' को पूरी तरह बुझा देता है।

ज़्यादा पानी पीने का विज्ञान: 'हाइपोनेट्रेमिया'

हमारा शरीर पानी से बना है, लेकिन यह केवल सादा पानी नहीं है; यह सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का एक नाज़ुक घोल है।

  • सोडियम का डाइल्यूट होना (Hyponatremia): हमारी किडनी एक घंटे में अधिकतम 800 से 1000 मिलीलीटर पानी ही फिल्टर कर सकती है। जब आप इससे ज़्यादा पानी पीते हैं, तो खून में मौजूद 'सोडियम' (नमक) का स्तर तेज़ी से गिरने लगता है (डाइल्यूट हो जाता है)। इस स्थिति को 'हाइपोनेट्रेमिया' कहते हैं।
  • कोशिकाओं में सूजन (Cellular Swelling): सोडियम का काम कोशिकाओं (Cells) के अंदर और बाहर तरल पदार्थ का संतुलन बनाए रखना है। जब खून में सोडियम कम होता है, तो पानी कोशिकाओं के अंदर घुसने लगता है और वे गुब्बारे की तरह फूल जाती हैं।
  • ब्रेन एडिमा (Brain Edema): शरीर की बाकी कोशिकाएं तो फैल सकती हैं, लेकिन हमारा दिमाग एक सख़्त खोपड़ी (Skull) के अंदर होता है। जब दिमाग की कोशिकाओं में पानी भरता है और वे सूजती हैं, तो सिरदर्द, भयंकर 'ब्रेन फॉग', मतली (Nausea) और गंभीर मामलों में कोमा या मृत्यु तक हो सकती है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है? (अतिजलपान और अग्निमांद्य)

आधुनिक विज्ञान जिसे इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस कह रहा है, महर्षि वाग्भट ने हज़ारों साल पहले अष्टांग हृदयम में 'अतिजलपान' (Excessive water intake) के नुकसान के रूप में स्पष्ट कर दिया था।

  • जठराग्नि का बुझना (Extinguishing the Digestive Fire): आयुर्वेद के अनुसार, पानी का स्वभाव 'शीत' (ठंडा) और 'गुरु' (भारी) होता है। जब आप बिना प्यास के या खाने के तुरंत बाद बहुत सारा पानी पी लेते हैं, तो यह आपके पेट की 'पाचन अग्नि' (Jatharagni) पर पानी फेरने जैसा होता है। अग्नि बुझने से खाना पचता नहीं, सड़ता है और 'आम' (Toxins) बनाता है।
  • कफ और क्लेद का बढ़ना: अत्यधिक पानी पीने से शरीर में 'कफ दोष' और 'क्लेद' (Excess moisture/Fluid retention) बढ़ जाता है। इससे शरीर में हमेशा भारीपन, सुस्ती और अंगों में सूजन (Edema) रहने लगती है।
  • वात प्रकोप: जब पानी शरीर के प्राकृतिक चैनलों को ब्लॉक कर देता है, तो नर्वस सिस्टम का 'वात' असंतुलित हो जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द और मानसिक सुस्ती (Brain fog) शुरू हो जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार पानी कब और कितना पिएं?

आयुर्वेद "दिन में 8 गिलास" के किसी भी अंधे नियम को नहीं मानता। पानी की ज़रूरत आपकी 'प्रकृति', मौसम और मेहनत पर निर्भर करती है।

  • प्यास ही सबसे बड़ा नियम है (Rule of Trishna): जब तक प्राकृतिक प्यास (Trishna) न लगे, तब तक पानी न पिएं। शरीर बहुत समझदार है; जब उसे पानी चाहिए होता है, तो वह गला सूखने का संकेत देता है।
  • भोजन और पानी का संबंध: महर्षि वाग्भट कहते हैं, भोजन से तुरंत पहले पानी पीने से शरीर कमज़ोर होता है; भोजन के तुरंत बाद पानी पीने से मोटापा और ज़हर (आम) बनता है; और भोजन के बीच-बीच में 1-2 घूंट पानी पीना 'अमृत' के समान है जो पाचन को बढ़ाता है।
  • उषापान (Morning Hydration): सुबह उठकर बासी मुँह हल्का गुनगुना पानी पीना (उषापान) आंतों को साफ करता है, लेकिन यह भी 1 से 2 गिलास से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।

इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस और सही हाइड्रेशन के लिए आयुर्वेदिक डाइट

अगर आप हाइड्रेटेड रहना चाहते हैं, तो सिर्फ सादा पानी 'गटकने' के बजाय उन फलों और सब्ज़ियों को खाएं जिनमें 'स्ट्रक्चर्ड वाटर' (Structured water) और इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं।

आहार की श्रेणी क्या लें (हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए सर्वश्रेष्ठ) क्या न लें (जो 'अग्नि' बुझाते हैं और इलेक्ट्रोलाइट्स बिगाड़ते हैं)
पेय पदार्थ (Beverages) नारियल पानी (इलेक्ट्रोलाइट्स का खज़ाना), नींबू पानी (सेंधा नमक के साथ), ताज़ा मट्ठा (छाछ)। फ्रिज का बर्फ वाला ठंडा पानी, एक ही सांस में 1 लीटर सादा पानी पीना, कोल्ड ड्रिंक्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) खीरा, ककड़ी, लौकी, पेठा (Ash gourd), तरोई (इनमें 90% से ज़्यादा प्राकृतिक पानी है)। अत्यधिक सूखी और बासी सब्ज़ियाँ जो शरीर का पानी सोखती हैं।
फल (Fruits) तरबूज, खरबूजा, संतरा, पपीता, अंगूर (प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर)। डिब्बाबंद फलों के रस (इनमें सिर्फ शुगर होती है, हाइड्रेशन नहीं)।
अनाज (Grains) मूंग दाल की खिचड़ी, जौ (Barley - शरीर के अतिरिक्त क्लेद/पानी को बाहर निकालता है)। मैदा, सूखा और रूखा भोजन जो भयंकर प्यास बढ़ाता है।
मसाले (Spices) जीरा, सौंफ, धनिया (ये पानी को पचने लायक बनाते हैं), सेंधा नमक (सोडियम बैलेंस के लिए)। अत्यधिक मिर्च और गरम मसाले (जो अस्वाभाविक रूप से प्यास भड़काते हैं)।

'अग्नि' जगाने और अतिरिक्त पानी (Fluid Retention) निकालने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

जब अतिजलपान (Excessive drinking) से शरीर में सूजन और मेटाबॉलिज़्म सुस्त हो जाए, तो ये जड़ी-बूटियाँ जादुई काम करती हैं:

  • पुनर्नवा (Punarnava): जैसा इसका नाम है, यह शरीर को 'नया' करती है। यह एक बेहतरीन प्राकृतिक मूत्रवर्धक (Diuretic) है, जो किडनी को ताक़त देती है और शरीर में रुके हुए अतिरिक्त पानी (Water retention) को फ्लश आउट करती है।
  • गोक्षुर (Gokshura): यह यूरिनरी ट्रैक्ट और किडनी के फंक्शन को सुचारू करके इलेक्ट्रोलाइट्स को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करता है।
  • त्रिकटु (Trikatu): सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली का यह मिश्रण ज़्यादा पानी पीने से बुझी हुई 'जठराग्नि' को तुरंत प्रज्वलित करता है और भारीपन दूर करता है।
  • धनिया-जीरा-सौंफ की चाय (CCF Tea): अगर आपको पानी पीना ही है, तो सादे पानी की जगह इस हर्बल टी का सेवन करें। यह पाचन को सुधारती है और 'आम' को पचाती है।

पंचकर्म थेरेपी: शरीर के 'क्लेद' (Excess Fluid) की डीप क्लींजिंग

जब शरीर में पानी और कफ जमा होकर अंगों को सुस्त कर देते हैं, तो पंचकर्म इस इम्बैलेंस को सेट करता है।

  • स्वेदन (Swedana): हर्बल भाप (Steam) के ज़रिए शरीर के रोम छिद्रों को खोला जाता है और पसीने के रास्ते अतिरिक्त 'क्लेद' (ज़हरीला पानी) बाहर निकाल दिया जाता है।
  • उद्वर्तन (Udvartana): हर्बल पाउडर की इस सूखी मालिश से त्वचा के नीचे जमा अतिरिक्त पानी और 'कफ' को सुखाया जाता है, जिससे शरीर में तुरंत हल्कापन आता है।
  • बस्ती (Basti): वात दोष को संतुलित करने के लिए औषधीय एनिमा दिया जाता है, जो किडनी और नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करके तरल पदार्थों के संतुलन को रिस्टोर करता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम आपकी समस्या को केवल लक्षणों से नहीं, बल्कि आपके रूटीन से पकड़ते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि क्या आपके शरीर में 'कफ' (भारीपन और तरल) ने 'अग्नि' को पूरी तरह बुझा दिया है।
  • पाचन और लक्षण ऑडिट: क्या आपको बिना प्यास के पानी पीने की आदत है? क्या आपको खाने के बाद पेट फूलना, सुबह उठने पर चेहरे पर सूजन (Puffiness) या हमेशा थकान रहती है?
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आप दिन में कितना पानी पीते हैं, कैसा पानी पीते हैं (ठंडा या गुनगुना) और किस पोज़िशन (खड़े होकर या बैठकर) में पीते हैं, इसका बारीकी से अध्ययन किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको हाइड्रेशन का सही विज्ञान सिखाते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुसार आपको रोज़ाना कितना पानी चाहिए, और रुकी हुई 'अग्नि' को कैसे जगाना है, इसका पूरा डाइट और हर्बल रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

इलेक्ट्रोलाइट्स और 'अग्नि' को रिसेट होने में ज़्यादा समय नहीं लगता, बशर्ते आप पानी पीने का सही नियम अपना लें।

  • शुरुआती 1-2 हफ्ते: सही मात्रा में पानी पीने और 'पुनर्नवा' के उपयोग से शरीर की सूजन (Water retention) और चेहरे का भारीपन (Puffiness) कम हो जाएगा।
  • 1 से 2 महीने तक: बुझी हुई 'पाचन अग्नि' दोबारा जलने लगेगी। गैस, ब्लोटिंग और पेट का भारीपन दूर होगा।
  • 3 महीने तक: आपका इलेक्ट्रोलाइट संतुलन (सोडियम-पोटैशियम) बिल्कुल नॉर्मल हो जाएगा। 'ब्रेन फॉग' खत्म होगा और आप एक नई ऊर्जा महसूस करेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम फिटनेस ट्रेंड्स के अंधे अनुकरण को नहीं, बल्कि शरीर के प्राकृतिक विज्ञान को मानते हैं।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ दवाइयाँ नहीं देते, हम आपको यह सिखाते हैं कि आपके शरीर (प्रकृति) को असल में कितनी नमी (Hydration) की ज़रूरत है।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों ऐसे केस देखे हैं जहाँ मरीज़ों ने गलत लाइफस्टाइल और 'अतिजलपान' से अपना मेटाबॉलिज़्म बर्बाद कर लिया था।
  • कस्टमाइज्ड केयर: एक 'पित्त' प्रकृति वाले मज़दूर को दिन में 4 लीटर पानी चाहिए हो सकता है, लेकिन एसी (AC) में बैठने वाले 'कफ' प्रकृति के व्यक्ति के लिए 2 लीटर भी बहुत है। हमारा इलाज बिल्कुल आपकी ज़रूरत पर आधारित होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी औषधियाँ किडनी पर कोई दबाव डाले बिना शरीर के तरल पदार्थों (Fluids) को बैलेंस करती हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक ट्रेंड्स (Modern Fads) आयुर्वेद
हाइड्रेशन का नियम "दिन में कम से कम 8 गिलास या 4-5 लीटर पानी पीना ही चाहिए।" केवल प्यास लगने पर ही पानी पिएं (Rule of Trishna)।
शरीर को देखने का नज़रिया शरीर को एक पाइप मानता है जिसे पानी से 'फ्लश' (Flush) करना ज़रूरी है। शरीर को 'अग्नि' का घर मानता है, जहाँ बिना ज़रूरत का पानी अग्नि को बुझा देता है।
भोजन और पानी खाने से पहले पानी पीकर पेट भरने (ताकि वज़न कम हो) की सलाह। खाने के तुरंत पहले या बाद में बहुत सारा पानी पीना 'ज़हर' (मोटापा और आम का कारण) मानता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स पानी की कमी को इलेक्ट्रोलाइट्स ड्रिंक्स (चीनी युक्त) से पूरा करना। छाछ, नारियल पानी और सेंधा नमक जैसे प्राकृतिक हाइड्रेशन को प्राथमिकता।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

ज़्यादा पानी पीने के बाद (Water Intoxication) अगर आपको ये गंभीर संकेत दिखें, तो यह इमरजेंसी है:

  • सिरदर्द और मतली: अगर बहुत सारा पानी पीने के बाद सिर भारी हो जाए और उल्टियाँ (Vomiting) शुरू हो जाएं (यह ब्रेन एडिमा का संकेत है)।
  • ब्रेन फॉग या कंफ्यूज़न: अगर आपको अचानक चीज़ें समझने में दिक्कत हो, चक्कर आएं या व्यवहार अजीब हो जाए।
  • मांसपेशियों में ऐंठन (Muscle Cramps): इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम/पोटैशियम) तेज़ी से गिरने पर मांसपेशियों में भयंकर क्रैम्प्स या कमज़ोरी आना।
  • दौरे पड़ना (Seizures): गंभीर हाइपोनेट्रेमिया में व्यक्ति को दौरे पड़ सकते हैं या वह बेहोश हो सकता है।

निष्कर्ष

जल ही जीवन है, लेकिन अति हर चीज़ की बुरी होती है। जब हम इंटरनेट के फिटनेस ट्रेंड्स के चक्कर में पड़कर अपनी प्राकृतिक प्यास को नज़रअंदाज़ करते हैं और मशीन की तरह गैलनों पानी अपने अंदर उड़ेलते रहते हैं, तो हम अपनी किडनी को थका रहे होते हैं और खून में मौजूद ज़रूरी सोडियम को डाइल्यूट कर रहे होते हैं। 'हाइपोनेट्रेमिया' एक ऐसी खामोश तबाही है जो आपके मेटाबॉलिज़्म को सुस्त कर देती है, दिमाग की कोशिकाओं को सुजा देती है और आपकी 'पाचन अग्नि' को पूरी तरह बुझा देती है। प्यास न होने पर पानी पीना अमृत नहीं, बल्कि शरीर के लिए एक बोझ है। आयुर्वेद आपको इस अंधी दौड़ से बाहर निकालता है और आपके शरीर की भाषा सुनना सिखाता है। केवल प्यास लगने पर ही घूंट-घूंट करके पानी पिएं। खाने के तुरंत बाद पानी पीने की आदत छोड़ें। त्रिकटु और पुनर्नवा जैसी आयुर्वेदिक औषधियों की मदद से अपनी बुझी हुई अग्नि को जगाएं और शरीर की सूजन (Fluid retention) को खत्म करें। प्राकृतिक हाइड्रेशन (नारियल पानी, छाछ) को अपनाएं, और जीवा आयुर्वेद के साथ एक संतुलित और ऊर्जावान स्वास्थ्य प्राप्त करें।

FAQs

जब कोई व्यक्ति बहुत कम समय में अपनी किडनी की क्षमता (800-1000ml प्रति घंटा) से ज़्यादा पानी पी लेता है, तो खून में सोडियम का स्तर बहुत कम हो जाता है। इसे हाइपोनेट्रेमिया कहते हैं, जिससे कोशिकाओं (विशेषकर दिमाग) में सूजन आ जाती है।

आयुर्वेद में पानी की कोई निश्चित मात्रा (जैसे 8 गिलास) नहीं बताई गई है। यह आपकी प्रकृति (वात, पित्त, कफ), मौसम, और आपकी मेहनत पर निर्भर करता है। प्यास लगने पर ही पानी पीना सबसे उत्तम नियम है।

बिल्कुल नहीं। आयुर्वेद के अनुसार भोजन के तुरंत बाद ज़्यादा पानी पीना ज़हर के समान है क्योंकि यह पाचन अग्नि (Jatharagni) को बुझा देता है। भोजन के बीच में 1-2 घूंट पानी पीना अच्छा है, और पेट भर पानी खाने के 45 मिनट से 1 घंटे बाद ही पीना चाहिए।

जी हाँ। खड़े होकर तेज़ी से पानी पीने से पानी एक झटके से पेट की दीवार से टकराता है और सीधे नीचे की तरफ जाता है। इससे पानी पेट में सही से पचता नहीं है, किडनी पर दबाव पड़ता है और यह जोड़ों में तरल पदार्थ का संतुलन बिगाड़कर आर्थराइटिस (Arthritis) का कारण बन सकता है। हमेशा बैठकर और घूंट-घूंट करके पानी पिएं।

ज़रूरत से ज़्यादा पानी पीने से आपकी पाचन अग्नि कमज़ोर हो जाती है और मेटाबॉलिज़्म सुस्त पड़ जाता है। साथ ही, किडनी जब इतना पानी बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में वाटर रिटेंशन (Fluid retention) हो जाता है, जिससे वज़न और सूजन बढ़ती है।

सुबह उठकर हल्का गुनगुना पानी (उषापान) पीना अच्छा है क्योंकि यह आंतों की सफाई करता है। लेकिन यह मात्रा 1 से 2 गिलास से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। सुबह-सुबह 1-2 लीटर पानी ज़बरदस्ती पीने से आम (गंदगी) बनता है और अग्नि मंद हो जाती है।

इसके दो सबसे आसान तरीके हैं: पहला, आपको प्यास का एहसास न हो रहा हो, और दूसरा, आपके यूरिन (पेशाब) का रंग हल्का पीला या पानी जैसा साफ हो। अगर यूरिन साफ है, तो आपको ज़बरदस्ती पानी पीने की ज़रूरत नहीं है।

आयुर्वेद में बर्फ के पानी को सख़्त मना किया गया है। यह पाचन अग्नि को तुरंत बुझा देता है, गले और नसों को सिकोड़ देता है (वात बढ़ाता है) और मेटाबॉलिज़्म को बिल्कुल धीमा कर देता है। हमेशा कमरे के तापमान का या मटके का पानी पिएं।

बाज़ार में मिलने वाले स्पोर्ट्स ड्रिंक्स में बहुत ज़्यादा रिफाइंड शुगर और कृत्रिम रंग होते हैं। इनकी जगह नारियल पानी, नींबू पानी (सेंधा नमक डालकर) या ताज़ा मट्ठा (छाछ) पिएं, जो प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होते हैं।

पुनर्नवा एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (Diuretic) है। जब अत्यधिक पानी पीने या कमज़ोर मेटाबॉलिज़्म के कारण शरीर में पानी रुक जाता है (सूजन/Edema आ जाती है), तो पुनर्नवा किडनी के फंक्शन को सुधारकर उस अतिरिक्त पानी और टॉक्सिन्स को सुरक्षित रूप से बाहर निकालती है।

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