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Genetic testing हर किसी के लिए ज़रूरी है या नहीं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल स्वास्थ्य की दुनिया में एक नया शब्द बहुत तेज़ी से चर्चा में आ रहा है: जेनेटिक टेस्टिंग। कुछ लोग इसे भविष्य की बीमारियों को पहले से जानने का तरीका मानते हैं तो कुछ को लगता है कि यह सिर्फ खास परिस्थितियों में ही काम आती है।

सवाल यह है कि क्या हर इंसान को यह जाँच करवानी चाहिए? क्या यह सच में भविष्य की बीमारियों का अंदाज़ा लगा सकती है? या फिर यह सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों के लिए ज़रूरी है?

इन सवालों के जवाब समझने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि जेनेटिक टेस्टिंग होती क्या है, यह कैसे काम करती है और इसे कराने की ज़रूरत कब पड़ती है।

जेनेटिक टेस्टिंग (जेनेटिक टेस्टिंग) आखिर है क्या? 

हमारे शरीर का हर हिस्सा कोशिकाओं (Cells) से बना है, और इन कोशिकाओं के अंदर छिपा होता है हमारा DNA। DNA को आप हमारे शरीर का 'ब्लूप्रिंट' कह सकते हैं। यह तय करता है कि हम कैसे दिखेंगे, हमारे शरीर की मशीनरी कैसे काम करेगी और हमें अपने माता-पिता से कौन सी खूबियां या बीमारियां विरासत में मिलेंगी।

जेनेटिक टेस्टिंग एक ऐसी आधुनिक मेडिकल जाँच है, जो इसी DNA, जीन्स (Genes) या क्रोमोसोम्स में हुए बदलावों (जिन्हें म्यूटेशन कहते हैं) की पहचान करती है। यह टेस्ट आमतौर पर आपके खून, बाल, त्वचा या थूक (Saliva) के सैंपल से किया जाता है।

शरीर के DNA को समझने का विज्ञान

जैसे किसी इमारत को बनाने के लिए एक नक्शा होता है उसी तरह हमारे शरीर को बनाने और चलाने के लिए DNA काम करता है। यह एक ऐसा खाका है जो शरीर की हर छोटी-बड़ी बात तय करता है।

DNA में मौजूद जीन्स यह निर्धारित करते हैं कि:

  • आँखों का रंग कैसा होगा
  • ऊंचाई कितनी होगी
  • कुछ विशेष रोगों का जोखिम कितना होगा
  • शरीर दवाओं पर कैसी प्रतिक्रिया देगा

जेनेटिक टेस्टिंग कैसे की जाती है?

जेनेटिक टेस्टिंग का नाम सुनकर अक्सर लोगों को लगता है कि यह कोई बहुत जटिल या दर्दनाक प्रक्रिया होगी। लेकिन सच तो यह है कि यह टेस्ट बहुत ही सीधा और आसान होता है।

टेस्ट के लिए सैंपल कैसे लिया जाता है?

आमतौर पर जाँच के लिए शरीर से बहुत ही सामान्य तरीके से सैंपल लिए जाते हैं:

  • खून का सैंपल (Blood Sample): यह बिल्कुल किसी रूटीन ब्लड टेस्ट जैसा ही होता है, जिसमें हाथ की नस से थोड़ा सा खून लिया जाता है।
  • लार (Saliva): इसमें आपको लैब से मिली एक खास ट्यूब में बस थोड़ा सा थूकना होता है। यह तरीका बिना किसी सुई के होता है, इसलिए बच्चों के लिए बहुत आसान रहता है।
  • गाल के अंदर की कोशिकाएं (Cheek Swab): इसमें एक रुई लगे स्वैब (कॉटन बड जैसा) को आपके गाल के अंदरूनी हिस्से पर हल्का सा रगड़ा जाता है। इससे वहां की कुछ कोशिकाएं सैंपल में आ जाती हैं। इसमें बिल्कुल भी दर्द या परेशानी नहीं होती।

किन लोगों को जेनेटिक टेस्टिंग करवाने की सलाह दी जाती है?

जेनेटिक टेस्टिंग हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं है लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में यह बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। अगर नीचे दी गई कोई भी स्थिति आप पर लागू होती है तो किसी विशेषज्ञ से एक बार ज़रूर मिलें।

  • परिवार में गंभीर बीमारियाँ: अगर घर में कैंसर, हृदय रोग या थैलेसीमिया जैसी बीमारियाँ पहले से किसी को रही हों तो यह जाँच खतरे का अंदाज़ा लगाने में मदद करती है।
  • बच्चे की योजना बनाने वाले दंपत्ति: कुछ बीमारियाँ माता-पिता से बच्चों में आ सकती हैं। गर्भधारण से पहले यह जाँच करवाने से होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में ज़रूरी जानकारी मिल सकती है।
  • कैंसर का ज़्यादा खतरा: कुछ लोगों के जीन्स में ऐसे बदलाव होते हैं जो कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। समय रहते पता चल जाए तो बचाव आसान हो जाता है।
  • बार-बार गर्भपात: अगर बार-बार गर्भपात हो रहा हो तो इसकी आनुवंशिक वजह समझने के लिए यह जाँच फायदेमंद है।
  • बच्चे का असामान्य विकास: अगर बच्चे का शारीरिक या मानसिक विकास सामान्य से अलग हो तो यह जाँच कारण समझने में मदद कर सकती है।
  • दवाइयाँ असर न करें: अगर किसी दवाई का शरीर पर सही असर न हो तो जेनेटिक टेस्टिंग से समझा जा सकता है कि शरीर उस दवाई को कैसे लेता है।

जेनेटिक टेस्टिंग के मुख्य फायदे

जेनेटिक टेस्टिंग सिर्फ बीमारी का पता लगाने का तरीका नहीं है बल्कि यह आपको समय से पहले सतर्क करने का एक अहम ज़रिया भी है।

  • बीमारी आने से पहले खतरे का अंदाज़ा: कई बीमारियाँ लक्षण दिखने से बहुत पहले ही शरीर में मौजूद होती हैं। जेनेटिक टेस्टिंग से इन्हें समय रहते पहचाना जा सकता है।
  • हर इंसान के लिए अलग स्वास्थ्य योजना: हर शरीर अलग होता है। जेनेटिक जानकारी के आधार पर खानपान, दिनचर्या और स्वास्थ्य निगरानी की एक व्यक्तिगत योजना बनाई जा सकती है।
  • परिवार नियोजन में मदद: कुछ बीमारियाँ अगली पीढ़ी में जा सकती हैं। इस जाँच से समझकर सही फैसले लिए जा सकते हैं।
  • मन में स्पष्टता आती है: लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे अगर कोई आनुवंशिक कारण हो तो उसका पता चल जाता है जिससे सही इलाज की दिशा तय होती है।

आयुर्वेद और Genetics: क्या इनमें कोई संबंध है?

जब हम 'जेनेटिक्स' (Genetics) या आनुवंशिकी की बात करते हैं, तो हमें लगता है कि यह बिल्कुल आधुनिक विज्ञान की देन है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिसे आज की मेडिकल साइंस 'पर्सनलाइज्ड मेडिसिन' (Personalized Medicine) या व्यक्ति-विशिष्ट चिकित्सा कह रही है, उसके बारे में हमारा आयुर्वेद हज़ारों साल पहले से ही बात करता आया है।

'प्रकृति' और DNA का अनोखा मेल

आयुर्वेद का पूरा ढांचा ही इस बात पर टिका है कि हर इंसान एक-दूसरे से बिल्कुल अलग और अनोखा है। आयुर्वेद में 'प्रकृति' का सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण है, जिसके तहत तीन मुख्य दोषों वात, पित्त और कफ के आधार पर किसी भी व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक प्रवृत्तियों का सटीक आकलन किया जाता है।

ठीक इसी तरह, आज का आधुनिक विज्ञान कहता है कि हर इंसान का DNA और जेनेटिक ब्लूप्रिंट ही यह तय करता है कि उसका शरीर कैसा दिखेगा, उसका स्वभाव कैसा होगा और उसे कौन सी बीमारियां हो सकती हैं। यानी जो काम आज विज्ञान DNA टेस्ट के ज़रिए कर रहा है, आयुर्वेद ने उसे 'प्रकृति' के रूप में सदियों पहले ही देख लिया था।

जेनेटिक टेस्टिंग करवाने से पहले किन बातों पर विचार करना चाहिए?

जाँच करवाने से पहले कुछ ज़रूरी सवालों के बारे में सोचना फायदेमंद होता है। इससे फैसला लेना आसान हो जाता है।

  • जाँच करवाने का मकसद क्या है?
  • क्या परिवार में कोई आनुवंशिक बीमारी पहले से रही है?
  • क्या रिपोर्ट के नतीजे मेरे इलाज या फैसले पर असर डालेंगे?
  • क्या मैं किसी भी नतीजे को मानसिक रूप से स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ?

जेनेटिक टेस्टिंग से जुड़े आम भ्रम

  • भ्रम: यह हर बीमारी बता सकती है। सच यह है कि कई बीमारियाँ सिर्फ जीन्स से नहीं बल्कि खानपान और दिनचर्या से भी होती हैं।
  • भ्रम: रिपोर्ट सामान्य है तो कभी बीमारी नहीं होगी। सच यह है कि जीवनशैली और आसपास का माहौल भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
  • भ्रम: यह सिर्फ गंभीर मरीज़ों के लिए है। सच यह है कि स्वस्थ इंसान भी खतरे का अंदाज़ा लगाने के लिए यह जाँच करवा सकता है।

कब करवाएँ और कब नहीं?

इन स्थितियों में करवा सकते हैं:

इन स्थितियों में ज़रूरी नहीं:

  • कोई खास खतरा न हो
  • सिर्फ जिज्ञासा के लिए करवाई जा रही हो
  • नतीजों का कोई चिकित्सकीय उपयोग न हो

निष्कर्ष

जेनेटिक टेस्टिंग आधुनिक मेडिकल साइंस का एक बेहतरीन आविष्कार ज़रूर है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर किसी को इसे आँख बंद करके करवा लेना चाहिए। इसे किसी डर, इंटरनेट के ट्रेंड या फैशन के तौर पर देखने के बजाय, अपनी ज़रूरत, पारिवारिक इतिहास (Family History) और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही चुनना समझदारी है।

हमेशा याद रखें कि हमारे जीन्स हमें सिर्फ किसी बीमारी की 'संभावना' बताते हैं, हमारा 'भाग्य' तय नहीं करते। आपका सही खानपान, एक्टिव लाइफस्टाइल, मानसिक शांति और समय-समय पर रूटीन चेकअप ही हमेशा एक लंबी और सेहतमंद ज़िंदगी की सबसे मज़बूत नींव रहेंगे।

References

GENETIC TESTING - Understanding Genetics - NCBI Bookshelf

Genetic Testing

Genetic Testing Fact Sheet - NCI

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। अधिकांश मामलों में इसके लिए केवल आपके खून, लार (Saliva) या गाल के अंदरूनी हिस्से से कोशिकाओं (Cheek Swab) का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है, जिसमें कोई दर्द नहीं होता।

नहीं, ऐसा नहीं है। यह टेस्ट केवल कुछ खास आनुवंशिक स्थितियों, जन्मजात विकारों और भविष्य में होने वाली कुछ बीमारियों के जोखिमों (Risks) की जानकारी दे सकता है, सभी बीमारियों की नहीं।

हाँ, एक पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति भी यह जाँच करवा सकता है, खासकर तब जब वह अपने परिवार के मेडिकल इतिहास को लेकर सतर्क होना चाहता हो या किसी भावी खतरे का अंदाज़ा लगाना चाहता हो।

नहीं। यह टेस्ट केवल इस बात का आकलन करता है कि आपके जीन्स के कारण आपको कैंसर होने का खतरा सामान्य लोगों से कितना ज़्यादा या कम है। यह कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं करता।

कुछ मामलों में हाँ। यदि समय रहते किसी बड़े खतरे (जैसे किसी खास बीमारी का जोखिम) का पता चल जाए, तो सही जीवनशैली, खानपान में बदलाव और समय-समय पर डॉक्टरी जाँच की मदद से उस खतरे को बहुत हद तक टाला या कम किया जा सकता है।

हाँ, विशेष परिस्थितियों में जैसे कि बच्चे के शारीरिक या मानसिक विकास में कोई असामान्य देरी दिख रही हो, तो डॉक्टर की सलाह पर बच्चों के लिए भी यह टेस्ट किया जाता है।

बिल्कुल नहीं। भले ही आप एक ही परिवार के सदस्य हों, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना (Genetic Structure) और उसके जीन्स का पैटर्न पूरी तरह अलग होता है।

इसकी लागत पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस प्रकार का और कितना जटिल (Complex) टेस्ट करवा रहे हैं। बेसिक टेस्ट के मुकाबले एडवांस जेनेटिक मैपिंग की कीमत थोड़ी ज़्यादा हो सकती है।

हाँ, कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज में यह टेस्ट बहुत मददगार होता है (जिसे फार्माकोजेनोमिक्स कहते हैं)। इससे डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि कौन सी दवा या डोज़ आपके शरीर पर सबसे सटीक और बेहतर असर करेगी।

नहीं, बेहतर होगा कि यह निर्णय आप खुद अकेले न लें। किसी भी नतीजे या रिपोर्ट को सही तरीके से समझने और सही दिशा में कदम उठाने के लिए किसी योग्य चिकित्सक या जेनेटिक काउंसलर से सलाह ज़रूर लें।

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