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Gout में पैर का अंगूठा इतना सूजा कि जूता नहीं पहन सकता था — 3 महीने में Normal

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 11 Jun, 2026
  • category-iconUpdated on 11 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5008

रात को सोते समय सब कुछ बिल्कुल ठीक था, लेकिन सुबह उठते ही पैर के अंगूठे में इतनी भयानक सूजन और दर्द था कि ज़मीन पर पैर रखना तो दूर, जूता पहनना भी नामुमकिन हो गया। दर्द ऐसा मानो किसी ने अंगूठे में कोई सूई चुभा दी हो। ऐसे में तुरंत राहत पाने के लिए कई लोग पेनकिलर्स (Painkillers) का सहारा ले लेते हैं। लेकिन क्या यह सही तरीका है? बिल्कुल नहीं। दर्द की दवाइयां कुछ घंटों के लिए आपके दिमाग को दर्द का एहसास नहीं होने देतीं, लेकिन वे समस्या की जड़ को खत्म नहीं करतीं। 

जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि शरीर में यूरिक एसिड (Uric Acid) क्यों बढ़ रहा है, तब तक कोई भी गोली स्थायी आराम नहीं दे सकती। यह समझना बेहद ज़रूरी है कि गाउट (Gout) कोई आम चोट नहीं, बल्कि आपके मेटाबॉलिज़्म और खराब पाचन का लक्षण है। शरीर में एसिड का संतुलन कहीं न कहीं बिगड़ गया है, जिसे सही दिनचर्या और प्राकृतिक तरीकों से 3 महीने के अंदर वापस नॉर्मल किया जा सकता है।

गाउट (Gout) का दर्द आखिर क्यों होता है?

गाउट की समस्या, जिसे आम भाषा में यूरिक एसिड का बढ़ना भी कहा जाता है, किसी एक कारण से नहीं होती। इसके पीछे हमारी आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, गलत खानपान और कमज़ोर पाचन मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं। जब हम खाने में बहुत ज़्यादा प्यूरीन (Purine) वाली चीज़ें खाते हैं, तो शरीर उसे पचाकर यूरिक एसिड बनाता है। आमतौर पर हमारी किडनी इस एसिड को फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है। लेकिन जब किडनी इसे पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह एसिड हमारे खून में बढ़ने लगता है। धीरे-धीरे यह क्रिस्टल (छोटे-छोटे कांच के टुकड़ों की तरह) का रूप ले लेता है और हमारे जोड़ों में, खासकर पैर के अंगूठे में जमा होने लगता है। इन्ही क्रिस्टल्स की वजह से भयानक दर्द, लालिमा और सूजन आती है। असल में गाउट कोई ऐसी बीमारी नहीं जिसे ज़बरदस्ती दबाया जाए; इसे तो शरीर की सफाई करके ही ठीक किया जा सकता है।

क्या गाउट का दर्द हर बार एक जैसा होता है?

जी नहीं, गाउट की परेशानी हर व्यक्ति के लिए और हर बार एक जैसी नहीं होती। इसे मुख्य रूप से अलग-अलग चरणों में देखा जा सकता है। पहले अटैक में अचानक पैर के अंगूठे या एड़ी में भयानक दर्द उठता है जो कुछ दिनों में खुद कम हो जाता है। इसे 'एक्यूट गाउट अटैक' कहते हैं। इसके बाद कुछ लोगों को महीनों या सालों तक कोई दर्द नहीं होता, लेकिन अंदर ही अंदर यूरिक एसिड जमा हो रहा होता है। 

अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह दर्द बार-बार लौटने लगता है और अंगूठे के अलावा घुटनों, कोहनियों और उंगलियों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। इसे 'क्रॉनिक गाउट' कहा जाता है। इस स्टेज में जोड़ों के पास एसिड की गांठें (Tophi) बन जाती हैं। इसलिए अपनी परेशानी के शुरुआती पैटर्न को पहचानना सबसे पहला कदम है।

यूरिक एसिड बढ़ने का शरीर पर क्या असर पड़ता है?

शरीर में यूरिक एसिड का लेवल ज़्यादा होना सिर्फ जोड़ों के दर्द तक सीमित नहीं रहता। इसके कई गंभीर बदलाव देखने को मिलते हैं:

  • किडनी पर दबाव: बढ़ा हुआ यूरिक एसिड किडनी के लिए फिल्टर करना मुश्किल हो जाता है, जिससे किडनी में पथरी (Kidney Stones) बनने का खतरा रहता है।
  • जोड़ों का खराब होना: अगर लंबे समय तक गाउट का इलाज न हो, तो एसिड के क्रिस्टल हड्डियों और कार्टिलेज को अंदर से घिसने लगते हैं।
  • चलने-फिरने में लाचारी: दर्द और सूजन इतनी बढ़ जाती है कि इंसान का रोज़मर्रा का काम करना और चलना-फिरना तक बंद हो जाता है।
  • त्वचा के नीचे गांठें: एडवांस स्टेज में यूरिक एसिड जोड़ों के आस-पास सफेद गांठों (टोफी) के रूप में जमा हो जाता है, जो देखने में भी खराब लगता है।
  • नींद और मानसिक शांति खराब: रात के समय गाउट का दर्द ज़्यादा भड़कता है, जिससे नींद पूरी तरह टूट जाती है और इंसान चिड़चिड़ा हो जाता है।

क्या पैर का दर्द किसी गहरी बीमारी का संकेत है?

अंगूठे में बार-बार सूजन आना सिर्फ एक मौसमी दर्द नहीं है; यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी उथल-पुथल का संकेत हो सकता है:

  • किडनी की कमज़ोरी: यह इस बात का साफ इशारा है कि आपकी किडनी शरीर से टॉक्सिन्स (ज़हर) को सही से बाहर नहीं निकाल पा रही है।
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम: बढ़ा हुआ यूरिक एसिड अक्सर मोटापे, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ते कोलेस्ट्रॉल की तरफ भी इशारा करता है।
  • डायबिटीज का खतरा: जिन लोगों का यूरिक एसिड लगातार हाई रहता है, उन्हें भविष्य में शुगर  होने का खतरा बहुत ज़्यादा होता है।
  • लिवर की खराबी: अगर आपका लिवर फैटी है या पाचन कमज़ोर है, तो शरीर प्यूरीन को सही से तोड़ नहीं पाता।
  • हृदय रोग की चेतावनी: कुछ मामलों में गाउट खून की नसों में सूजन पैदा करता है, जो दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है।

आयुर्वेद में गाउट (वातरक्त) का मूल कारण क्या माना जाता है?

आयुर्वेद के अनुसार, गाउट की समस्या को 'वातरक्त' कहा जाता है। इसके मुख्य कारण ये माने गए हैं:

  • वात दोष का बढ़ना: गलत खानपान से शरीर में वात (हवा) बढ़ जाती है, जो खून के बहाव में रुकावट डालती है।
  • रक्त (खून) का दूषित होना: बहुत ज़्यादा मसालेदार, खट्टा और भारी खाना खाने से शरीर का खून दूषित (Impure) हो जाता है।
  • पित्त का असंतुलन: शरीर में पित्त (गर्मी) बढ़ने से जोड़ों में सूजन, लालिमा और जलन पैदा होती है।
  • पाचन की कमज़ोरी (आम दोष): जब खाना सही से नहीं पचता, तो वह पेट में सड़कर 'आम' (टॉक्सिन) बनाता है, जो जोड़ों में जाकर जम जाता है।

गाउट (यूरिक एसिड) में राहत देने वाली असरदार जड़ी-बूटियाँ 

आयुर्वेद में गाउट के दर्द और यूरिक एसिड को जड़ से खत्म करने के लिए इन जड़ी-बूटियों को बहुत असरदार माना गया है:

  • गिलोय (Giloy): गिलोय को वातरक्त की सबसे बेहतरीन दवा माना गया है। यह शरीर में बढ़े हुए यूरिक एसिड को बेअसर करके सूजन कम करती है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): इसके नाम का मतलब ही है 'शरीर को नया करना'। यह किडनी के काम करने की क्षमता को बढ़ाती है और पेशाब के रास्ते यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकाल फेंकती है।
  • किशोर गुग्गुल (Kaishore Guggulu): यह जड़ी-बूटी खून को साफ करने और जोड़ों में जमा यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को तोड़ने में चमत्कार की तरह काम करती है।
  • सुरंजान (Suranjan): गाउट के भयंकर दर्द और अचानक होने वाले अटैक को रोकने के लिए सुरंजान का इस्तेमाल किया जाता है, यह एक प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करता है।

 खराब लाइफस्टाइल और गलत आदतें गाउट को कैसे बढ़ाती हैं?

आजकल एक ही जगह बैठे रहना गाउट न ठीक होने का एक बहुत बड़ा कारण बन चुका है:

  • शारीरिक मेहनत की कमी: दिन भर कुर्सी पर बैठे रहने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है, जिससे एसिड जोड़ों में आसानी से जमने लगता है।
  • मोटापा बढ़ना: वज़न ज़्यादा होने पर किडनी को यूरिक एसिड बाहर निकालने में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • पानी कम पीना: एसी (AC) कमरों में रहने से प्यास कम लगती है। पानी कम पीने से किडनी एसिड को फ्लश आउट नहीं कर पाती।
  • देर रात जागना: नींद पूरी न होने से शरीर का स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, जो मेटाबॉलिज़्म को खराब करके यूरिक एसिड बढ़ा देता है।

गलत खानपान गाउट के दर्द को कैसे भड़काता है?

आप जो खाते हैं, उसका सीधा असर आपके जोड़ों पर पड़ता है:

  • प्यूरीन वाला खाना: रेड मीट, सीफूड और कुछ खास तरह की दालों में प्यूरीन बहुत ज़्यादा होता है, जो सीधा यूरिक एसिड बनाता है।
  • शराब और बीयर (Alcohol): बीयर में प्यूरीन की मात्रा बहुत हाई होती है। यह किडनी को एसिड निकालने से रोकती है, जिससे दर्द तुरंत भड़क जाता है।
  • रिफाइंड चीनी: कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड जूस में मौजूद 'फ्रुक्टोज़' यूरिक एसिड के लेवल को बहुत तेज़ी से बढ़ाता है।
  • खट्टे और तले हुए पदार्थ: बहुत ज़्यादा खट्टी चीज़ें और तला-भुना खाना आयुर्वेद के अनुसार रक्त को खराब करता है और सूजन बढ़ाता है।

किन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण यूरिक एसिड बढ़ता है?

कई बार आप डाइट बिल्कुल सही रखते हैं, फिर भी कुछ बीमारियों के कारण गाउट का अटैक आ जाता है:

  • किडनी की बीमारी: अगर किडनी पहले से ही कमज़ोर है या उसमें कोई इन्फेक्शन है, तो वह यूरिक एसिड को फिल्टर नहीं कर पाएगी।
  • हाइपोथायरायडिज्म: थायराइड कम काम करने पर शरीर का पूरा सिस्टम सुस्त हो जाता है, जिससे यूरिक एसिड शरीर में रुकने लगता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर: बीपी की दवाइयां (जिन्हें डाययूरेटिक्स कहते हैं) शरीर से पानी बाहर निकालती हैं, जिससे खून में यूरिक एसिड गाढ़ा हो जाता है।
  • डायबिटीज : शरीर में इंसुलिन का सही से काम न करना यूरिक एसिड को बढ़ने में पूरी मदद करता है।
  • सोरायसिस: इस स्किन बीमारी में शरीर के सेल्स बहुत तेज़ी से टूटते हैं, जिससे अंदर यूरिक एसिड का लेवल बढ़ जाता है।

पेनकिलर्स कब नुकसान पहुंचा सकते हैं?

गाउट के दर्द में ली जाने वाली पेनकिलर्स (Painkillers) एक अस्थायी उपाय हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका इस्तेमाल गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। सबसे बड़ा खतरा आपकी किडनी और लिवर पर होता है। धीरे-धीरे आपकी किडनी इन गोलियों से डैमेज होने लगती है, जिससे यूरिक एसिड बाहर निकलने की बजाय शरीर में ही जमा होने लगता है। इसके अलावा, रोज़ ये दवाइयाँ खाने से पेट में अल्सर, एसिडिटी और कमज़ोरी जैसी समस्याएँ होने लगती हैं। जब आप गोली का असर खत्म होने पर खड़े होते हैं, तो दर्द दोगुना महसूस होता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सख्त सलाह के इन्हें अपनी आदत कभी नहीं बनाना चाहिए।

बिना Painkiller सूजन और दर्द कम करने के प्राकृतिक तरीके

प्राकृतिक रूप से अंगूठे की सूजन और दर्द को कम करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं:

  • बर्फ की सिकाई: सूजे हुए अंगूठे पर आइस पैक लगाने से नसों की सूजन तुरंत कम होती है और दर्द में आराम मिलता है।
  • पैर को ऊंचाई पर रखें: लेटकर अपने पैर के नीचे दो तकिए लगा लें, इससे खून का दौरा सही होता है और सूजन घटती है।
  • खूब पानी पिएँ : दर्द के समय जितना हो सके सादा पानी पिएं, यह यूरिक एसिड को पेशाब के ज़रिए बाहर धकेलेगा।
  • चेरी का जूस: ताज़ी चेरी या उसका जूस यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को तोड़ने में बहुत मददगार साबित होता है।
  • नींबू पानी: नींबू में विटामिन सी होता है, जो यूरिक एसिड को बेअसर करने में जादुई असर दिखाता है।

यूरिक एसिड कंट्रोल करने के लिए रोज़मर्रा की कौन-सी आदतें अपनाएँ?

गाउट को हमेशा के लिए दूर रखने के लिए अपनी रूटीन में ये बदलाव लाएँ:

  • पानी का नियम: रोज़ाना कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीने की आदत डालें, यह किडनी का सबसे बड़ा दोस्त है।
  • वज़न कंट्रोल करें: क्रैश डाइट के बिना धीरे-धीरे अपना वज़न कम करें। वज़न कम होने से यूरिक एसिड अपने आप नॉर्मल हो जाता है।
  • हल्का व्यायाम: तेज़ दर्द में आराम करें, लेकिन दर्द ठीक होने पर रोज़ 30 मिनट वॉक या योग ज़रूर करें।
  • सही जूते पहनें: बहुत ज़्यादा टाइट या सख्त तलवे वाले जूते पहनने से बचें, पैरों को आरामदायक फुटवियर दें।
  • डिनर जल्दी करें: रात का खाना हल्का रखें और सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खा लें ताकि खाना सही से पच सके।

आयुर्वेद गाउट की समस्या को कैसे देखता है?

आयुर्वेद गाउट (वातरक्त) को केवल एक जोड़ की बीमारी नहीं मानता, बल्कि यह पूरे शरीर की मेटाबॉलिक कमज़ोरी का नतीजा है। आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर का पाचन (अग्नि) खराब होता है और पेट साफ नहीं रहता, तो शरीर में गंदगी जमा होने लगती है। आयुर्वेद सिर्फ दर्द को नहीं दबाता, बल्कि यह देखता है कि आपके शरीर की प्रकृति क्या है और वात या रक्त में से क्या ज़्यादा बिगड़ा हुआ है। यह पेट की सफाई, खून के शोधन और सही जड़ी-बूटियों के माध्यम से किडनी की ताकत वापस लाने पर ज़ोर देता है, जिससे यूरिक एसिड बनना ही बंद हो जाए।

गाउट के दर्द में कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है:

  • तेज़ बुखार आना: अंगूठे में दर्द के साथ अगर तेज़ बुखार या कंपकंपी छूट रही हो, तो यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।
  • असहनीय दर्द: जब दर्द इतना बढ़ जाए कि चादर का छूना भी बर्दाश्त न हो और कोई घरेलू उपाय काम न करे।
  • लाल रंग का फैलना: अगर अंगूठे की लाली और सूजन पूरे पंजे या पैर के ऊपरी हिस्से तक तेज़ी से फैल रही हो।
  • जोड़ों का मुड़ना: अगर बार-बार अटैक आने से पैर का अंगूठा टेढ़ा होने लगा हो या गांठें बन गई हों।
  • लगातार परेशानी: अगर गाउट का दर्द 2 हफ्ते से ज़्यादा समय तक बिल्कुल कम न हो रहा हो।

अच्छी रिकवरी और सूजन कम करने के आयुर्वेदिक सुझाव

आयुर्वेद में कुछ बेहतरीन उपाय हैं जो बिना किसी साइड इफेक्ट के गाउट के दर्द को खींच लेते हैं। सबसे कारगर है 'एरंड के तेल' (Castor Oil) का इस्तेमाल। हल्के गुनगुने एरंड के तेल को सूजे हुए हिस्से पर लगाकर छोड़ दें, यह सूजन को तेज़ी से सोखता है। गिलोय का ताज़ा जूस रोज़ सुबह खाली पेट पीना यूरिक एसिड का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसके अलावा, दर्द वाली जगह पर 'दशमूल' या हल्दी का लेप लगाने से भी लाली और सूजन तुरंत कम होती है। आयुर्वेद में 'पंचकर्म' की 'बस्ती' और 'रक्तमोक्षण' (दूषित खून बाहर निकालना) चिकित्सा वातरक्त के लिए रामबाण मानी जाती है।

गाउट के लिए आधुनिक और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करना, दर्द व सूजन कम करना और गठिया (Gout) से होने वाले जोड़ों के नुकसान को रोकना। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार शरीर के संतुलन, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करना।
नज़रिया यूरिक एसिड के बढ़ने, क्रिस्टल बनने और उनसे होने वाली सूजन को बीमारी का प्रमुख कारण माना जाता है। आयुर्वेद में इसे वात-रक्त या अन्य दोषों के असंतुलन से जोड़कर देखा जा सकता है।
उपचार तरीका आवश्यकता अनुसार यूरिक एसिड कम करने वाली दवाएँ (जैसे एलोप्यूरिनॉल, फेबुक्सोस्टेट), सूजनरोधी दवाएँ, आहार और जीवनशैली में बदलाव शामिल होते हैं। जड़ी-बूटियाँ, आहार नियंत्रण, पंचकर्म और अन्य पारंपरिक उपायों का उपयोग किया जा सकता है।
दर्द और सूजन पर प्रभाव तीव्र दर्द और सूजन को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं। आयुर्वेदिक उपचार आराम और समग्र स्वास्थ्य सुधारने का प्रयास करते हैं।
किडनी की भूमिका आधुनिक चिकित्सा भी किडनी की कार्यक्षमता, यूरिक एसिड के उत्सर्जन और संबंधित जोखिम कारकों पर ध्यान देती है। पारंपरिक रूप से शरीर की शुद्धि और संतुलन पर बल दिया जाता है।
दवाओं की अवधि कुछ लोगों को लंबे समय तक दवा की आवश्यकता हो सकती है, जबकि कुछ में स्थिति के अनुसार उपचार बदला जा सकता है। उपचार की अवधि व्यक्ति की स्थिति और चिकित्सक की सलाह पर निर्भर करती है।
वैज्ञानिक प्रमाण यूरिक एसिड नियंत्रण और गाउट की रोकथाम के लिए आधुनिक दवाओं की प्रभावशीलता के मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक उपायों पर सीमित शोध उपलब्ध है, लेकिन अधिकांश दावों के लिए अधिक वैज्ञानिक प्रमाणों की आवश्यकता है।
सुरक्षा दवाओं के लाभ और संभावित दुष्प्रभाव दोनों होते हैं, इसलिए नियमित चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है। आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग भी योग्य चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए।

निष्कर्ष

गाउट का दर्द शरीर का एक अलार्म है जो बताता है कि अंदर कुछ बहुत गलत चल रहा है। अंगूठे की सूजन और दर्द से परेशान होकर सिर्फ पेनकिलर्स पर निर्भर होना किसी भी तरह से सही समाधान नहीं है। तीन महीने तक अपनी दिनचर्या में सुधार, सही खानपान, प्यूरीन वाली चीज़ों से दूरी और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को पूरी तरह नॉर्मल किया जा सकता है। याद रखें, एक स्वस्थ शरीर रातों-रात नहीं बनता, इसके लिए आपको अपनी किडनी और पाचन को प्यार और धैर्य के साथ वापस मज़बूत करना होगा। अपने शरीर के संकेतों को सुनें और दर्द-मुक्त, प्राकृतिक जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

टमाटर में प्यूरीन ज़्यादा नहीं होता, लेकिन कुछ लोगों में यह गाउट के अटैक को भड़का सकता है। अगर आपको टमाटर से दर्द बढ़ता महसूस होता है, तो इसका इस्तेमाल कम कर दें।

दर्द होने पर पैर को तुरंत ऊपर रखें और उस पर आइस पैक से सिकाई करें। बिल्कुल भी चलने की कोशिश न करें।

जब पैर में सूजन और दर्द हो (गाउट अटैक के दौरान), तो वॉक बिल्कुल न करें। दर्द पूरी तरह ठीक होने के बाद ही हल्की वॉक शुरू करें।

सुबह खाली पेट 2 चम्मच ताज़े गिलोय के जूस को आधे गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर पीना काफी फायदेमंद होता है।

सभी दालें नुकसान नहीं करतीं। छिलके वाली दालें (जैसे राजमा, छोले, उड़द) कम खानी चाहिए, लेकिन मूंग की दाल आसानी से पच जाती है और सुरक्षित है।

एक स्वस्थ वयस्क को यूरिक एसिड बाहर निकालने के लिए हर दिन 3 से 4 लीटर पानी ज़रूर पीना चाहिए।

रात को सोने से पहले थोड़ा सा एरंड का तेल हल्का गर्म करें और सूजे हुए अंगूठे पर हल्के हाथ से लगाकर छोड़ दें। मालिश न करें।

सीमित मात्रा में कॉफी पीना यूरिक एसिड कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन बहुत ज़्यादा चीनी वाली 

क्या यूरिक एसिड की बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो सकती है?

हां, अगर आप 3 से 6 महीने तक सही लाइफस्टाइल, आयुर्वेदिक दवाइयां और कड़ा परहेज़ अपनाएं, तो यह समस्या जड़ से खत्म हो सकती है।

नहीं, गाउट के अचानक उठे दर्द (Acute attack) में हमेशा बर्फ (ठंडी सिकाई) का इस्तेमाल करें। गर्म सिकाई से सूजन और दर्द बढ़ सकता है।

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