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Sensitive skin में कौन सी food mistakes परेशानी बढ़ा सकती हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

चेहरे पर बार-बार लाल दाने आना, खुजली होना या स्किन का छिल जाना बहुत परेशान करने वाला अनुभव होता है। जब कोई भी नई क्रीम लगाने के बाद चेहरे पर जलन मचती रहती है, तो पूरा दिन चिड़चिड़ेपन से भरा गुज़रता है। ऐसे में कई लोग तुरंत राहत पाने के लिए केमिकल वाली क्रीम या लोशन का सहारा ले लेते हैं। लेकिन क्या यह सही तरीका है? बिलकुल नहीं। ये क्रीम कुछ देर के लिए आपकी स्किन की ऊपरी परत को शांत कर सकती हैं, लेकिन वे समस्या की जड़ को खत्म नहीं करतीं। 

जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि स्किन अंदर से क्यों रूठी हुई है और आपकी कौन सी 'फूड मिस्टेक्स' Food Mistakes इसे बिगाड़ रही हैं, तब तक कोई भी ट्यूब स्थायी आराम नहीं दे सकती। यह समझना बेहद ज़रूरी है कि सेंसिटिव स्किन होना सिर्फ बाहरी परेशानी नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही किसी समस्या का लक्षण है। आपके पेट और स्किन के बीच का तालमेल कहीं न कहीं बिगड़ गया है, जिसे सही खानपान और प्राकृतिक तरीकों से वापस पाया जा सकता है।

स्किन अचानक इतनी सेंसिटिव क्यों हो जाती है?

स्किन के सेंसिटिव होने की समस्या किसी एक कारण से नहीं होती। इसके पीछे हमारा आज का अनहेल्दी खानपान, बढ़ता प्रदूषण और खराब पाचन मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं। जब हम लगातार जंक फूड या ज़्यादा मसालेदार चीज़ें खाते हैं, तो हमारे शरीर में 'हीट' यानी गर्मी बढ़ जाती है। शरीर इस गर्मी को शांत नहीं कर पाता और यह चेहरे पर दाने या लालिमा के रूप में बाहर निकल जाती है। 

इसके अलावा, सही समय पर खाना न खाना और पानी कम पीना हमारे शरीर के प्राकृतिक डिटॉक्स सिस्टम को भ्रमित कर देता है। अगर आपका पेट साफ नहीं रहता, तो खून में अशुद्धियाँ बढ़ने लगती हैं और स्किन को सही पोषण नहीं मिल पाता। कई बार हमारी कुछ छोटी-छोटी आदतें जैसे बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी पीना या रात को भारी भोजन करना भी स्किन की प्राकृतिक नमी को हमसे दूर ले जाती हैं। असल में चमकती स्किन कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे ज़बरदस्ती क्रीम से लाया जा सके; यह तो एक अंदरूनी सहज प्रक्रिया है।

क्या हर किसी की सेंसिटिव स्किन की परेशानी एक जैसी होती है?

जी नहीं, सेंसिटिव स्किन की परेशानी हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। इसे मुख्य रूप से तीन तरह से देखा जा सकता है। कुछ लोगों को धूप में जाते ही या तीखा खाते ही चेहरे पर भयंकर लालिमा Redness आ जाती है और जलन होने लगती है। वहीं, कुछ लोगों की स्किन इतनी रूखी हो जाती है कि उस पर पपड़ी जमने लगती है और खुजली होने लगती है। 

तीसरी स्थिति वह होती है जिसमें चेहरे पर छोटे-छोटे पानी वाले या पस वाले दाने निकल आते हैं और वे जल्दी ठीक नहीं होते। इसके अलावा कुछ लोगों को सिर्फ मौसम बदलने पर दिक्कत होती है, जबकि कुछ लोगों के लिए यह महीनों पुरानी आदत बन जाती है। इसलिए अपनी स्किन के पैटर्न और खाने के असर को पहचानना सबसे पहला कदम है।

गलत खानपान का स्किन पर क्या असर पड़ता है?

आप जो खाते हैं, उसका सीधा असर आपकी स्किन पर पड़ता है। गलत फूड मिस्टेक्स शरीर में कई तरह के बदलाव लाती हैं:

  • पेट में गर्मी बढ़ना: बहुत ज़्यादा तीखा या तला हुआ खाने से पेट में गर्मी बढ़ती है, जो सीधे चेहरे पर दानों के रूप में दिखती है।
  • खून की अशुद्धि: पैक्ड और प्रोसेस फूड खाने से शरीर में टॉक्सिन्स ज़हरीले तत्व जमा हो जाते हैं, जिससे खून साफ नहीं रह पाता।
  • हार्मोनल बदलाव: ज़्यादा मीठा खाने से शरीर में इंसुलिन का स्तर तेज़ी से बढ़ता है, जो स्किन में तेल सीबम का उत्पादन बढ़ा देता है।
  • कोलेजन का टूटना: अनहेल्दी डाइट से स्किन की नमी और लचीलापन खत्म हो जाता है, जिससे वह कमज़ोर और सेंसिटिव हो जाती है।
  • सूजन Inflammation: बासी या गलत कॉम्बिनेशन वाला खाना शरीर के अंदर सूजन पैदा करता है, जिससे स्किन छूने पर भी दर्द करती है।

क्या आपकी स्किन की समस्या किसी गहरी वजह का संकेत है?

लगातार स्किन का खराब रहना सिर्फ एक बाहरी समस्या नहीं है; यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी उथल-पुथल का संकेत हो सकता है:

  • पाचन तंत्र की खराबी: अगर आपका पेट ठीक नहीं है, कब्ज़ या एसिडिटी रहती है, तो चेहरे पर कभी भी प्राकृतिक चमक नहीं आ पाएगी।
  • लीवर पर दबाव: शरीर की गंदगी बाहर निकालने का काम लीवर का है। इसके कमज़ोर होने पर गंदगी स्किन के ज़रिए बाहर आने लगती है।
  • हार्मोनल असंतुलन: महिलाओं में PCOD या थायराइड की समस्या के कारण भी स्किन बहुत ज़्यादा ऑयली और सेंसिटिव हो जाती है।
  • गट हेल्थ Gut Health: आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की कमी होने से खाया हुआ खाना ठीक से नहीं पचता और एलर्जी पैदा करता है।
  • खून की कमी: शरीर में आयरन या ज़रूरी विटामिन्स की कमी स्किन को अंदर से बेजान और रूखा बना देती है।

आयुर्वेद में सेंसिटिव स्किन का मूल कारण क्या माना जाता है?

आयुर्वेद के अनुसार, स्किन की हर समस्या का सीधा संबंध हमारे 'त्रिदोष' वात, पित्त, कफ और 'रक्त धातु' खून से है। इसके मुख्य कारण ये माने गए हैं:

  • पित्त दोष का बढ़ना: शरीर में पित्त गर्मी जब असंतुलित होकर बढ़ जाता है, तो चेहरे पर लालिमा, जलन और दाने निकलने लगते हैं।
  • रक्त दृष्टि: जब दूषित खानपान से खून में अशुद्धियाँ मिल जाती हैं, तो स्किन की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
  • आम दोष Toxins: खाना ठीक से न पचने के कारण शरीर में जो 'आम' टॉक्सिन बनता है, वह स्किन के रोम छिद्रों को बंद कर देता है।
  • विरुद्ध आहार: आयुर्वेद के अनुसार मछली के साथ दूध पीना या गरम के साथ एकदम ठंडी चीज़ें खाना दोषों को बिगाड़ देता है।

सेंसिटिव स्किन को शांत करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

स्किन की गर्मी और एलर्जी को अंदर से शांत करने के लिए ये आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ बहुत असरदार हैं:

  • नीम: यह खून को साफ करने वाली सबसे बेहतरीन प्राकृतिक औषधि है, जो बैक्टीरिया को मारती है और स्किन को दाने-मुक्त बनाती है।
  • मंजिष्ठा: यह जड़ी-बूटी शरीर की अंदरूनी गर्मी को कम करती है, रंगत निखारती है और स्किन की खुजली व लालिमा को दूर करती है।
  • एलोवेरा घृतकुमारी: यह वात और पित्त दोनों को शांत करता है। इसका जूस पीने से पेट साफ होता है और स्किन को अंदर से नमी मिलती है।
  • सारिवा अनंतमूल: यह खून की गर्मी पित्त को खींचकर बाहर निकाल देता है और स्किन को एक प्राकृतिक और स्थायी ठंडक प्रदान करता है।

ज़्यादा मीठा और डेयरी प्रोडक्ट्स स्किन कैसे बिगाड़ते हैं?

आजकल की डाइट में मीठा और दूध से बनी चीज़ें सेंसिटिव स्किन के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुकी हैं:

  • शुगर स्पाइक: ज़्यादा चीनी खाने से शरीर में सूजन Inflammation बढ़ती है, जो सीधे तौर पर पिंपल्स का कारण बनती है।
  • डेयरी का असर: पैकेट वाले दूध और चीज़ में अक्सर ऐसे हार्मोन्स होते हैं, जो हमारे शरीर के हार्मोन्स को बिगाड़ देते हैं।
  • स्किन का ऑयली होना: डेयरी प्रोडक्ट्स स्किन की तेल ग्रंथियों को उत्तेजित करते हैं, जिससे पोर्स रोम छिद्र बंद हो जाते हैं।
  • खुजली और एलर्जी: कई लोगों का पेट दूध को ठीक से पचा नहीं पाता, जिससे अंदर गैस और एसिडिटी बनती है जो चेहरे पर एलर्जी के रूप में दिखती है।
  • ग्लाइकेशन: अत्यधिक मीठा कोलेजन को सख्त बना देता है, जिससे स्किन अपना प्राकृतिक बचाव खो देती है।

मसालेदार और तला-भुना खाना सेंसिटिव स्किन का दुश्मन

आप जो खाते हैं, उसका सीधा असर आपकी स्किन की तासीर पर पड़ता है:

  • हीट जनरेशन: बहुत ज़्यादा लाल मिर्च, गरम मसाला या काली मिर्च खाने से शरीर के अंदर भयंकर गर्मी पैदा होती है।
  • पित्त का भड़कना: यह गर्मी खून को अशुद्ध करती है और स्किन पर लाल चकत्ते या जलन पैदा कर सकती है।
  • लीवर पर दबाव: रोज़ाना तला-भुना Junk Food खाने से लीवर उसे पचाने में थक जाता है, और जब लीवर शरीर की गंदगी बाहर नहीं निकाल पाता, तो वह गंदगी स्किन के रास्ते दाने बनकर बाहर आती है।
  • एसिडिटी का असर: जंक फूड से होने वाली एसिडिटी स्किन के नेचुरल पीएच pH लेवल को बिगाड़ देती है।

क्या आपकी स्किन की समस्या किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकती है?

लगातार स्किन का खराब रहना सिर्फ एक बाहरी समस्या नहीं है; यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी उथल-पुथल का संकेत हो सकता है:

  • पीसीओडी: महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण चेहरे के निचले हिस्से Jawline पर मोटे दाने निकल आते हैं।
  • गट हेल्थ: अगर आपका पेट साफ नहीं रहता या कब्ज़ रहती है, तो आपका शरीर कभी भी ग्लोइंग स्किन नहीं दे सकता।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: ब्लड शुगर का सही न होना स्किन को हर वक्त लाल और सेंसिटिव बनाए रखता है।
  • थायराइड: थायराइड के असंतुलन से स्किन या तो बहुत ज़्यादा रूखी और खुरदरी हो जाती है या फिर बहुत ज़्यादा ऑयली।

केमिकल वाली क्रीम और दवाइयाँ कब नुकसान पहुँचा सकती हैं?

स्किन की एलर्जी मिटाने वाली क्रीम खासकर स्टेरॉयड वाली एक अस्थायी उपाय हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका इस्तेमाल गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। सबसे बड़ा खतरा स्किन का पतला होना है। धीरे-धीरे आपकी स्किन इन क्रीम्स की आदी हो जाती है और प्राकृतिक रूप से खुद को रिपेयर करना बंद कर देती है। 

इसके अलावा, रोज़ ये क्रीम लगाने से स्किन की बाहरी परत कमज़ोर हो जाती है और धूप लगते ही जलने लगती है। अचानक इन क्रीम्स को छोड़ने पर समस्या पहले से भी ज़्यादा भयंकर रूप ले लेती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सख्त सलाह के इन्हें चेहरे पर कभी नहीं लगाना चाहिए।

बिना केमिकल के स्किन सुधारने के प्राकृतिक तरीके

प्राकृतिक रूप से स्किन को स्वस्थ बनाने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं:

  • पर्याप्त पानी पिएँ: दिन भर में 8-10 गिलास पानी पीने से शरीर के सारे टॉक्सिन्स पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाते हैं।
  • विटामिन सी लें: अपनी डाइट में आँवला, संतरा और नींबू शामिल करें, जो स्किन को अंदर से हील करते हैं।
  • ठंडी तासीर का भोजन: लौकी, तोरई, खीरा और नारियल पानी स्किन की गर्मी को प्राकृतिक रूप से शांत करते हैं।
  • ग्रीन टी या हर्बल टी: कैफीन की जगह पुदीने या कैमोमाइल की चाय पिएँ, जो पेट को ठंडक देती है।
  • हल्के फेसवाश का प्रयोग: साबुन की जगह बेसन और गुलाब जल से चेहरा साफ करें, यह स्किन को रूखा नहीं होने देता।

बेदाग स्किन के लिए रोज़मर्रा की कौन-सी आदतें अपनाएँ?

स्किन रूटीन को सुधारने के लिए अपनी दिनचर्या में ये बदलाव लाएँ:

  • चेहरा बार-बार न छुएँ: गंदे हाथों से चेहरे को छूने की आदत छोड़ दें, इससे बैक्टीरिया फैलते हैं।
  • भरपूर नींद: रोज़ रात को 7-8 घंटे की गहरी नींद लें, ताकि स्किन की कोशिकाएँ खुद को रिपेयर कर सकें।
  • धूप से बचाव: बाहर जाते समय चेहरा सूती कपड़े से ढकें या प्राकृतिक सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।
  • साफ तौलिया: अपना तौलिया और तकिए का कवर हर दूसरे दिन बदलें ताकि इंफेक्शन न हो।
  • तनाव से दूरी: ध्यान और योगा से अपने स्ट्रेस लेवल को कम रखें, क्योंकि स्ट्रेस सीधा स्किन पर हमला करता है।

आयुर्वेद स्किन की समस्या को कैसे देखता है?

आयुर्वेद स्किन त्वचा को शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य का आईना मानता है। आयुर्वेद के अनुसार, स्किन का सीधा संबंध हमारे पाचन अग्नि और धातूपोषणा से है। जब हमारा खानपान प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाता है, तो दोषों में असंतुलन आ जाता है। आयुर्वेद सिर्फ दानों पर लेप लगाने को इलाज नहीं मानता, बल्कि यह देखता है कि आपके शरीर की प्रकृति क्या है और पेट में कौन सा दोष बढ़ा हुआ है। यह पेट की सफाई, खून के शोधन और सही जड़ी-बूटियों के माध्यम से शरीर के प्राकृतिक संतुलन को वापस लाने पर ज़ोर देता है।

डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

खानपान सुधारने और घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है:

  • लगातार लालिमा: अगर चेहरे की लालिमा कम न हो रही हो और उसमें तेज़ जलन या दर्द हो।
  • बड़े और पस वाले दाने: जब चेहरे पर ऐसे दाने निकलें जो फूटने पर घाव बन जाएँ और जल्दी न भरें।
  • स्किन का छिलना: अगर स्किन हद से ज़्यादा रूखी होकर पपड़ी बन रही हो और खून निकलने लगे।
  • तेज़ी से फैलना: अगर एलर्जी चेहरे से शुरू होकर गर्दन या शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुँचने लगे।
  • दवाइयों का रिएक्शन: अगर आपकी किसी अन्य बीमारी की दवा स्किन को खराब कर रही हो।

सेंसिटिव स्किन के लिए बेहतरीन आयुर्वेदिक सुझाव

आयुर्वेद में कुछ बेहतरीन उपाय हैं जो बिना किसी साइड इफेक्ट के स्किन को हील करते हैं। सबसे कारगर है 'अभ्यंग' यानी सही तेल की हल्की मालिश। नहाने से पहले नारियल या चंदन के तेल से हल्की मसाज पित्त को शांत करती है। खाने में घी का संतुलित इस्तेमाल आंतों की खुश्की दूर करता है, जिसका असर चेहरे पर दिखता है। रात को सोने से पहले नाभि में शुद्ध सरसों या नीम के तेल की दो बूँदें डालना स्किन के रूखेपन के लिए जादुई असर दिखाता है। पंचकर्म चिकित्सा में 'रक्तमोक्षण' जैसी विधियाँ भी बहुत पुरानी एलर्जी को जड़ से मिटाने के लिए अपनाई जाती हैं।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य त्वचा रोग के कारण की पहचान कर लक्षणों को नियंत्रित करना और त्वचा को स्वस्थ रखना। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार शरीर के संतुलन, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना।
नज़रिया एलर्जी, संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग, हार्मोनल बदलाव या अन्य कारणों की जाँच की जाती है। त्वचा की समस्या को शरीर के समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली से जोड़कर देखा जाता है।
उपचार तरीका आवश्यकता अनुसार मॉइस्चराइज़र, एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल दवाएँ, स्टेरॉयड क्रीम, इम्यूनोमॉड्यूलेटर्स या अन्य उपचार दिए जा सकते हैं। जड़ी-बूटियाँ, आहार संबंधी सुझाव, पंचकर्म और अन्य पारंपरिक उपायों का उपयोग किया जा सकता है।
लक्षणों पर प्रभाव कई उपचार सूजन, खुजली, लालिमा और संक्रमण को प्रभावी रूप से नियंत्रित कर सकते हैं। त्वचा और समग्र स्वास्थ्य सुधारने का प्रयास किया जाता है।
स्टेरॉयड क्रीम के बारे में सही मात्रा और चिकित्सकीय निगरानी में उपयोग करने पर ये कई त्वचा रोगों में प्रभावी होती हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में सामान्यतः स्टेरॉयड का उपयोग नहीं किया जाता।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग के प्रकार के अनुसार दीर्घकालिक प्रबंधन और पुनरावृत्ति रोकने की रणनीति अपनाई जाती है। जीवनशैली और आहार सुधार के माध्यम से लंबे समय के संतुलन पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है। आयुर्वेदिक औषधियों और उपचारों के भी संभावित जोखिम हो सकते हैं; विशेषज्ञ की देखरेख महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

स्किन हमारे शरीर के स्वास्थ्य का एक इंडिकेटर है। जब हमारा पेट साफ होता है और डाइट सही होती है, तो स्किन खुद-ब-खुद चमकने लगती है। स्किन की सेंसिटिविटी बढ़ने पर केमिकल वाली क्रीम्स पर निर्भर रहना किसी भी तरह से सही समाधान नहीं है। अपनी दिनचर्या में सुधार, सही खानपान, ज़्यादा मीठे और मसालों से दूरी और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। याद रखें, बेदाग स्किन एक दिन में नहीं मिलती, इसके लिए आपको अपने पेट और शरीर की ज़रूरतों को प्यार और धैर्य के साथ वापस सेट करना होगा। अपनी फूड मिस्टेक्स सुधारें और एक स्वस्थ, प्राकृतिक जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

References:

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5595600/

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3519246/

https://ijdvl.com/sensitive-skin-an-overview/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, ज़्यादा डेयरी प्रोडक्ट्स दूध, पनीर खाने से शरीर में सीबम ऑयल का उत्पादन बढ़ जाता है, जिससे रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और दाने निकलते हैं।

जलन होने पर केमिकल वाली क्रीम की जगह ताज़ा एलोवेरा जेल या गुलाब जल लगाना सबसे सुरक्षित और असरदार होता है।

बिल्कुल, अगर पेट में कब्ज़ या गैस की समस्या है, तो शरीर के टॉक्सिन्स स्किन के रास्ते बाहर आने की कोशिश करते हैं, जिससे एलर्जी होती है।

आप सुबह खाली पेट नीम के 2-3 कच्चे पत्ते चबा सकते हैं या नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से चेहरा धो सकते हैं।

हाँ, भरपूर पानी पीने से शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है और स्किन अंदर से हाइड्रेट होकर प्राकृतिक रूप से ग्लो करने लगती है।

जिनकी स्किन सेंसिटिव और पित्त प्रधान है, उनके लिए नारियल का तेल या चंदन का तेल सबसे ठंडा और सुरक्षित माना जाता है।

चॉकलेट में मौजूद अत्यधिक चीनी और डेयरी शरीर में हीट और सूजन बढ़ाते हैं, जो सेंसिटिव स्किन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

पूरी तरह हटाने की ज़रूरत नहीं है, बस बहुत ज़्यादा तीखी लाल मिर्च या गरम मसाले का सेवन कम करें। हल्का जीरा, धनिया और हल्दी फायदेमंद होते हैं।

रात में गरिष्ठ भारी भोजन करने से वह ठीक से पच नहीं पाता, जिससे पेट में टॉक्सिन्स आम बनते हैं जो अगली सुबह चेहरे पर सुस्ती और दाने लाते हैं।

स्टेरॉयड क्रीम को एकदम से बंद करने पर दाने भड़क सकते हैं। अपने डॉक्टर से मिलें, वे धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल कम करवाएंगे और साथ ही आयुर्वेदिक उपाय अपनाएँ।

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