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Vitamin deficiency से nerve pain क्यों बढ़ता है? hidden कारण समझिए

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 25 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 20 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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आप सुबह उठते हैं और आपके हाथों-पैरों में अजीब सी झनझनाहट, सुन्नपन या सुई चुभने जैसा दर्द महसूस होता है। कई बार पैर के तलवों में आग जैसी भयंकर जलन होती है। ज़्यादातर लोग इसे "नस चढ़ना", "थकान" या "गलत तरीके से सोना" समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं या तुरंत एक पेनकिलर खा लेते हैं। लेकिन यह कोई आम दर्द नहीं है। यह आपके शरीर का चीख-चीख कर बताने का तरीका है कि आपकी नसों की ऊपरी परत (Myelin Sheath) सूख रही है और शरीर में विटामिन्स (विशेषकर B12 और D) की भयंकर कमी हो गई है। पेनकिलर इस दर्द को सिर्फ सुन्न करते हैं, नसों को पोषण नहीं देते। आइए जानते हैं इसके छिपे हुए कारण और आयुर्वेद कैसे इन कमज़ोर नसों में दोबारा जान फूँक सकता है।

नसों का दर्द (Nerve Pain / Neuropathy) असल में क्या है?

जब हमारी नसें (Nerves) किसी कारण से डैमेज हो जाती हैं या कमज़ोर पड़ जाती हैं, तो वे दिमाग को गलत सिग्नल भेजने लगती हैं। इसे मेडिकल भाषा में न्यूरोपैथी (Neuropathy) कहा जाता है। सामान्य मांसपेशियों के दर्द (जैसे मोच या खिंचाव) और नसों के दर्द में बहुत बड़ा अंतर होता है। नसों का दर्द बहुत अजीब और बेचैन करने वाला होता है।इसमें मरीज़ को ऐसा लगता है जैसे पैरों या हाथों में बिजली का करंट (Electric shock) दौड़ रहा हो, चींटियां रेंग रही हों (Tingling), सुइयां चुभ रही हों, या फिर बर्फ जैसा सुन्नपन आ गया हो। कई बार रात के समय पैर के तलवों में इतनी भयंकर जलन होती है कि इंसान को ठंडे फर्श पर पैर रखने पड़ते हैं। यह इस बात का सबूत है कि नसों का कम्युनिकेशन सिस्टम टूट रहा है।

The Hidden Causes: Vitamin Deficiency से नसों का दर्द तेज़ी से क्यों बढ़ता है?

ज़्यादातर लोग नसों के दर्द को सिर्फ बढ़ती उम्र या डायबिटीज (Diabetes) से जोड़कर देखते हैं। लेकिन आज के समय में युवाओं और वर्किंग प्रोफेशनल्स में इस दर्द का सबसे बड़ा और छिपा हुआ कारण (Hidden Cause) शरीर में विटामिन्स की भयंकर कमी है। आइए विज्ञान की नज़र से समझते हैं कि कौन से विटामिन्स की कमी नसों को अंदर से बर्बाद कर रही है:

विटामिन B12 (Vitamin B12) की कमी: नसों का सुरक्षा कवच टूटना

विटामिन B12 नसों के लिए सबसे ज़रूरी तत्व है। हमारी हर नस के ऊपर एक सुरक्षा परत होती है जिसे मायलिन शीथ (Myelin Sheath) कहते हैं। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे बिजली की तार के ऊपर प्लास्टिक की कोटिंग होती है। विटामिन B12 इस कोटिंग को बनाता है और रिपेयर करता है। जब शरीर में B12 की कमी होती है, तो यह कोटिंग सूखने और टूटने लगती है। तार (नसें) नंगी हो जाती हैं और आपस में शॉर्ट-सर्किट करने लगती हैं। इसी शॉर्ट-सर्किट की वजह से हाथों-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और सुई चुभने जैसा भयंकर दर्द होता है।

विटामिन D (Vitamin D) की कमी: सूजन और कमज़ोरी

हम सब सोचते हैं कि विटामिन D सिर्फ हड्डियों के लिए ज़रूरी है, लेकिन यह नर्वस सिस्टम के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विटामिन D नसों की सूजन (Inflammation) को कम करता है और नसों के रिसेप्टर्स (Receptors) को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। आज-कल दिन भर एसी (AC) ऑफिस में बैठे रहने और धूप न सेंकने के कारण युवाओं में विटामिन D खतरनाक स्तर तक गिर चुका है, जिससे शरीर में हर जगह अनजाना दर्द (Chronic Pain) और नसों में खिंचाव रहता है।

विटामिन B1 (Thiamine) और B6 की कमी

विटामिन B1 हमारी नसों को ऊर्जा (Energy) देता है ताकि वे दिमाग तक सिग्नल पहुँचा सकें। वहीं, B6 न्यूरोट्रांसमीटर्स (Neurotransmitters) बनाने में मदद करता है। बहुत ज़्यादा जंक फूड खाने, शराब पीने और डाइटिंग करने से शरीर में इन विटामिन्स की कमी हो जाती है, जिससे नसें कमज़ोर पड़ जाती हैं और सुन्नपन (Numbness) आने लगता है।

लोग इस भयंकर चेतावनी को नज़रअंदाज़ क्यों करते हैं?

पेनकिलर और नसों को सुन्न करने वाली गोलियों का झूठा भ्रम (The Trap of Pregabalin / Gabapentin)

जब नसों में झनझनाहट या दर्द होता है, तो लोग अक्सर मेडिकल स्टोर से न्यूरोपैथी की गोलियां (जैसे Pregabalin या Gabapentin) खरीद कर खाने लगते हैं। ये गोलियां विटामिन्स की कमी पूरी नहीं करतीं और न ही नसों को रिपेयर करती हैं। ये सिर्फ आपके दिमाग को सुन्न कर देती हैं ताकि आपको दर्द का एहसास न हो। जैसे ही गोली का असर खत्म होता है, दर्द वापस आ जाता है। लोग सोचते हैं "गोली खाकर मैं ठीक हूँ" और वे अंदर ही अंदर डैमेज हो रही नसों को मरने के लिए छोड़ देते हैं।

एक्शन न लेने के भयंकर परिणाम: इसे बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें

अगर आप यह मानकर बैठे हैं कि यह तो बस थोड़ी सी झनझनाहट है और बाम लगाने या दर्द की गोली से काम चल जाएगा, तो आप अनजाने में अपने शरीर को हमेशा के लिए अपाहिज बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं:

  • स्थायी सुन्नपन (Permanent Loss of Sensation):अगर सालों तक विटामिन B12 की कमी बनी रहे और नसों की मायलिन शीथ पूरी तरह नष्ट हो जाए, तो नसें मर जाती हैं (Dead nerves)। आपके हाथ-पैर जीवन भर के लिए सुन्न हो सकते हैं। आपको गर्म, ठंडे या दर्द का एहसास होना बंद हो जाएगा।
  • बैलेंस बिगड़ना और लकवा (Loss of Balance & Ataxia):पैरों की नसें कमज़ोर होने से दिमाग को ज़मीन का एहसास नहीं होता। ऐसे मरीज़ अक्सर चलते-चलते लड़खड़ा कर गिर जाते हैं। उम्र बढ़ने पर यह स्थिति लकवे (Paralysis) या बिस्तर पर निर्भरता का कारण बन सकती है।
  • खतरनाक घाव (Unnoticed Injuries):जब पैरों में सुन्नपन आ जाता है, तो अगर पैरों में कोई कील चुभ जाए, जूता काट ले या कट लग जाए, तो मरीज़ को पता ही नहीं चलता। वह घाव धीरे-धीरे भयंकर रूप ले लेता है, जो गैंग्रीन (Gangrene) बन सकता है और कई मामलों में पैर काटने (Amputation) तक की नौबत आ जाती है।

आयुर्वेद इस समस्या को कैसे समझता है? (मज्जा धातु क्षय और वात प्रकोप)

आयुर्वेद में नर्वस सिस्टम (नसों और दिमाग) को मज्जा धातु (Majja Dhatu) कहा जाता है और शरीर में नसों के सभी कार्यों (सिग्नल भेजना, महसूस करना) को वात दोष (Vata Dosha) नियंत्रित करता है।

आयुर्वेद के बेहद गहरे और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार, जब हम लगातार रूखा-सूखा, बासी और जंक फूड खाते हैं, तनाव लेते हैं, या शरीर को सही पोषण (विटामिन्स) नहीं देते, तो हमारी जठराग्नि (पाचन) कमज़ोर हो जाती है। खाना ठीक से न पचने के कारण शरीर में रस से लेकर मज्जा तक सातों धातुएं कमज़ोर पड़ने लगती हैं।

जब नसों को पोषण नहीं मिलता, तो इसे मज्जा धातु क्षय (Depletion of Majja Dhatu) कहते हैं। जैसे ही मज्जा धातु सूखती है, शरीर में खाली जगह बन जाती है जहाँ वात दोष (हवा) भयंकर रूप से कुपित होकर भर जाता है। यह बढ़ा हुआ रूखा वात नसों को और ज़्यादा सुखाता है, जिससे नसों में सुई चुभने जैसा दर्द, झनझनाहट और सुन्नपन (सुप्ति) पैदा होता है। जब तक शरीर के इस कुपित वात को शांत करके नसों (मज्जा) को स्नेहन (चिकनाई और पोषण) नहीं दिया जाएगा, नसों की बीमारी कभी ठीक नहीं होगी।

इस समस्या के लिए असरदार जड़ी-बूटियाँ  

प्रकृति ने हमें नसों के डैमेज को रिपेयर करने और झनझनाहट को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए बहुत ही जादुई जड़ी-बूटियाँ दी हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): नसों के दर्द (Neuropathy) और कमज़ोरी के लिए यह धरती का सबसे बड़ा अमृत है। यह नर्वस सिस्टम को ज़बरदस्त ताकत (Strength) देता है, स्ट्रेस कम करता है और डैमेज हो चुकी नसों को रिपेयर करने में मदद करता है।
  • बला (Bala): जैसा इसका नाम है, यह शरीर और नसों को बल (ताकत) देती है। यह कुपित वात को शांत कर नसों की सुन्नता और लकवे जैसी कमज़ोरी को दूर करती है।
  • मालकांगनी (Malkangni / Jyotishmati): यह एक अत्यंत मेध्य (Brain and Nerve tonic) औषधि है। यह नसों के ब्लॉकेज को खोलती है और पूरे शरीर में नर्व कंडक्शन (सिग्नल भेजने की गति) को तेज़ करती है।
  • गिलोय (Giloy / Amrita): यह शरीर के अंदर की सूजन (Inflammation) को खत्म करती है और नसों में रक्त संचार को दुरुस्त कर तलवों की जलन को शांत करती है।
  • निर्गुंडी (Nirgundi): नसों के भयंकर दर्द, सुई चुभने और करंट लगने जैसे दर्द को तुरंत शांत करने के लिए निर्गुंडी का लेप या काढ़ा अचूक है।

आयुर्वेदिक थेरेपी नसों के दर्द (Neuropathy) में कैसे काम करती है?

जब नसों का दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाए, रात को नींद न आए और पैर बिल्कुल सुन्न पड़ चुके हों, तब हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी गहराई में जाकर चमत्कारिक परिणाम देती है।

  • अभ्यंग और स्वेदन (Abhyanga & Swedana): पूरे शरीर और खास तौर पर पैरों पर वात-नाशक गर्म औषधीय तेलों (जैसे क्षीरबला तैल) से गहरी मालिश और हर्बल भाप दी जाती है। यह नसों के सूखेपन को खत्म कर तुरंत रक्त संचार बढ़ाती है और सुन्न पड़े अंगों में जान डालती है।
  • षष्टिक शालि पिंड स्वेद (Navarakizhi): यह नसों और मांसपेशियों को पोषण (Nourishment) देने की सबसे बेहतरीन चिकित्सा है। इसमें विशेष औषधीय चावल (नवारा चावल) को दूध और जड़ी-बूटियों के काढ़े में पकाकर उसकी पोटली बनाई जाती है और उससे पूरे शरीर की सिकाई की जाती है। यह डैमेज नसों को नया जीवन देती है।
  • बस्ती (Basti): चूंकि वात दोष का मुख्य स्थान बड़ी आंत है, इसलिए औषधीय तेल और काढ़ों का एनीमा शरीर से वात को जड़ से उखाड़ फेंकता है, जिससे नसों का सूखना हमेशा के लिए बंद हो जाता है।

नसों को बचाने के लिए वात-शामक और विटामिन युक्त डाइट प्लान

नसों की कमज़ोरी पूरी तरह से आपके खान-पान से जुड़ी है। आपको अपनी डाइट में प्राकृतिक विटामिन्स और वात-शामक चीज़ें शामिल करनी होंगी।

  • क्या खाएँ (Foods to Include): अपनी डाइट में विटामिन B12 और D के प्राकृतिक स्रोतों को बढ़ाएँ। शुद्ध देसी गाय का दूध, पनीर, दही, ताज़ा छाछ, और घर का निकला सफेद मक्खन (White butter) रोज़ खाएं। स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज), अखरोट, बादाम, और अलसी के बीज (Flaxseeds) नसों के लिए बेहतरीन हैं। घी का सेवन नसों को अंदरूनी चिकनाई देता है।
  • किन चीज़ों से सख्त परहेज़ करें (Vata-Aggravating Diet): जंक फूड, मैदा, पैकेटबंद सूप, रिफाइंड तेल, और बहुत ज़्यादा चीनी तुरंत बंद कर दें। बादी वाली चीज़ें (जैसे राजमा, छोले) और बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी नसों को सुखाते हैं और वात बढ़ाते हैं। शराब (Alcohol) नसों के लिए सबसे बड़ा ज़हर है, इसे बिल्कुल छोड़ दें।
  • दैनिक पेय: रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में एक चौथाई चम्मच अश्वगंधा पाउडर और थोड़ा सा शुद्ध घी डालकर पिएं। यह नसों की सूजन को कम करता है और मायलिन शीथ को रिपेयर करता है।

ठीक होने (Recovery) में लगने वाला समय कितना है?

नसों की डैमेज हुई परत (Myelin Sheath) रातों-रात रिपेयर नहीं होती। विटामिन्स की कमी को शरीर में प्राकृतिक रूप से सोखने और नसों को हील करने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती 1 से 3 हफ्ते: आपके पैरों के तलवों की जलन, सुई चुभने जैसा करंट और झनझनाहट (Tingling) में काफी आराम मिलने लगेगा। रात की नींद बेहतर होगी।
  • 1 से 3 महीने तक: हाथ-पैर का भारीपन और बर्फ जैसा सुन्नपन दूर होने लगेगा। आपका नर्व कंडक्शन सुधरेगा और बैलेंस में स्थिरता आएगी। डॉक्टर की सलाह से आपकी नसों को सुन्न करने वाली एलोपैथिक गोलियां छूट जाएंगी।
  • 3 से 6 महीने तक: आपकी मज्जा धातु (Nervous System) काफी हद तक रिपेयर हो जाएगी। पंचकर्म और रसायन औषधियों से आपकी नसें अपनी पुरानी ताकत वापस पा लेंगी और आप एक दर्द-रहित, सामान्य ज़िंदगी जी सकेंगे।

मरीज़ों के अनुभव

मेरा नाम अंजलि है और मैं दिल्ली से हूँ। मेरी नानी जी की उम्र 65+ है। पिछले कुछ सालों से उनके पैरों के तलवों में हर समय सुई चुभने जैसा भयंकर दर्द और झनझनाहट रहती थी। रात के समय उनके तलवों में इतनी आग लगती थी कि वे सो नहीं पाती थीं। टेस्ट कराने पर पता चला कि उनके शरीर में विटामिन B12 और D का स्तर बहुत कम है और उन्हें पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy) हो गई है। एलोपैथिक डॉक्टरों ने उन्हें नसों को सुन्न करने की गोलियां (Pregabalin) दीं। गोलियां खाने से उन्हें सिर्फ नींद आती थी, लेकिन असर खत्म होते ही दर्द फिर शुरू हो जाता। नानी जी का चलना-फिरना बिल्कुल बंद हो गया था और पैर सुन्न पड़ गए थे। हम उनकी इस लाचारी को देखकर बहुत घबरा गए थे।

हमने बिना देरी किए जीवाग्राम से उपचार शुरू किया। डॉक्टर ने नानी जी की पूरी हिस्ट्री और विटामिन्स की रिपोर्ट देखकर तुरंत मज्जा धातु क्षय का वात-शामक उपचार और पंचकर्म (षष्टिक शालि पिंड स्वेद और अभ्यंग) शुरू किया। आयुर्वेदिक औषधियों (अश्वगंधा, मालकांगनी) और थेरेपी से उन्हें बहुत ही चमत्कारी लाभ मिला—उनके पैरों की जलन और सुई चुभना बिल्कुल खत्म हो गया। पैरों का सुन्नपन दूर हो गया और वे ज़मीन को महसूस कर पाती हैं। सबसे बड़ी बात, उनका सालों पुराना नसों की गोलियों का कोर्स पूरी तरह छूट गया है। यहाँ का वातावरण और सात्विक दिनचर्या बहुत अच्छी है।

मैं सभी को नसों के भयंकर दर्द, विटामिन की कमी और सुन्नपन जैसी खतरनाक बीमारी से बचने के लिए जीवा ग्राम में उपचार लेने की सख्त सलाह देती हूँ।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

नसों के दर्द में हम अक्सर तुरंत राहत ढूँढते हैं। लेकिन सिर्फ सुन्न करने वाली गोलियां खाना और आयुर्वेद की गहराई को समझना कितना अलग है, यह जानना बहुत ज़रूरी है।

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
इलाज का मुख्य लक्ष्य Gabapentin/Pregabalin से सिग्नल ब्लॉक, सप्लीमेंट्स देना वात शांत कर अग्नि सुधारना और नसों को हील करना
नज़रिया न्यूरोपैथी को स्थायी मानना स्नेहन व रसायन से स्थायी सुधार
उपचार तरीका दवाओं से दर्द/सुन्नता कंट्रोल डाइट, पंचकर्म और जड़ी-बूटियों से प्राकृतिक हीलिंग
दवाएँ/जड़ी-बूटियाँ नर्व पेन दवाएँ, विटामिन अश्वगंधा, गिलोय
लंबा असर सुस्ती, वज़न बढ़ना, दिमाग पर असर शरीर मजबूत, दीर्घकालिक राहत

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए? 

हाथों-पैरों की झनझनाहट को हमेशा थकान या कमज़ोरी समझकर घर पर इग्नोर नहीं करना चाहिए। कई बार यह लकवे या गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत भी हो सकता है। अगर आपको ये गंभीर संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • अगर आपके हाथ या पैर अचानक से इतने कमज़ोर और सुन्न हो जाएं कि आप हाथ से कोई सामान (जैसे पानी का ग्लास) न पकड़ पाएं या चलते समय पैर ज़मीन पर घिसटने लगें (Foot Drop)।
  • अगर नसों का दर्द या सुन्नपन आपके पैरों से शुरू होकर तेज़ी से ऊपर कमर या छाती की तरफ बढ़ने लगे।
  • अगर आपको सुन्नपन के साथ-साथ चक्कर आएं, बोलने में लड़खड़ाहट हो या चेहरे का एक हिस्सा लटक जाए (यह स्ट्रोक/लकवे का संकेत है)।
  • अगर आपके पैरों में सुन्नपन के कारण कोई कट या घाव लग जाए और वह कई दिनों तक न भरे (यह गैंग्रीन की शुरुआत हो सकती है)।

निष्कर्ष

हाथों-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और आग जैसी जलन को महज़ थकान या बढ़ती उम्र का असर समझना एक भयंकर भूल है। यह इस बात का सीधा संकेत है कि शरीर में विटामिन्स की भारी कमी हो गई है और आपकी नसें अंदर से सूखकर डैमेज हो रही हैं। लगातार पेनकिलर खाना या नसों को सुन्न करने वाली गोलियां लेना आपको स्थायी अपंगता की ओर धकेल सकता है। जब शरीर पोषण मांग रहा हो, तो दर्द दबाने से काम नहीं चलता। आयुर्वेद की रसायन चिकित्सा, पंचकर्म और सही खान-पान अपनाकर आप नसों को दोबारा जीवित कर सकते हैं। समय रहते जीवा आयुर्वेद से जुड़ें और एक दर्द-मुक्त, स्वस्थ ज़िंदगी की ओर लौटें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

विटामिन B12 नसों के ऊपर की सुरक्षा परत (Myelin Sheath) बनाने का काम करता है। इसकी कमी से यह परत टूट जाती है, जिससे नसों में शॉर्ट-सर्किट होता है और हाथों-पैरों में सुई चुभने, झनझनाहट (Tingling) और सुन्नपन की समस्या होती है।

यह 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी' (Peripheral Neuropathy) का क्लासिक लक्षण है। विटामिन्स की कमी या शुगर के कारण पैरों की सबसे छोटी नसें डैमेज हो जाती हैं। रात को जब शरीर का तापमान और कॉर्टिसोल गिरता है, तो यह जलन और भी भयंकर रूप ले लेती है।

अगर आपका पाचन (जठराग्नि) कमज़ोर है, तो आप कितनी भी गोलियां खा लें, शरीर उस विटामिन को सोख (Absorb) नहीं पाएगा। इसलिए आयुर्वेद पहले पाचन को ठीक करता है और फिर नसों को पोषण देता है।

जी हाँ! अगर नसों के डैमेज को सालों तक नज़रअंदाज़ किया जाए, तो नसें पूरी तरह मर सकती हैं। इससे मांसपेशियों की ताकत खत्म हो जाती है और इंसान का बैलेंस बिगड़ जाता है, जो अंततः अपंगता का कारण बन सकता है।

आयुर्वेद में 'अश्वगंधा', 'मालकांगनी' और 'बला' को नर्वस सिस्टम के लिए सबसे बड़ा अमृत माना गया है। ये जड़ी-बूटियाँ डैमेज नसों को रिपेयर करती हैं और शरीर में सिग्नल भेजने की गति को तेज़ करती हैं।

ये गोलियां नसों को रिपेयर नहीं करतीं, बल्कि दिमाग के दर्द महसूस करने वाले हिस्से को सुन्न कर देती हैं। लंबे समय तक इन्हें खाने से सुस्ती, याददाश्त में कमी, वज़न बढ़ना और लिवर-किडनी पर भयंकर साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

पंचकर्म की षष्टिक शालि पिंड स्वेद (औषधीय चावल की पोटली से सिकाई) और अभ्यंग से शरीर का रूखा वात शांत होता है। गर्म औषधीय तेल नसों की गहराई तक जाकर उन्हें पोषण (Nutrition) देते हैं और सुन्न अंगों में जान डालते हैं।

बिल्कुल। जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर में वात दोष और स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। ये नसों को सिकोड़ देते हैं और ब्लड सर्कुलेशन कम कर देते हैं, जिससे नसों में दर्द और सुन्नपन तेज़ी से बढ़ जाता है।

आपको हमेशा ताज़ा, गर्म और स्निग्ध (थोड़ा चिकना) भोजन लेना चाहिए। डाइट में शुद्ध घी, दूध, पनीर, स्प्राउट्स और ड्राई फ्रूट्स (अखरोट, बादाम) शामिल करें। बासी खाना, पैकेटबंद जंक फूड और बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी बिल्कुल बंद कर दें।

तीव्र जलन और सुई चुभने वाले दर्द में शुरुआती 2 से 3 हफ्तों में ही काफी आराम मिल जाता है। लेकिन नसों की टूटी हुई परत (Myelin Sheath) को पूरी तरह रिपेयर करने और सुन्नपन खत्म करने में आमतौर पर 3 से 6 महीने का अनुशासित समय लग सकता है।

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