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क्या अचानक बढ़ता दर्द और जोड़ों की लालिमा गाउट की निशानी है? शरीर में जमा अम्ल की भूमिका समझिए

Information By Dr. Keshav Chauhan

सुबह उठते ही अगर आपका पैर ज़मीन पर रखते ही झनझना उठे, या किसी दिन बिना चोट के अचानक जोड़ लाल, सूजा हुआ और जलन भरा महसूस होने लगे, तो यह सिर्फ थकान नहीं हो सकती। कई लोग ऐसे दर्द को कुछ समय का मानकर सह लेते हैं, लेकिन शरीर इस तरह के संकेत यूँ ही नहीं देता।

जब अंदर ही अंदर अम्ल (Uric Acid) जमा होने लगता है, तो उसका असर सबसे पहले जोड़ों पर दिखता है। शुरुआत में दर्द अचानक आता है, फिर सूजन और लालिमा जुड़ जाती है। कई बार तो हल्का-सा स्पर्श भी परेशान कर देता है। यहीं से गाउट जैसी समस्या चुपचाप अपने पैर पसारने लगती है।

यह लेख आपको सरल भाषा में समझाने के लिए है कि अचानक बढ़ता जोड़ों का दर्द और लालिमा आखिर क्यों होती है, शरीर में जमा अम्ल इसमें क्या भूमिका निभाता है और आपको किन संकेतों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। अगर आप अपने दर्द को बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है।

गाउट क्या होता है और यह आम जोड़ों के दर्द से कैसे अलग है?

जब आपको जोड़ों में दर्द होता है, तो अक्सर आप उसे उम्र, थकान या ज़्यादा चलने-फिरने से जोड़कर देख लेते हैं। लेकिन गाउट का दर्द इन सबसे अलग होता है। यह अचानक आता है, तेज़ होता है और कई बार आपको चलने-फिरने तक में परेशानी होने लगती है।

गाउट दरअसल जोड़ों से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिसमें शरीर के अंदर जमा यूरिक एसिड जोड़ों में जाकर जमने लगता है। यह यूरिक एसिड छोटे-छोटे कणों के रूप में जोड़ों में बैठ जाता है, जिससे वहाँ तेज़ सूजन और असहनीय दर्द पैदा होता है।

आम जोड़ों के दर्द में:

  • दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है
  • सुबह अकड़न ज़्यादा और दिन में थोड़ी राहत मिल जाती है
  • लालिमा और जलन बहुत कम होती है

लेकिन गाउट में:

  • दर्द अचानक शुरू होता है
  • जोड़ों में साफ़ लालिमा और सूजन दिखती है
  • छूने पर भी जलन और तेज़ दर्द महसूस होता है

यही वजह है कि गाउट को साधारण जोड़ों का दर्द समझकर नज़रअंदाज़ करना सही नहीं होता। अगर आप इस फर्क को समय रहते समझ लें, तो आगे होने वाली परेशानियों से खुद को बचा सकते हैं।

जोड़ों में लालिमा, सूजन और जलन गाउट के शुरुआती संकेत क्यों माने जाते हैं?

अगर किसी दिन आपको बिना किसी चोट के अचानक जोड़ों में लालिमा दिखे, सूजन आ जाए और अंदर-ही-अंदर जलन महसूस हो, तो यह शरीर का एक साफ़ संकेत हो सकता है कि कुछ गड़बड़ हो रही है।गाउट में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब जोड़ों में यूरिक एसिड जमा होने लगता है, तो शरीर उसे एक बाहरी चीज़ मानकर प्रतिक्रिया देता है। इस प्रतिक्रिया के कारण:

  • उस हिस्से में सूजन आ जाती है
  • त्वचा लाल दिखने लगती है
  • जोड़ गर्म और जलन भरा महसूस होता है

कई लोगों को यह दर्द रात के समय ज़्यादा महसूस होता है। आप सोकर उठते हैं और अचानक लगता है कि जोड़ हिलाना भी मुश्किल हो गया है। कई बार तो चादर का हल्का-सा स्पर्श भी असहनीय लग सकता है।

यह लालिमा और जलन इसलिए भी अहम संकेत हैं क्योंकि आम जोड़ों के दर्द में ये लक्षण साफ़ दिखाई नहीं देते। गाउट में शरीर आपको पहले ही चेतावनी दे देता है, बस ज़रूरत होती है उसे समझने की।

अगर आप गाउट के इन शुरुआती संकेतों को पहचान लें, तो आगे जाकर गाउट को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

शरीर में जमा अम्ल यानी यूरिक एसिड क्या होता है और यह बढ़ता क्यों है?

यूरिक एसिड कोई बाहरी चीज़ नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर में रोज़ बनता है। जब आप खाना खाते हैं, खासकर ऐसा भोजन जिसमें कुछ खास तत्व ज़्यादा होते हैं, तो उनके टूटने से यूरिक एसिड बनता है। सामान्य स्थिति में यह यूरिक एसिड पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है।

समस्या तब शुरू होती है जब:

  • शरीर ज़रूरत से ज़्यादा यूरिक एसिड बनाने लगता है
  • या गुर्दे उसे पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाते

ऐसी स्थिति में यह अम्ल धीरे-धीरे शरीर में जमा होने लगता है। जब इसकी मात्रा ज़्यादा हो जाती है, तो यह जोड़ों में जाकर जमने लगता है और वहीं से गाउट की शुरुआत होती है।

आपके शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने के कुछ आम कारण हो सकते हैं:

  • गलत खान-पान और बहुत ज़्यादा तला-भुना भोजन
  • पानी कम पीना
  • बढ़ता हुआ वज़न
  • लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि की कमी

कई बार आपको पता भी नहीं चलता कि शरीर के अंदर यह अम्ल बढ़ रहा है। लेकिन जैसे ही यह जोड़ों में जमा होने लगता है, दर्द, सूजन और लालिमा के रूप में शरीर आपको संकेत देने लगता है।

अगर आप समय रहते इन संकेतों को समझ लें और अपने खान-पान व जीवनशैली पर ध्यान देना शुरू कर दें, तो गाउट जैसी समस्या को काफी हद तक संभाला जा सकता है। शरीर आपको बार-बार चेतावनी देता है, बस ज़रूरत है उसे गंभीरता से लेने की।

शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने पर जोड़ों पर क्या असर पड़ता है?

जब आपके शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाती है, तो यह खून में घुला हुआ नहीं रह पाता। ऐसी स्थिति में यह धीरे-धीरे नुकीले कणों के रूप में बदलने लगता है और ये कण जोड़ों में जाकर जमा हो जाते हैं।

अब ज़रा इसे आसान भाषा में समझिए। मान लीजिए किसी बर्तन में बहुत ज़्यादा नमक डाल दिया जाए और वह पूरी तरह घुल न पाए। जो नमक नीचे बैठ जाता है, वही हाल यूरिक एसिड का होता है। यह नीचे बैठकर जोड़ों में जम जाता है।

जब ये नुकीले कण जोड़ों में जमा होते हैं:

  • जोड़ के अंदर सूजन होने लगती है
  • हिलाने-डुलाने पर तेज़ चुभन महसूस होती है
  • छूने पर भी दर्द बढ़ जाता है

आपका शरीर इन कणों को बाहर की चीज़ समझकर उनसे लड़ने की कोशिश करता है। इसी लड़ाई के कारण जोड़ लाल, सूजा हुआ और गर्म महसूस होने लगता है। यही वजह है कि गाउट का दर्द आम जोड़ों के दर्द से कहीं ज़्यादा तीव्र होता है।

अगर यह स्थिति बार-बार होती रहे, तो जोड़ों की बनावट भी धीरे-धीरे खराब होने लगती है। इसलिए यूरिक एसिड बढ़ने को हल्के में लेना आपके लिए आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है।

गाउट का दर्द दिन के बजाय रात में ज़्यादा क्यों महसूस होता है?

गाउट के दर्द की सबसे खास बात यही होती है कि यह अचानक शुरू होता है। कई लोग बताते हैं कि वे बिल्कुल ठीक सोए थे, लेकिन सुबह उठते ही जोड़ में इतना दर्द था कि पैर ज़मीन पर रखना भी मुश्किल हो गया।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि:

  • यूरिक एसिड के कण पहले से ही जोड़ में मौजूद होते हैं
  • शरीर की प्रतिक्रिया अचानक तेज़ हो जाती है
  • सूजन एकदम से बढ़ जाती है

रात में दर्द ज़्यादा बढ़ने के पीछे भी कुछ वजहें होती हैं। जब आप सोते हैं, तो शरीर की गतिविधियाँ धीमी हो जाती हैं। उस समय:

  • शरीर का तापमान थोड़ा कम हो जाता है
  • जोड़ों में जमा अम्ल ज़्यादा आसानी से जम सकता है
  • पानी का स्तर भी कम हो सकता है, खासकर अगर आपने दिन में कम पानी पिया हो

इन सब कारणों से रात या सुबह के समय दर्द ज़्यादा महसूस होता है। कई बार तो चादर का हल्का-सा स्पर्श भी आपको असहनीय लग सकता है।

अगर आपको बार-बार ऐसा अचानक दर्द हो रहा है, तो इसे साधारण थकान समझकर टालना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। यह शरीर का सीधा संकेत है कि अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है।

किन लोगों में गाउट होने का खतरा ज़्यादा रहता है?

गाउट किसी एक उम्र या एक तरह के लोगों तक सीमित नहीं है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज़्यादा देखा जाता है। अगर आप नीचे दिए गए कारणों से खुद को जोड़ पाते हैं, तो आपको थोड़ा ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है।

गाउट का खतरा ज़्यादा हो सकता है अगर:

  • आपकी उम्र बढ़ रही है और शरीर पहले जैसा सक्रिय नहीं रहा
  • आपका वज़न ज़रूरत से ज़्यादा है
  • आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत कम चलते-फिरते हैं
  • आपका खान-पान असंतुलित है और बाहर का भोजन ज़्यादा रहता है
  • आप पानी कम पीते हैं और शरीर में तरल की कमी रहती है

इसके अलावा, जिन लोगों को पहले से ही शुगर या रक्तचाप जैसी समस्याएँ हैं, उनमें भी यूरिक एसिड बढ़ने की संभावना ज़्यादा देखी जाती है।

यह ज़रूरी नहीं कि गाउट हर किसी को हो, लेकिन अगर आप अपने शरीर के संकेतों को नज़रअंदाज़ करते रहेंगे, तो खतरा बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर ध्यान देकर, खान-पान सुधारकर और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाकर आप इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।

आपका शरीर आपको बार-बार संकेत देता है। सवाल बस इतना है कि क्या आप उन्हें समझ रहे हैं या नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

गाउट और आम यूरिक एसिड बढ़ने में क्या फर्क होता है?

बहुत से लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि यूरिक एसिड बढ़ना और गाउट होना एक ही बात है। जबकि सच यह है कि दोनों जुड़े ज़रूर हैं, लेकिन एक जैसे नहीं हैं। इस फर्क को समझना आपके लिए बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यहीं से सही समय पर सही कदम उठाने की शुरुआत होती है।

जब आपके शरीर में यूरिक एसिड बढ़ता है, तो कई बार कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। आप सामान्य जीवन जीते रहते हैं और आपको पता भी नहीं चलता कि अंदर अम्ल की मात्रा बढ़ रही है। इसे आप एक चेतावनी की तरह समझ सकते हैं, जो अभी शांत है।

लेकिन जब यही बढ़ा हुआ यूरिक एसिड जोड़ों में जाकर जमने लगता है, तब गाउट की स्थिति बनती है। उस समय शरीर चुप नहीं रहता, बल्कि साफ़ संकेत देने लगता है।

आम तौर पर फर्क कुछ इस तरह समझा जा सकता है:

  • केवल यूरिक एसिड बढ़ने पर दर्द या सूजन ज़रूरी नहीं
  • गाउट में अचानक तेज़ दर्द, लालिमा और सूजन साफ़ दिखाई देती है
  • यूरिक एसिड बढ़ना एक अवस्था है, जबकि गाउट उसका गंभीर रूप है

अगर आप सिर्फ रिपोर्ट देखकर यह सोच लें कि “थोड़ा-सा यूरिक एसिड बढ़ा है, कुछ नहीं होगा”, तो यह सोच आगे चलकर भारी पड़ सकती है। सही समय पर ध्यान न देने से यही स्थिति गाउट का रूप ले सकती है, जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर देती है।

गाउट के लक्षण दिखने पर आपको कब सतर्क हो जाना चाहिए?

आपका शरीर जब किसी समस्या की ओर इशारा करता है, तो वह छोटे संकेतों से शुरुआत करता है। गाउट में भी ऐसा ही होता है। अगर आप इन संकेतों को समय रहते समझ लें, तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।

आपको सतर्क हो जाना चाहिए अगर:

  • जोड़ों में दर्द अचानक शुरू हो और धीरे-धीरे बढ़ जाए
  • दर्द के साथ लालिमा और सूजन साफ़ दिखने लगे
  • जोड़ छूने पर गर्म और जलन भरा महसूस हो
  • रात या सुबह के समय दर्द ज़्यादा परेशान करने लगे

कई लोग इन लक्षणों को थकान या मौसम का असर मानकर टाल देते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है।

सतर्कता का मतलब डरना नहीं, बल्कि समझदारी से कदम उठाना है। जैसे ही आपको लगे कि यह साधारण जोड़ों का दर्द नहीं है, आपको अपने खान-पान, पानी पीने की आदत और दिनचर्या पर ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए।

जितनी जल्दी आप अपने शरीर के संकेतों को समझेंगे, उतनी ही आसानी से आप गाउट जैसी परेशानी को संभाल पाएँगे। सही समय पर लिया गया छोटा-सा फैसला आपको लंबे समय की तकलीफ़ से बचा सकता है।

निष्कर्ष

अचानक जोड़ों में तेज़ दर्द, लालिमा और सूजन को अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन यही संकेत आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकते हैं। गाउट कोई एक दिन में होने वाली समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर जमा अम्ल का नतीजा होता है, जो समय के साथ असर दिखाता है। जब आप अपने शरीर के छोटे संकेतों को समझते हैं, तो आप खुद को लंबे दर्द और तकलीफ़ से बचा सकते हैं।

यह ज़रूरी है कि आप सिर्फ दर्द दबाने के बजाय उसकी वजह पर ध्यान दें। सही खान-पान, पर्याप्त पानी और समय पर सलाह लेने से स्थिति को संभालना आसान हो जाता है। आपका शरीर आपको बार-बार चेतावनी देता है, बस ज़रूरत है उसे सुनने और समझने की।

अगर आप गाउट या जोड़ों के दर्द से जुड़ी किसी भी समस्या से परेशान हैं, तो आज ही हमारे प्रमाणित जीवा डॉक्टरों से व्यक्तिगत परामर्श के लिए संपर्क करें। डायल करें: 0129-4264323

FAQs

  1. गाउट बार-बार क्यों लौट आता है?

अगर खान-पान, पानी पीने की आदत और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए, तो गाउट की समस्या बार-बार उभर सकती है।

  1. क्या गाउट पूरी तरह ठीक हो सकता है?

गाउट को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली से इसे लंबे समय तक नियंत्रण में रखा जा सकता है।

  1. गाउट के दौरान चलना-फिरना सही होता है या नहीं?

दर्द ज़्यादा होने पर ज़ोर डालना ठीक नहीं होता। आराम करना बेहतर रहता है, ताकि सूजन और दर्द और न बढ़े।

  1. गाउट में कितना पानी पीना चाहिए?

गाउट की स्थिति में दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ज़रूरी होता है, ताकि शरीर से अतिरिक्त अम्ल बाहर निकल सके।

  1. क्या मौसम बदलने से गाउट का दर्द बढ़ सकता है?

कुछ लोगों में ठंड या मौसम परिवर्तन के दौरान जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है, क्योंकि उस समय शरीर में जकड़न ज़्यादा महसूस होती है।

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