गुड़ को चीनी का हेल्दी विकल्प बताया जाता है। इसकी वजह यह है कि गुड़ कम प्रसंस्कृत होता है और इसमें कुछ खनिज भी मौजूद रह सकते हैं। लेकिन सिर्फ इतना जानकर यह मान लेना कि गुड़ जितना चाहें खा सकते हैं। इसको भी खाना सही नहीं होगा क्यूंकि गुड़ भी मुख्य रूप से चीनी ही देता है और शरीर पर इसका असर मात्रा से जुड़ा होता है दूसरी तरफ चीनी में पोषक तत्त्व बहुत कम होते हैं लेकिन गुड़ की तुलना में उसे लेकर भी कई बाते ज़रुरत से ज़्यादा बढ़कर बताई जाती हैं इसलिए गुड़ और चीनी कौन सही है यह नहीं बल्कि कितना और कितनी बार मीठा खाया जा रहा है।
गुड़ और चीनी में क्या फर्क है?
गुड़ और चीनी दोनों ही गन्ने के रस से बनते हैं, लेकिन उनके बनाने के तरीके और सेहत पर पड़ने वाले असर में बड़ा अंतर है। चीनी को अत्यधिक रिफाइन और केमिकल प्रोसेस के जरिए तैयार किया जाता है, जिससे इसके सभी प्राकृतिक विटामिन और मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं और यह केवल खाली कैलोरी बनकर रह जाती है। दूसरी ओर, गुड़ को बिना किसी केमिकल के, गन्ने के रस को उबालकर और गाढ़ा करके पारंपरिक तरीके से प्राकृतिक रूप से बनाया जाता है। इसी वजह से गुड़ में आयरन, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे ज़रूरी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं, जो सेहत और पाचन के लिए फायदेमंद होते हैं।
क्या गुड़ को हेल्दी शुगर कहना सही है ?
गुड़ को पूरी तरह से हेल्दी शुगर कहना सही नहीं है बल्कि इसे चीनी का एक बेहतर विकल्प मानना ज़्यादा उचित होगा। हालांकि गुड़ में आयरन पोटैशियम मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे ज़रूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इसे रिफाइंड सफेद चीनी से अधिक पौष्टिक बनाते हैं, लेकिन रासायनिक रूप से इसमें भी मुख्य रूप से सुक्रोज ही होता है। इसका मतलब है कि गुड़ में भी कैलोरी और शुगर की मात्रा लगभग सफेद चीनी के बराबर ही होती है जो शरीर में ब्लड शुगर लेवल को तेज़ी से बढ़ा सकती है। इसलिए, डायबिटीज़ के मरीज़ों या वज़न घटाने की कोशिश कर रहे लोगों को भी गुड़ का सेवन बेहद कम ही करना चाहिए।
गुड़ खाने से ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ता है ?
गुड़ खाने से ब्लड शुगर का स्तर तेज़ी से बढ़ता है। गुड़ को चीनी का एक प्राकृतिक विकल्प माना जाता है लेकिन यह ब्लड शुगर पर लगभग चीनी जैसा ही असर डालता है।
- शुक्रोज की मात्रा: गुड़ में करीब 65 से 85 प्रतिशत तक सुक्रोज और ग्लूकोज होता है।
- ग्लाइसेमिक इंडेक्स: गुड़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी उच्च होता है, जिससे यह पचने के बाद खून में तुरंत घुल जाता है।
- असर: इसे खाने से शरीर में इंसुलिन का स्तर और ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकते हैं।स्वस्थ व्यक्ति इसे सीमित मात्रा में खा सकते हैं, लेकिन डायबिटीज़ के मरीज़ों को गुड़ के सेवन से बचना चाहिए।
डायबिटीज़ में गुड़ या चीनी में क्या चुनें ?
डायबिटीज में गुड़ और चीनी दोनों में से किसी को भी चुनना सही नहीं है क्योंकि दोनों ही ब्लड शुगर के स्तर को तेज़ी से बढ़ाते हैं। लोग गुड़ को प्राकृतिक और स्वस्थ विकल्प मानकर चीनी से बेहतर समझते हैं। हालांकि गुड़ में आयरन पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे कुछ खनिज पाए जाते हैं, लेकिन इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 80 से अधिक होता है, जो कि सामान्य सफेद चीनी 65 से भी ज़्यदा है।गुड़ और चीनी दोनों में ही सुक्रोज की मात्रा और कैलोरी लगभग बराबर होती है। इसलिए, दोनों का ही सेवन शरीर में इंसुलिन स्पाइक पैदा कर सकता है और डायबिटीज़ को अनियंत्रित कर सकता है। चिकित्सा के दृष्टिकोण से डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए गुड़ चीनी का सुरक्षित विकल्प नहीं है। मीठे के सुरक्षित विकल्पों के लिए आप स्टीविया या मोंक फ्रूट का उपयोग कर सकते हैं।
हेल्दी शुगर चुनने से ज़्यादा ज़रूरी क्या है?
सिर्फ चीनी बदलकर गुड़ शहद या स्टीविया ले लेने से ब्लड शुगर पर असर पड़ सकता है अगर आप बाकी गलतियां जारी रखते हैं। शुगर को नियंत्रित रखने के लिए इन बातों पर ध्यान देना सबसे अहम है:
- फूड पेयरिंग: कार्बोहाइड्रेट जैसे रोटी या चावल को हमेशा प्रोटीन दाल, पनीर और फाइबर सलाद, हरी सब्ज़ियों के साथ खाएं। अकेला कार्बोहाइड्रेट ब्लड शुगर को तेज़ी से बढ़ाता है।
- खाने का क्रम: पहले प्लेट का हिस्सा यानी सलाद और हरी सब्जियां खाएं फिर प्रोटीन लें और कार्बोहाइड्रेट रोटी-चावल सबसे आखिर में खाएं। इससे शुगर का खून में अब्ज़ॉर्प्शन धीमा हो जाता है।
- पोर्शन कंट्रोल: आप क्या खा रहे हैं इसके साथ यह भी ज़रूरी है कि आप कितनी मात्रा में खा रहे हैं। थाली में आधा हिस्सा बिना स्टार्च वाली सब्ज़ियाँ एक चौथाई प्रोटीन और एक चौथाई ही कार्ब्स होना चाहिए।
- खाने के बाद की आदतें: खाना खाने के तुरंत बाद लेटने या बिस्तर पर जाने के बजाय थोड़ी देर टहलना बेहद ज़रूरी है।
गुड़ या चीनी में से बेहतर चुनाव कैसे करें?
- सीमित मात्रा: आप किसी भी विकल्प को चुनें, उसका सेवन बहुत कम मात्रा में ही करें।
- असली गुड़ की पहचान: यदि आप गुड़ चुन रहे हैं, तो बहुत अधिक चमकदार या चमकीले पीले गुड़ से बचें क्योंकि उसमें केमिकल हो सकते हैं। गहरे भूरे और प्राकृतिक रंग का गुड़ बेहतर माना जाता है।
- स्वास्थ्य स्थिति: यदि आपको मधुमेह है तो गुड़ को सुरक्षित न समझें और डॉक्टर की सलाह से कम मात्रा लें।
निष्कर्ष:
गुड़ और चीनी में से 'हेल्दी शुगर' चुनना एक भ्रामक विचार हो सकता है। यद्यपि गुड़ में कुछ प्राकृतिक खनिज होते हैं जो इसे रिफाइंड चीनी से थोड़ा बेहतर बनाते हैं, लेकिन दोनों ही ब्लड शुगर को तेज़ी से बढ़ाते हैं। डायबिटीज़ के मरीजों के लिए गुड़ भी सुरक्षित नहीं है। असली सेहत सिर्फ मीठे का विकल्प बदलने में नहीं, बल्कि उसकी मात्रा को सीमित रखने, सही आहार संयोजन (फूड पेयरिंग) और खाने के सही क्रम पर निर्भर करती है।
References :
https://www.who.int/publications/i/item/9789241549028















