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Cholesterol Normal पर Heart Attack — असली Risk Factor कौन?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 15 May, 2026
  • category-iconUpdated on 15 May, 2026
  • category-iconHeart Health
  • blog-view-icon5006

आजकल बहुत से लोग यह सोचकर बेफिक्र रहते हैं कि उनका कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) बिल्कुल नॉर्मल है, इसलिए उन्हें हार्ट अटैक (Heart Attack) नहीं आ सकता। लेकिन यह एक बहुत बड़ा और भयंकर धोखा है। जब रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद अचानक दिल का दौरा पड़ता है, तो लोग पूरी तरह से हैरान रह जाते हैं। एलोपैथी में अक्सर सिर्फ कोलेस्ट्रॉल को ही असली विलेन मानकर स्टेटिन (Statins) जैसी भारी गोलियाँ दे दी जाती हैं, जबकि असली खतरा कहीं और छिपा होता है। आयुर्वेद के अनुसार, सामान्य कोलेस्ट्रॉल होने पर भी हार्ट अटैक का असली कारण रक्त में भयंकर 'आम' (Toxins) का संचय, बढ़ा हुआ ट्राइग्लिसराइड्स, दूषित 'कफ' और रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी सूजन (Inflammation) है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से इस अंदरूनी सूजन और ब्लॉकेज को जड़ से मिटाता है, ताकि आपका हृदय हमेशा सुरक्षित रहे।

Normal Cholesterol के बाद भी Heart Attack असल में क्या है?

मेडिकल विज्ञान भी अब यह मानता है कि पचास प्रतिशत (50%) से ज़्यादा हार्ट अटैक के मामलों में मरीज़ का एलडीएल (LDL) यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल सामान्य स्तर पर होता है। इसका मतलब है कि सिर्फ एक रिपोर्ट देखकर दिल की सेहत का अंदाज़ा लगाना एक भयंकर भूल है। जब आपकी धमनियों (Arteries) की अंदरूनी दीवारों पर लगातार सूजन बनी रहती है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम उसे भरने के लिए वहाँ प्लाक (Plaque) जमा करने लगता है। यह प्लाक अचानक फट सकता है, जिससे वहाँ खून का थक्का (Blood clot) बन जाता है और दिल का दौरा पड़ जाता है। असली गड़बड़ी शरीर के अंदर सुस्त पड़ी पाचन अग्नि, भयंकर मानसिक तनाव और रक्त में तैर रहे दूसरे छिपे हुए तत्वों में चल रही होती है, जिन्हें अक्सर लोग पूरी तरह अनदेखा कर देते हैं।

Heart Attack को बुलाने वाले असली और छिपे हुए Risk Factors

कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल होने के बावजूद ये चार भयंकर रिस्क फैक्टर आपके दिल को अंदर ही अंदर पूरी तरह खोखला कर रहे होते हैं:

  • ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides): यह कोलेस्ट्रॉल से भी ज़्यादा भयंकर होता है। जब यह बढ़ता है, तो खून चाशनी की तरह गाढ़ा हो जाता है, जिससे धमनियों में सीधे थक्के बनने लगते हैं।
  • सीआरपी (C-Reactive Protein): यह शरीर और धमनियों में चल रही भयंकर सूजन को नापने का टेस्ट है। सूजन होने पर नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल भी धमनियों में चिपक जाता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और पेट का मोटापा रक्त वाहिकाओं को कड़ा कर देता है, जिससे दिल पर भयंकर दबाव पड़ता है।
  • मानसिक तनाव (Stress): भयंकर तनाव के दौरान कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो नसों को सिकोड़ कर अचानक हार्ट अटैक ला सकता है।

इन भयंकर शारीरिक लक्षणों को अनदेखा करना पड़ सकता है भारी

दिल का दौरा पड़ने से पहले शरीर कुछ बेहद डरावने और भयंकर संकेत देता है, जिन्हें लोग अक्सर गैस या थकावट समझकर टाल देते हैं:

  • सीने में भारीपन और घुटन: सीढ़ियाँ चढ़ने या थोड़ा सा तेज़ चलने पर सीने के बीच में या बाएँ (Left) हिस्से में भारीपन या ऐसा दबाव महसूस होना जैसे किसी ने पत्थर रख दिया हो।
  • अचानक भयंकर पसीना आना: एसी (AC) में बैठे होने के बावजूद या बिना कोई मेहनत किए शरीर का ठंडे पसीने से पूरी तरह भीग जाना।
  • बाएँ हाथ और जबड़े में दर्द: सीने का दर्द कंधे से होता हुआ बाएँ हाथ, गर्दन या नीचे जबड़े तक जाना, जो सबसे भयंकर चेतावनी है।
  • साँस फूलना: बिना किसी कारण के भयंकर रूप से साँस अटकना या ज़ोर-ज़ोर से हाँफना।

असली Risk Factors को अनदेखा करने के भयंकर जोखिम

अगर आप सिर्फ कोलेस्ट्रॉल की नॉर्मल रिपोर्ट देखकर बेफिक्र हो जाते हैं और इन असली कारणों पर ध्यान नहीं देते, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • साइलेंट हार्ट अटैक (Silent Heart Attack): इसमें सीने में दर्द नहीं होता, बल्कि सिर्फ कमज़ोरी या हल्की गैस महसूस होती है, लेकिन दिल का एक हिस्सा पूरी तरह मर जाता है।
  • सडन कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest): धमनियों में अचानक भयंकर ब्लॉकेज होने से दिल की धड़कन अचानक रुक जाती है, जिसमें जान बचने का मौका बहुत कम मिलता है।
  • हार्ट फेलियर (Heart Failure): लगातार सूजन के कारण दिल की माँसपेशियाँ भयंकर रूप से कमज़ोर हो जाती हैं और वह पूरे शरीर में रक्त पंप करने लायक नहीं बचता।

Heart Attack के छिपे हुए कारणों पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद में हृदय रोगों को 'हृद रोग' और 'रस धातु' के दूषित होने से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, जब हमारा खानपान खराब होता है और जठराग्नि सुस्त पड़ जाती है, तो शरीर में चिपचिपा 'आम' (Toxins) बनने लगता है। यही भयंकर 'आम' जब रक्त के साथ मिलकर हृदय की धमनियों (रक्तवह स्रोतस) में जाता है, तो वहाँ भयंकर सूजन और ब्लॉकेज पैदा करता है। इसमें 'कफ' दोष नसों को ब्लॉक करता है और 'वात' दोष उसे कड़ा बना देता है। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि असली सूजन कहाँ है। आयुर्वेद का मकसद सिर्फ कोलेस्ट्रॉल कम करना नहीं, बल्कि 'आम' को पिघलाकर सूजन को जड़ से मिटाना है।

जीवा आयुर्वेद असली Risk Factors को खत्म करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत और जड़ से काम करने वाला है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर इंसान का शरीर, जीवनशैली और मानसिक तनाव (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए हृदय को सुरक्षित करने का इलाज पूरी तरह उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को होने वाली थकान, साँस फूलने और सीने के दबाव की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ की बीपी, ट्राइग्लिसराइड्स, सीआरपी (CRP) रिपोर्ट और ली जा रही दवाओं का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित कफ और वात को पकड़ने के बाद ही नसों की अंदरूनी सूजन को कम करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

हृदय की अंदरूनी सूजन को मिटाने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में धमनियों की सूजन कम करने, खून को प्राकृतिक रूप से पतला रखने और 'आम' को काटने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अर्जुन (Arjuna): यह हृदय के लिए प्रकृति का सबसे बड़ा वरदान है। यह धमनियों की सूजन को जड़ से खत्म करता है और दिल की मांसपेशियों को भयंकर ताकत देता है।
  • गुग्गुल (Guggulu): यह शरीर की कोशिकाओं से चिपचिपे 'आम' और खतरनाक ट्राइग्लिसराइड्स को पिघलाने में बेहद असरदार है।
  • पुष्करमूल (Pushkarmool): यह सीने के दर्द और भारीपन को तेज़ी से कम करता है और हृदय की धमनियों में खून का प्रवाह बिल्कुल सही रखता है।
  • त्रिकटु (Trikatu): यह जठराग्नि (Metabolism) को इतना तेज़ कर देता है कि शरीर अतिरिक्त फैट को तुरंत जला देता है और सूजन टिक नहीं पाती।

रक्त और हृदय को साफ करने की अचूक पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, मेटाबॉलिज़्म और हृदय को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • हृदय बस्ती (Hridaya Basti): यह दिल के लिए सबसे चमत्कारी थेरेपी है। इसमें सीने पर उड़द की दाल का घेरा बनाकर गर्म औषधीय तेल भरा जाता है। यह तेल सीधे हृदय की नसों को ताकत देता है और भयंकर तनाव को तुरंत शांत कर देता है।
  • विरेचन (Virechana): शरीर से पुराने रसायनों, पित्त और सूजन पैदा करने वाले टॉक्सिन्स को निकालने के लिए यह एक अचूक चिकित्सा है। औषधीय दवाइयाँ देकर पेट साफ कराया जाता है, जिससे रक्त पूरी तरह शुद्ध हो जाता है।

छिपे हुए Risk Factors को खत्म करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हृदय रोगों में आहार ही आपकी सबसे बड़ी और असली दवा है:

क्या खाएँ?

  • सुपाच्य और फाइबर युक्त भोजन: लौकी, पेठा और ओट्स का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह पाचन तंत्र को मज़बूत करते हैं और खून को गाढ़ा नहीं होने देते।
  • लहसुन और मेथी: सुबह खाली पेट लहसुन की कली और मेथी दाना लेना धमनियों की ब्लॉकेज और सूजन को तेज़ी से कम करता है।

क्या न खाएँ?

  • रिफाइंड तेल और चीनी: मिठाइयाँ, बाज़ार का तेल और चीनी का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि यही शरीर में जाकर सीधे ट्राइग्लिसराइड्स बनते हैं।
  • मैदा और जंक फूड: पिज़्ज़ा और रिफाइंड आटा शरीर में भयंकर 'आम' बनाते हैं, जो सीधे दिल की नसों में जमा हो जाता है।

जीवा आयुर्वेद में हृदय रोगों की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरे शरीर की समझ के साथ की जाती है। सबसे पहले आपकी परेशानी, थकान और साँस फूलने की रफ्तार को आराम से सुना जाता है। आपके द्वारा अनुभव किए गए सीने के दर्द और मानसिक तनाव की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है। आपके आहार, जंक फूड के सेवन और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है। नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर हृदय में जमे 'आम' और मंद अग्नि के स्तर का पता लगाया जाता है, जिससे बीमारी की असली और भयंकर वजह सामने आ सके।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

हृदय को पूरी तरह सुरक्षित होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में हृदय का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के शरीर और बीमारी की गहराई के हिसाब से किया जाता है। अगर साँस फूलना या सीने में भारीपन अभी शुरू हुआ है, तो अर्जुन और गुग्गुल जैसी दवाइयों से 6 से 8 हफ्तों में ही नसों की सूजन कम होने लगती है और सीना हल्का लगने लगता है। अगर ब्लॉकेज भयंकर है और सीआरपी लेवल बहुत ज़्यादा है, तो धमनियों को पूरी तरह 'रीसेट' होने और साफ होने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं। मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और शुद्ध आहार का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में अचानक हार्ट अटैक का भयंकर खतरा टल जाता है और वह बिना किसी डर के लंबी ज़िंदगी जी सकता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य स्टेटिन और अन्य दवाओं से कोलेस्ट्रॉल तथा हृदय जोखिम को नियंत्रित करना अर्जुन, पुष्करमूल जैसी जड़ी-बूटियों और जीवनशैली सुधार से समग्र हृदय स्वास्थ्य को सपोर्ट देना
नज़रिया समस्या को कोलेस्ट्रॉल, LDL और ब्लॉकेज के रूप में देखना इसे ‘आम’, पाचन असंतुलन, सूजन और धमनियों की कमजोरी से जोड़कर देखना
उपचार तरीका दवाएँ, ब्लड थिनर्स और मेडिकल मॉनिटरिंग पर ज़ोर आयुर्वेदिक औषधि, पंचकर्म, योग और दिनचर्या सुधार पर ध्यान
डाइट और लाइफस्टाइल दवा के साथ सीमित जीवनशैली बदलाव की सलाह संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और दिनचर्या को आधार बनाना
लंबा असर दवाओं को लंबे समय तक जारी रखने की आवश्यकता हो सकती है मेटाबॉलिज़्म और जीवनशैली सुधार के माध्यम से दीर्घकालिक संतुलन पर ज़ोर

Heart Attack के भयंकर लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?

छिपे हुए रिस्क फैक्टर्स के संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • थोड़ा सा चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर ही सीने में तेज़ दर्द या भारीपन महसूस होने लगे।
  • बिना कोई मेहनत किए अचानक भयंकर पसीना आने लगे और साथ में घबराहट हो।
  • सीने का दर्द आपके बाएँ हाथ, पीठ या जबड़े तक फैलने लगे।
  • पेट के ऊपरी हिस्से में अचानक भयंकर जलन या दर्द हो, जो गैस की दवा से भी ठीक न हो।

निष्कर्ष

कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल होना एक अच्छी बात है, लेकिन यह इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आप भयंकर हार्ट अटैक से पूरी तरह सुरक्षित हैं। जब तक आपके शरीर में बढ़ा हुआ ट्राइग्लिसराइड्स, धमनियों की सूजन और भयंकर तनाव मौजूद है, आपका दिल एक टिक-टिक करते बम की तरह है। सिर्फ एक ब्लड रिपोर्ट देखकर खुश होना और असली लक्षणों को अनदेखा करना बहुत महँगा पड़ सकता है। आयुर्वेद में अर्जुन, गुग्गुल और शुद्ध जीवनशैली से न सिर्फ आपके खून की गंदगी साफ होती है, बल्कि दिल की माँसपेशियों को ऐसी प्राकृतिक ताकत मिलती है जो आपको किसी भी छिपे हुए खतरे से जीवन भर बचाए रखती है।

FAQs

सिर्फ कोलेस्ट्रॉल दिल का दुश्मन नहीं है। धमनियों की भयंकर सूजन, बढ़ा हुआ ट्राइग्लिसराइड्स और खून का गाढ़ापन दिल का दौरा ला सकता है, भले ही आपका कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नॉर्मल हो।

हाँ। भयंकर तनाव से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन निकलता है, जो खून की नसों को सिकोड़ देता है। इससे दिल पर रक्त पंप करने का दबाव बढ़ता है और अचानक हार्ट अटैक आ सकता है।

बिल्कुल। अर्जुन की छाल आयुर्वेद का सबसे बड़ा चमत्कार है। यह दिल की माँसपेशियों को ताकत देती है, धमनियों की सूजन को कम करती है और खून को प्राकृतिक रूप से साफ रखती है।

सीआरपी टेस्ट शरीर और धमनियों में चल रही अंदरूनी सूजन को नापता है। अगर यह ज़्यादा है, तो खून का थक्का बनने और हार्ट अटैक आने का भयंकर खतरा रहता है।

हाँ। सुबह खाली पेट लहसुन खाने से ट्राइग्लिसराइड्स कम होते हैं और यह खून को प्राकृतिक रूप से पतला रखता है, जिससे नसों की ब्लॉकेज खुलने में बहुत मदद मिलती है।

पेट का मोटापा सीधे तौर पर इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) पैदा करता है, जो नसों को कड़ा बना देता है और हृदय रोगों के भयंकर खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

हाँ, यह सबसे अचूक थेरेपी है। सीने पर औषधीय तेल रोकने से दिल की नसों को सीधा पोषण मिलता है, तनाव दूर होता है और साँस फूलने की समस्या तुरंत कम हो जाती है।

अगर बिना किसी गर्मी के अचानक भयंकर ठंडा पसीना आए और सीने में हल्की सी भी घुटन महसूस हो, तो यह साइलेंट हार्ट अटैक का एक बहुत बड़ा और भयंकर संकेत हो सकता है।

बिल्कुल। पिज़्ज़ा, बर्गर और रिफाइंड तेल शरीर में भयंकर 'आम' बनाते हैं। यह चिपचिपा 'आम' रक्त के साथ मिलकर धमनियों की दीवारों पर चिपक जाता है और भयंकर सूजन पैदा करता है।

जी हाँ। अगर समय रहते आयुर्वेद की जड़ी-बूटियों (पुष्करमूल, गुग्गुल) और वात-कफ नाशक आहार को जीवनशैली में अपना लिया जाए, तो दिल हमेशा के लिए सुरक्षित और मज़बूत रहता है।

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